Union Budget 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का दिव्यांगजनों को तोहफा, इन योजनाओं का किया एलान
Union Budget 2026: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार (1 फरवरी, 2026) को लगातार अपना नौवां बजट पेश किया. वित्त मंत्री ने इस बजट में कई नए प्रोजेक्ट और योजना का एलान किया. बार के बजट में वित्त मंत्री ने दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण के लिए दो बेहद खास योनजाओं का एलान किया. वित्त मंत्री ने कहा कि हमारी सरकार दिव्यांगजन सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है. उसके बाद उन्होंने दिव्यांगों के लिए दो बड़ी योजनाओं की घोषणा की. वित्त मंत्री ने दिव्यांगजन कौशल योजना और दिव्यांग सहारा योजना की घोषणा की.
क्या है दिव्यांग कौशल और दिव्यांग सहारा योजना?
वित्त मंत्री दिव्यांग कौशल योजना का एलान करते हुए कहा कि इस योजना के तहत प्रत्येक दिव्यांग समूह को उद्योग अनुकूल और विशिष्ट प्रशिक्षण के माध्यम से सम्मान से जीवन जीने के अवसरों को सुनिश्चित करेगी. वहीं दूसरी योजना 'दिव्यांग सहारा योजना' है. जिसके तहत आर्टिफिशियल लिम्ब्स मैन्युफैक्चरिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एल्मिको) को दिव्यांगों के लिए सहायक उपकरणों के उत्पादन को बढ़ाने, अनुसंधान एवं विकास में निवेश और AI से एकीकरण के लिए मदद करना है.
वित्त मंत्री ने बजट में किए ये एलान
वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में कहा कि, उनकी सरकार देश और लोगों के चौतरफा विकास के लिए प्रतिबद्ध है. आईटी सेक्टर में देश को और आगे ले जाने के लिए वित्त मंत्री ने सेमिकंडक्टर के क्षेत्र में आईपी डिजाइन के लिए आईएसएम 2.0 के शुरू करने की बात कही. इसके लिए वित्त मंत्री ने करीब 40 करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा है. वित्त मंत्री ने कहा कि, हम इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 की शुरुआत करेंगे. उन्होंने कहा कि उद्योग-नेतृत्व वाले रिसर्च और ट्रेनिंग सेंटरों पर भी ध्यान दिया जाएगा, जिससे तकनीक आधारित और कुशल वर्कफोर्स को तैयार किया जा सके.
वित्त मंत्री ने कहा कि आज हम ऐसे बाहरी माहौल का सामना कर रहे हैं, जहां व्यापार और बहुपक्षवाद दबाव में हैं. उन्होंने कहा कि, संसाधनों तक पहुंच तथा सप्लाई चेन बाधित है. उन्होंने कहा कि नई तकनीकों से उत्पादन प्रणालियां बदल रही हैं. पानी, ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों की मांग में भी तेजी आई है. देश विकसित भारत की दिशा में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ता रहेगा. वित्त मंत्री ने कहा कि जहां महत्वाकांक्षा और समावेशन के बीच संतुलन होगा.
बांग्लादेश में जनवरी में मॉब किलिंग और हिरासत में हुई मौत के मामले में दोगुनी बढ़ोतरी
ढाका, 1 फरवरी (आईएएनएस)। बांग्लादेश में हिंसा के बढ़ते मामले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा हो रही है। हाल ही में भारत की इंटेलिजेंस एजेंसी ने चेतावनी जारी की है कि चुनाव के दिनों तक हिंसा बढ़ने की संभावना है। बांग्लादेश में जनवरी में भीड़ की हिंसा में तेजी से बढ़ोतरी हुई। सार्वजनिक स्थानों पर सरेआम पिटाई से होने वाली मौतों की संख्या पिछले महीने के मुकाबले दोगुनी से ज्यादा हो गई।
इसके साथ ही जेल में होने वाली मौतों में भी काफी बढ़ोतरी हुई। देश में राष्ट्रीय चुनाव होने वाला है, लेकिन जिस तरह के हालात बने हुए हैं, इससे कानून-व्यवस्था और पूरे मानवाधिकार की स्थिति को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं।
मानवाधिकार सांस्कृतिक फाउंडेशन (एमएसएफ) की जारी हर महीने की मॉनिटरिंग रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी में भीड़ के हमले में कम से कम 21 लोग मारे गए, जबकि दिसंबर 2025 में ऐसी 10 मौतें रिपोर्ट की गई थीं। शनिवार को जारी रिपोर्ट में जनवरी में मानवाधिकार की स्थिति को खतरनाक रूप से हिंसक और जटिल बताया गया।
रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया कि भीड़ की हिंसा के खिलाफ सरकार की तरफ से सुनिश्चित और साफ कार्रवाई न होने से सजा से बचने का ट्रेंड बढ़ा है। एमएसएफ ने कहा कि द डेली स्टार ने बताया कि इससे अपराधियों को बढ़ावा मिला है और न्याय व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कम हुआ है।
रिपोर्ट में इन घटनाओं को कानून के राज से लोगों के भरोसे में कमी का साफ संकेत बताया गया है। भीड़ द्वारा की गई हत्या के अलावा, रिपोर्ट में देश भर में मिले अज्ञात शवों की संख्या में बढ़ोतरी भी बताई गई है। जनवरी में कुल 57 शव मिले, जबकि दिसंबर में यह संख्या 48 थी।
वहीं, कस्टडी में हुई मौतें भी एक बड़ी चिंता का विषय बनकर सामने आईं। जनवरी में जेल कस्टडी में मरने वाले कैदियों की संख्या बढ़कर 15 हो गई, जबकि पिछले महीने यह संख्या नौ थी। इसके अलावा, खबर है कि दो लोगों की मौत कानून प्रवर्तन एजेंसियों की कस्टडी में हुई।
एमएसएफ ने इन मौतों के लिए मेडिकल लापरवाही, अमानवीय हालात और जेल मैनेजमेंट में सिस्टम की कमियों जैसे कारणों को जिम्मेदार ठहराया। 13वें राष्ट्रीय चुनाव के पास आने के साथ रिपोर्ट में चुनाव से जुड़ी हिंसा में बढ़ोतरी देखी गई।
जनवरी के दौरान, राजनीतिक गतिविधियों से जुड़ी झड़पों में चार लोगों की जान चली गई और 509 दूसरे घायल हो गए। यह दिसंबर के मुकाबले काफी बढ़ोतरी थी, जब चुनाव से जुड़ी सिर्फ एक मौत दर्ज की गई थी।
रिपोर्ट में एक और चिंताजनक ट्रेंड बताया गया कि पुलिस केस में आरोपी बनाए गए अज्ञात लोगों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। राजनीतिक केस में लिस्टेड अज्ञात लोगों की संख्या दिसंबर में 110 से बढ़कर जनवरी में 320 हो गई। मानवाधिकार समर्थकों का तर्क है कि इस प्रैक्टिस से बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां होती हैं और लोगों में डर बढ़ता है।
एमएसएफ ने महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा में गंभीर गिरावट को भी बताया। अकेले जनवरी में, महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हिंसा के 257 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 34 दुष्कर्म और 11 सामूहिक दुष्कर्म की घटनाएं शामिल हैं। अल्पसंख्यक समुदायों पर भी हमलों में काफी बढ़ोतरी देखी गई। जनवरी में चोरी, तोड़-फोड़ या मंदिरों और मूर्तियों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं बढ़कर 21 हो गईं, जबकि पिछले महीने यह सिर्फ छह थीं।
एमएसएफ ने उल्लंघन की तुरंत बिना किसी भेदभाव जांच की मांग की और अधिकारियों से न्याय व्यवस्था में भरोसा वापस लाने के लिए सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
--आईएएनएस
केके/एबीएम
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