भारतीय IT कंपनियों की दूसरी तिमाही में राजस्व वृद्धि सुस्त रहने का अनुमान
नयी दिल्ली, चार अक्टूबर देश की प्रमुख सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनियों की जुलाई-सितंबर तिमाही में राजस्व वृद्धि सुस्त रहने और मार्जिन लगभग स्थिर रहने का अनुमान है। विश्लेषकों के अनुसार, ग्राहक विवेकाधीन खर्च को सीमित रख रहे हैं और ऐसे में इस बात पर नजर रहेगी कि मजबूत बुकिंग कितनी तेजी से राजस्व में बदलती है तथा कृत्रिम मेधा (एआई) पारंपरिक सेवाओं की मांग को किस हद तक प्रभावित करती है। शोध सलाहकार कंपनी अर्नअर्थइनसाइट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में पांच प्रमुख आईटी कंपनियों की तिमाही आधार पर वृद्धि 0.5-1 प्रतिशत रह सकती है।
यह अप्रैल-जून तिमाही की तुलना में मामूली सुधार होगा। अर्नअर्थइनसाइट के संस्थापक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी गौरव वासु ने कहा, ‘‘दूसरी तिमाही पहली तिमाही से बेहतर नहीं होगी... क्योंकि हमें ग्राहकों के बजट या खर्च में कोई सुधार देखने को नहीं मिल रहा है। भू-राजनीतिक तनाव के बीच विवेकाधीन खर्च रुका हुआ है और निर्णय लेने में भी लंबा समय लग रहा है।’’ गार्टनर के अनुसार, जुलाई-सितंबर तिमाही पिछली तिमाही की तुलना में कुछ बेहतर रह सकती है।
इसका मुख्य कारण पहले मिले अनुबंधों का राजस्व देने वाले चरण में पहुंचना है। गार्टनर के वरिष्ठ प्रधान विश्लेषक बिस्वजीत मैती ने कहा, ‘‘हालांकि, बाजार की स्थितियां मोटे तौर पर समान बनी हुई हैं। सावधानी के साथ किए जा रहे विवेकाधीन खर्च और उत्पादकता पर लगातार ध्यान खरीद संबंधी फैसलों को प्रभावित कर रहे हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मौजूदा बाजार रुझानों के आधार पर प्रमुख आईटी सेवा प्रदाताओं की वृद्धि सीमित रहने का अनुमान है।’’ वासु ने कहा कि कंपनियों की बुकिंग मजबूत बनी रहेगी, लेकिन उन्हें राजस्व में बदलने में अधिक समय लगेगा।
अगले 12-18 महीनों में ग्राहकों के निर्णय लेने की प्रक्रिया लंबी रहने का अनुमान है। दूसरी तिमाही के नतीजों की शुरुआत टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) आठ अक्टूबर को करेगी। एचसीएलटेक 12 अक्टूबर और इन्फोसिस 23 अक्टूबर को अपने नतीजे घोषित करेगी।
वासु ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कंपनियों के वृद्धि अनुमान में बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है। हालांकि, कुछ कंपनियां अपने अनुमान की ऊपरी सीमा में करीब 0.5 प्रतिशत की वृद्धि कर सकती हैं। अर्नअर्थइनसाइट ने प्रमुख कंपनियों की पूरे वित्त वर्ष की वृद्धि का अनुमान तीन से चार प्रतिशत पर कायम रखा है।
उसके अनुसार, इसमें बड़ी हिस्सेदारी मांग में सुधार के बजाय विलय एवं अधिग्रहण से होने वाली वृद्धि की होगी। वासु ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 में अब तक प्रौद्योगिकी सेवा उद्योग ने 14 विलय एवं अधिग्रहण सौदों पर 3.6 अरब अमेरिकी डॉलर खर्च किए हैं। उन्होंने कहा कि कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बना रहेगा।
वेतन वृद्धि का असर हाल में ही समाहित हुआ है और सौदे हासिल करने के लिए एआई मंचों तथा साझेदारियों में निवेश भी करना पड़ रहा है। एआई से होने वाली दक्षता बढ़ोतरी का लाभ भी ग्राहकों को दिया जा रहा है। वासु ने कहा, ‘‘मार्जिन के लिए वास्तविक सहारा केवल सेवाएं बेचने के बजाय एप्लिकेशन और मंच बेचने से मिलेगा।’’ अर्नअर्थइनसाइट को टीसीएस, इन्फोसिस और एचसीएलटेक जैसी कुछ बड़ी कंपनियों के मार्जिन में मामूली सुधार की उम्मीद है।
वहीं, मध्यम आकार की कंपनियों के मौजूदा मार्जिन को बनाए रखने का अनुमान है, हालांकि उन्हें विलय एवं अधिग्रहण के बाद कंपनियों को एकीकृत करने की लागत भी उठानी होगी। गार्टनर के अनुसार, मार्जिन मोटे तौर पर स्थिर रहेंगे और इसमें बढ़ोतरी की गुंजाइश सीमित है। स्वचालन से उत्पादकता बढ़ने और कर्मचारियों के बेहतर उपयोग से होने वाले लाभ की भरपाई एआई में निवेश, मांग वाली विशेषज्ञता रखने वाले कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि और ग्राहकों की कीमतों में रियायत की मांग से हो रही है।
मैती ने कहा कि ग्राहक प्रौद्योगिकी पर खर्च को लेकर अभी सतर्क हैं और ऐसे कार्यक्रमों को प्राथमिकता दे रहे हैं जिनसे कारोबार को स्पष्ट लाभ, लागत में कमी और जोखिम में कमी मिले। उन्होंने कहा, ‘‘अधिकांश संगठन अभी भी निवेश के फैसले चुनिंदा तरीके से ले रहे हैं और स्पष्ट निवेश पर प्रतिफल, उत्पादकता बढ़ोतरी तथा परिचालन मजबूती वाले कार्यक्रमों पर ध्यान दे रहे हैं। एआई, साइबर सुरक्षा और प्रौद्योगिकी के आधुनिकीकरण से मांग बनी हुई है, जबकि गैर-जरूरी बदलाव वाले कार्यक्रमों के लिए बजट पर कड़ी निगरानी और मंजूरी की लंबी प्रक्रिया जारी है।
इसलिए खर्च में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है, लेकिन कुल मांग का माहौल अभी पूरी तरह सुधरा नहीं है।’’ वासु ने कहा कि बैंकिंग क्षेत्र दबाव में है। मुद्रास्फीति में कमी नहीं आने के कारण खुदरा और विनिर्माण क्षेत्र भी दबाव में हैं। उन्होंने अमेरिका को सबसे कमजोर बाजार बताया।
महिला पत्रकार से कथित छेड़छाड़ पर बवाल, पुलिस स्टेशन के बाहर पहुंची CJP
एसीपी विवेक भगत पर महिला पत्रकार से कथित छेड़छाड़ के आरोपों को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी ने विरोध जताया है। सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर दावा किया कि पुलिस पीड़ित महिला से मिलने को तैयार नहीं है।
पुलिस स्टेशन के बाहर मौजूद होने का दावा
सौरव दास ने अपनी पोस्ट में कहा कि सीजेपी के लोग संसद मार्ग पुलिस स्टेशन के बाहर मौजूद हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस उस महिला से मिलने को तैयार नहीं है, जिसके साथ एसीपी विवेक भगत ने कथित तौर पर छेड़छाड़ की है। उन्होंने लिखा कि यह स्वीकार्य नहीं है और जब तक पुलिस उन्हें थाने के अंदर जाने की अनुमति नहीं देती, तब तक वे बाहर खड़े रहेंगे।
We are outside the Parliament Street Police Station. The Police is unwilling to meet the victim who has been molested by ACP Vivek Bhagat. This is unacceptable! We will continue to stand here until they let us in! @whattalawyer @Cockroachisback https://t.co/oNf4vStlNz
— Saurav Das (@SauravDassss) October 4, 2026
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तीन महिला पत्रकारों की शिकायतें क्राइम ब्रांच को भेजी गईं
दिल्ली पुलिस ने पूरे मामले को लेकर अपने एक्स हैंडल पर जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, 3 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली इलाके में विरोध प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति के बीच तीन महिला पत्रकारों ने पुलिस अधिकारियों पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए।
नई दिल्ली जिला पुलिस को तीनों महिला पत्रकारों की शिकायतें मिली हैं। पुलिस ने बताया कि निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच के लिए इन शिकायतों को क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया है।
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आरोपों की जांच के बाद स्थिति होगी स्पष्ट
दिल्ली पुलिस के अनुसार, अब इन शिकायतों की जांच क्राइम ब्रांच करेगी। मामले में लगाए गए आरोपों की जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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