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Explainer: ODI वर्ल्ड कप 2027 से पहले टीम इंडिया का बड़ा 'रियलिटी चेक', वेस्टइंडीज सीरीज ने खोली इन 5 बड़ी कमजोरियों की पोल

IND vs WI: भारतीय टीम ने हाल ही में घर पर वेस्टइंडीज के खिलाफ 3 मैचों की वनडे सीरीज को 2-1 से अपने नाम किया. टीम इंडिया भले ही इस सीरीज को जीतने में कामयाब रही, लेकिन इसने वनडे वर्ल्ड कप 2027 के लिहाज से टीम इंडिया की कई कमजोरियों की पोल खोल दी है. वेस्टइंडीज जैसी टीम ने भारतीय गेंदबाजों की उनके ही घर पर जमकर धुनाई की. दूसरे वनडे में वेस्टइंडीज ने 405 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया और तीसरे वनडे में 352 रनों के रिकॉर्ड लक्ष्य का पीछा कर भारत को 5 विकेट से हराकर चौंका दिया. इस सीरीज के खत्म होने के बाद कप्तान शुभमन गिल ने खुद माना कि टीम में कई कमियां हैं जिन्हें समय रहते सुधारना होगा. वर्ल्ड कप 2027 के लिहाज से इस सीरीज ने टीम इंडिया की कुछ ऐसी बुनियादी कमजोरियों और कमियों को उजागर किया है, जिन्हें नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है. 

गेंदबाजों का रन लुटाना और धारहीन पेस अटैक

इस पूरी सीरीज में भारत की सबसे बड़ी कमजोरी उसका कमजोर और नया गेंदबाजी अटैक रहा. जसप्रीत बुमराह और हार्दिक पांड्या जैसे सीनियर गेंदबाजों के न होने से भारतीय तेज गेंदबाजी पूरी तरह बेअसर दिखी. सपाट पिचों पर भारतीय गेंदबाजों की बुरी तरह से पिटाई हुई है. वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों ने भारतीय पिचों पर तीनों मैचों में रनों की जमकर बरसात की. विंडीज ने पहले मैच में 295 रन, दूसरे मैच में 405/7 (जो उनके इतिहास का सबसे बड़ा वनडे स्कोर है) और तीसरे मैच में 352/5 रन कूटकर भारतीय गेंदबाजों की लय खराब कर दी.

डेथ ओवरों में बेहद ही खराब गेंदबाजी

तीसरे वनडे में केएल राहुल की नाबाद 129 रनों की धमाकेदार पारी और रोहित शर्मा के शानदार 92 रनों के दम पर भारत ने 351 रनों का बड़ा स्कोर खड़ा किया था. इसके बावजूद भारतीय गेंदबाज इस बड़े स्कोर को डिफेंड नहीं कर पाए. वेस्टइंडीज के कप्तान शाई होप ने नाबाद 162 रन कूटकर बेहद आसानी से मैच भारत के हाथ से छीन लिया और वेस्टइंडीज की झोली में डाल दिया.

जसप्रीत बुमराह पर अत्यधिक निर्भरता

यह सीरीज एक बार फिर साबित कर गई कि जब टीम में जसप्रीत बुमराह नहीं होते हैं, तो हमारा तेज गेंदबाजी आक्रमण बिल्कुल साधारण नजर आने लगता है. मैच के बीच के मिडिल ओवर्स में जब विरोधी बल्लेबाज क्रीज पर जम जाते हैं, तो भारतीय गेंदबाज विकेट निकालने के लिए तरस जाते हैं. तीसरे मैच में मोहम्मद सिराज (8 ओवर में 52 रन, 1 विकेट) के अलावा कोई भी पेसर बड़ी साझेदारियां तोड़ने में नाकाम रहा. स्पिनर कुलदीप यादव ने तो पूरी सीरीज में अच्छी गेंदबाजी की, लेकिन तेज गेंदबाजों से उन्हें कोई साथ नहीं मिला.

गुरनूर बरार, अंशुल कंबोज और अकिब नबी का खराब रहा डेब्यू

इसके अलावा प्रसिद्ध कृष्णा की भी गेंदबाजी खराब रही. उनके चोटिल होकर बाहर होने के बाद मौका पाने वाले युवा गेंदबाज भी दबाव नहीं झेल सके. दूसरे वनडे मैच में अपना डेब्यू करने वाले अंशुल कांबोज ने आखिरी वनडे में 9 ओवर फेंककर 82 रन लुटा दिए और उन्हें एक भी विकेट नहीं मिला. वहीं, गुरनूर बरार भी 9.1 ओवर में 64 रन देकर सिर्फ 1 विकेट ही ले पाए. बरार ने दूसरे वनडे मैच में भी 96 रन लुटा दिए थे. आकिब नबी को दूसरे वनडे में डेब्यू करने का मौका मिला और वह 84 रन लुटा दिए थे. वनडे वर्ल्ड कप 2027 के नजरिए से देखें तो बैकअप गेंदबाजों का यह लचर प्रदर्शन आगे चलकर टीम इंडिया के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है. 

ऑलराउंडर की बड़ी समस्या

हार्दिक पांड्या की गैरमौजूदगी में भारतीय टीम एक ऐसे परफेक्ट बॉलिंग ऑलराउंडर के लिए तरसती नजर आई, जो बल्लेबाजी के साथ-साथ गेंदबाजी में भी कमाल दिखा सके. टीम में संतुलन बनाने का पूरा दबाव युवा ऑलराउंडर नितीश कुमार रेड्डी पर आ गया, जिन्हें मजबूरी में अपने कोटे के पूरे ओवर फेंकने पड़ रहे हैं. तीसरे वनडे में वह काफी महंगे साबित हुए और 6.5 ओवरों में 50 रन लुटाने के बाद भी कोई विकेट हासिल नहीं कर सके.

वहीं दूसरी तरफ, छठे गेंदबाज के तौर पर आजमाए गए नमन धीर में भी इंटरनेशनल क्रिकेट के अनुभव की कमी साफ दिखी. उन्होंने मैच में 5.2 ओवर फेंककर 33 रन दिए. जब सामने वाली टीम तेजी से रन कूट रही हो, तो ऐसे पार्ट-टाइम या बिल्कुल नए ऑलराउंडरों के भरोसे रहना सिलेक्टर्स के लिए एक बहुत बड़ी चिंता बन गया है. वर्ल्ड कप 2027 से पहले इस कमी को दूर करना टीम इंडिया के लिए बेहद जरूरी है.

खराब फील्डिंग और छूटे हुए कैच बने बड़ी मुसीबत

तीसरा वनडे मैच खत्म होने के बाद खुद कप्तान शुभमन गिल ने माना कि आखिरी के ओवरों में लचर गेंदबाजी के साथ-साथ टीम की फील्डिंग भी बेहद घटिया रही. वेस्टइंडीज के खिलाफ इस पूरी सीरीज के दौरान भारतीय फील्डर्स ने बेहद जरूरी मौकों पर कई आसान कैच टपकाए और बाउंड्री पर भी काफी ढीलापन दिखाया.

तीसरे मैच में विंडीज के धाकड़ बल्लेबाज शाई होप और अमीर जंगू को मिले जीवनदान भारत पर बहुत भारी पड़े. इन छूटे हुए कैचों की बदौलत ही वेस्टइंडीज मैच को भारत के हाथ से पूरी तरह छीन ले गया. फैंस भी जानते हैं कि वनडे वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में सिर्फ एक कैच छूटना, पूरी टीम को वर्ल्ड कप की रेस से बाहर करने के लिए काफी होता है. इसलिए 2027 के मिशन से पहले फील्डिंग को दुरुस्त करना सबसे बड़ी जरूरत है.

टॉप ऑर्डर हिट, लेकिन मिडिल ऑर्डर की निरंतरता पर सवाल

भारतीय टीम के टॉप ऑर्डर में भले ही रोहित शर्मा, शुभमन गिल और विराट कोहली रनों का अंबार लगा रहे हैं, लेकिन मिडिल ऑर्डर की कमजोरी अभी भी एक बड़ा सवाल बनी हुई है. तीसरे वनडे में जब टीम इंडिया ने सिर्फ 4 रन पर अपने 2 बड़े विकेट गंवा दिए थे, तब केएल राहुल (नाबाद 129 रन) और ऋतुराज गायकवाड़ (57 रन) ने मिलकर पारी को संभाला और टीम को संकट से निकाला. लेकिन असली चिंता यह है कि अगर वर्ल्ड कप के किसी नॉकआउट या सेमीफाइनल जैसे बड़े मैच में ये मुख्य बल्लेबाज फ्लॉप हो जाते हैं, तो लोअर-मिडिल ऑर्डर मैच को फिनिश नहीं कर पा रहा है. युवा ऑलराउंडर नितीश रेड्डी और नमन धीर में अभी वो मैच्योरिटी नहीं दिख रही है कि वे अकेले दम पर मैच जिताकर लौटें.

वेस्टइंडीज के खिलाफ यह वनडे सीरीज टीम इंडिया के लिए एक बहुत बड़ा 'रियलिटी चेक' साबित हुई है. अगर टीम इंडिया को साल 2027 वनडे वर्ल्ड कप का खिताब जीतना है, तो मुख्य खिलाड़ियों की चोटों और खराब बेंच स्ट्रेंथ की समस्या से निपटना होगा. सिलेक्टर्स को फ्लैट पिचों के बजाय ऐसी परिस्थितियों के लिए गेंदबाजों को तैयार करना होगा जो दक्षिण अफ्रीका की उछाल भरी पिचों पर कारगर साबित हो सकें.

यह भी पढ़ें:  न्यूजीलैंड टेस्ट सीरीज से पहले भारतीय गेंदबाज का तहलका, ईरानी कप में 8 विकेट लेकर टीम इंडिया में वापसी का दावा किया मजबूत

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फ्लाईदुबई के को-पायलट को लेकर चौंकाने वाले घटनाक्रम सामने आए, सोशल मीडिया पोस्ट में खुलासा

फ्लाईदुबई के को-पायलट के बारे में चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं. उस पर आरोप है कि उसने कॉकपिट के  अंदर क्रैश एक्स (विमान दुर्घटना के समय इस्तेमाल होने वाली कुल्हाड़ी) से अपने भारतीय साथी पर हमला किया और करीब 170 लोगों से भरे विमान को क्रैश करने की कोशिश की. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ओमान के  नागरिक हम्माम अल-हम्माम ने जांचकर्ताओं को बताया कि वह जानबूझकर विमान को क्रैश करना चाहता था और  उसे 'मौत से डर नहीं लगता था'.

यात्रियों के साथ विमान को लैंड कराना

यह बात उनके उड़ने के शौक से बिल्कुल अलग है, जो जून 2022 में उनके एक सोशल मीडिया पोस्ट से साफ  पता चलता है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अरबी भाषा में लिखे उस पोस्ट में कहा गया था, "एविएशन और फ्लाइट ट्रेनिंग को जो चीज इतनी खूबसूरत बनाती है, वह यह है कि इसमें कुछ रोजमर्रा जैसा नहीं होता. कुछ पल ऐसे  होते हैं जिन्हें आप कभी नहीं भूलते—जैसे आपकी पहली सोलो फ्लाइट (अकेले उड़ान भरना), या पहली बार   यात्रियों के साथ विमान को लैंड कराना."

सऊदी अधिकारियों ने भी की पूछताछ

अल-हम्मामी से अभी संयुक्त अरब अमीरात में पूछताछ हो रही है. एक दिन पहले फ्लाईदुबई की फ्लाइट में क्रैश  के डर के बाद, गुरुवार सुबह एक सिक्योरिटी टीम उन्हें वहां ले गई थी. बुधवार को सऊदी अरब में फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंग के बाद सऊदी अधिकारियों ने भी उनसे पूछताछ की थी.

कट्टरपंथी विचारों के कारण ओमान की नेशनल एयरलाइन से नौकरी से निकाला गया. पहले की रिपोर्ट से जानकारी मिलती है कि उन्हें बीते साल ओमान क नेशनल एयरलाइन से नौकरी से निकाला गया था. एक रिपोर्ट की मानें तो उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स (जो अब डिलीट कर दिए गए हैं) से उनके कट्टरपंथी विचारों का पता चला था. आरोपी पायलट, जिसे इजराइल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने 'कट्टरपंथी' बताया था, ने कथित तौर पर पोस्ट  किया था कि महिला-पुरुषों ने एक साथ काम करने वाली जगहों का महिलाओं पर बुरा असर पड़ता है.

सीरिया से कनेक्शन और 'कट्टरपंथ'

अधिकारियों के मुताबिक, 29 साल के अल-हमामी के पिता और मां सीरिया की थे. वह दुबई में रह चुका है. जांच ​​करने वाले उसके बारे में जानकारी जुटा रहे हैं. बताया जा रहा है कि सीरिया से उसके कनेक्शन पर खास ध्यान दिया जा रहा है. मीडिया रिपोर्ट की मानें, अल-हमामी ने लंबे वक्त से चले गृहयुद्ध के दौरान इस संघर्ष-ग्रस्त देश  में कुछ वक्त बिताया था. जांच करने वाले इस संभावना की जांच में जुट हैं. सीरिया में इस्लामी विद्रोहियों के   असद सरकार के खिलाफ लड़ने के दौरान ही वह कट्टरपंथी बनने लगा था. 

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44 साल बाद भारतीय महिला हॉकी टीम ने जीता गोल्ड, कप्तान ने कहा- हम इसके हकदार थे

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