UTI बार-बार क्यों लौटता है? Mini-Bladder मॉडल पर रिसर्च में वैज्ञानिकों को मिला जवाब
(वालिद ओमारा, शेफील्ड हल्लाम यूनिवर्सिटी) शेफील्ड (ब्रिटेन), चार अक्टूबर (द कन्वरसेशन) कई लोगों के लिए मूत्र मार्ग का संक्रमण (यूटीआई) एंटीबायोटिक की खुराक खत्म होने के बाद भी पूरी तरह खत्म नहीं होता। पेशाब करते समय होने वाली जलन और बार-बार शौचालय जाने की जरूरत कुछ समय के लिए थम जाती है, लेकिन कुछ हफ्तों या महीनों बाद संक्रमण फिर लौट आता है। दुनियाभर में हर साल 40 करोड़ से अधिक लोग यूटीआई से प्रभावित होते हैं।
यूटीआई की घटनाओं पर किए गए वैश्विक विश्लेषण के मुताबिक, आधी से अधिक वयस्क महिलाओं को जीवन में कम से कम एक बार यह संक्रमण होता है। अध्ययनों से यह भी पता चलता है कि इनमें से करीब एक-चौथाई महिलाओं को छह महीने के भीतर दोबारा संक्रमण हो जाता है। ऐसा नहीं है कि एंटीबायोटिक काम ही नहीं कर रहे।
हाल में मानव कोशिकाओं से प्रयोगशाला में तैयार किए गए ब्लैडर (मूत्राशय) के एक छोटे-से मॉडल ‘मिनी-ब्लैडर’ पर हुए शोध से संकेत मिला है कि इसकी एक वजह मूत्राशय की दीवार के भीतर भी छिपी हो सकती है। अधिकांश यूटीआई एक ऐसे बैक्टीरिया के कारण होते हैं, जिसे ई. कोलाई कहा जाता है। यह बैक्टीरिया आम तौर पर हमारी आंतों में बिना नुकसान पहुंचाए रहता है।
समस्या तब शुरू होती है, जब यह मूत्रमार्ग से होते हुए ऊपर चढ़कर मूत्राशय तक पहुंच जाता है। बार-बार होने वाला संक्रमण दो तरह से हो सकता है। आंतों से नए बैक्टीरिया दोबारा वही रास्ता तय कर मूत्राशय तक पहुंच सकते हैं।
वास्तव में, कई बार होने वाले संक्रमण नए संक्रमण यानी ‘री-इन्फेक्शन’ ही होते हैं। लेकिन कुछ मामलों में ऐसा लगता है कि शुरुआती संक्रमण के दौरान पहुंचे बैक्टीरिया उपचार के बावजूद शरीर में कहीं टिके रह जाते हैं और बाद में फिर सक्रिय हो जाते हैं। जानवरों पर हुए अध्ययनों से लंबे समय से पता है कि ई. कोलाई मूत्राशय की अंदरूनी परत बनाने वाली कोशिकाओं में घुसकर उनके भीतर बढ़ सकता है।
वहां यह बैक्टीरिया के ऐसे समूह बना सकता है, जिन्हें प्रतिरक्षा तंत्र और कुछ एंटीबायोटिक दवाओं से आंशिक सुरक्षा मिल जाती है। इंसानों में भी ऐसी प्रक्रिया होने के संकेत मिले हैं। उदाहरण के लिए, मूत्र के साथ शरीर से बाहर निकलने वाली मूत्राशय की कोशिकाओं में बैक्टीरिया देखे गए हैं।
हालांकि, मानव ऊतक के भीतर इस पूरी प्रक्रिया को होते हुए देखना कहीं अधिक कठिन है। मिनी-ब्लैडर ने क्या दिखाया? स्विट्जरलैंड और जर्मनी के वैज्ञानिकों ने अब मानव मूत्राशय की अंदरूनी परत का एक त्रिआयामी (3डी) मॉडल तैयार किया है।
इसे मानव मूत्राशय की कोशिकाओं से बनाया गया है। यह मॉडल मूत्राशय की अंदरूनी परत में मौजूद कोशिकाओं की कई परतों, उनके मूत्र के संपर्क और वास्तविक मूत्राशय के भरने और खाली होने की कुछ स्थितियों को दोहराता है। जब शोधकर्ताओं ने इन मिनी-ब्लैडर में ई. कोलाई का संक्रमण पैदा किया, तो बैक्टीरिया ऊतक की गहरी परतों तक पहुंच गया।
इसके बाद उन्होंने संक्रमण के इलाज के लिए फॉस्फोमाइसिन नामक एंटीबायोटिक का इस्तेमाल किया, जो यूटीआई के उपचार में दी जाती है। शोधकर्ताओं ने पाया कि कुछ बैक्टीरिया सामान्य कोशिका-भित्ति के बिना एक अस्थायी अवस्था में जीवित रह गए। यह महत्वपूर्ण खोज है क्योंकि फॉस्फोमाइसिन बैक्टीरिया की कोशिका-भित्ति बनने की प्रक्रिया को बाधित करके काम करती है।
बदली हुई अवस्था में ये बैक्टीरिया मूत्राशय के ऊतक की गहरी परतों में टिके रहने में सक्षम थे। जैसे ही एंटीबायोटिक को हटा दिया गया, उन्होंने फिर अपना सामान्य रूप धारण कर लिया और संक्रमण दोबारा शुरू कर दिया। शोध में यह भी सामने आया कि मूत्र में पानी की मात्रा कम और घुले हुए पदार्थों की मात्रा अपेक्षाकृत अधिक रहने की स्थिति लंबे समय तक रहने से मूत्राशय की कोशिकाओं के बीच के जुड़ाव कमजोर हो गए।
इससे ऊतक बैक्टीरिया के हमले के प्रति अधिक संवेदनशील हो गया और एंटीबायोटिक उपचार का असर भी कम हो गया। महिलाओं को यूटीआई ज्यादा क्यों होता है? इसका एक बड़ा कारण शरीर की बनावट है।
पुरुषों की तुलना में महिलाओं का मूत्रमार्ग काफी छोटा होता है। इसलिए बैक्टीरिया को मूत्राशय तक पहुंचने के लिए कम दूरी तय करनी पड़ती है। इसके अलावा, मूत्रमार्ग का मुंह गुदा के काफी करीब होता है, जहां आंतों में रहने वाले बैक्टीरिया मौजूद होते हैं।
रजोनिवृत्ति से पहले की महिलाओं में यौन गतिविधि और गर्भ निरोधकों का इस्तेमाल भी बार-बार होने वाले यूटीआई के स्थापित जोखिम कारकों में शामिल हैं। रजोनिवृत्ति के आसपास और उसके बाद यह जोखिम एक बार फिर बढ़ जाता है। इस दौरान एस्ट्रोजन का स्तर कम होने से योनि और मूत्र मार्ग के ऊतकों में बदलाव आते हैं।
इसके साथ ही सुरक्षात्मक भूमिका निभाने वाले लैक्टोबैकिलस बैक्टीरिया की संख्या कम हो सकती है। इससे ऐसी परिस्थितियां बनती हैं, जिनमें यूटीआई पैदा करने वाले बैक्टीरिया आसानी से टिक और बढ़ सकते हैं। बार-बार होने वाले संक्रमण से कैसे बचें?
हर व्यक्ति के लिए एक ही उपाय कारगर नहीं होता, लेकिन कई ऐसे विकल्प हैं जिनके पक्ष में वैज्ञानिक प्रमाण मौजूद हैं। ब्रिटेन का नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ एंड केयर एक्सीलेंस (एनआईसीई) रजोनिवृत्ति के आसपास की अवधि और रजोनिवृत्ति के बाद बार-बार होने वाले यूटीआई की स्थिति में योनि में इस्तेमाल होने वाली एस्ट्रोजन की दवा पर विचार करने की सलाह देता है। यह संस्था इंग्लैंड में स्वास्थ्य और देखभाल संबंधी दिशा-निर्देश जारी करती है।
जो लोग सामान्य तौर पर कम पानी पीते हैं, उनके लिए पानी की मात्रा बढ़ाना भी मददगार हो सकता है। क्रैनबेरी से बने उत्पाद भी कुछ महिलाओं में संक्रमण की पुनरावृत्ति कम कर सकते हैं। हालांकि, अलग-अलग अध्ययनों और उत्पादों में इनके नतीजे अलग-अलग रहे हैं।
‘डी-मैनोज’ एक प्रकार की शर्करा है, जिसे आहार अनुपूरक के तौर पर बेचा जाता है। माना जाता है कि यह कुछ ई. कोलाई बैक्टीरिया को मूत्राशय की अंदरूनी परत से चिपकने से रोककर यूटीआई से बचाव में मदद कर सकती है। जिन लोगों को बार-बार संक्रमण होता है, उनके मामले में एनआईसीई का कहना है कि मौजूदा संक्रमण का इलाज पूरा होने के बाद डॉक्टर निवारक उपचार पर विचार कर सकते हैं।
जिन लोगों में संक्रमण बार-बार लौटता है, उसके पीछे एक संभावित वजह यह हो सकती है कि शुरुआती उपचार के बावजूद बैक्टीरिया की एक छोटी-सी आबादी जीवित बच गई हो और बाद में फिर से बढ़ने लगी हो।
Shubman Gill ने Rohit Sharma और Virat Kohli की तारीफ की, World Cup के लिए मजबूत होगा टीम संयोजन
विराट कोहली और रोहित शर्मा की उम्र को लेकर भले ही लगातार सवाल उठ रहे हों, लेकिन वेस्टइंडीज के खिलाफ हालिया वनडे सीरीज में दोनों ने बल्ले से एक बार फिर अपनी अहमियत साबित की है। सीरीज में दोनों के शानदार प्रदर्शन के बाद भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने भी उनके योगदान और मौजूदा फॉर्म पर भरोसा जताया है।
विराट कोहली ने सीरीज के पहले वनडे में शानदार शतक लगाया और अंत तक नाबाद रहे। इसके बाद दूसरे मुकाबले में रोहित शर्मा ने शतकीय पारी खेलकर अपनी फॉर्म का सबूत दिया। तीसरे और निर्णायक वनडे में भी रोहित शतक के बेहद करीब पहुंच गए थे, लेकिन 92 रन बनाकर आउट हो गए। इन पारियों ने एक बार फिर दिखाया है कि अनुभव के साथ दोनों बल्लेबाजों की मैच जिताने की क्षमता अब भी बरकरार है।
गौरतलब है कि कोहली की उम्र 37 साल और रोहित की उम्र 39 साल है। ऐसे में भारतीय वनडे टीम में अगली पीढ़ी को तैयार करने और दोनों वरिष्ठ खिलाड़ियों के भविष्य को लेकर चर्चा लगातार होती रही है। हालांकि, वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज के बाद शुभमन गिल के बयान से साफ संकेत मिले हैं कि फिलहाल टीम प्रबंधन दोनों खिलाड़ियों को अपनी योजनाओं का हिस्सा मान रहा है।
सीरीज के तीसरे मुकाबले के बाद पत्रकारों से बातचीत में गिल ने रोहित और कोहली के प्रदर्शन की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि रोहित पिछले 4 पारियों में 3 शतक लगा चुके हैं और उनका बल्ला लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। गिल ने कोहली की बल्लेबाजी को भी शानदार बताया है। उन्होंने विकेटकीपर बल्लेबाज केएल राहुल का भी जिक्र करते हुए कहा कि जब भी उन्हें मौका मिला है, उन्होंने टीम के लिए जरूरी योगदान दिया है।
मौजूद जानकारी के अनुसार भारत के सामने अब 2027 वनडे विश्व कप की तैयारी का लक्ष्य है। इसी वजह से यह चर्चा भी हो रही थी कि विश्व कप से पहले होने वाली द्विपक्षीय सीरीजओं में युवा खिलाड़ियों को ज्यादा मौके दिए जाएं और रोहित तथा कोहली को समय-समय पर आराम दिया जाए। हालांकि गिल का मानना है कि वनडे मुकाबलों की संख्या पहले की तुलना में कम हो गई है और ऐसे में प्रयोग के लिए ज्यादा समय उपलब्ध नहीं है।
गिल ने साफ कहा है कि भारत को विश्व कप के लिए अपनी पसंदीदा टीम और संयोजन जल्द तय करना होगा। उनके मुताबिक जो खिलाड़ी विश्व कप में खेलने के लिए उपलब्ध होंगे, उनके साथ लगातार मुकाबले खेलकर टीम को सही तालमेल बनाना चाहिए। कप्तान का मानना है कि बार-बार खिलाड़ियों को बदलने के बजाय विश्व कप की संभावित टीम को साथ खेलने का पर्याप्त मौका देना जरूरी है।
बता दें कि रोहित और कोहली दोनों भारतीय वनडे क्रिकेट के सबसे अनुभवी बल्लेबाजों में शामिल हैं। लंबे समय तक दोनों ने टीम की बल्लेबाजी को मजबूती दी है और कई बड़े मुकाबलों में अहम पारियां खेली हैं। हालिया सीरीज में भी दोनों का प्रदर्शन यह बताता है कि उम्र के बावजूद वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव छोड़ने की क्षमता रखते हैं।
वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज खत्म होने के बाद भारतीय टीम को वनडे क्रिकेट से करीब 1 महीने का ब्रेक मिलेगा। इसके बाद भारत को न्यूजीलैंड के खिलाफ अगली वनडे सीरीज खेलनी है। ऐसे में आने वाले मुकाबले रोहित और कोहली के साथ-साथ विश्व कप के लिए टीम के अंतिम संयोजन को लेकर भी अहम माने जा रहे हैं।
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