Budget 2026: AI चिपसेट और ग्लोबल सप्लाई चेन बढ़ाएंगे स्मार्टफोन के दाम? इंडस्ट्री ने सरकार से की यह मांग
केंद्रीय बजट 2026-27 की घोषणा से पहले देश के टेक जगत में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या आम आदमी के लिए स्मार्टफोन और महंगे हो जाएंगे? भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्मार्टफोन बाजार है, और डिजिटल होती दुनिया में यह गैजेट अब एक जरूरत बन चुका है। ऐसे में बजट में होने …
हाइब्रिड वॉरफेयर, इलेक्ट्रॉनिक सामान के नाम पर तस्करी:चीन ने अमेरिका के बाद यूरोप में फैलाया ड्रग्स का कारोबार
अमेरिका के बाद अब यूरोप में ड्रग्स के जरिए हाइब्रिड वारफेयर शुरू हो गया है। यूरोपोल की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन से भेजे जा रहे काले बाजार के केमिकल्स से यूरोप में मेथ और एक्स्टेसी जैसे क्लास-ए ड्रग्स बनाए जा रहे हैं। इस महीने यूरोप के कई देशों में छापेमारी कर 24 इंडस्ट्रियल लैब्स को बंद किया गया और 1,000 टन से ज्यादा प्रीकरसर केमिकल जब्त किए गए। इनमें से ज्यादातर चीन से आए थे। ड्रग्स बनाने वाले गैंग चीन से सस्ते और लगातार मिलने वाले केमिकल्स को यूरोप लाकर बड़े पैमाने पर ड्रग्स तैयार कर रहे हैं। इन केमिकल्स को इलेक्ट्रॉनिक सामान या पीवीसी जैसे सामान्य उत्पादों के नाम पर कंटेनरों में छिपाकर भेजा जाता है। फिर इन्हें वैध रास्तों से यूरोप पहुंचाया जाता है। कस्टम और एक्सपोर्ट चेक से बचने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जाता है। यूरोप पहुंचने के बाद ये केमिकल्स ट्रेन से अलग-अलग देशों में भेजे जाते हैं ताकि पुलिस को चकमा दिया जा सके। इसके बाद इन्हें नीदरलैंड्स, बेल्जियम, चेक रिपब्लिक और पोलैंड की लैब्स में भेजा जाता है, जहां इन्हें ड्रग्स में बदला जाता है। इन लैब्स में ड्रग्स बनाने के लिए खास तरह की 400 लीटर की मशीनें लगाई जाती हैं, जिनकी कीमत करीब 60 हजार पाउंड होती है। एक बार में ये मशीनें 100 किलो तक मेथ या एक्स्टसी बना सकती हैं। ड्रग्स के लिए तैयार लैब्स भी चीन से आ रही हैं यूरोपीय ड्रग निरोधक एजेंसी के मुताबिक, अब कुछ गैंग चीन से पूरी तरह तैयार लैब्स भी खरीद रहे हैं। पहले इंजीनियर इन्हें यूरोप में बनाते थे, लेकिन अब सीधे चीन से मंगाई जा रही हैं। ड्रग्स की यूरोपीय मार्केट 18,823 करोड़ रुपए की यूरोप में मेथ और एक्स्टेसी जैसी ड्रग्स की मार्केट करीब 1.5 अरब पाउंड या 18,823 करोड़ रुपए की है। यूरोप में ज्यादातर ड्रग्स लैब्स नीदरलैंड्स में हैं। कुछ लैब्स खेतों में बने बड़े सेटअप हैं, तो कुछ किचन में बने छोटे लैब्स, जो हर बार 500 ग्राम तक ड्रग्स बना सकते हैं। चीन में खुलेआम मिलते हैं ड्रग्स के केमिकल यूरोपीय यूनियन और संयुक्त राष्ट्र के एक्सपर्ट्स का कहना है कि चीन में ड्रग्स बनाने वाले केमिकल्स को मामूली बदलाव कर वैध बना दिया जाता है, जिससे उन पर बैन नहीं लग पाता। जबकि, ऑनलाइन मार्केटप्लेस के जरिए इन केमिकल्स की सप्लाई हो रही है। चीन की केमिकल इंडस्ट्री इतनी बड़ी है कि हर कंटेनर की जांच करना लगभग नामुमकिन है। अमेरिका में एक साल में फेंटानिल से 48 हजार मौतें अमेरिका पहले ही चीन पर फेंटानिल ड्रग की सप्लाई का आरोप लगा चुका है। 2024 में अमेरिका में फेंटानिल के ओवरडोज से 48 हजार लोगों की मौत हुई। इसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सख्त कार्रवाई की चेतावनी देते हुए इसे ‘मास डिस्ट्रक्शन वेपन’ घोषित किया था। हालांकि, लंदन स्थित चीनी दूतावास ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह चीन के खिलाफ एक साजिश है।
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