योगाभ्यास के कितनी देर बाद नहाना और खाना चाहिए?, जानें आयुष मंत्रालय की सलाह
नई दिल्ली, 4 अक्टूबर (आईएएनएस)। आजकल खुद को फिट और स्वस्थ रखने के लिए बड़ी संख्या में लोग योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना रहे हैं। सुबह उठकर योग करना न सिर्फ शरीर को सक्रिय रखने में मदद करता है, बल्कि मानसिक तनाव और थकान को कम करने में भी सहायक माना जाता है। अक्सर लोग योगाभ्यास पूरा होते ही अपनी रोजमर्रा की गतिविधियों में लग जाते हैं। ऐसे में आयुष मंत्रालय ने योग के बाद शरीर को आराम देने और नहाने व भोजन के बीच उचित अंतर रखने की सलाह दी है।
आयुष मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बताया कि योगाभ्यास के बाद शरीर को आराम करने और सामान्य स्थिति में लौटने का समय देना चाहिए। मंत्रालय के अनुसार, योग करने के बाद नहाने या भोजन करने से पहले 20 से 30 मिनट का इंतजार करना बेहतर है। इस दौरान व्यक्ति को कुछ समय शांत रहना चाहिए और शरीर को सहज होने देना चाहिए। इससे योगाभ्यास के बाद दिनचर्या में लौटने के लिए एक अच्छा अंतराल मिल जाता है।
दरअसल, योग के दौरान शरीर की मांसपेशियां सक्रिय होती हैं और सांस लेने की गति में भी बदलाव आता है। ऐसे में अभ्यास पूरा होने के बाद कुछ समय आराम करना उपयोगी माना जाता है। योग के बाद जल्दबाजी करने के बजाय शांत बैठना, सामान्य तरीके से सांस लेना और शरीर को सहज होने देना चाहिए।
आयुष मंत्रालय ने योगाभ्यास के लिए खानपान से जुड़ी कुछ जरूरी बातें भी साझा की हैं। मंत्रालय के मुताबिक, संतुलित और पौष्टिक भोजन शरीर और मन को योग के लिए तैयार रखने में मदद करता है। आमतौर पर योगाभ्यास करने वालों के लिए शाकाहारी भोजन को प्राथमिकता देने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा 30 वर्ष से अधिक उम्र के स्वस्थ व्यक्ति के लिए दिन में दो बार भोजन पर्याप्त हो सकता है। हालांकि, बीमारी, अधिक शारीरिक गतिविधि या मेहनत वाला काम करने वाले लोगों की जरूरतें अलग हो सकती हैं।
योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर और मन के बीच संतुलन बनाने का एक प्रभावी माध्यम है। विभिन्न शोधों में योग को शारीरिक फिटनेस, मांसपेशियों और हड्डियों के बेहतर कामकाज तथा हृदय संबंधी स्वास्थ्य के लिए लाभकारी पाया गया है। नियमित योगाभ्यास डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, सांस संबंधी समस्याओं और जीवनशैली से जुड़ी परेशानियों के प्रबंधन में भी मदद कर सकता है।
इसके अलावा योग तनाव, चिंता, थकान और अवसाद के लक्षणों को कम करने में सहायक हो सकता है। महिलाओं में मासिक धर्म और मेनोपॉज से जुड़ी कुछ परेशानियों के प्रबंधन में भी योग लाभकारी माना जाता है।
--आईएएनएस
पीआईएम/एएस
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Nobel Peace Prize 2026: ट्रंप से लेकर ISS तक नाम चर्चा में, जानें कौन-कौन है दावेदार; समझें चयन प्रक्रिया
Nobel Peace Prize 2026: दुनिया की निगाहें इस समय नॉर्वे की राजधानी ओस्लो पर टिकी हैं. 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा 9 अक्टूबर को होने वाली है. इस बार यह पुरस्कार ऐसे समय में दिया जा रहा है, जब दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध, राजनीतिक तनाव और मानवीय संकट जारी हैं. ऐसे में शांति के इस प्रतिष्ठित सम्मान को लेकर अटकलें भी तेज हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम एक बार फिर चर्चा में है. लेकिन इस बार संभावित दावेदारों की सूची में कुछ ऐसे नाम भी हैं, जो काफी अलग हैं. इनमें इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS), अंतरराष्ट्रीय अदालतें, सूडान के राहत कार्यकर्ता और पत्रकारों की सुरक्षा के लिए काम करने वाली संस्था शामिल हैं.
हालांकि, सबसे जरूरी बात यह है कि नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी संभावित दावेदारों की आधिकारिक सूची जारी नहीं करती. 2026 में कुल 287 नामांकन दर्ज हुए हैं, जिनमें 208 व्यक्ति और 79 संगठन हैं. नामांकन और समिति की चर्चाएं 50 साल तक गोपनीय रहती हैं. इसलिए मीडिया में सामने आने वाले नाम विशेषज्ञों के आकलन, सार्वजनिक नामांकन दावों या शोध संस्थानों की संभावित सूचियों पर आधारित हैं.
कब होगा नोबेल शांति पुरस्कार का ऐलान?
- 9 अक्टूबर 2026 को नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा होगी.
- घोषणा नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में की जाएगी.
- पुरस्कार समारोह 10 दिसंबर को होगा.
- 2026 में कुल 287 नामांकन मिले हैं.
- इनमें 208 व्यक्ति और 79 संगठन शामिल हैं.
- 2025 में 338 नामांकन मिले थे, जबकि 2024 में 286 नाम थे.
नोबेल कमेटी नामांकित लोगों के नाम सार्वजनिक नहीं करती. इसलिए किसी व्यक्ति या संगठन का नाम मीडिया में आने का मतलब यह नहीं है कि वह आधिकारिक तौर पर शॉर्टलिस्टेड है.
सबसे चौंकाने वाला नाम- इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन
इस साल संभावित दावेदारों में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन यानी ISS का नाम सबसे ज्यादा ध्यान खींच रहा है. पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट ओस्लो यानी PRIO के कार्यवाहक निदेशक हाकॉन गेरलॉव ने अपनी 2026 की संभावित सूची में ISS को शामिल किया है. उनकी सूची आधिकारिक नोबेल शॉर्टलिस्ट नहीं है, बल्कि उनका स्वतंत्र आकलन है.
ISS को क्यों मिल सकता है सम्मान?
ISS को अंतरराष्ट्रीय सहयोग का बड़ा उदाहरण माना जाता है.
- अमेरिका और रूस जैसे देशों के वैज्ञानिक यहां लंबे समय से साथ काम करते रहे हैं.
- अलग-अलग देशों के अंतरिक्ष यात्री एक ही स्टेशन पर रिसर्च करते हैं.
- धरती पर राजनीतिक तनाव के बावजूद अंतरिक्ष में वैज्ञानिक सहयोग जारी रहा है.
- ISS 2030 के दशक की शुरुआत में रिटायर होने की दिशा में बढ़ रहा है.
PRIO के मुताबिक, ऐसे समय में जब दुनिया में तनाव बढ़ रहा है, ISS को सम्मान देना अंतरराष्ट्रीय सहयोग का संदेश हो सकता है. अंतरिक्ष तेजी से व्यावसायिक और रणनीतिक गतिविधियों का क्षेत्र बन रहा है, ऐसे में ISS की साझेदारी को शांति के प्रतीक के तौर पर देखा जा सकता है.
डोनाल्ड ट्रंप का नाम फिर चर्चा में
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम भी 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर लगातार चर्चा में है. कई सार्वजनिक दावों के मुताबिक उन्हें अलग-अलग लोगों और नेताओं की ओर से नामांकित किया गया है.
हालांकि, विशेषज्ञों के आकलन को आधिकारिक नोबेल कमेटी की राय नहीं माना जा सकता. रॉयटर्स और एपी की हालिया रिपोर्टों में ट्रंप का नाम संभावित दावेदारों के बीच चर्चा में बताया गया है, लेकिन उनके नाम को लेकर काफी विवाद भी है.
ट्रंप की दावेदारी से जुड़ी चर्चा में एक और घटना का जिक्र हो रहा है. 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार वेनेजुएला की नेता मारिया कोरीना मचाडो को मिला था. पुरस्कार मिलने के बाद उन्होंने अपना मेडल ट्रंप को भेंट कर दिया था. इससे नोबेल पुरस्कार और अमेरिकी राजनीति के बीच चर्चा और तेज हुई थी.
हालांकि, यह याद रखना जरूरी है कि नोबेल कमेटी स्वतंत्र है और संभावित उम्मीदवारों के बारे में सार्वजनिक अटकलें उसके अंतिम फैसले की जानकारी नहीं देतीं.
अंतरराष्ट्रीय कानून की रक्षा करने वाली अदालतें भी चर्चा में
इस साल इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) और इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) के नाम भी संभावित दावेदारों के तौर पर सामने आए हैं. PRIO के 2026 के आकलन में दोनों अदालतों को शामिल किया गया है. PRIO का तर्क है कि बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय कानून और नियम आधारित व्यवस्था की भूमिका महत्वपूर्ण है.
ICJ क्या करता है?
- यह देशों के बीच कानूनी विवादों पर फैसला करता है.
- संयुक्त राष्ट्र व्यवस्था में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है.
- युद्ध और अंतरराष्ट्रीय विवादों से जुड़े मामलों में इसके फैसले सामने आते रहे हैं.
ICC क्या करता है?
- ICC व्यक्तियों के खिलाफ गंभीर अंतरराष्ट्रीय अपराधों के मामलों पर काम करता है.
- इसमें युद्ध अपराध और नरसंहार जैसे अपराध शामिल हैं.
- रूस और इजरायल से जुड़े मामलों में इसके कदमों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी चर्चा पैदा की है.
इन दोनों संस्थाओं को सम्मान देने का मतलब अंतरराष्ट्रीय कानून और जवाबदेही की भूमिका को महत्व देना माना जा सकता है.
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी भी चर्चा में
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का नाम भी 2026 के संभावित दावेदारों में चर्चा में है. इसकी एक वजह अमेरिका के साथ कनाडा के संबंधों में बढ़ा तनाव और कार्नी का अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सक्रिय रुख बताया जा रहा है. एपी की रिपोर्ट में भी कार्नी का नाम इस साल के संभावित दावेदारों में चर्चा में बताया गया है. हालांकि, उनके नोबेल कमेटी की आधिकारिक शॉर्टलिस्ट में होने की पुष्टि नहीं हुई है.
पोप लियो का नाम भी चर्चा में
पोप लियो का नाम भी संभावित दावेदारों के बीच सामने आया है. पोप लियो ने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे युद्धों और मानवीय संकटों पर बातचीत और शांति की अपील की है. हाल के दिनों में उन्होंने AI के संभावित खतरों और उसके सुरक्षित इस्तेमाल पर भी चिंता जाहिर की है. नोबेल शांति पुरस्कार के संदर्भ में पोप का नाम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उनका प्रभाव धार्मिक सीमाओं से बाहर भी अंतरराष्ट्रीय बहस में दिखाई देता है.
सूडान के आम लोग भी दौड़ में
इस बार संभावित नामों में बड़े राजनेताओं के अलावा सूडान की Emergency Response Rooms भी शामिल हैं. सूडान लंबे समय से गृहयुद्ध और मानवीय संकट से जूझ रहा है. ऐसे हालात में स्थानीय स्वयंसेवकों के नेटवर्क ने लोगों की मदद के लिए काम किया है.
ये समूह:
- जरूरतमंदों के लिए भोजन की व्यवस्था करते हैं.
- घायलों तक चिकित्सा सहायता पहुंचाने की कोशिश करते हैं.
- युद्ध से प्रभावित लोगों की मदद करते हैं.
- बेहद मुश्किल परिस्थितियों में स्थानीय स्तर पर राहत कार्य चलाते हैं.
PRIO ने Emergency Response Rooms को अपनी संभावित सूची में शामिल किया है.
यूक्रेन के बच्चों के लिए काम करने वाले लोग और संस्थाएं
मायकोला कुलेबा और Save the Children का नाम भी PRIO की सूची में है. युद्ध के कारण यूक्रेन में बड़ी संख्या में बच्चे प्रभावित हुए हैं. बच्चों की सुरक्षा, परिवारों से बिछड़े बच्चों को वापस मिलाने और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए किए जा रहे काम को इस संभावित नामांकन से जोड़ा जा रहा है. यह नामांकन युद्ध में सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले बच्चों की स्थिति को वैश्विक ध्यान में लाने का माध्यम भी बन सकता है.
पत्रकारों की सुरक्षा के लिए काम करने वाली संस्था भी दावेदार
Committee to Protect Journalists यानी CPJ भी PRIO की 2026 की संभावित सूची में शामिल है. यह संस्था संघर्ष वाले क्षेत्रों में काम करने वाले पत्रकारों की सुरक्षा और प्रेस की स्वतंत्रता के लिए काम करती है. PRIO का कहना है कि जब दुनिया के कई हिस्सों में पत्रकारों पर दबाव और हमले बढ़ रहे हैं, तब पत्रकारों को सुरक्षित तरीके से काम करने का अधिकार शांति और लोकतंत्र से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है.
महिलाओं के नाम पर भी नजर
नोबेल शांति पुरस्कार के इतिहास में महिलाओं की हिस्सेदारी पुरुषों के मुकाबले काफी कम रही है. इसलिए हर साल महिला उम्मीदवारों के नामों पर भी विशेष ध्यान रहता है. 2026 में यूलिया नवलनाया और गाजा में मानवीय काम से जुड़े कुछ नामों की चर्चा संभावित दावेदारों के रूप में हुई है. लेकिन इनमें से किसी का आधिकारिक तौर पर नोबेल कमेटी की शॉर्टलिस्ट में होना सार्वजनिक नहीं है.
आखिर इस बार का पुरस्कार इतना अहम क्यों?
2026 में कई बड़े संकटों से गुजर रही है दुनिया.
- यूक्रेन में युद्ध जारी है.
- मध्य पूर्व में तनाव बना हुआ है.
- सूडान मानवीय संकट से जूझ रहा है.
- अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और नियम आधारित व्यवस्था को लेकर बहस तेज है.
- दुनिया में हथियारों और सैन्य खर्च को लेकर भी चिंता बढ़ रही है.
ऐसे माहौल में नोबेल शांति पुरस्कार सिर्फ किसी व्यक्ति या संस्था को सम्मान देने तक सीमित नहीं रहता. इसके जरिए शांति, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, मानवीय अधिकार और संवाद जैसे मुद्दों पर दुनिया का ध्यान जाता है.
इस साल की संभावित सूची को देखें तो एक बात खास तौर पर सामने आती है कि दावेदारों में केवल राष्ट्राध्यक्ष या बड़े राजनेता नहीं हैं. अंतरिक्ष स्टेशन से लेकर युद्धग्रस्त इलाकों में काम करने वाले स्वयंसेवकों और अंतरराष्ट्रीय अदालतों तक, कई तरह के नाम चर्चा में हैं.
अब अंतिम फैसला नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी को करना है. दुनिया की निगाहें 9 अक्टूबर 2026 को ओस्लो पर रहेंगी, जब यह साफ होगा कि इस बेहद तनावपूर्ण दौर में शांति का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय सम्मान किसे मिलता है.
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