केंद्रीय बजट 2026 से पहले सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट, सिल्वर 9 प्रतिशत तक फिसली
मुंबई, 1 फरवरी (आईएएनएस)। पिछले दो दिनों से जारी तेज गिरावट के बाद रविवार सुबह चांदी की कीमतों में फिर से भारी गिरावट देखने को मिली। एमसीएक्स पर चांदी के दाम करीब 10 प्रतिशत तक गिर गए। दुनिया भर में धातु बाजार में बिकवाली का असर भारतीय बाजार पर भी साफ दिखा।
केंद्रीय बजट 2026-27 के चलते रविवार को विशेष सत्र में एमसीएक्स (मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज) पर मार्च डिलीवरी वाली चांदी में 22,626 रुपए यानी करीब 8 प्रतिशत तक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई और यह 2,69,299 रुपए प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती नजर आई। शुरुआती कारोबार में चांदी 2,65,652 रुपए तक गिर गई थी, जिसमें 9 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।
रिकॉर्ड ऊंचाई से तुलना करें तो चांदी की कीमतों में अब तक करीब 36 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है। यह कीमती धातुओं में चल रही बड़ी गिरावट का हिस्सा मानी जा रही है।
वहीं एमसीएक्स पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना 3.59 प्रतिशत यानी 5,368 रुपए की गिरावट के साथ 1,44,285 रुपए प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। सोने का भाव इंट्रा-डे में 1,36,185 रुपए प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया था।
कीमती धातुओं की कीमतों में यह गिरावट अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक घोषणा के बाद आई है। ट्रंप ने कहा कि केविन वार्श, जेरोम पॉवेल की जगह अमेरिका के केंद्रीय बैंक (फेडरल रिजर्व) के नए चेयरमैन बन सकते हैं।
केविन वार्श को एक सख्त (हॉकिश) सोच वाला व्यक्ति माना जाता है। माना जा रहा है कि वह ब्याज दरों को लेकर अलग रुख अपना सकते हैं। इससे डॉलर मजबूत हो सकता है और आमतौर पर डॉलर मजबूत होने पर सोने-चांदी जैसी धातुओं की कीमतों पर दबाव पड़ता है।
सोने और चांदी में आई बड़ी गिरावट की एक और वजह ज्यादा सट्टेबाजी और मुनाफावसूली भी है। इससे पहले कीमती धातुओं में बहुत तेज तेजी आई थी, क्योंकि शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ने से निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के तौर पर सोना-चांदी खरीदी थी।
बाजार के जानकारों का कहना है कि बड़ी तेजी के बाद मुनाफावसूली होना सामान्य बात है। जब किसी चीज की कीमत उसकी असली मजबूती से काफी आगे निकल जाती है, तो गिरावट आती ही है। मजबूत डॉलर और ज्यादा बढ़ी हुई कीमतों के कारण निवेशक अब मुनाफा निकाल रहे हैं।
--आईएएनएस
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Budget 2026: बजट में निर्मला सीतारमण का साड़ी स्वैग, हर बार दिखता है एक अलग अंदाज, पिछले 9 बजट में पहनीं ये खास साड़ियां
Budget 2026 Nirmala Sitharaman Different Saree Style: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज लगातार नौवीं बार देश का केंद्रीय बजट पेश कर एक नया इतिहास रचने जा रही हैं. 1 फरवरी का यह दिन पूरे राष्ट्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि करोड़ों टैक्सपेयर्स, उद्योग जगत, किसान, महिलाएं और युवा टकटकी लगाए उनके बजट भाषण का इंतजार कर रहे हैं. हालांकि, नीतियों और आर्थिक घोषणाओं के साथ-साथ निर्मला सीतारमण की साड़ियों का चयन भी हर साल एक बड़ा चर्चा का विषय बना रहता है.
निर्मला सीतारमण का पहनावा केवल फैशन नहीं, बल्कि देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विविध बुनाई शैलियों का एक अनूठा प्रदर्शन होता है. पिछले आठ बजटों के दौरान, उन्होंने जिस तरह से अलग-अलग राज्यों की पारंपरिक साड़ियों को चुना है, वह भारत की कपड़ा विरासत (Textile Heritage) के प्रति उनके लगाव को दिखाता है. उनकी साड़ियों पर की गई कारीगरी और रंगों का चयन अक्सर राष्ट्रीय गौरव और उस साल के नीतिगत फोकस से जोड़कर देखा जाता है.
निर्मला सीतारमण ने हर बार दिखाया साड़ी स्वैग
साल 2019 से लेकर 2025 तक, उनके हर बजट लुक ने एक अलग कहानी बयां की है. उन्होंने कभी आंध्र प्रदेश की प्रसिद्ध मंगलगिरी साड़ी पहनी, तो कभी बिहार की पारंपरिक मधुबनी पेंटिंग वाली साड़ी में नजर आईं. उनके ये चुनाव ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने और स्थानीय कारीगरों के कौशल को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने के प्रतीक माने जाते हैं. यही कारण है कि बजट के दिन सोशल मीडिया पर उनकी साड़ी के रंग और उसकी बुनाई को लेकर काफी उत्साह रहता है.
आज जब वे अपना नौवां बजट पेश करेंगी, तो एक बार फिर सभी की निगाहें न केवल आंकड़ों पर, बल्कि उनकी 'अनूठी' साड़ी पर भी टिकी होंगी. उनकी यह पसंद अक्सर 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' की भावना को मजबूती प्रदान करती है और देश की एकता व विविधता को प्रदर्शित करती है. आइए, एक नजर डालते हैं निर्मला सितारमण की उन 9 साड़ियों पर जो उन्होंने पिछले 9 बजट पेश करते हुए पहनी हैं.
यूनियन बजट 2026
इस वर्ष निर्मला सीतारमण ने तमिलनाडु की सदियों पुरानी बुनाई परंपरा को विशेष सम्मान दिया. उन्होंने हाथ से बुनी हुई बैंगनी रंग की कट्टम कांजीवरम रेशमी साड़ी पहनी. इस साड़ी की विशेषता इस पर बने सुनहरे भूरे रंग के कट्टम यानी चेक और कॉफी ब्राउन रंग का बॉर्डर था, जिस पर धागे का बारीक काम किया गया था. यह चुनाव दक्षिण भारतीय हस्तशिल्प की भव्यता को प्रदर्शित करता है.
यूनियन बजट 2025
साल 2025 में वित्त मंत्री ने गोल्डन बॉर्डर वाली ऑफ-व्हाइट साड़ी पहनी थी, जिस पर पारंपरिक मधुबनी प्रिंट था. यह साड़ी बेहद खास थी क्योंकि इसे पद्मश्री से सम्मानित कलाकार दुलारी देवी ने उन्हें उपहार में दिया था. इस पसंद के जरिए उन्होंने बिहार की लोक कला और महिला कलाकारों के प्रति अपना सम्मान प्रकट किया.
यूनियन बजट 2024
2024 के अंतरिम बजट में उन्होंने पश्चिम बंगाल की प्रसिद्ध कांथा कढ़ाई वाली नीले रंग की टसर सिल्क साड़ी चुनी.
इसके बाद, पूर्ण बजट के दौरान उन्होंने आंध्र प्रदेश की मंगलगिरी साड़ी पहनी. यह चुनाव न केवल राज्यों की कला को दर्शाता था, बल्कि उस समय सरकार के विशेष क्षेत्रीय नीतिगत फोकस का भी प्रतीक माना गया.
यूनियन बजट 2023
साल 2023 के बजट में उन्होंने लाल रंग की सिल्क साड़ी पहनी थी, जिसमें काले और सुनहरे रंग का टेंपल बॉर्डर था. इस साड़ी पर रथ, मोर और कमल के डिजाइन बने थे. लाल रंग को शक्ति और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है, जबकि टेंपल बॉर्डर दक्षिण भारतीय सांस्कृतिक स्थिरता और परंपरा को प्रदर्शित करता है.
यूनियन बजट 2022
इस साल उन्होंने भूरे रंग की बोमकाई साड़ी पहनकर ओडिशा की समृद्ध कलात्मक विरासत को वैश्विक मंच दिया. सिल्वर जरी के काम और ऑफ-व्हाइट बॉर्डर वाली यह साड़ी ओडिशा के गंजाम जिले के बुनकरों की मेहनत का प्रमाण थी.
यूनियन बजट 2021
2021-22 के बजट के लिए निर्मला सीतारमण ने तेलंगाना की मशहूर पोचमपल्ली इकत साड़ी को चुना. लाल, ऑफ-व्हाइट और हरे रंग के बोल्ड मिश्रण वाली यह साड़ी अपनी ज्यामितीय बुनाई के लिए जानी जाती है. यह पसंद आधुनिकता और भारतीय पारंपरिक बुनाई के मेल का एक उत्कृष्ट उदाहरण थी.
यूनियन बजट 2020
इस वर्ष उन्होंने हरे बॉर्डर वाली पीले रंग की सिल्क साड़ी पहनी थी. पीला रंग हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति में शुभता, नई शुरुआत और विकास का प्रतीक माना जाता है. इस साड़ी के जरिए उन्होंने चुनौतीपूर्ण समय में देश की अर्थव्यवस्था के प्रति सकारात्मकता और आशा का संदेश दिया था.
यूनियन बजट 2019
अपने पहले बजट में निर्मला सीतारमण ने इतिहास रचते हुए ब्रीफकेस की जगह 'बही खाता' का उपयोग किया. इस दौरान उन्होंने सुनहरे बॉर्डर वाली गुलाबी मंगलगिरी साड़ी पहनी थी. गुलाबी रंग उनके नए दृष्टिकोण का प्रतीक था, जबकि सुनहरी जरी ने भारत की समृद्ध कपड़ा विरासत को सम्मानित किया, जिससे उन्होंने आधुनिक नीतियों को सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ा.
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