छात्र खुदकुशी रोकने को University परिसरों के ढांचे में वैश्विक स्तर पर हुए हैं बदलाव
(गुंजन शर्मा) नयी दिल्ली, चार अक्टूबर विद्यार्थियों की आत्महत्या रोकने की कोशिशों के बीच भारतीय शिक्षण संस्थान अपने यहां पंखों में भी बदलाव कर रहे हैं। कहीं स्प्रिंग लगे ‘आत्महत्या रोधी’ पंखे लगाए जा रहे हैं, तो कहीं पंखों को जाली से ढका जा रहा है और कुछ संस्थान छत की जगह दीवार वाले पंखे लगा रहे हैं। इन कदमों को भले ही ‘तात्कालिक उपाय’ कहकर आलोचना का सामना करना पड़ रहा हो, लेकिन कई विदेशी विश्वविद्यालय भी पहले ऐसे भौतिक बदलाव अपना चुके हैं।
अमेरिका के ह्यूस्टन विश्वविद्यालय (यूएच) ने परिसर में आत्महत्या की दो घटनाओं के बाद 2023 में अपने बुनियादी ढांचे में कई बदलाव किए थे जिसके तहत इमारत के चारों ओर सुरक्षा बाड़ लगाने के साथ-साथ ऊपरी मंजिल के छज्जों, अंदरूनी सीढ़ियों और इमारतों को जोड़ने वाले खुले गलियारों को अस्थायी अवरोध लगाकर सुरक्षित किया गया था। घटना के बाद विश्वविद्यालय ने ‘एग्नेस अर्नोल्ड हॉल टास्कफोर्स’ का गठन किया और तीन चरणों में इमारत के नवीनीकरण का काम शुरू किया। अमेरिका के कॉर्नेल विश्वविद्यालय में भी 2009-10 के शैक्षणिक सत्र के दौरान आत्महत्या की सिलसिलेवार घटनाओं ने परिसर की सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव जरूरी कर दिया था।
एक महीने के भीतर विश्वविद्यालय के तीन छात्रों ने ‘ईस्ट हिल’ के पुलों से या उनके आसपास से कूदकर आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद परिसर के आसपास की गहरी खाइयों पर बने पुलों पर स्टील की सुरक्षा जालियां लगाई गईं। बाद में विश्वविद्यालय ने आठ पुलों पर स्थायी अवरोध लगाए और कुछ खड़ी चट्टानों के किनारों पर भी बाड़ लगा दी।
हार्वर्ड विश्वविद्यालय के ‘मीन्स मैटर’ दिशानिर्देशों में भी आत्महत्या रोकने के उपायों के तहत घातक साधनों तक पहुंच सीमित करने की सिफारिश की गई है। यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (यूसीएल) और ब्रुनेल यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन में भी छात्रावासों की खिड़कियों पर ऐसे अवरोधक लगाने की नीति है, जिनसे खिड़कियों को एक निश्चित सीमा से अधिक खोला नहीं जा सकता। ऑक्सफोर्ड के वेडहम कॉलेज में छात्रों को खिड़कियों पर लगे इन अवरोधकों के साथ छेड़छाड़ करने की अनुमति नहीं है।
इसके अलावा, छतों, मुंडेरों और छज्जों तक पहुंच प्रतिबंधित है। बालकनी पर सुरक्षा रेलिंग भी लगाई गई हैं। मुंबई स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के एक छात्र द्वारा 18 सितंबर को परिसर में स्थित छात्रावास के कमरे में फंदा लगाकर आत्महत्या किए जाने की घटना के बाद विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए।
इस घटना ने एक बार फिर छात्र आत्महत्याओं के मुद्दे को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। चिंता संबंधी विकारों की विशेषज्ञ मनोचिकित्सक वैशाली षणमुगम ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि घातक साधनों तक पहुंच सीमित करना विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की सिफारिशों का भी हिस्सा है, लेकिन इसे छात्रों को सार्थक सहयोग देने के विकल्प के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘परिसर के भौतिक वातावरण में बदलाव पर जरूरत से ज्यादा जोर देने का खतरा यह है कि इससे मानसिक स्वास्थ्य के बड़े संकट से ध्यान हट सकता है।
पंखे हटाने से अल्पावधि में कुछ जानें बच सकती हैं। लेकिन अगर हम वास्तव में छात्रों का साथ देना चाहते हैं तो हमें ऐसी व्यवस्थाएं बनानी होंगी, जहां उन्हें लगे कि उनकी बात सुनी और समझी जा रही है और उनकी परवाह की जा रही है। अब समय आ गया है कि हम गंभीर समस्या पर महज तात्कालिक उपाय करना बंद करें।
Bahraich Court ने 1994 के तिहरे हत्याकांड में पांच मुजरिमों को सुनाई उम्रकैद की सजा
बहराइच (उप्र), चार अक्टूबर उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले की एक विशेष अदालत ने 32 साल पुराने तिहरे हत्याकांड में पांच आरोपियों को दोषी करार देते हुए शनिवार को उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष ने रविवार को यह जानकारी दी। विशेष न्यायाधीश (एससी-एसटी अधिनियम) पवन कुमार शर्मा की अदालत ने महावीर, गिरधारी, विजयराज, गरीबे और राधेश्याम को दोषी ठहराया।
अदालत ने प्रत्येक दोषी पर एक लाख 15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया और जुर्माने की आधी राशि पीड़ित परिवार को देने का आदेश दिया है। जुर्माना नहीं देने पर दोषियों को छह महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अभियोजन के अनुसार, नानपारा कोतवाली क्षेत्र के चौवाइनपुरवा गांव में 31 जुलाई 1994 को श्यामलाल, रामफल, गोपी, ढोढ़े, गिरधारी, महावीर, विजयराज, गरीबे और राधेश्याम एक घर में घुस गए थे।
आरोपियों ने लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से हमला किया था, जिसमें चिरकू, उनके बेटे संतराम और दामाद मायाराम की मौत हो गई थी। मामले में चिरकू की पत्नी सुमित्रा देवी की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। अभियोजन के मुताबिक, सुमित्रा देवी ने पुलिस को बताया था कि वह अपने पति को बचाने के लिए आगे बढ़ीं तो हमलावरों ने उन्हें पेड़ से बांध दिया और उनकी आंखों के सामने उनके पति, बेटे और दामाद की हत्या कर दी।
पुलिस ने विवेचना पूरी करने के बाद अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे एक सरकारी अधिवक्ता ने बताया कि सुनवाई के दौरान चार आरोपियों श्यामलाल, रामफल, गोपी और ढोढ़े की मृत्यु हो गई, जिसके बाद उनके खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी गई। शनिवार देर शाम अदालत परिसर में मौजूद पीड़ित पक्ष के परिजनों ने फैसले पर संतोष जताया।
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