गोवा में आम आदमी पार्टी की सक्रियता तेज, बैठक में केजरीवाल ने संगठन मजबूत करने और स्थानीय मुद्दों पर फोकस करने का दिया संदेश
गोवा की राजनीति में बदलाव के संकेत दिखने लगे हैं. आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने शनिवार (31 जनवरी) को गोवा राज्य समिति के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ अहम बैठक की. यह बैठक सिर्फ औपचारिक नहीं थी, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी का स्पष्ट संकेत मानी जा रही है. बैठक में गोवा के कई स्थानीय मुद्दों पर चर्चा हुई. नेताओं ने कहा कि राज्य में जमीन का गलत इस्तेमाल हो रहा है. खेती की खाजान जमीन को नुकसान पहुंच रहा है और झीलों व नदियों पर भी बुरा असर पड़ रहा है. उनका आरोप है कि गलत नीतियों और बिना योजना के विकास कार्यों के कारण पर्यावरण को नुकसान हो रहा है और लोगों की रोजी-रोटी प्रभावित हो रही है.
केजरीवाल ने बैठक में क्या कहा?
अरविंद केजरीवाल ने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि आम आदमी पार्टी की राजनीति सत्ता के लिए नहीं, बल्कि जनता के लिए है. उन्होंने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने, युवाओं और महिलाओं को जोड़ने और जनता से सीधा संवाद बढ़ाने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि पार्टी गोवा में लंबी और मजबूत राजनीतिक मौजूदगी बनाना चाहती है.
Had a lunch meeting today with the Aam Aadmi Party Goa State Committee and held detailed discussions on strengthening the organisation in the state.
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) January 31, 2026
The people of Goa want an honest alternative and people centric politics. Together with the people, we will work to fulfil Goa’s… pic.twitter.com/SMBURTqRG6
बैठक में यह भी कहा गया कि गोवा की जनता लंबे समय से एक ईमानदार विकल्प की तलाश में है. पर्यटन राज्य होने के बावजूद यहां बेरोजगारी, महंगाई, स्वास्थ्य सेवाओं की कमी और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे लोगों को परेशान कर रहे हैं. आम आदमी पार्टी इन समस्याओं को अपने एजेंडे में प्रमुखता दे रही है.
पंजाब में पार्टी के कामों का किया जिक्र
पंजाब में पार्टी की सरकार के कामों का भी जिक्र हुआ. शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और पानी जैसे क्षेत्रों में किए गए बदलावों को उदाहरण के तौर पर पेश किया गया. नेताओं का कहना है कि इसी तरह का मॉडल गोवा में भी लागू किया जा सकता है.
2027 चुनावों की तैयारी शुरू
आम आदमी पार्टी अब गांव, वार्ड और बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत कर रही है. स्थानीय नेताओं को आगे लाने और जनता के बीच लगातार पहुंच बनाने की योजना है. पार्टी का मानना है कि 2027 का चुनाव गोवा की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है.
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चीन ने वेनेजुएला को लेकर अमेरिका की की, लेकिन उइगरों पर अत्याचारों को किया नजरअंदाज
बीजिंग, 31 जनवरी (आईएएनएस)। चीन ने अमेरिकी बलों द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी की निंदा करते हुए इसे “वैश्विक मानदंडों को कमजोर करने वाला वर्चस्ववादी कदम” बताया है। हालांकि, उइगरों पर चीन के अत्याचारों से परिचित लोगों के लिए बीजिंग की यह प्रतिक्रिया केवल “पाखंडी ही नहीं, बल्कि घोर अमानवीय” भी है। यह बात शनिवार को आई एक रिपोर्ट में कही गई।
ऑनलाइन पत्रिका ‘बिटर विंटर’ के लिए लिखते हुए उइगर-अमेरिकी पत्रकार शोह्रेत होशुर ने कहा, “मादुरो को पकड़ने के लिए ट्रंप प्रशासन ने सीमित संख्या में सैनिकों को हवा, ज़मीन और समुद्र के रास्ते तैनात किया। यह अभियान दो घंटे 28 मिनट में पूरा हो गया। इसके विपरीत, चीन ने तीन मिलियन से अधिक उइगरों को हिरासत में लेने के लिए दसियों हजार पुलिसकर्मियों और लाखों सरकारी कैडरों को झोंक दिया। ट्रंप के सैनिक राष्ट्रपति भवन के दरवाज़े तक पहुंचे, जबकि चीनी पुलिस ने आधी रात को आंगनों की दीवारें फांदीं, घरों में घुसी, दरवाज़े तोड़े और बिना चेतावनी घुसकर परिवारों को जानबूझकर आतंकित किया।”
उन्होंने आगे लिखा, “ट्रंप की सेना ने उन सैनिकों और सुरक्षा बलों से सुरक्षित राष्ट्रपति भवन पर धावा बोला। वहीं, चीनी सशस्त्र पुलिस ने निहत्थे आम नागरिकों—पुरुषों, महिलाओं और बुज़ुर्गों— के घरों पर धावा बोला, जिनकी सुरक्षा का एकमात्र साधन शायद आंगन में बंधा कोई कुत्ता रहा हो। मादुरो को बांधकर हेलीकॉप्टर से ले जाया गया। उइगरों को अक्सर सिर पर बोरी डालकर ले जाया गया; और जब बोरी उपलब्ध नहीं होती, तो अधिकारी अपनी ही जैकेट उनके सिर पर डालकर उन्हें घसीटते हुए ले जाते थे।”
होशुर ने बताया कि मादुरो के मामले में गिरफ्तारी के तुरंत बाद कानूनी प्रक्रिया शुरू हुई। न्यूयॉर्क पहुंचने के तीन दिन के भीतर उन्हें अदालत में पेश किया गया। एक सप्ताह के भीतर उन्हें अपने बेटे से मिलने की अनुमति भी मिल गई और दुनिया को उनकी गिरफ्तारी का कारण पता था।
लेकिन उइगरों को जिन शिविरों में भेजा गया, वहां कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं थी—न वारंट, न आरोप, न सुनवाई।
उन्होंने कहा, “परिवारों को अंधेरे में रखा गया। खुद बंदी बनाए गए लोगों को भी अक्सर यह नहीं पता था कि उन्हें क्यों पकड़ा गया—सिवाय इसके कि वे उइगर थे और उस संसाधन-समृद्ध क्षेत्र के निवासी थे, जिसे ऐतिहासिक रूप से पूर्वी तुर्किस्तान कहा जाता है।”
रिपोर्ट के अनुसार, मादुरो की गिरफ्तारी के बाद ट्रंप प्रशासन ने खुले तौर पर वेनेजुएला के तेल में अपनी दिलचस्पी स्वीकार की और कहा कि इससे दोनों देशों को लाभ हो सकता है।
वहीं, रिपोर्ट में कहा गया कि चीन चुपचाप पूर्वी तुर्किस्तान के तेल, गैस और प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करता रहा है, जबकि वह यह दावा करता है कि वह केवल “शिनजियांग का आर्थिक विकास” कर रहा है। इन संसाधनों से होने वाले मुनाफे के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी जाती।
--आईएएनएस
डीएससी
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