यूक्रेन में तकनीकी खराबी से बड़े पैमाने पर बिजली गुल
कीव, 31 जनवरी (आईएएनएस)। यूक्रेन में शनिवार को तकनीकी खराबी के चलते देश के कई हिस्सों में व्यापक स्तर पर बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। यूक्रेनी अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की है।
ऊर्जा मंत्री डेनिस श्मिहाल ने टेलीग्राम पर बताया कि यह घटना स्थानीय समयानुसार सुबह 10:42 बजे (08:42 जीएमटी) हुई। इस दौरान रोमानिया और मोल्दोवा के बिजली ग्रिड से जुड़ी ट्रांसमिशन लाइनों के साथ-साथ यूक्रेन के पश्चिमी और मध्य हिस्सों को जोड़ने वाली लाइन एक साथ डिस्कनेक्ट हो गई।
ऊर्जा मंत्री के अनुसार, इस तकनीकी विफलता के कारण यूक्रेन के पावर ग्रिड में कैस्केडिंग फेल्योर हुआ, जिससे सब-स्टेशनों पर ऑटोमैटिक प्रोटेक्शन सिस्टम सक्रिय हो गए। इस स्थिति में परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की इकाइयों का लोड कम करना पड़ा, जबकि देश के कई क्षेत्रों में आपातकालीन बिजली कटौती लागू की गई।
राजधानी कीव में कम वोल्टेज के कारण मेट्रो सेवाएं निलंबित कर दी गईं। यह जानकारी कीव के मेयर विटाली क्लिट्स्को ने दी।
राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन की ऊर्जा प्रणाली में सभी आवश्यक प्रतिक्रिया उपाय लागू कर दिए गए हैं और बिजली बहाली का काम तेजी से जारी है।
इससे पहले, जेलेंस्की ने कहा था कि यूक्रेन रूस के साथ ऊर्जा युद्धविराम का पालन करने के लिए तैयार है, जो शुक्रवार रात से लागू हुआ है। यूक्रेन की समाचार एजेंसी उक्रइंफॉर्म के अनुसार, जेलेंस्की ने अपने संबोधन में कहा, “यूक्रेन संयम का उसी तरह पालन करने को तैयार है और आज हमने रूसी ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर कोई हमला नहीं किया।”
उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका ने ऊर्जा अवसंरचना पर हमलों को एक सप्ताह के लिए रोकने का प्रस्ताव दिया है।
इससे पहले गुरुवार को, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भीषण ठंड को देखते हुए एक सप्ताह तक कीव और अन्य शहरों पर हमले न करने का अनुरोध किया है।
वहीं, शुक्रवार को क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि ट्रंप के अनुरोध के बाद रूस ने 1 फरवरी तक यूक्रेन की ऊर्जा सुविधाओं पर हमले रोकने पर सहमति जताई है।
--आईएएनएस
डीएससी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
डिविजनल रेलवे अस्पताल मालदा में विश्व कुष्ठ रोग दिवस 2026 मनाया, थीम 'कलंक असली चुनौती' पर जोर
मालदा, 31 जनवरी (आईएएनएस)। डिविजनल रेलवे अस्पताल, मालदा में शनिवार को विश्व कुष्ठ रोग दिवस 2026 धूमधाम से मनाया गया। यह कार्यक्रम डीआरएम/मालदा मनीष कुमार गुप्ता के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया, जिसकी वैश्विक थीम कुष्ठ रोग ठीक हो सकता है, असली चुनौती कलंक है थी।
इस थीम के अनुरूप कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कुष्ठ रोग (हैंसेन रोग) के बारे में जागरूकता फैलाना, शुरुआती पहचान और समय पर इलाज के महत्व को रेखांकित करना और बीमारी से जुड़े गहरे सामाजिक कलंक को दूर करना था। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. (डॉ.) आर. एन. भट्टाचार्य, एचओडी, प्लास्टिक एंड रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी विभाग, आरजी कर मेडिकल कॉलेज, कोलकाता ने विशेषज्ञ व्याख्यान दिया।
22 वर्षों से कुष्ठ रोग से प्रभावित मरीजों की रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी में समर्पित कार्य कर रहे डॉ. भट्टाचार्य ने भारत में कुष्ठ रोग की स्थिति पर विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि भारत अभी भी कुष्ठ रोग के मामलों में प्रमुख देशों में शामिल है, जहां पश्चिम बंगाल रिपोर्ट किए गए मामलों में तीसरे स्थान पर है।
डॉ. भट्टाचार्य ने जोर देकर कहा कि कुष्ठ रोग पूरी तरह ठीक हो सकता है, बहु-औषधि चिकित्सा (एमडीटी) से मुफ्त इलाज उपलब्ध है, लेकिन देर से निदान के कारण होने वाली विकृतियां मरीजों को सामाजिक बहिष्कार और अस्वीकृति का शिकार बनाती हैं। रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी और संरचित फिजियोथेरेपी से खोए कार्यों को बहाल किया जा सकता है, जिससे मरीज मुख्यधारा समाज में वापस लौट सकें। उन्होंने महात्मा गांधी की कुष्ठ रोगियों के प्रति आजीवन प्रतिबद्धता और उनकी गरिमा बहाल करने के प्रयासों का जिक्र किया, जो आज भी प्रेरणादायक है।
कार्यक्रम में एक इंटरैक्टिव सत्र भी हुआ, जिसका संचालन डॉ. अमिताभ मंडल, डिप्टी सीएमओएच-III, मालदा ने किया। उन्होंने डॉक्टरों, स्वास्थ्य कर्मियों और उपस्थित लोगों के साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य रणनीतियों, शुरुआती पहचान, उपचार और समुदाय-आधारित सहायता पर चर्चा की। सत्र में कुष्ठ रोग के लक्षण, संक्रमण रोकथाम और कलंक मुक्ति के उपायों पर सवाल-जवाब हुआ।
अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी जैसे डॉ. एस. बोस (एसीएमएस/पी), डॉ. एस. रॉय (डीएमओ/ईएनटी), डॉ. एस. भट्टाचार्य (एसीएमएस) सहित नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ ने सक्रिय भागीदारी की। उनका उत्साहपूर्ण सहयोग अस्पताल की कुष्ठ रोग के चिकित्सा एवं सामाजिक दोनों स्तरों पर लड़ाई की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
--आईएएनएस
एससीएच
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