महाराष्ट्र सरकार में शनिवार को एक महत्वपूर्ण मंत्रिमंडल फेरबदल हुआ, जिसमें उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार को आबकारी, खेल और अल्पसंख्यक विकास विभाग आवंटित किए गए। ये विभाग पहले उनके दिवंगत पति और वरिष्ठ राष्ट्रीय समिति नेता अजित पवार के पास थे, जिनकी बारामती में विमान दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। प्लानिंग और फाइनेंस विभाग, जो पहले दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजित पवार के पास थे, अब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के पास हैं।
सूत्रों के अनुसार, यह कदम आगामी बजट सत्र से पहले निरंतरता और स्थिरता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है, जिसके दौरान मार्च में महाराष्ट्र का 2026-27 का बजट पेश किया जाना है। सूत्रों के मुताबिक, फडणवीस वित्त विभाग का कार्यभार संभालेंगे और स्वयं वार्षिक बजट पेश करेंगे। सुनेत्रा पवार को यह पोर्टफोलियो आवंटन भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति सरकार में उनकी हाल ही में उपमुख्यमंत्री के रूप में नियुक्ति के बाद हुआ है। अजित पवार के निधन के कुछ दिनों बाद ही मंत्रिमंडल में एक बड़ा पद खाली हो गया था।
अजित पवार इससे पहले वित्त, उत्पाद शुल्क, खेल और अल्पसंख्यक मामलों सहित कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों का कार्यभार संभाल चुके हैं। राज्य सरकार के सूत्रों के अनुसार, आगामी बजट की अधिकांश तैयारियां उपमुख्यमंत्री अजित पवार के नेतृत्व में पहले ही पूरी हो चुकी थीं। ऐसे में, अंतिम चरण में, जब नीतिगत निर्णयों और संशोधनों की आवश्यकता होती है, किसी नए मंत्री को लाना प्रक्रिया को जटिल बना सकता था।
सूत्रों ने बताया कि महायुति और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के बीच सुचारू समन्वय सुनिश्चित करने के लिए वित्त मंत्रालय का प्रभार अस्थायी रूप से मुख्यमंत्री के पास ही रहेगा। यह निर्णय बजट से पहले की महत्वपूर्ण अवधि में निरंतरता बनाए रखने और बजट तैयारियों में किसी भी प्रकार की बाधा को रोकने के उद्देश्य से लिया गया है।
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मॉस्को में ग्रैंड क्रेमलिन पैलेस का यह मशहूर सुनहरा दरवाजा खुला और रूस के राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन इस दरवाजे से एक विशाल हॉल में दाखिल हुए। इस हॉल में पुतिन उस शख्स से मिले जिसने कुछ दिन पहले ही पीएम मोदी से मुलाकात की थी। जानकारी के लिए बता दें कि ग्रैंड क्रेमलिन पैलेस पुतिन का ऑफिशियल रेजिडेंस है और इसी पैलेस में लगे इन सुनहरे दरवाजों से एक बार पुतिन पीएम मोदी के साथ भी निकले थे। बहरहाल 29 जनवरी को पुतिन ग्रैंड क्रमन पैलेस के इसी हॉल में संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहियान से मिले। दिलचस्प बात यह है कि 10 दिन पहले ही अल नाहियान अपनी पूरी कैबिनेट के साथ पीएम मोदी से भी मिलने पहुंचे थे।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या संयुक्त अरब अमीरात किसी बड़े संकट में है? क्यों संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति पहले पीएम मोदी से मिले और उसके बाद राष्ट्रपति पुतिन से। ऐसा क्या संकट है कि अपने देश को बचाने के लिए राष्ट्रपति नाहियान लगातार विदेशी दौरे कर रहे हैं। संयुक्त अरब अमीरात क्या चाहता है और भारत रूस क्या बड़ा धमाका कर रहे हैं। दरअसल संयुक्त अरब अमीरात इन दिनों सऊदी अरब के साथ गंभीर संकट में फंसा हुआ है। यह दोनों देश यमन और सूडान में अलग-अलग गुटों का समर्थन कर रहे हैं। जिसकी वजह से इन दोनों देशों के बीच कूटनीतिक खींचतान शुरू हो गई है।
सऊदी अरब ने तो यमन में संयुक्त अरब अमीरात के समर्थन वाले गुट पर एयर स्ट्राइक तक कर दी। इन दोनों देशों के बीच बढ़ रहे विवाद का एक यह कारण भी है कि संयुक्त अरब अमीरात ने वित्तीय और व्यापारिक केंद्र के रूप में सऊदी अरब को काफी पीछे छोड़ दिया है। ऐसे में दोनों की खींचतान और ज्यादा बढ़ गई है। लेकिन इसी खींचतान को पाकिस्तान और गहरा कर रहा है। पाकिस्तान ने इस विवाद को बढ़ाने के लिए सबसे पहले तो सिर्फ सऊदी अरब के साथ एक डिफेंस डील कर ली। उसके बाद एक इस्लामिक नाटो बनाने की मांग भी कर दी जिसके शुरुआती मेंबर्स पाकिस्तान, सऊदी अरब, तुर्की और कतर हो सकते हैं। अब यहां दिलचस्प बात यह है कि ये चारों देश संयुक्त अरब अमीरात से नाराज हैं।
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