2 अक्टूबर का 'नो UPI डे' कैंसिल:वित्त मंत्री से मुलाकात के बाद व्यापारिक संगठनों ने फैसला वापस लिया, UPI चार्ज टालने की मांग
व्यापारी संगठनों ने 2 अक्टूबर को 'नो यूपीआई डे' का फैसला वापस ले लिया है। बुधवार को नई दिल्ली में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ बैठक के बाद व्यापारी संगठनों ने यह बात कही है। व्यापारी संगठनों ने त्योहारी सीजन को देखते हुए UPI चार्ज टालने की मांग भी की है। ₹2000 से ज्यादा के UPI ट्रांजैक्शन पर चार्ज 15 अक्टूबर से लागू होना है। अलग-अलग राज्यों से लगभग 20 बड़े व्यापारी नेताओं ने वित्त मंत्री से मुलाकात की। इस बैठक का नेतृत्व चांदनी चौक से सांसद और कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने किया। प्रवीण खंडेलवाल ने बताया कि सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया है कि व्यापारी संगठनों की मांगों और चिंताओं पर विचार किया जाएगा। इसके बाद ही यह फैसला वापस लिया गया। व्यापारी संगठनों की वित्त मंत्री से मांगें 'नो-UPI-डे' की खबरों को CAIT ने फेक बताया था 4 दिन पहले CAIT ने 'नो UPI डे' मनाने की मीडिया रिपोर्ट्स को गलत बताया था। इसके 2 दिन पहले खबरें आई थीं कि देशभर में व्यापारी और दुकानदार 2 अक्टूबर को UPI से पेमेंट नहीं लेंगे। सरकार के UPI ट्रांजैक्शन चार्ज के विरोध में व्यापारी संगठनों ने इस दिन नो UPI डे मनाने का ऐलान किया है। इस पर महाराष्ट्र चैंबर ऑफ कॉमर्स, इंडस्ट्री एंड एग्रीकल्चर (MACCIA) के अध्यक्ष रवींद्र मंगवे ने कहा था कि यह आंदोलन सिर्फ महाराष्ट्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देशभर के 500 से ज्यादा प्रमुख व्यापारी संगठन इसमें हिस्सा लेंगे। व्यापारी संगठनों का UPI चार्ज के विरोध में क्या तर्क है UPI MDR चार्ज के नए नियम और व्यापारियों पर प्रभाव बड़े व्यापारियों पर 0.4% चार्ज: महीने में ₹1 लाख से ज्यादा कमाने वाले व्यापारियों को ₹2,000 से ज्यादा के हर पेमेंट लेने पर 0.4% MDR+GST देना होगा। GST, MDR चार्ज का 18% लगेगा। छोटे व्यापारियों को राहत: जिन व्यापारियों की महीने में UPI से कुल कमाई ₹1 लाख तक है, उन पर कोई चार्ज नहीं लगेगा, चाहे ट्रांजैक्शन ₹2,000 से ज्यादा ही क्यों न हो। कैटेगरी बदलने का नियम: अगर कोई छोटा व्यापारी लगातार 3 महीने तक ₹1 लाख से ज्यादा UPI कलेक्शन लेता है, तो बैंक उसे ऑटोमेटिक बड़े व्यापारियों की कैटेगरी में शिफ्ट कर देंगे। फिर उसे भी चार्ज देना होगा। ₹2,000 तक की बिक्री फ्री: बड़े व्यापारियों को भी ₹2,000 या उससे कम के छोटे पेमेंट्स पर कोई फीस नहीं देनी होगी। मैक्सिमम चार्ज की लिमिट: ₹75,000 या उससे बड़े ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट से मैक्सिमम ₹300+GST ही चार्ज लिया जाएगा। लिमिट हर ट्रांजैक्शन पर लागू: ₹2,000 की लिमिट पूरे दिन की कुल बिक्री पर नहीं, बल्कि हर एक पेमेंट पर देखी जाएगी। खास सेक्टर्स के लिए सिर्फ ₹5 की फ्लैट फीस: पेट्रोल पंप, रेलवे, बिल पेमेंट, टेलीकॉम, इंश्योरेंस और एजुकेशन से जुड़े व्यापारियों को ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर 0.40% के बजाय फ्लैट ₹5 देना होगा। कार्ड के मुकाबले फिर भी सस्ता: क्रेडिट कार्ड (1.5%-2.5%) और डेबिट कार्ड (0.90% तक) के मुकाबले UPI पर MDR चार्ज काफी कम है। मर्चेंट डिस्काउंट रेट क्या होता है? मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR, यह वह फीस होती है जो कोई व्यापारी या दुकानदार डेबिट/क्रेडिट कार्ड या डिजिटल पेमेंट (UPI) की सुविधा यानी पॉइंट ऑफ सेल मशीन या पेमेंट गेटवे का उपयोग करने के बदले बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को देता है। यह फीस डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और ट्रांसफर नेटवर्क को सही से चलाने की लागत को पूरा करने के लिए लिया जाता है। यह चार्ज व्यापारी को देना होता है, ग्राहक को नहीं। ये खबर भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट का UPI चार्ज पर रोक से इनकार: ₹2000 से ज्यादा के पेमेंट पर 0.4% चार्ज तय; सरकार से पूछा- नियम का आधार बताएं सुप्रीम कोर्ट ने UPI पेमेंट पर 0.4% चार्ज लगाने के केंद्र सरकार के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। 15 अक्टूबर से यह शुल्क 2000 रुपए से ज्यादा के मर्चेंट पेमेंट पर लागू होगा। हालांकि, कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी करके जवाब मांगा है कि इस नए नियम को लागू करने का आधार क्या है। पूरी खबर पढ़ें…
'लादेन को पनाह': यूएन में शहबाज के फर्जी दावों की भारत ने उड़ाई धज्जियां, कश्मीर राग अलापने पर सुनाई खरी-खरी
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर कश्मीर और आतंकवाद को लेकर तीखी बयानबाजी देखने को मिली। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के भाषण के बाद भारत ने राइट टू रिप्लाई का इस्तेमाल किया। भारत की ओर से संयुक्त राष्ट्र में प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने पाकिस्तान के रुख पर जवाब दिया।
गहलोत ने शहबाज शरीफ के भाषण को भारत के अनुसार तथ्यों से परे बताते हुए पाकिस्तान के आतंकवाद, कश्मीर और सिंधु जल संधि से जुड़े बयानों पर सवाल उठाए। भारत का आधिकारिक रुख पहले भी रहा है कि सीमा पार आतंकवाद और हिंसा के माहौल में भारत-पाकिस्तान संबंधों में सामान्य सहयोग संभव नहीं है।
'पाकिस्तान के प्रतिनिधि की टिप्पणियां बेहद अजीब'
राइट टू रिप्लाई के दौरान पेटल गहलोत ने कहा कि महासभा ने पाकिस्तान के प्रतिनिधि की ओर से कुछ ऐसी टिप्पणियां सुनीं, जिन्हें भारत ने बेहद असंगत माना। उन्होंने 9/11 आतंकी हमले की 25वीं बरसी का भी संदर्भ दिया।
गहलोत ने आतंकवादी संगठन अल-कायदा के प्रमुख ओसामा बिन लादेन का जिक्र करते हुए कहा कि वह पाकिस्तान में अमेरिकी कार्रवाई में मारा गया था और भारत ने पाकिस्तान के आतंकवाद से जुड़े रिकॉर्ड पर सवाल उठाया।
पेटल गहलोत ने पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था पर भी टिप्पणी की। उन्होंने पाकिस्तान में सत्ता और सेना के संबंधों को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि वहां वास्तविक फैसले लेने वाली शक्ति को लेकर भ्रम नहीं होना चाहिए।
'दिन में शांति की बात, रात में आतंकवाद'
भारतीय राजनयिक ने पाकिस्तान की आतंकवाद नीति पर भी हमला बोला। उनके मुताबिक पाकिस्तान की ओर से मंच पर शांति और सुरक्षा की बातें की जाती हैं, लेकिन भारत लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान पर आरोप लगाता रहा है।
भारत ने पहले भी संयुक्त राष्ट्र के मंचों पर पाकिस्तान पर आतंकवाद को समर्थन देने के आरोप लगाए हैं। 2025 में भी पेटल गहलोत ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के UNGA भाषण के जवाब में आतंकवाद और पाकिस्तान में ओसामा बिन लादेन की मौजूदगी का मुद्दा उठाया था।
#IndiaAtUN
— India at UN, NY (@IndiaUNNewYork) September 26, 2026
Watch: First Secretary @petal_gahlot exercises ????????’s Right of Reply at #UNGA81. @MEAIndia @IndianDiplomacy @UN @PMOIndia @DDNewslive @airnewsalerts pic.twitter.com/MEW1n7WIJW
कश्मीर के मुद्दे पर भी भारत का जवाब
शहबाज शरीफ की ओर से जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाए जाने के बाद पेटल गहलोत ने भारत का रुख दोहराया। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है।
गहलोत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाते हुए वहां के लोगों की स्थिति पर भी सवाल किए। उन्होंने रावलकोट का उल्लेख करते हुए पाकिस्तान पर स्थानीय लोगों के अधिकारों और सुरक्षा से जुड़े सवाल उठाए।
भारत लंबे समय से पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर को लेकर पाकिस्तान से क्षेत्र खाली करने की मांग करता रहा है, जबकि पाकिस्तान कश्मीर को विवादित क्षेत्र बताते हुए अलग रुख रखता है।
सिंधु जल संधि का भी उठा मुद्दा
पेटल गहलोत ने सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर भी भारत का पक्ष रखा। भारत ने 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद संधि को 'abeyance' में रखने का फैसला किया था। भारत का कहना रहा है कि सीमा पार आतंकवाद के जारी रहने की स्थिति में दोनों देशों के बीच सहयोग पहले जैसा नहीं रह सकता।
2026 में भी भारत ने संयुक्त राष्ट्र के एक अन्य मंच पर पाकिस्तान की ओर से उठाए गए सिंधु जल संधि के मुद्दे का जवाब देते हुए कहा था कि आपसी विश्वास और सद्भाव के आधार पर सहयोग तभी संभव है जब सीमा पार आतंकवाद को राज्य नीति के साधन के तौर पर इस्तेमाल करना बंद किया जाए।
पाकिस्तान के 27वें संशोधन का भी जिक्र
पेटल गहलोत के दिए गए बयान के मुताबिक उन्होंने पाकिस्तान के 27वें संविधान संशोधन और वहां के सैन्य नेतृत्व से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों का भी संदर्भ दिया। उन्होंने पाकिस्तान की लोकतांत्रिक व्यवस्था और धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए।
हालांकि, इन विशेष टिप्पणियों का पूरा आधिकारिक ट्रांसक्रिप्ट अभी उपलब्ध स्रोतों में स्पष्ट रूप से नहीं मिला है। इसलिए इस हिस्से को भारत के राजनयिक के बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि स्वतंत्र रूप से सत्यापित तथ्य के रूप में।
UN में भारत-पाकिस्तान की बयानबाजी फिर तेज
संयुक्त राष्ट्र महासभा के मौजूदा सत्र में भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर, आतंकवाद और द्विपक्षीय संबंधों को लेकर बयानबाजी जारी है। पाकिस्तान की ओर से भारत के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर भारत लगातार राइट टू रिप्लाई के जरिए अपना पक्ष रख रहा है।
इससे पहले भी UNGA में पेटल गहलोत ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के भाषण के जवाब में आतंकवाद और कश्मीर का मुद्दा उठाया था। 2025 के जवाब में उन्होंने पाकिस्तान पर आतंकवाद को बढ़ावा देने और आतंकवादी संगठनों को लेकर दोहरे रवैये का आरोप लगाया था।
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