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Breaking News: IRGC ने अपनी सभी Missile Units को फुल अलर्ट पर रहने को कहा- ईरानी सुरक्षा सूत्र

ईरान से बड़ी खबर, ईरानी सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने अपनी सभी मिसाइल यूनिट्स को फुल अलर्ट पर रहने और किसी भी हमले का तुरंत जवाब देने के आदेश दिए हैं. #iranusconflict #donaldtrump #alikhamenei #atwebvideos #aajtak #aajtakdigital #tvchunks Copyright Disclaimer under section 107 of the Copyright Act 1976, allowance is made for “fair use” for purposes such as criticism, comment, news reporting, teaching, scholarship, education and research. Fair use is a use permitted by copyright statute that might otherwise be infringing. आजतक के साथ देखिये देश-विदेश की सभी महत्वपूर्ण और बड़ी खबरें | Watch the latest Hindi news Live on the World's Most Subscribed News Channel on YouTube. #LatestNews #Aajtak #HindiNews Aaj Tak News Channel: आज तक भारत का सर्वश्रेष्ठ हिंदी न्‍यूज चैनल है । आज तक न्‍यूज चैनल राजनीति, मनोरंजन, बॉलीवुड, व्यापार और खेल में नवीनतम समाचारों को शामिल करता है। आज तक न्‍यूज चैनल की लाइव खबरें एवं ब्रेकिंग न्यूज के लिए बने रहें । #hindinews #newsinhindi #hindisamachar #breakingnews #aajtak #samachar #news अधिक समाचारों के लिए यहां क्लिक करें: https://www.youtube.com/@aajtak?sub_confirmation=1 About Channel: Aaj Tak is India's Best Hindi News Channel. Aaj Tak News Channel Covers The Latest News, Breaking News, Politics, Entertainment News, Business News and Sports News. Stay tuned for all the News in Hindi. Join Aaj Tak Whatsapp Channel: https://whatsapp.com/channel/0029Va7Rxc32ER6hBAuIL222 Watch Our Prime Shows on Aaj Tak: Vardaat — Real-life crime stories that shook the nation https://youtube.com/playlist?list=PLP-nGFpz3fa_WLJqwFuJlwfhAepqcOd3I&si=tJXqsrKVHOvxy4BJ Black & White with Anjana Om Kashyap - Big debates, sharp opinions, and political analysis https://youtube.com/playlist?list=PLP-nGFpz3fa_aLomcIgk-c_dRhuYOBphp&si=1wAaQfSUIfZ0OrIy Halla Bol — The nation’s most powerful debate on today’s top issues https://youtube.com/playlist?list=PLP-nGFpz3fa-ZT2YKfqzI-ayeZV0n8qAh&si=nnRN8_9u02p8QlG_ DasTak 2025: https://youtube.com/playlist?list=PLP-nGFpz3fa9q68r5rws67UxSUdhcHupG&si=QMiiUiKyXUP76DUk ताज़ा खबरों और LIVE अपडेट्स के लिए जुड़े रहें Aaj Tak के साथ - https://youtube.com/live/Nq2wYlWFucg?feature=share https://youtube.com/live/gH6ftEJDLGo?feature=share Download Aaj Tak APP, India’s No.1 Hindi News App: https://aajtak.link/yyJu Subscribe to Aaj Tak YouTube Channel: https://www.youtube.com/c/aajtak Visit Aaj Tak website: https://www.aajtak.in/ Follow us on Facebook: https://www.facebook.com/aajtak Follow us on Twitter: https://twitter.com/aajtak Follow us on Instagram: https://www.instagram.com/aajtak/ Subscribe our other Popular YouTube Channels: India Today: https://www.youtube.com/c/indiatoday SoSorry: https://www.youtube.com/c/sosorrypolitoons Good News Today: https://www.youtube.com/c/GoodNewsTodayOfficial AajTak AI: https://www.youtube.com/channel/UClZU5ouD9LkfgrelmL2auTg

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शिखा अपमान से यूपी भाजपा को कितना नुकसान:5 चुनावों में सबसे ज्यादा ब्राह्मण वोट मिले, नाराज हुए तो किधर जाएंगे?

यूपी में पहले समाज के सुख-दुख पर चर्चा के लिए एक साथ बैठे ब्राह्मण विधायकों को नोटिस दिया गया। फिर प्रयागराज के माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का अपमान और उनके शिष्यों की चोटी (शिखा) खींचकर पिटाई की गई। दोनों मामलों से ब्राह्मण समाज गुस्से में है। इसके बाद भाजपा और सरकार निशाने पर है। ब्राह्मण समाज की नाराजगी इस मायने में खास है कि पिछले 5 चुनावों में उनका एकमुश्त समर्थन भाजपा को मिला है। अब समाज की नाराजगी से पार्टी को कितना डैमेज हो सकता है? ब्राह्मण समाज के सामने विकल्प क्या हैं? पढ़िए ये रिपोर्ट… पहले जानिए यूपी में ब्राह्मण वोटर कितना निर्णायक प्रदेश में 9 से 11 फीसदी ब्राह्मण समाज की आबादी है। मौजूदा 75 जिलों में 31 में ब्राह्मण प्रभावी भूमिका में हैं। पूर्वांचल, मध्य और बुंदेलखंड में ब्राह्मण समाज जिसके साथ जाता है, उसी की ताजपोशी भी तय मानी जाती है। ब्राह्मण हमेशा से महत्वपूर्ण स्विंग वोटबैंक रहे हैं। ये मतदाता अक्सर चुनावों का रुख तय करते हैं। इसकी वजह भी है, ये सामाजिक-आर्थिक रूप से सशक्त हैं। मुखर होने की वजह से अन्य जातियों को भी प्रभावित करते हैं। जब भी ब्राह्मण वोटर किसी पार्टी या गठबंधन के साथ मजबूती से जुड़े, तो उस पार्टी को बड़ा फायदा हुआ। बस समस्या ये है कि ये कभी भी एक पार्टी के साथ लंबे वक्त तक स्थाई रूप से जुड़े नहीं रह सके। कब किस सियासी पार्टी के साथ गए 1980 तक कांग्रेस के बने रहे सारथी देश की आजादी के बाद 1980 तक ब्राह्मण मुख्य रूप से कांग्रेस के साथ रहे। यूपी में गोविंद वल्लभ पंत, हेमवती नंदन बहुगुणा और नारायण दत्त तिवारी जैसे ब्राह्मण नेता सीएम बने। ब्राह्मणों का सपोर्ट कांग्रेस की 'अम्ब्रेला कोएलिशन' (छत्र छाया वाला गठजोड़) की रीढ़ रहा। इसमें ब्राह्मण-मुस्लिम-दलित और अन्य समूह शामिल थे। 1985 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 269 सीटें मिली थीं। लेकिन, राम मंदिर आंदोलन और मंडल कमीशन से ब्राह्मणों का कांग्रेस से मोहभंग हो गया। 1990 में BJP की ओर शिफ्ट हुए ब्राह्मण मंडल कमीशन के चलते ब्राह्मण जनता दल से नाराज था। अयोध्या में मुलायम सिंह यादव ने कारसेवकों पर गोली चलवा दी थी। इन घटनाओं से ब्राह्मण समाज भी आंदोलित था। मंडल कमीशन से बंट चुके हिंदुओं को भाजपा ने एकजुट करते हुए राम मंदिर आंदोलन को तेज कर दिया। ब्राह्मण पहली बार बड़ी संख्या में भाजपा के साथ जुड़े। फायदा यह हुआ कि 1991 में 221 सीटों के साथ भाजपा पूर्ण बहुमत से यूपी की सत्ता में आ गई। 2007 में बसपा की ओर गया ब्राह्मण ‘हाथी नहीं गणेश है, ब्रह्मा-विष्णु-महेश है…’ इस नारे के साथ बसपा ने 2007 में ब्राह्मण समाज को पार्टी से जोड़ने पर जोर दिया। सतीश मिश्रा को पार्टी महासचिव बनाया। प्रदेश के अलग-अलग इलाकों के मजबूत ब्राह्मण नेताओं को पार्टी में शामिल कराया। जिले-जिले में ब्राह्मण सम्मेलन कराए। फायदा यह हुआ कि भाजपा छोड़कर ब्राह्मण बसपा के साथ चले गए। बसपा को फायदा यह हुआ कि लंबे अंतराल के बाद बसपा 206 सीटों के साथ अकेले पूर्ण बहुमत से सत्ता में आ गई। 2012 में सपा के साथ गए 2012 के विधानसभा चुनाव में एक बार फिर ब्राह्मण समाज शिफ्ट हुआ। इस बार 19% ब्राह्मणों की पहली पसंद सपा बनी। सपा 224 सीटों के साथ यूपी की सत्ता में लौटी। लेकिन, ब्राह्मणों का झुकाव भाजपा की ओर हो चुका था। 2014 में भाजपा के पक्ष में लामबंद 2014 में ब्राह्मण भाजपा के साथ पूरी तरह से लामबंद रहे। इसका फायदा यह हुआ कि पार्टी लोकसभा की 71 सीटें जीतने में कामयाब रही। फिर 2017, 2019, 2022 और 2024 में ब्राह्मण पूरी तरह से भाजपा के पक्ष में समर्पित रहे। सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज (सीएसडीएस) की रिपोर्ट बताती है कि 2017 में 83%, तो 2022 के विधानसभा में 89% ब्राह्मणों का वोट भाजपा को मिला था। 2024 से शुरू हुई नाराजगी, दिखने लगी शिफ्टिंग 2024 में ब्राह्मण वोटर एक बार फिर शिफ्ट होता दिखने लगा। भाजपा को भले ही 79% ब्राह्मणों का वोट मिला हो, लेकिन उनका 16% वोट महागठबंधन को भी गया। यह दिखाता है कि ब्राह्मण का भाजपा से मोहभंग हो रहा। इसका असर भी दिखा। महागठबंधन की सीटों की संख्या 43 हो गई और भाजपा गठबंधन 37 सीटों पर ही रुक गई। खबर में आगे बढ़ने से पहले इस पोल पर अपनी राय दीजिए… शंकराचार्य और चोटी अपमान से कितना आहत हैं ब्राह्मण प्रयागराज के माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती संगम स्नान नहीं कर पाए। अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में बैठकर स्नान करने जा रहे थे। पुलिस ने उन्हें रोका और पैदल जाने को कहा। विरोध करने पर शिष्यों से धक्का-मुक्की हुई। शिष्यों को चोटी पकड़कर खींचा गया। शिष्यों से मारपीट और पालकी रोके जाने से नाराज अविमुक्तेश्वरानंद मौके पर ही धरने पर बैठ गए। सनातन धर्म में शंकराचार्य को केवल व्यक्ति नहीं, बल्कि आदि शंकराचार्य की परंपरा का प्रतीक माना जाता है। शंकराचार्य सिर्फ धार्मिक संत नहीं, ब्राह्मण परंपरा में सर्वोच्च आस्था प्रतीक माने जाते हैं। उनके अपमान को समाज व्यक्तिगत नहीं, सामूहिक अपमान मानता है। ऐसे में उनके साथ हुई घटना ने ब्राह्मणों को आहत किया। जिस तरह से उनके शिष्य को चोटी पकड़कर घसीटा गया, ब्राह्मण वर्ग में गहरी पीड़ा देखी गई। इसके पहले शीतकालीन सत्र के दौरान भाजपा के ब्राह्मण विधायकों ने पीएन पाठक के आवास पर बैठक की थी। मकसद था कि समाज के सुख–दुख पर चर्चा करके उनके उत्थान के लिए कुछ प्रयास किया जाए। लेकिन भाजपा संगठन ने इसे अनुशासनहीनता मानते हुए नोटिस जारी कर दिया। जब समाज की ओर से मुखर आवाज उठने लगी तब भाजपा को इसका अहसास हुआ। वह इस मामले में डैमेज कंट्रोल में जुटी ही थी कि प्रयागराज का प्रकरण सामने आ गया। शंकराचार्य और चोटी विवाद के बीच ही यूजीसी (यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन) के भी विवाद ने तूल पकड़ लिया। यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन वाले नए एंटी-डिस्क्रिमिनेशन नियमों को लेकर सवर्ण समाज के छात्र से लेकर नेता तक खिलाफ में उतर गए। भाजपा से कई इस्तीफे हुए। लेकिन चर्चा बटोरी बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने। उन्होंने इस्तीफा देने के साथ ही खुलकर अपनी बात भी रखी। कहा कि यह रेगुलेशन (13 जनवरी 2026) अत्यंत भेदभावपूर्ण है। इसमें सामान्य वर्ग के मेधावी छात्र-छात्राओं को 'स्वघोषित अपराधी' मान लिया गया है। उसके साथ भेदभाव नहीं हो सकता। समता समितियों के माध्यम से बच्चों का मानसिक और शारीरिक शोषण होने की पूरी आशंका है। कोई भी निराधार शिकायत करके किसी का भविष्य बर्बाद कर सकता है। क्या हम अपने बच्चों को ऐसी व्यवस्था में पढ़ने भेजेंगे, जहां न्याय के नाम पर शोषण हो? मैं उन जनप्रतिनिधियों से भी पूछना चाहता हूं, जो ब्राह्मण समाज के नाम पर वोट लेकर आज 'कॉर्पोरेट एम्पलाई' की तरह चुप बैठे हैं। क्या आप ब्राह्मणों का नरसंहार चाहते हैं। सांसद-विधायकों से पूछना चाहता हूं- क्या घुंघरू पहन रखा है, कब बोलेंगे। क्या आप लोग वेट कर रहे हैं कि हमारी बहू-बेटियों का सड़कों पर रेप हो। क्या आप अपने आकाओं के आदेश का इंतजार कर रहे हैं? क्या आप तब बोलेंगे, जब स्थिति हाथ से निकल जाएगी? आपने ब्राह्मण के नाम टिकट लिया। ब्राह्मणों को वोट लिया। जब आप जीत गए। तो कोई मतलब ही नहीं। हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी। इससे भाजपा भले ही राहत महसूस कर रही हो, लेकन सवर्णों में एक संदेश तो चला ही गया कि ये सरकार सवर्णों के खिलाफ नीतियां बना रही है। इसके बाद अयोध्या के जीएसटी के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने ये कहते हुए इस्तीफा दे दिया कि एक चुने हुए सीएम और पीएम के बारे में अभद्र भाषा का उपयोग किए जाने से वो आहत थे। लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। जबकि उनके सगे भाई ने उनके दिव्यांग प्रमाणपत्र के फर्जी होने की पहले से शिकायत कर रखी है। वरिष्ठ पत्रकार त्रियुगी नारायण तिवारी कहते हैं- सरकार की कार्रवाई और रवैए से साफ संकेत दिया जा रहा कि वह ब्राह्मण विरोध में काम कर रही। नहीं तो जहां डैमेज कंट्रोल करना था, वहां इस तरह की दोतरफा कार्रवाई कैसे होती? इसे लेकर भी समाज में काफी आक्रोश है। विधानसभा चुनाव में अभी एक साल का वक्त है। हो सकता है, तब तक ब्राह्मणों की नाराजगी दूर हो जाए। लेकिन, सरकार और संगठन की ओर से इस नाराजगी को दूर करने का अभी तक कोई प्रयास होता दिख नहीं रहा। इसका दुष्परिणाम यह होगा कि ब्राह्मण भाजपा से और दूर होता चला जाएगा। भाजपा में कार्यरत ब्राह्मण नेता और विधायक भी इस पूरे मामले से दुखी हैं। लेकिन, अनुशासनात्मक कार्रवाई के डर से कोई भी खुलकर बोलने से बच रहा। हालांकि उनका मौन संदेश और समर्थन समाज के साथ है। वरिष्ठ भाजपा नेता एवं राष्ट्रीय परशुराम परिषद के संस्थापक पंडित सुनील भराला भी त्रियुगी नारायण से सहमत हैं। कहते हैं- मेरी चार पीढ़ियां आरएसएस और भाजपा में सक्रिय रही हैं। हाल के घटनाक्रमों से ब्राह्मण समाज काफी आहत है। प्रयागराज में जिस तरह से शंकराचार्य और उनके शिष्यों के साथ पुलिस का बर्ताव था, वो काफी रोषजनक है। इससे ब्राह्मण समाज ही नहीं, पूरा सनातन समाज खुद को अपमानित महसूस कर रहा। जहां तक ब्राह्मणों की नाराजगी का विषय है, तो शायद भाजपा को भ्रम हो चुका है कि उससे ब्राह्मण कहीं दूर जाने वाले नहीं। हकीकत में नाराजगी इस स्तर तक पहुंच चुकी है कि आज की तारीख में ब्राह्मण समाज विकल्प तलाश रहा। मैंने खुद पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और सीएम योगी से मिलकर इस नाराजगी के बारे में अवगत कराया है। फिर 2027 में ब्राह्मण समाज के सामने विकल्प क्या वरिष्ठ पत्रकार शरत प्रधान कहते हैं- ब्राह्मणों की नाराजगी एक दिन की नहीं है। ये धीरे-धीरे बढ़ रही थी, लेकिन एक के बाद एक हुई घटनाओं ने इसको काफी बढ़ा दिया है। इससे पहले विकास दुबे के एनकाउंटर, पूर्वांचल में हरिशंकर तिवारी पर की गई कार्रवाई से भी ब्राह्मण समाज काफी आहत हुआ था। लेकिन, पहली बार ब्राह्मण समाज को दिख रहा कि उसके साथ जानबूझकर भेदभाव किया जा रहा। जैसे क्षत्रिय, कुर्मी और लोध विधायकों ने बैठक की तो कोई नोटिस नहीं। लेकिन जैसे ही ब्राह्मण विधायकों की बैठक हुई, तो पार्टी ने नोटिस जारी कर दिया। इसी तरह शंकराचार्य विवाद में इस्तीफा देने वाले दोनों अधिकारियों के मामले में कार्रवाई के स्तर पर भेदभाव हुआ। ब्राह्मणों में इस बार इसका सीधा संदेश गया है कि सरकार पूरी तरह से दोहरा मापदंड अपना रही। जहां तक विकल्प की बात है तो जाहिर है कि ब्राह्मण समाज का वोट सरकार के खिलाफ किसी को सरकार में लाने के लिए होगा। 2027 में भाजपा को जो भी पार्टी टक्कर देती नजर आएगी, उसी के साथ जाएंगे। 2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा के अलावा ब्राह्मणों का वोट महागठबंधन को मिला था। महागठबंधन ने भाजपा को यूपी में हराया भी। भाजपा गठबंधन को जहां 36 सीटें मिलीं, वहीं महागठबंधन के पाले में 43 सीटें गईं। एक सीट पर चंद्रशेखर ने जीत दर्ज की थी। 2027 में भी यही महागठबंधन भाजपा को टक्कर देता नजर आ रहा है। सपा भी ब्राह्मणों को रिझाने की कोशिश में जुटी है। खुद अखिलेश और शिवपाल यादव खुलकर बोल चुके हैं कि ब्राह्मण उनके साथ आएं, पूरा सम्मान मिलेगा। इस कारण ये माना जा रहा है कि 2027 में ब्राह्मण महागठबंधन के साथ जा सकता है। इसके अलावा भी ब्राह्मणों के सामने कांग्रेस और बसपा का भी विकल्प है। कांग्रेस उनका पुराना घर रहा है। कांग्रेस की वजह से ब्राह्मणों का बड़ा वोटबैंक महागठबंधन के साथ जा सकता है। ठीक उसी तरह जैसे 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की वजह से दलितों का एक बड़ा वोटबैंक महागठबंधन की ओर शिफ्ट हुआ था। बसपा प्रमुख मायावती ने भी खुलकर ब्राह्मणों को पार्टी के साथ जुड़ने का ऑफर दिया है। कहा है कि वह 2007 की तरह पूरी भागीदारी देंगी। 2022 में भाजपा को अकेले 255 सीटें ही मिली थीं। यूपी में बहुमत के लिए 202 सीटें चाहिए। मतलब 30 प्रतिशत भी ब्राह्मण वोटरों की नाराजगी चुनाव तक बनी रही और 2022 की तरह ही टक्कर रही तो भाजपा को अकेले बहुमत में लौटना मुश्किल हो सकता है। ब्राह्मणों की नाराजगी चुनाव तक बनी रही तो 40 से 50 सीटें हार सकती है 2022 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश में 114 सीटें ऐसी थीं, जिस पर जीत–हार का अंतर 10 हजार से कम था। इसमें से 15 सीटों पर तो एक हजार से भी कम का मार्जिन था। इन 114 सीटों में भाजपा 64 और उसके सहयोगी दलों में रालोद, निषाद पार्टी को 2–2 सीटों पर जीत मिली थी। वहीं, सपा 35 सीटों पर जीती थी। बसपा व कांग्रेस की 1–1 सीटें थीं। प्रदेश में ब्राहणों की आबादी 9 से 11 प्रतिशत है। वहीं विधानसभा में औसत वोटरों की संख्या 2.20 लाख थी। इस हिसाब से अनुमान लगाएं तो 10 प्रतिशत ब्राह्मणों की नाराजगी से 1 प्रतिशत वोट स्विंग होगा। मतलब दो हजार वोट भाजपा से कटेंगे। यदि 2022 की तरह ही टक्कर होती है तो सीधे 12 से 15 सीटों का नुकसान भाजपा को हो सकता है। यदि 30 प्रतिशत भी ब्राह्मण वोट भाजपा से शिफ्ट हुआ तो लगभग 50 सीटों का नुकसान भाजपा को हो सकता है। हालांकि, भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ब्राह्मणों की नाराजगी को सिरे से खारिज करते हैं। कहते हैं- पार्टी सर्वसमाज को एक साथ लेकर आगे बढ़ रही है। नाराजगी का नरेटिव सिर्फ जातिवादी पार्टियां गढ़ने का प्रयास कर रही हैं। एमपी और राजस्थान में भी नुकसान की आशंका एमपी में भी 7–8 प्रतिशत ब्राह्मण हैं। खासकर जबलपुर से लेकर कटनी और विंध्य क्षेत्र में ब्राह्मणों की आबादी ठीक–ठाक है। भोपाल और ग्वालियर–चंबल में भी ब्राह्मण आबादी अच्छी संख्या में हैं। अभी तक ये पूरी तरह से भाजपा के प्रति निष्ठावान रही है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का शंकराचार्य पद पर पट्टाभिषेक मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले स्थित झोतेश्वर में हुआ था। मध्य प्रदेश के ही ओंकारेश्वर में आदि शंकराचार्य पर्वत है, जहां उनकी विश्वप्रसिद्ध प्रतिमा भी स्थापित है। शंकराचार्य को लेकर मध्य प्रदेश के जन-जन में सम्मान का भाव है। प्रयागराज में उनके अपमान से यहां का ब्राह्मण समाज भी नाराज है। इसी तरह राजस्थान में राजस्थान 6–7% ब्राह्मण वोटबैंक है। जयपुर–कोटा–उदयपुर सीटों पर इनका खासा प्रभाव है। ब्राह्मणों की नाराजगी यहां भाजपा के लिए परेशानी बन सकती है। हालांकि राजस्थान के सीएम भजनलाल शर्मा खुद ब्राह्मण समुदाय से आते हैं, सियासी जानकार मानते हैं कि इस कारण यहां बहुत नुकसान की आशंका नहीं है। ----------------------- ये खबर भी पढ़ें- यूपी भाजपा में पूर्वांचल का दबदबा, अवध-पश्चिम कमजोर, जानिए क्षेत्रीय संतुलन बिगड़ने से क्या फर्क पड़ेगा यूपी की भाजपा सरकार और संगठन में क्षेत्रीय संतुलन बिगड़ गया है। सरकार और संगठन में प्रमुख पदों पर पूर्वांचल के काशी और गोरखपुर क्षेत्र का दबदबा बढ़ गया है। वहीं, अवध और पश्चिम क्षेत्र सबसे कमजोर हैं। पढ़िए ये रिपोर्ट…

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