भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच हुए 'सबसे महत्वपूर्ण व्यापार समझौते' ने न केवल अमेरिका में हलचल मचा दी है, बल्कि सीमा पार पाकिस्तान में भी इसका असर देखने को मिल रहा है। वर्षों की मेहनत के बाद तैयार हुए इस मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) से भारत को उन क्षेत्रों में व्यापक बाज़ार पहुंच मिलेगी जो लंबे समय से यूरोप में पाकिस्तान की निर्यात सफलता का आधार रहे हैं, विशेषकर वस्त्र और परिधान। डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए 50% टैरिफ के कारण इन श्रम-प्रधान क्षेत्रों को सबसे अधिक नुकसान हुआ था। भारत-ईयू व्यापार समझौते के बाद अब पाकिस्तान को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
शहबाज शरीफ सरकार में अफरा-तफरी मची हुई है। यूरोपीय संघ पाकिस्तान का दूसरा सबसे बड़ा निर्यात बाजार है, और दांव पर सालाना 9 अरब डॉलर (82 लाख करोड़ रुपये) का निर्यात है, जिसमें ज्यादातर कपड़ा और परिधान शामिल हैं। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि भारत के साथ व्यापार समझौते के मद्देनजर निर्यात पर पड़ने वाले किसी भी प्रभाव से निपटने के लिए वह यूरोपीय संघ के संपर्क में है। इसके अलावा, पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने भी स्थिति की समीक्षा के लिए आपातकालीन रूप से अंतर-मंत्रालयी बैठक बुलाई। यह बैठक प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और पाकिस्तान में यूरोपीय संघ के राजदूत के बीच हुई बैठक के बाद हुई। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा हम इस मामले पर यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के साथ द्विपक्षीय रूप से और ब्रुसेल्स स्थित यूरोपीय संघ के मुख्यालय के साथ सामूहिक रूप से नजर रख रहे हैं।
भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते का समय पाकिस्तान के लिए बेहद चिंताजनक है, क्योंकि यह ऐसे समय में आया है जब वह निर्यात बढ़ाने के लिए संघर्ष कर रहा है और उसकी अर्थव्यवस्था बुरी तरह से चरमरा गई है। विश्व बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के निर्यात का हिस्सा 1990 के दशक में सकल घरेलू उत्पाद का 16% था, जो 2024 में घटकर लगभग 10% रह गया है। पाकिस्तान की चिंता का मुख्य कारण यह है कि भारत-यूरोपीय संघ समझौते से यूरोपीय बाज़ार में उसकी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त कमज़ोर हो जाएगी। पाकिस्तान को जनरलाइज़्ड सिस्टम ऑफ़ प्रेफरेंसेस प्लस (जीएसपी+) का दर्जा प्राप्त है, जिसके तहत पाकिस्तानी व्यापारियों को अपने लगभग 66% या दो-तिहाई निर्यात पर यूरोपीय संघ के बाज़ार में शुल्क-मुक्त पहुँच मिलती है। 2014 में प्राप्त जीएसपी+ दर्जे के तहत, पाकिस्तान के यूरोप को वस्त्र निर्यात में 108% की वृद्धि हुई। वास्तव में, 27 सदस्यीय यूरोपीय संघ पाकिस्तान के वार्षिक वस्त्र निर्यात का लगभग 7 अरब डॉलर या 40% हिस्सा है। महत्वपूर्ण बात यह है कि पाकिस्तान का जीएसपी+ दर्जा अगले साल समाप्त हो जाएगा। वस्त्र क्षेत्र पाकिस्तान का सबसे बड़ा औद्योगिक नियोक्ता और निर्यात आय का सबसे बड़ा स्रोत है। यह क्षेत्र लगभग 15 से 25 मिलियन लोगों को रोज़गार प्रदान करता है।
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एक अप्रत्याशित घटनाक्रम में, भारतीय मूल की मशहूर फिल्म निर्देशक मीरा नायर का नाम कुख्यात एप्सटीन फाइल्स से जुड़ने के बाद चर्चा में आ गया है। यह सुर्खियाँ उनके सिनेमा में योगदान के बजाय एक अलग ही कारण से बनी हैं। ‘मॉनसून वेडिंग’ और ‘द नेमसेक’ जैसी चर्चित फिल्मों के लिए पहचानी जाने वाली मीरा नायर एक प्रतिष्ठित फिल्मकार होने के साथ-साथ न्यूयॉर्क सिटी काउंसिल के सदस्य जोहरान ममदानी की माँ भी हैं। हाल ही में अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) द्वारा जारी किए गए कुछ दस्तावेज़ों में वर्ष 2009 के एक ईमेल का उल्लेख सामने आया है, जिसमें एक पार्टी का जिक्र है और उसमें मीरा नायर का नाम शामिल बताया गया है।
एप्सटीन फाइल्स, जिनमें दिवंगत फाइनेंसर जेफ्री एप्सटीन से जुड़े व्यापक सामाजिक नेटवर्क का विवरण है, लगातार सार्वजनिक बहस का विषय बनी हुई हैं। इन दस्तावेज़ों में राजनीति, मनोरंजन और अन्य क्षेत्रों से जुड़े कई चर्चित नाम सामने आए हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, मीरा नायर का नाम कुछ ईमेल संवादों में आया है, जो कथित तौर पर एक सामाजिक आयोजन से संबंधित हैं। इससे उनके नाम के इस संदर्भ में सामने आने को लेकर सवाल खड़े हुए हैं और उनके सार्वजनिक व्यक्तित्व पर इसके प्रभाव को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
वर्ष 2009 के जिस ईमेल का जिक्र किया जा रहा है, वह उस दौर के सामाजिक परिवेश की ओर इशारा करता है, जहाँ कई प्रभावशाली और चर्चित लोग एक-दूसरे से जुड़े हुए थे और ऐसे आयोजनों में जेफ्री एप्सटीन की मौजूदगी अक्सर बताई जाती रही है। मीरा नायर का नाम इन संवादों में आने के बाद अटकलों का दौर शुरू हो गया है, खासकर इसलिए क्योंकि एप्सटीन पर यौन शोषण और मानव तस्करी जैसे गंभीर आरोप सिद्ध हो चुके थे।
इस पूरे मामले पर मीरा नायर की ओर से अब तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, उनके बेटे जोहरान ममदानी ने ऐसे संबंधों के सामान्यीकरण के खिलाफ रुख अपनाते हुए जवाबदेही की आवश्यकता पर जोर दिया है। इस खुलासे के बाद मनोरंजन जगत से जुड़े लोगों के सामाजिक संबंधों और विवादास्पद व्यक्तियों से जुड़ाव के संभावित परिणामों पर भी बहस तेज हो गई है।
जैसे-जैसे एप्सटीन फाइल्स से जुड़ी जानकारियाँ सामने आ रही हैं, मीरा नायर की छवि और विरासत पर इसका क्या असर पड़ेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। यह घटनाक्रम इस बात की याद दिलाता है कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले लोगों को अक्सर उन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, जहाँ उनका नाम विवादों से जुड़ जाता है—चाहे उनका व्यक्तिगत नजरिया या पेशेवर योगदान कुछ भी रहा हो।
मीरा नायर का सिनेमा जगत में योगदान निर्विवाद रूप से महत्वपूर्ण रहा है, लेकिन एप्सटीन फाइल्स में उनके नाम का उल्लेख यह दर्शाता है कि सेलिब्रिटी संस्कृति कितनी जटिल हो सकती है और किसी भी तरह के संबंध के दूरगामी परिणाम हो सकते हैं। ऐसे मामलों में पारदर्शिता और सामाजिक नैतिकता की आवश्यकता और भी अधिक स्पष्ट होकर सामने आती है।
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