कल्पना चावला: वो भारतीय बेटी जो अंतरिक्ष को छूकर आंखों से ओझल हो गई, आज भी जख्म हरे कर जाती है कोलंबिया हादसे की याद
नई दिल्ली, 31 जनवरी (आईएएनएस)। 1 फरवरी का दिन भारत और अमेरिकी अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के लिए काला दिन है। ऐसा इसलिए क्योंकि इसी दिन 1 फरवरी 2003 को भारत की शान और अमेरिकी स्पेस मिशन की एस्ट्रोनॉट कल्पना चावला का निधन हो गया था। उस दिन को याद कर आज भी दिल में एक टीस उठती है, जब स्पेस मिशन पूरा कर पूरी टीम के साथ धरती पर लौट रहीं कल्पना चावला एक भयानक हादसे का शिकार हो गई थीं।
कल्पना चावला का जन्म 17 मार्च 1962 को भारत के हरियाणा के करनाल में हुआ था। बचपन से ही उन्हें स्पेस और विज्ञान में काफी रुचि थी। उन्होंने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद वह आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका चली गईं। 1994 में उन्हें अमेरिका स्पेस एजेंसी नासा ने अपने अगले मिशन के लिए चुना था।
कल्पना चावला पहली बार अपने स्पेस मिशन पर 1997 में गई थीं। कोलंबिया स्पेस शटल (एसटीएस-87) मिशन के लिए उड़ान भरने के साथ ही कल्पना चावला अंतरिक्ष मिशन पर जाने वाली पहली भारतीय मूल की महिला बनीं। उनका पहला स्पेस मिशन सफल रहा और वह सकुशल धरती पर लौटीं।
इसके बाद उनका दूसरा मिशन 16 जनवरी 2003 को शुरू हुआ, जो आखिरी था। कल्पना 16 जनवरी को दूसरे स्पेस मिशन एसटीएस107 के लिए रवाना हुईं। इस दौरान कोलंबिया यान ने 80 से अधिक वैज्ञानिक प्रयोग किए। आखिरकार 1 फरवरी 2003 को कल्पना अपनी टीम के साथ कोलंबिया स्पेसक्राफ्ट से वापस पृथ्वी पर लौट रही थीं।
पृथ्वी पर लैंडिंग से महज 16 मिनट की दूरी पर कुछ ऐसा हुआ, जिसने सबको हिलाकर रख दिया। कोलंबिया यान जब पृथ्वी से 16 मिनट की दूरी पर था, स्पेसक्राफ्ट में कुछ तकनीकी दिक्कत आ गई।
यान के बाएं पंखे में छेद होने की वजह से बाहर की गैस अंतरिक्ष यान के अंदर तेजी से भरने लगी। यान में गैस भरने की वजह से सेंसर ने काम करना बंद कर दिया और स्पेसक्राफ्ट बड़े हादसे का शिकार हो गया और इस तरह कल्पना उस मिशन से कभी लौटी ही नहीं। इस हादसे में कल्पना चावला समेत सभी सात अंतरिक्ष यात्रियों की मौत हो गई।
कल्पना चावला भारत की गौरव हैं। मरणोपरांत उन्हें कई सम्मानों से नवाजा गया। उनके नाम पर कई संस्थान, छात्रवृत्ति और अंतरिक्ष यानों का नाम रखा गया। तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश द्वारा चावला को मरणोपरांत कांग्रेसनल स्पेस मेडल ऑफ ऑनर से सम्मानित किया गया।
--आईएएनएस
केके/वीसी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
एसटीटी बढ़ोतरी से टैक्स कलेक्शन को नुकसान, ट्रेडिंग पर भी पड़ा असर: नितिन कामथ
मुंबई, 31 जनवरी (आईएएनएस)। जेरोधा के सह-संस्थापक नितिन कामथ ने सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) को बार-बार बढ़ाने पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि ज्यादा टैक्स लगाने से धीरे-धीरे शेयर बाजार में ट्रेडिंग गतिविधि कम हो रही है और इसका असर सरकार की कमाई पर भी पड़ रहा है।
एक सोशल मीडिया पोस्ट में नितिन कामथ ने बताया कि एसटीटी उस समय लागू किया गया था, जब लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स (एलटीसीजी) हटा दिया गया था। लेकिन बाद में जब एलटीसीजी दोबारा लागू कर दिया गया, तब भी एसटीटी को हर बजट में बढ़ाया जाता रहा।
उन्होंने कहा कि बाजार में भागीदार होने के नाते उन्हें हर बजट से उम्मीद रहती है कि एसटीटी कम किया जाएगा, लेकिन हर साल यह बढ़ता ही जा रहा है।
नितिन कामथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, एक बाजार सहभागी के तौर पर मैं हमेशा उम्मीद करता हूं कि बजट में एसटीटी घटेगा, लेकिन यह हर साल बढ़ता जा रहा है। एसटीटी तब लाया गया था, जब एलटीसीजी शून्य कर दिया गया था, लेकिन अब एलटीसीजी वापस आ चुका है।
कामथ ने बजट 2024 का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय फ्यूचर्स और ऑप्शंस (एफएंडओ) ट्रेड पर एसटीटी में 60 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी की गई थी।
उन्होंने बताया कि फ्यूचर्स पर एसटीटी 0.0125 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.02 प्रतिशत कर दिया गया, जबकि ऑप्शंस पर टैक्स 0.0625 प्रतिशत से बढ़कर 0.1 प्रतिशत हो गया।
कामथ के अनुसार, उस समय बाजार तेजी में था, इसलिए एसटीटी बढ़ने का असर तुरंत नजर नहीं आया और ट्रेडिंग वॉल्यूम बना रहा।
उन्होंने कहा, बजट 2024 में एफएंडओ पर एसटीटी 60 प्रतिशत बढ़ाया गया था, लेकिन उस वक्त बुल मार्केट था और लोगों की भागीदारी बढ़ रही थी। मगर बाजार हमेशा तेजी में नहीं रहता।
पिछले एक साल में जब बाजार ठंडा पड़ा, तब ज्यादा एसटीटी का असर साफ दिखने लगा और ट्रेडिंग वॉल्यूम कम होने लगा।
कामथ ने वित्त वर्ष 2025-26 के एसटीटी कलेक्शन के सरकारी अनुमान पर भी सवाल उठाए। सरकार ने इस साल 78,000 करोड़ रुपए एसटीटी से जुटाने का लक्ष्य रखा था।
11 जनवरी तक एसटीटी से करीब 45,000 करोड़ रुपए ही जुट पाए थे। यदि मार्च के अंत तक 12,000 करोड़ रुपए और एकत्र हो जाते हैं, तब भी कुल कलेक्शन करीब 57,000 करोड़ रुपए रहेगा, जो लक्ष्य से लगभग 25 प्रतिशत कम है।
कामथ ने कहा कि मुझे लगता है कि अगर 2024 में एसटीटी नहीं बढ़ाया गया होता, तो सरकार को टैक्स के रूप में इससे कहीं ज्यादा रकम मिल सकती थी।
--आईएएनएस
डीबीपी/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
News Nation





















