सरकार ने खाद का दुरुपयोग रोकने के लिए जारी किए 14,692 नोटिस, 6 हजार से अधिक लाइसेंस रद्द
नई दिल्ली, 31 जनवरी (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने मौजूदा फसल सीजन के दौरान खाद के डायवर्जन और गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, खरीफ और चल रहे रबी सीजन 2025-26 (अप्रैल-जनवरी 2026 के मध्य) के दौरान 14,692 कारण बताओ नोटिस जारी किए गए, 6,373 लाइसेंस सस्पेंड या रद्द किए गए और 766 एफआईआर दर्ज की गईं।
सरकार का मकसद किसानों के हितों की रक्षा करना और राष्ट्रीय खाद सप्लाई चेन में पारदर्शिता बनाए रखना है। सरकार ने राज्य सरकारों और जिला-स्तरीय अधिकारियों ने एक बड़ा अभियान चलाया, जिसमें निरीक्षण, छापे और कानूनी कार्रवाई शामिल थी। खाद विभाग ने कृषि और किसान कल्याण विभाग के साथ मिलकर यह अभियान चलाया।
शनिवार को एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि ये सक्रिय और कड़े कदम खाद की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करते हैं, बाजार में अनुशासन मजबूत करते हैं और पूरे देश में वितरण प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखते हैं।
सरकार ने यह भी साफ किया कि असंतुलित खाद के बुरे असर सिर्फ मिट्टी की क्वालिटी तक ही सीमित नहीं हैं। इससे पर्यावरण प्रदूषण भी बढ़ता है और सेहत को भी खतरा हो सकता है।
बयान के अनुसार, पोषक तत्वों की कमी वाली मिट्टी में उगाई गई फसलों में जानवरों के चारे के लिए जरूरी मिनरल्स की कमी होती है, जिससे जानवरों की सेहत और प्रोडक्टिविटी पर बुरा असर पड़ता है। इस तरह, पोषक तत्वों का असंतुलन लंबे समय तक चलने वाले खेती-बाड़ी सिस्टम की स्थिरता और दक्षता में एक बड़ी रुकावट है।
सरकार ने टिकाऊ कृषि उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए मिट्टी की सेहत को बहाल करने और बनाए रखने के लिए संतुलित खाद को एक मुख्य रणनीति के तौर पर बढ़ावा दिया है। सॉइल हेल्थ कार्ड स्कीम के जरिए किसानों को उनकी जमीन में पोषक तत्वों की स्थिति और भौतिक स्थितियों के बारे में पूरी जानकारी दी जाती है। फसलों के लिए रासायनिक उर्वरक, बायोफर्टिलाइजर, जैविक इनपुट और मिट्टी के ट्रीटमेंट के सही इस्तेमाल के लिए गाइडलाइन भी दी जाती हैं।
जुलाई 2025 तक इस स्कीम के तहत 93 हजार से अधिक किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम, लगभग 6.8 लाख फील्ड डेमोंस्ट्रेशन और हजारों जागरूकता अभियान चलाए गए थे। नवंबर 2025 के मध्य तक, देशभर में 25.55 करोड़ से अधिक सॉइल हेल्थ कार्ड बांटे जा चुके थे, जो संतुलित पोषक तत्व मैनेजमेंट को बढ़ावा देने में स्कीम के बड़े असर को दिखाता है।
--आईएएनएस
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डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
बजट 2026 से पहले इस हफ्ते भारतीय शेयर बाजार में आई तेजी
मुंबई, 31 जनवरी (आईएएनएस)। केंद्रीय बजट 2026-27 से पहले इस हफ्ते भारतीय शेयर बाजार में करीब 1 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। हालांकि, पूरे सप्ताह बाजार में काफी उतार-चढ़ाव बना रहा और वैश्विक संकेतों के मिलेजुले रहने तथा बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण बाजार का रुख सतर्क लेकिन सकारात्मक बना रहा।
सप्ताह के अंत में निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता कमजोर होती दिखी। विदेशी निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली और रुपये की कमजोरी के कारण आखिरी कारोबारी सत्र में बाजार में गिरावट देखने को मिली।
हफ्ते भर में निफ्टी 1.09 प्रतिशत चढ़ा, लेकिन अंतिम कारोबारी दिन यह 0.39 प्रतिशत फिसलकर 25,320 पर बंद हुआ। वहीं, सेंसेक्स 296 अंक या 0.36 प्रतिशत गिरकर 81,537 पर बंद हुआ, हालांकि पूरे सप्ताह में इसमें 0.90 प्रतिशत की बढ़त रही।
इस हफ्ते सेक्टर आधारित सूचकांकों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। कंज्यूमर सर्विसेज और हार्डवेयर टेक्नोलॉजी शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी रही और इनमें 2.5 से 3.7 प्रतिशत तक की गिरावट आई। इसके अलावा एफएमसीजी, मीडिया और सॉफ्टवेयर शेयरों में भी 1 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।
इसके उलट, मेटल, ऑयल और गैस स्टॉक्स इस हफ्ते के टॉप गेनर्स रहे और इनमें 2 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी आई, हालांकि आखिरी कारोबारी सत्र में निफ्टी मेटल इंडेक्स 5 प्रतिशत से अधिक टूट गया। मजबूत डॉलर, वैश्विक लिक्विडिटी को लेकर चिंताओं और अमेरिकी फेड चेयरमैन से जुड़ी अनिश्चितताओं के चलते आईटी शेयरों में मुनाफावसूली देखने को मिली।
ऑटो और बेवरेज सेक्टर में भी बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण चुनिंदा शेयरों में कमजोरी रही।
ब्रॉडर मार्केट की बात करें तो इस हफ्ते इनमें बेहतर प्रदर्शन देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप 100 में 2.25 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 3.2 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।
हफ्ते की शुरुआत में टैरिफ से जुड़ी नई चिंताओं और कॉरपोरेट नतीजों के मिलेजुले रहने से बाजार का माहौल कमजोर था, लेकिन भारत-ईयू ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर बनी सकारात्मक उम्मीदों ने ट्रेड से जुड़े सेक्टरों को सहारा दिया।
वहीं सप्ताह के मध्य में आए अनुकूल आर्थिक सर्वेक्षण से बाजार में भरोसा बढ़ा और वित्त वर्ष 2026-27 में मजबूत आर्थिक वृद्धि और नियंत्रित महंगाई की उम्मीदें जताई गईं, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा।
विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले दिनों में बाजार मुख्य रूप से बड़ी घटनाओं पर निर्भर रहेगा। घरेलू स्तर पर केंद्रीय बजट सबसे बड़ा कारक होगा, जो बाजार की दिशा तय करेगा।
एक्सपर्ट्स के अनुसार, अगर सरकार की नीतियों से समर्थन मिला तो अर्थव्यवस्था से जुड़े सेक्टरों में मजबूती बनी रह सकती है। वहीं आईटी और निर्यात से जुड़े शेयर वैश्विक आर्थिक संकेतों के प्रति आगे भी संवेदनशील बने रह सकते हैं।
--आईएएनएस
डीबीपी/
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