शरीर को वज्र की तरह मजबूत बना देगी हीरा भस्म, कैंसर, गठिया और दिल से जुड़े रोगों में भी लाभकारी
नई दिल्ली, 31 जनवरी (आईएएनएस)। आयुर्वेद में दुर्लभ जड़ी-बूटियों की सहायता से रोगों का इलाज कई सालों से होता आया है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि जड़ी-बूटियों के अलावा, प्राकृतिक धातुओं से भी इलाज संभव है?
आयुर्वेद में विभिन्न धातुओं द्वारा तैयार की गई भस्मों से भी लंबे समय से इलाज होता आया है। हीरा भस्म, हीरक भस्म या व्रज भस्म को भी आयुर्वेद में दवा की तरह इस्तेमाल किया जाता है, जो शरीर के सभी दोषों (वात, पित्त और कफ) के असंतुलन को दूर करती है और शरीर के किसी भी अंग से संबंधित पुरानी बीमारियों को दूर किया जा सकता है।
आयुर्वेद में हीरा भस्म एक महत्वपूर्ण औषधि है, जिसके सेवन से आयु और जीवन की गुणवत्ता में सुधार आता है और कुछ गंभीर बीमारियों में भी हीरा भस्म का इस्तेमाल सदियों से होता आया है, जैसे कैंसर, ट्यूमर, तपेदिक, मधुमेह, मोटापा और पुरानी एनीमिया की बीमारी से छुटकारा पाने में हीरा भस्म मदद करती है। आयुर्वेद में इसे वज्र भस्म के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि यह शुद्ध हीरे से तैयार की जाती है। इस भस्म को शुद्ध हीरे और कुछ दुर्लभ जड़ी-बूटियों के कई बार शोधन के बाद तैयार किया जाता है।
हीरे में कार्बन होता है, और इसमें रस सिंदूर और शुद्ध गंधक की बराबर मात्रा मिलाकर अच्छी तरह पीस लिया जाता है। फिर इसे एक डिब्बा बंद डिब्बे में हवा की अनुपस्थिति में गर्म किया जाता है, और इस प्रक्रिया को 14 बार दोहराया जाता है। इसकी एक ग्राम की कीमत हीरे की असल कीमत के कैलकुलेशन से तैयार की जाती है।
हीरे के समान कीमती ये भस्म कई रोगों में काम आती है। यह हृदय रोगों के लिए लाभकारी है। अगर दिल ठीक से रक्त का प्रवाह नहीं करता है या रक्त धमनियां कमजोर हैं, तो हीरा भस्म दिल को मजबूती देता है। इस भस्म का उपयोग अस्थमा, मधुमेह, मोटापा, बांझपन और सूजन संबंधी बीमारियों के इलाज में किया जाता है।
इसके अलावा, अगर रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है तब भी हीरा भस्म टॉनिक की तरह काम करता है और शरीर में स्फूर्ति लाने में सहायक है। हीरा भस्म का इस्तेमाल कैंसर, गठिया और अस्थि मज्जा से जुड़े रोगों को दूर करने में भी होता आया है। ये प्राकृतिक रूप से स्मृति शक्ति बढ़ाकर मस्तिष्क को तेज बनाती है, जिससे एकाग्रता बढ़ती है। पुरुषों से जुड़ी शारीरिक कमजोरी में भी हीरा भस्म लाभकारी है।
--आईएएनएस
पीएम/एएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
एक दशक बाद भारत-अरब विदेश मंत्रियों की दूसरी बैठक का आज
नई दिल्ली, 31 जनवरी (आईएएनएस)। भारत की राष्ट्रीय राजधानी में शनिवार को भारत-अरब विदेश मंत्रियों की दूसरी बैठक (आईएएफएमएम) का आयोजन कर रहा है। इस मौके पर ओमान और संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्री और विदेश राज्य मंत्री का आगमन दिल्ली में हुआ।
ओमान के विदेश मंत्री बद्र अलबुसैदी और संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्रालय में राज्य मंत्री खलीफा शाहीन अल मरार दूसरे आईएएफएमएम में शामिल होने के लिए शनिवार को दिल्ली पहुंचे। यूएई के नेता का स्वागत करते हुए भारत के विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, उनकी यात्रा भारत और यूएई के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगी।
इसके अलावा, एमईए ने ओमान के विदेश मंत्री का स्वागत करते हुए एक्स पर लिखा, “उनकी यात्रा भारत और ओमान के बीच कई तरह की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगी।”
शुक्रवार को लीबिया के विदेश मंत्री एल्ताहर एस एम एलबौर, सोमालिया के विदेश मंत्री अब्दिसलाम अली और कतर के विदेश राज्य मंत्री सुल्तान बिन साद अल मुरैखी दूसरे आईएएफएमएम में हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली पहुंचे।
इस उच्च स्तरीय बैठक की सहअध्यक्षता भारत और यूएई करेंगे और इसमें अरब लीग के सभी 22 सदस्य देशों के विदेश मंत्री और वरिष्ठ प्रतिनिधि अरब लीग के प्रमुख के साथ शामिल होंगे।
एमईए के अनुसार यह बैठक लगभग एक दशक के लंबे समय के बाद हो रही है। इससे पहले भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक 2016 में बहरीन में हुई थी। एमईए ने अपनी आधिकारिक रिलीज में कहा, दूसरी भारत-अरब एफएमएम से हमारे मौजूदा सहयोग को और आगे बढ़ाने, इस साझेदारी को बढ़ाने और गहरा करने की उम्मीद है।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक भारत और अरब राज्यों की लीग (एलएएस) के बीच सहयोग को दिशा दिखाने वाली सबसे बड़ी संस्थागत प्रणाली है। मार्च 2002 में भारत और अरब लीग के बीच एक एमओयू पर हस्ताक्षर हुआ था, जिसके बाद बातचीत का फ्रेमवर्क औपचारिक हुआ था।
--आईएएनएस
केके/एएस
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