Electric Car Insurance: पेट्रोल-डीजल कार से कितना अलग ईवी का इंश्योरेंस, बैटरी से चार्जर तक समझें जरूरी बातें
पेट्रोल-डीजल कार छोड़कर इलेक्ट्रिक कार खरीदने की तैयारी कर रहे तो आपका ध्यान सबसे पहले पेट्रोल के खर्च से होने वाली बचत पर जाएगा। लेकिन इलेक्ट्रिक व्हीकल खरीदते समय इंश्योरेंस को नजरअंदाज करना महंगा पड़ सकता। इलेक्ट्रिक और सामान्य कार के इंश्योरेंस का बेसिक ढांचा लगभग एक जैसा है, लेकिन ईवी की बैटरी, इलेक्ट्रिक मोटर और महंगे इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स बड़ा फर्क पैदा करते।
EV में बैटरी सबसे अहम
इलेक्ट्रिक कार के सबसे महंगे पार्ट्स में बैटरी पैक शामिल है। एक्सीडेंट में बैटरी बुरी तरह डैमेज हो जाए तो उसकी मरम्मत या उसे बदलने पर बड़ा खर्च आ सकता है। पेट्रोल-डीजल कारों में भी इंजन और ट्रांसमिशन जैसे महंगे पार्ट्स होते हैं। EV में हाई-वोल्टेज बैटरी, इलेक्ट्रिक मोटर और कई खास इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स होते हैं। इन्हें ठीक करने के लिए प्रशिक्षित टेक्नीशियन और खास उपकरणों की जरूरत पड़ सकती।
इसी वजह से कई मामलों में क्लेम की लागत बढ़ सकती। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हर EV का इंश्योरेंस पेट्रोल कार से महंगा ही होगा। प्रीमियम कार की कीमत, मॉडल, रजिस्ट्रेशन की जगह, इंश्योरेंस कवर और मालिक की क्लेम हिस्ट्री जैसे कई फैक्टर्स पर निर्भर करता है।
इंश्योरेंस के बेसिक नियम लगभग समान
ईवी के लिए कोई बिल्कुल अलग तरह का मोटर इंश्योरेंस नहीं लेना पड़ता। पेट्रोल-डीजल कार की तरह इलेक्ट्रिक कार के लिए भी थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस जरूरी है। अपनी कार के नुकसान का कवर चाहिए तो थर्ड-पार्टी के साथ ओन डैमेज कवर लिया जा सकता है या कॉम्प्रिहैंसिव इंश्योरेंस चुना जा सकता है। असली फर्क पॉलिसी की बारीक शर्तों में है।
बैटरी कवर की शर्त जरूर पढ़ें
सिर्फ कॉम्प्रिहैंसिव इंश्योरेंस देखकर यह न मानें कि बैटरी से जुड़ी हर परेशानी कवर हो जाएगी। किसी दुर्घटना या पॉलिसी में शामिल घटना के कारण बैटरी खराब हुई है तो शर्तों के मुताबिक नुकसान कवर हो सकता है। वहीं, कई साल इस्तेमाल करने के बाद बैटरी की क्षमता धीरे-धीरे कम होना अलग मामला है। इसे सामान्य तौर पर दुर्घटना से हुआ नुकसान नहीं माना जाता। ऐसी स्थिति में कंपनी की बैटरी वारंटी काम आ सकती है, लेकिन यह उसकी शर्तों पर निर्भर करेगा।
गैरेज नेटवर्क भी जांचें
ईवी खरीदते समय इंश्योरेंस कंपनी का कैशलेस या नेटवर्क गैरेज देखना भी जरूरी है। हर वर्कशॉप हाई-वोल्टेज इलेक्ट्रिकल सिस्टम या बैटरी की मरम्मत नहीं कर सकती। इसलिए देखें कि आपके शहर में कंपनी के नेटवर्क में EV की मरम्मत करने वाले सही गैरेज मौजूद हैं या नहीं।
चार्जर और केबल का क्या होगा?
इलेक्ट्रिक कार के साथ चार्जिंग केबल और दूसरे चार्जिंग उपकरण भी आते हैं। इन्हें बदलना भी महंगा हो सकता है। पॉलिसी खरीदने से पहले पता करें कि चार्जर और चार्जिंग केबल स्टैंडर्ड कवर में शामिल हैं या नहीं। अगर इनके लिए अलग एड-ऑन लेना पड़ता है तो उसकी कीमत और मिलने वाले कवर की तुलना करें।
सिर्फ सस्ता प्रीमियम देखकर न चुनें पॉलिसी
ईवी की कीमत भी इंश्योरेंस प्रीमियम को प्रभावित करती है। अगर किसी कार का इलेक्ट्रिक वर्जन उसी कैटेगरी की पेट्रोल कार से महंगा है तो उसकी आईडीवी और इंश्योरेंस लागत भी अलग हो सकती है। इसलिए EV इंश्योरेंस चुनते समय सिर्फ कम प्रीमियम न देखें।
बीमित घोषित मूल्य (IDV), अपनी जेब से चुकाई जाने वाली राशि, पॉलिसी में शामिल नहीं होने वाले नुकसान, अतिरिक्त कवर और अधिकृत गैराज के नेटवर्क की तुलना करें। सबसे ज्यादा ध्यान बैटरी और महंगे इलेक्ट्रिक पुर्जों के कवर पर दें। थोड़ी सस्ती पॉलिसी बाद में बड़े क्लेम के वक्त आपकी जेब पर भारी पड़ सकती है।
इलेक्ट्रिक और पेट्रोल-डीजल कार के इंश्योरेंस का बुनियादी ढांचा लगभग एक जैसा है, लेकिन बैटरी और इलेक्ट्रिक पुर्जों के कारण बड़ा फर्क आता है। इलेक्ट्रिक कार की पॉलिसी लेते समय बैटरी कवर, चार्जिंग उपकरण और इलेक्ट्रिक कार की मरम्मत करने वाले अधिकृत गैराज का नेटवर्क जरूर जांचें। सिर्फ कम प्रीमियम देखकर पॉलिसी चुनने के बजाय यह देखें कि दुर्घटना के बाद महंगे इलेक्ट्रिक पुर्जों के नुकसान पर कितना कवर मिलेगा।
(प्रियंका कुमारी)
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