गोविंदा संग रूमर्ड अफेयर पर कोमल रानी ने सुनीता को दिया करारा जवाब, दिव्या खोसला और कश्मीरा शाह को भी सुनाई खरी-खोटी
Komal Rani Reacts Affair with Govinda: बॉलीवुड एक्टर गोविंदा (Govinda) की पर्सनल लाइफ कई दिनों से सुर्खियों में है. उनका नाम एक्ट्रेस कोमल रानी स्वर्णकार (Komal Rani Swarnkar) संग जोड़ा जा रहा है. कई बार सुनीता आहूजा ने भी बिना नाम ने कोमल पर कथित तौर पर आरोप लगाए थे. उन्होंने कोमल को अपनी लाइफ की राक्षस बताया था और लोगों से इस मामले में मदद भी मांगी थी. गोविंदा और कोमल कुछ दिन पहले गणपति उत्सव के मौके पर लालबागचा राजा पंडाल में गणपति का दर्शन करने पहुंचे थे. इस पर भी सुनीता ने रिएक्शन दिया था. उस दौरान कोमल ने भी सुनीता पर हमला बोला था कि वह गोविंदा को मारना चाहती हैं और उनका करियर भी उन्होंने ही खराब किया है. इसी बीच कोमल ने अपने सोशल मीडिया पर कई पोस्ट किए. जिसमें उन्होंने सुनीता पर खुलकर निशाना साधा और दिव्या खोसला और कश्मीरा शाह को भी खरी-खोटी सुनाई.
कोमल ने सुनीता आहूजा को दिया करारा जवाब
कोमल रानी स्वर्णकार ने अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट पर लंबा चौड़ा नोट लिखा. इस नोट में कोमल रानी ने गोविंदा संग फिल्म, अफेयर, लालबागचा राजा के दर्शन समेत तमाम आरोपों का जवाब दिया. पहली स्टोरी में कोमल रानी स्वर्णकार ने लिखा, 'हाल ही में, मैंने कुछ सेलिब्रिटीज़ को गोविंदा जी, मेरी पर्सनल लाइफ़ और हमारे कैरेक्टर पर खुलकर कमेंट करते देखा है. फिर भी, मैंने उन्हें कभी किसी गंभीर मुद्दे पर अपनी राय रखने के लिए इतनी मज़बूती से आगे आते नहीं देखा . चाहे वह आतंकवाद हो, राजनीति हो, एक्टर्स की मौत हो या किसी दूसरे एक्टर की कई शादियां ही क्यों न हों.'
उन्होंने आगे लिखा, 'हमारी पर्सनल लाइफ़ अचानक सबके लिए कमेंट करने का विषय कैसे बन गई? मेरे हीरो के साथ गणपति बप्पा और मेरी आने वाली फ़िल्म 'रूपा' की सक्सेस के लिए प्रार्थना करना, शर्म की बात, राष्ट्रीय मुद्दा या दूसरों के लिए दिखावा कैसे बन गया? और जब यही तथाकथित सेलिब्रिटीज़ अपनी फ़िल्मों के प्रमोशन के लिए अपने मेल को-स्टार्स के साथ अलग-अलग पब्लिक जगहों पर जाती हैं, तो क्या उन्हें खुद ऐसा करते हुए शर्म नहीं आती?'
गोविंदा संग अफेयर पर दिया जवाब
इसके आगे उन्होंने गोविंदा संग कथित अफेयर को लेकर भी जवाब दिया. उन्होंने लिखा कि हमने अपनी फ़िल्म 'रूपा' की घोषणा की है, जो कोई रोमांटिक मामला नहीं है. तो आप कौन होते हैं यह तय करने वाले कि हमारा साथ दिखना हमारी फ़िल्म के प्रमोशन के बजाय किसी निजी रिश्ते को दिखाने के लिए है? उन्होंने लिखा, 'हमने अपनी फ़िल्म 'रूपा' की घोषणा की है, जो कोई रोमांटिक मामला नहीं है. तो आप कौन होते हैं यह तय करने वाले कि हमारा साथ दिखना हमारी फ़िल्म के प्रमोशन के बजाय किसी निजी रिश्ते को दिखाने के लिए है?'
उन्होंने कहा, 'हम साथ काम कर रहे हैं और आगे भी साथ दिखते रहेंगे. अगर इससे किसी को परेशानी होती है, तो उन्हें जलने दें.फ़िल्म इंडस्ट्री की कुछ एक्सेस, जिनका करियर ठंडा पड़ चुका है और जिनकी फ़िल्में बॉक्स ऑफ़िस पर नहीं चल रही हैं, उनके पास अब अपने पुराने पड़ चुके ब्रांड टैग के अलावा कुछ नहीं बचा है. वे दूसरों के चल रहे विवादों में टांग अड़ाकर और लाइमलाइट में बने रहने की पुरज़ोर कोशिश करके ट्रेंड बने रहने की कोशिश कर रही हैं.'
मांग में सिंदूर मामले पर क्या बोलीं कोमल
इसके साथ ही कोमल ने मांग में सिंदूर को लेकर भी जवाब दिया. उन्होंने लिखा कि उन्हें उन महिलाओं से सिंदूर, शादी या हमारी भारतीय संस्कृति और परंपराओं के बारे में सीख लेने में कोई दिलचस्पी नहीं है, जो खुद सिंदूर का मज़ाक उड़ाती हैं, जिनकी अपनी शादियां टूट रही हैं, और जो अपने वैवाहिक रिश्तों की पवित्रता भी बनाए नहीं रख सकतीं. उन्होंने लिखा, 'मुझे उन महिलाओं से सिंदूर, शादी या हमारी भारतीय संस्कृति और परंपराओं के बारे में सीख लेने में कोई दिलचस्पी नहीं है, जो खुद सिंदूर का मज़ाक उड़ाती हैं, जिनकी अपनी शादियाँ टूट रही हैं, और जो अपने वैवाहिक रिश्तों की पवित्रता भी बनाए नहीं रख सकतीं.'
उन्होंने आगे लिखा, 'मैं ऐसी महिलाओं को खुद को परखने या जज करने के लायक नहीं समझती. खासकर उन महिलाओं को जो ऐसे लोगों को आदर्श मानती हैं और उनका समर्थन करती हैं जिन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी रात-भर शराब पीने, दूसरे पुरुषों के साथ कई अफेयर रखने और यहां तक कि बुढ़ापे में भी तीन-तीन पुरुषों के साथ 'वन-नाइट स्टैंड' के सपने देखने में बिता दी हो, और साथ ही अपनी शोहरत के लिए दूसरों को सबके सामने नीचा दिखाया हो. सच कहूं तो, मुझे इस बात से कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि ये लोग मुझे अच्छा इंसान समझते हैं या बुरा.'
'मेरे नाम से लाइमलाइट लेने बंद करो'
इसके साथ ही उन्होंने बिना नाम लिए सुनीता पर निशाना साधा कि उन्हें लगता है कि वे सभी एक ही ग्रुप का हिस्सा हैं, जो अपनी नाकाम शादियों की निराशा किसी और पर निकाल रही हैं. वे आदमखोर औरतों जैसा बर्ताव करती हैं. ऐसी औरतें जो अपने पतियों की इज़्ज़त और साख को बर्बाद कर देती हैं. उन्होंने आखिर में लिखा, 'मुझे लगता है कि वे सभी एक ही ग्रुप का हिस्सा हैं, जो अपनी नाकाम शादियों की निराशा किसी और पर निकाल रही हैं. वे आदमखोर औरतों जैसा बर्ताव करती हैं. ऐसी औरतें जो अपने पतियों की इज़्ज़त और साख को बर्बाद कर देती हैं. लगातार मेरा नाम इस्तेमाल करके चर्चा में बने रहने की कोशिश बंद करो. शायद यह कहावत सच है,आपकी इज़्ज़त आपके अपने हाथों में है.ऐसे लोगों को अपनी हद पता होनी चाहिए और दूसरों को इतना नहीं उकसाना चाहिए कि वे खुद ही सबके सामने एक्सपोज्ड हो जाएं.'
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ट्रंप ने दी इस ताकतवर देश को धमकी, जानें क्या है अमेरिकी राष्ट्रपति की नाराजगी की वजह
Donald Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दक्षिण कोरिया को सीधी चेतावनी दे डाली है. मामला अलास्का में बन रहे एक विशाल गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट से जुड़ा है. बता दें इस प्रोजेक्ट में दक्षिण कोरिया को भी शामिल होना है, लेकिन वह अभी तक इस बारे में कोई अंतिम फैसला नहीं ले पाया है और इसी देरी पर ट्रंप ने नाराज हैं.
ट्रंप ने दक्षिण कोरिया को आखिर क्या धमकी दी?
व्हाइट हाउस में मरीन वन में सवार होने से पहले पत्रकारों से बातचीत के दौरान जब ट्रंप को बताया गया कि दक्षिण कोरिया ने अभी तक अलास्का पाइपलाइन प्रोजेक्ट पर दस्तखत नहीं किए हैं और वह अब भी इस पर विचार कर रहा है तो ट्रंप ने सख्त लहजे में कहा कि अगर उन्होंने जल्द साइन नहीं किया तो वे कीमत दोगुनी कर देंगे।
यह पूरी बातचीत कैसे शुरू हुई?
एक पत्रकार ने ट्रंप से पूछा कि दक्षिण कोरिया ने अभी तक अलास्का पाइपलाइन डील को मंजूरी नहीं दी है और वह इसका अध्ययन कर रहा है तो क्या उन्होंने कहीं जल्दबाजी तो नहीं कर दी. इस पर ट्रंप ने पहले कहा कि उन्होंने कोई जल्दबाजी नहीं की और अगर दक्षिण कोरिया इसमें शामिल नहीं होना चाहता तो उन्हें कोई दिक्कत नहीं है. लेकिन जैसे ही पत्रकार ने दोहराया कि सियोल ने अभी इस पर दस्तखत नहीं किए हैं ट्रंप का सुर बदल गया और उन्होंने अपने बयान देते हुए कीमत दोगुनी करने की बात कह दी.
आखिर यह अलास्का पाइपलाइन प्रोजेक्ट है क्या?
अमेरिकी मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार यह एक विशाल प्राकृतिक गैस परियोजना है जिसके तहत अलास्का के उत्तरी इलाके नॉर्थ स्लोप से करीब 1300 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के जरिए गैस को दक्षिणी अलास्का तक लाया जाएगा. जहां इसे लिक्विफाई कर जहाजों के जरिए एशियाई देशों को निर्यात किया जाएगा. बता दें इस पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 44 अरब डॉलर आंकी गई है.
दक्षिण कोरिया को इस प्रोजेक्ट में शामिल होने के लिए क्यों कहा जा रहा है?
जानकारी के मुताबिक अमेरिका लगातार जापान, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे एशियाई सहयोगियों पर इस प्रोजेक्ट में बड़ा निवेश करने का दबाव बना रहा है. दरअसल अमेरिका अपने व्यापार घाटे को कम करना चाहता है और एशियाई देश पहले से ही बड़ी मात्रा में अमेरिकी एलएनजी आयात करते रहे हैं. ट्रंप प्रशासन का मानना है कि यह प्रोजेक्ट टैरिफ से जुड़ी बातचीत को आसान बनाने और दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद व्यापारिक समझौता बनाने में मदद कर सकता है.
Trump warns Seoul over Alaska pipeline
— ANI Digital (@ani_digital) October 3, 2026
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#UnitedStates #Trump #Seoul #AlaskaPipeline pic.twitter.com/yNw7EpZTZl
क्या दक्षिण कोरिया इस डील से पूरी तरह इनकार कर रहा है?
दक्षिण कोरिया पहले ही अमेरिका के साथ 350 अरब डॉलर के निवेश को लेकर सहमति जता चुका है और अलास्का एलएनजी प्रोजेक्ट को इसी बड़े निवेश ढांचे का हिस्सा माना जा रहा है. मीडिया में हाल ही में ऐसी भी खबरें आई थीं कि दक्षिण कोरिया अगस्त या सितंबर के आसपास इस डील को लेकर औपचारिक ऐलान कर सकता है लेकिन अभी तक अंतिम मंजूरी नहीं मिली है.
क्या जापान और ताइवान भी इसमें शामिल हो रहे हैं?
ट्रंप पहले ही दावा कर चुके हैं कि जापान सरकार इस प्रोजेक्ट में शामिल होगी और इसके लिए वह अपने उस 550 अरब डॉलर के फंड का इस्तेमाल कर सकता है जिसका खुलासा जापान ने अमेरिका के साथ टैरिफ वार्ता के दौरान किया था. वहीं, ताइवान की सरकारी ऊर्जा कंपनी CPC पहले ही इस प्रोजेक्ट में निवेश और गैस खरीदने को लेकर एक गैर-बाध्यकारी समझौते पर दस्तखत कर चुकी है.
इस प्रोजेक्ट में अब तक कितनी कंपनियों ने दिलचस्पी दिखाई है?
रिपोर्टों के मुताबिक 50 से ज्यादा कंपनियां इस विशाल पाइपलाइन प्रोजेक्ट में निवेश को लेकर रुचि दिखा चुकी हैं. इनमें जापान की प्रमुख ऊर्जा कंपनी JERA का नाम भी शामिल है हालांकि जापान अभी भी अपनी कंपनियों को इतने बड़े और जोखिम भरे प्रोजेक्ट में शामिल करने को लेकर कुछ हद तक हिचकिचाहट दिखा रहा है.
अगर यह प्रोजेक्ट पूरा होता है तो इसका फायदा क्या होगा?
अगर यह पाइपलाइन प्रोजेक्ट पूरी तरह लागू हो जाता है तो यह अमेरिका में बनी एलएनजी गैस को एशियाई बाजारों तक पहुंचाने का एक बड़ा जरिया बन सकता है. एक रिपोर्ट के अनुसार अनुमान है कि इससे हर साल करीब 2 करोड़ मीट्रिक टन तरलीकृत गैस का निर्यात किया जा सकेगा जिससे अमेरिका और साझेदार देशों, दोनों को आर्थिक फायदा होने की उम्मीद है.
प्रोजेक्ट को लेकर आगे का समय सीमा क्या तय है?
कंपनी के मुताबिक पाइपलाइन हिस्से के लिए अंतिम निवेश फैसला 2026 में और निर्यात टर्मिनल के लिए 2027 की शुरुआत में लिए जाने की योजना है. अगर सबकुछ तय समय पर आगे बढ़ा तो 2031 तक इस प्रोजेक्ट से एलएनजी निर्यात शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है.
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