राम मंदिर में अब हर कर्मचारी का बनेगा ‘डिजिटल कुंडली’, ड्यूटी से मोबाइल तक होगी निगरानी; जानें नए नियम
राम मंदिर में सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा किया जा रहा है. अब कर्मचारियों की ड्यूटी, तैनाती और मोबाइल इस्तेमाल तक की डिजिटल निगरानी होगी. जानें नए नियम.
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Jitiya Vrat 2026: आज जीवित्पुत्रिका व्रत में मां जितिया और सूर्यदेव की आरती जरूर करें, संतान की लंबी उम्र की होगी कामना
Jitiya Vrat 2026: हर साल जितिया व्रत यानी जीवित्पुत्रिका का व्रत आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी के दिन रखा जाता है. इस व्रत की महिमा अत्यंत गहरी है. सनातन धर्म में जितिया का व्रत संतान की लंबी उम्र और सफल जीवन की कामना करने के लिए किया जाता है. इस साल आज यानी 3 अक्टूबर को जितिया व्रत किया जा रहा है. माताएं इस दिन संतान के कल्याण हेतु निर्जला व्रत रखती हैं और विधि-विधान से पूजा करते हैं. पूजा के दौरान आरती भी करनी चाहिए. चलिए यहां पढ़ते हैं जितिया व्रत में की जाने वाली आरतियों के लिरिक्स.
क्या है जितिया व्रत का महत्व? (Jitiya Vrat Importance)
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, हर साल आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर जितिया व्रत रखा जाता है. इसे जीवित्पुत्रिका व्रत के नाम से भी जाना जाता है. मान्यता है कि इस व्रत को माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य, सुरक्षा और सुखी जीवन के लिए कामना करती हैं. जितिया व्रत में निर्जला उपवास रखने की परंपरा है. इसके बाद पूजा-अर्चना और आरती की जाती है. यह उपवास भी 36 घंटे का होता है, जिस वजह से इसे भी कठिन व्रतों में से एक माना जाता है.
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जितिया व्रत की आरती यहां पढ़ें (Jitiya Vrat Aarti in Hindi)
जितिया माता की आरती (Jitiya Mata Aarti Lyrics in Hindi)
जय जय जय जितिया महारानी।
तुम हो सब जीवों की माता, हर लेती हो दुःख सब प्राणी।
जय जय जय...
तुम्हारे व्रत से संतानें, निरोगी और लंबी उम्र पाएं।
सुख-समृद्धि का वास हो घर में, तुम ऐसी कृपा बरसाएं।
जय जय जय...
जो नारी श्रद्धा से पूजे, तुम्हारी महिमा अपरम्पार।
हर संकट से रक्षा करती, और भरती खुशियों का संसार।
जय जय जय...
सत्यवादी राजा जीमूतवाहन की, महिमा है तुम से जुड़ी।
तुम्हारी कृपा से ही हुई, उस राजा की यश की घड़ी।
जय जय जय...
तुम हो दुःखहर्ता, सुखकर्ता, तुम हो जीवन की दात्री।
तुम्हारी पूजा से पावन हो, हर घर की जननी और गात्री।
जय जय जय...
इसके अलावा, जितिया व्रत के दिन सूर्यदेव की भी पूजा-अर्चना करते हैं. पूजा के दौरान उनकी आरती करने का भी विशेष महत्व होता है. सूर्यदेव की आरती का पाठ करने से भगवान सूर्यदेव का आशीर्वाद मिलता है. पढ़ें सूर्यदेव की आरती
सूर्यदेव की आरती (Surya Dev Aarti In Hindi)
जय कश्यप-नन्दन, ऊं जय अदिति नन्दन।
त्रिभुवन-तिमिर-निकन्दन,भक्त-हृदय-चन्दन॥
जय कश्यप-नन्दन, ऊं जय अदिति नन्दन।
सप्त-अश्वरथ राजित,एक चक्रधारी।
दुःखहारी, सुखकारी,मानस-मल-हारी॥
जय कश्यप-नन्दन, ऊं जय अदिति नन्दन।
सुर-मुनि-भूसुर-वन्दित,विमल विभवशाली।
अघ-दल-दलन दिवाकर,दिव्य किरण माली॥
जय कश्यप-नन्दन, ऊं जय अदिति नन्दन।
सकल-सुकर्म-प्रसविता, सविता शुभकारी।
विश्व-विलोचन मोचन, भव-बन्धन भारी॥
जय कश्यप-नन्दन, ऊं जय अदिति नन्दन।
कमल-समूह विकासक,नाशक त्रय तापा।
सेवत साहज हरतअति मनसिज-संतापा॥
जय कश्यप-नन्दन, ऊं जय अदिति नन्दन।
नेत्र-व्याधि हर सुरवर, भू-पीड़ा-हारी।
वृष्टि विमोचन संतत, परहित व्रतधारी॥
जय कश्यप-नन्दन, ऊं जय अदिति नन्दन।
सूर्यदेव करुणाकर, अब करुणा कीजै।
हर अज्ञान-मोह सब,तत्त्वज्ञान दीजै॥
जय कश्यप-नन्दन, ऊं जय अदिति नन्दन।
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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