Sheikh Hasina के प्रत्यर्पण पर भारत नहीं तय कर सकता कोई समयसीमा: भारतीय उच्चायुक्त
ढाका, तीन अक्टूबर बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने शनिवार को कहा कि भारत अपदस्थ बांग्लादेशी प्रधानमंत्री शेख हसीना की वापसी के लिए कोई समयसीमा नहीं बता सकता क्योंकि उनके प्रत्यर्पण के अनुरोध पर कानूनी प्रक्रिया के तहत विचार किया जा रहा है। ढाका में एक निजी विचार मंच द्वारा आयोजित चर्चा में बांग्लादेश की ओर से हसीना के प्रत्यर्पण की बार-बार की जा रही मांगों से जुड़े सवालों के जवाब में त्रिवेदी ने कहा, “हसीना की वापसी को लेकर कोई भी आपको समयसीमा नहीं बता सकता।” हसीना (79) अगस्त 2024 में बड़े सरकार-विरोधी आंदोलन के बीच अपनी सरकार के सत्ता से हटने के बाद ढाका से निकलकर भारत आ गई थीं। भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि बांग्लादेश सरकार के हसीना के प्रत्यर्पण के अनुरोध पर स्थापित प्रक्रियाओं के तहत विचार किया जा रहा है।
त्रिवेदी ने शनिवार को कहा, “भारत सरकार ने बार-बार इसका जवाब दिया है कि इसकी एक प्रक्रिया है और वह प्रक्रिया कानूनी तथा सुव्यवस्थित है।” उन्होंने यह भी कहा कि हसीना को भारतीय वायुसेना या सेना भारत नहीं लाई थी। पांच अगस्त को विरोध प्रदर्शनों के कारण उनकी सरकार के सत्ता से बाहर होने के बाद बांग्लादेश वायुसेना का एक विमान हसीना को भारत लेकर आया था। उस समय बांग्लादेश की सेना के नेतृत्व वाली सुरक्षा टुकड़ी ने उन्हें उनके आधिकारिक आवास से बाहर निकाला था, जब प्रदर्शनकारी परिसर की ओर बढ़ रहे थे।
त्रिवेदी ने कहा, “उस समय तक हसीना बांग्लादेश की प्रधानमंत्री थीं। हमारे पास शायद ही कोई विकल्प था। पड़ोसी होने के नाते परिस्थितियों की वास्तविकता को स्वीकार करना हमारा कर्तव्य था, क्योंकि कभी-कभी ऐसी परिस्थितियां पैदा हो जाती हैं जिनके लिए आप तैयार नहीं होते।” उन्होंने कहा, “हमारे पास क्या विकल्प था?
अगर आपने कहा होता कि नहीं, हम उन्हें स्वीकार नहीं करेंगे, हम उतरने की अनुमति नहीं देंगे, तो पता नहीं क्या होता।” त्रिवेदी ने कहा कि बांग्लादेश में “दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थितियों” के कारण यह स्थिति पैदा हुई थी और ऐसी परिस्थितियां दुनिया में कहीं भी दोबारा नहीं आनी चाहिए। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने शनिवार को ‘बे ऑफ बंगाल कन्वर्सेशन 2026’ के पांचवें संस्करण के उद्घाटन सत्र में संबोधन किया था। हालांकि, उसी कार्यक्रम में पैनल चर्चा के दौरान त्रिवेदी की टिप्पणी के समय वह मौजूद नहीं थे।
हसीना के प्रत्यर्पण के मुद्दे पर त्रिवेदी की ये पहली स्पष्ट टिप्पणियां थीं। इससे पहले वह “राजनीति” से जुड़े मामलों पर टिप्पणी करने से इनकार करते रहे थे। हसीना की सरकार के सत्ता से हटने के बाद मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम प्रशासन ने आठ अगस्त 2024 को पदभार संभाला था और अगले 18 महीनों तक बांग्लादेश में शासन किया था।
यूनुस के नेतृत्व वाले अंतरिम प्रशासन के दौरान भारत-बांग्लादेश संबंधों में काफी गिरावट आई। इस अवधि में हसीना पर एक विशेष न्यायाधिकरण में उनकी अनुपस्थिति में मुकदमा चलाया गया और उन्हें मौत की सजा सुनाई गई। अंतरिम सरकार ने उनकी अवामी लीग पार्टी को भी प्रतिबंधित कर दिया और राजनयिक नोट के जरिए उनके प्रत्यर्पण की मांग की।
बारह फरवरी को हुए चुनाव के बाद सत्ता में आई तारिक रहमान की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की सरकार ने हसीना की पार्टी पर प्रतिबंध को बरकरार रखा और उनके प्रत्यर्पण की मांग बार-बार दोहराई। हसीना का प्रत्यर्पण भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव का एक प्रमुख कारण बन गया है और इसका असर रहमान की प्रस्तावित नयी दिल्ली यात्रा पर भी पड़ा है। भारत ने पिछले महीने रहमान को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने का निमंत्रण दिया था, जबकि एक अलग द्विपक्षीय निमंत्रण फरवरी से ही लंबित था।
रहमान ने ब्रिक्स आउटरीच शिखर सम्मेलन में शामिल होने का निमंत्रण ठुकरा दिया था। पांच अगस्त को नयी दिल्ली से हसीना द्वारा की गई ऑनलाइन प्रेस वार्ता ने भी दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ाया। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने पहले कहा था कि हसीना की ऑनलाइन प्रेस वार्ता से रहमान की यात्रा के लिए माहौल “खराब” हुआ है।
भारत ने कहा है कि हसीना से संबंधित मीडिया कार्यक्रम में उसकी कोई भूमिका नहीं थी और मंच पर बांग्लादेश सरकार के बारे में कही गई किसी भी बात का वह समर्थन नहीं करता। हालांकि द्विपक्षीय संबंधों में गिरावट के बावजूद, बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने मंगलवार को त्रिवेदी से मुलाकात के बाद कहा कि रहमान की प्रस्तावित भारत यात्रा को लेकर बातचीत में प्रगति की संभावना के प्रति उनका देश “सकारात्मक” है, हालांकि अभी यात्रा की कोई तारीख तय नहीं हुई है।
Flydubai विमान में कैप्टन पर हमला करने वाले सह-पायलट की पहचान ओमान के नागरिक के रूप में हुई
न्यूयॉर्क, तीन अक्टूबर दुबई से तेल अवीव जाने वाले विमान को दुर्घटनाग्रस्त करने की कोशिश करने वाले सह-पायलट की पहचान ओमान के नागरिक हमाम अल-हम्मामी के रूप में हुई है। यह जानकारी मीडिया की खबरों से मिली। खबरों के अनुसार, फ्लाईदुबई के इस सह-पायलट ने इस सप्ताह भारतीय मूल के कैप्टन स्मित मच्छार पर हमला किया था और विमान को अपने नियंत्रण में लेने का कथित तौर पर प्रयास किया था।
‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ (डब्ल्यूएसजे) ने मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के हवाले से शनिवार को बताया कि अल-हम्मामी की कट्टरपंथी विचारधारा के कारण पूर्व में ओमान के अधिकारियों ने उसके विमान उड़ाने पर रोक लगा दी थी। फ्लाईदुबई की उड़ान एफजेड1073 में अल-हम्मामी ने कैप्टन मच्छार पर आपातकालीन कुल्हाड़ी (क्रैश एक्स) से हमला करके उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया था। आपातकालीन कुल्हाड़ी आपात स्थिति में इस्तेमाल के लिए कॉकपिट में रखी होती है।
हमले के पीछे की वजह अभी स्पष्ट नहीं है। विमान में 174 यात्री सवार थे। विमान ने आपात संकेत भेजे थे और इसके बाद यह 34,000 फुट की ऊंचाई से तेजी से गिरते हुए 17,000 फुट से अधिक नीचे आ गया।
बीबीसी के अनुसार, कैप्टन कॉकपिट के फर्श पर घायल अवस्था में पड़े थे, तभी उन्हें पता चला कि विमान नीचे जा रहा है और उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने के लिए “एक आखिरी कोशिश” करने का फैसला किया। इससे यात्रियों को हमलावर पर काबू पाने में मदद मिली, जिसके बाद दो रिजर्व पायलटों ने विमान को सुरक्षित रूप से सऊदी अरब के ताबुक शहर स्थित प्रिंस सुल्तान बिन अब्दुलअजीज हवाई अड्डे पर उतारा, जहां अल-हम्मामी को हिरासत में ले लिया गया। इस मामले की जांच कर रहे संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने शनिवार को कहा कि उसकी जांच में इसका खुलासा हुआ कि सह-पायलट ने ‘‘आतंकवादी कृत्य’’ को अंजाम देने की कोशिश की थी।
सीएनएन समेत कई अन्य समाचार प्रकाशनों ने भी अल-हम्मामी की पहचान नाम से की है, हालांकि आधिकारिक तौर पर उनकी पहचान की पुष्टि नहीं हुई है। डब्ल्यूएसजे की खबर में कहा गया है, ‘‘कथित हमलावर हमाम अल-हम्मामी नाम का ओमानी नागरिक है।” सीएनएन ने दो सूत्रों और एक इजराइली अधिकारी के हवाले से पायलट की पहचान भी ओमानी नागरिक हमाम अल-हम्मामी के रूप में की। उसका जन्म संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में हुआ और उसके पिता ओमानी और मां सीरियाई है तथा उसने अपने जीवन के कई वर्ष यूएई में बिताए हैं।
सीएनएन ने एक अन्य सूत्र, क्षेत्रीय राजनयिक के हवाले से बताया कि कट्टरपंथी विचारों को लेकर चिंताओं के कारण अल-हम्मामी को पायलट प्रशिक्षण से हटा दिया गया था और बाद में उसे ओमान की राष्ट्रीय एयरलाइन में दूसरी जिम्मेदारी दी गई थी। यह तत्काल स्पष्ट नहीं हो सका कि यूएई स्थित एयरलाइन फ्लाईदुबई में नियुक्त किए जाने से पहले उसकी किस स्तर तक जांच-पड़ताल की गई थी। सूत्रों के हवाले से आई खबरों में कहा गया है कि वह करीब आठ महीने से एयरलाइन के साथ काम कर रहा था।
बीबीसी ने विश्वविद्यालय के हवाले से बताया कि अल-हम्मामी ने ब्रिटेन की बकिंघमशायर न्यू यूनिवर्सिटी से विमानन प्रबंधन में तीन-वर्षीय दूरस्थ शिक्षा पाठ्यक्रम पूरा किया था और 2023 में स्नातक हुआ था। विश्वविद्यालय ने कहा कि उसने संस्थान में पायलट प्रशिक्षण नहीं लिया था। जांच का नेतृत्व कर रहे यूएई ने शनिवार को कहा कि उसकी जांच में सामने आया है कि सह-पायलट ने “आतंकवादी कृत्य” को अंजाम देने का प्रयास किया था।
यूएई के अटॉर्नी जनरल हमद सैफ अल शम्सी ने कहा कि सह-पायलट ने कॉकपिट में ‘‘क्रैश एक्स’’ से कैप्टन पर हमला किया और विमान का नियंत्रण अपने हाथ में लेने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि घटना की पूरी परिस्थितियों, मकसद और इससे जुड़े किसी भी संबंध का पता लगाने के लिए जांच जारी है। कैप्टन मच्छार ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से फोन पर बात की और हमले के बाद के भयावह क्षणों के बारे में बताया।
मच्छार ने कहा कि वह अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रहे थे, लेकिन उन्होंने दूसरों की भी जान बचाने की ठान ली थी। कैप्टन मच्छार का यूएई के एक अस्पताल में उपचार किया जा रहा है। भारतीय दूतावास ने शनिवार को सोशल मीडिया पर एक बयान में कहा कि पायलट की हालत स्थिर है और वह “अच्छी तरह स्वस्थ हो रहे हैं।” दूतावास ने कहा, “हम उनके परिवार और स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में हैं और उनके शीघ्र स्वस्थ होने के लिए हरसंभव सहयोग दे रहे हैं।
उनकी देखभाल के लिए यूएई सरकार का धन्यवाद। हम भी उनके अच्छे स्वास्थ्य के लिए शुभचिंतकों के साथ प्रार्थना कर रहे हैं।” दुबई के क्राउन प्रिंस शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने शनिवार को अस्पताल में मच्छार से मुलाकात की और भारतीय पायलट के साहस तथा जिम्मेदारी की भावना की सराहना की। शेख हमदान यूएई के उपप्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री भी हैं।
उन्होंने कहा कि फ्लाईदुबई के पायलट ने “साहस, जिम्मेदारी और मानव जीवन के प्रति संवेदनशीलता की सर्वोच्च भावना” का परिचय दिया। उन्होंने कहा, “हमारी ओर से और देश के नेतृत्व की ओर से हम उनकी पूरी सराहना और प्रशंसा करते हैं। हमें गर्व है कि वह हमारी टीम का हिस्सा हैं... हमारे देश की कहानी का हिस्सा हैं... और यूएई की पहचान का हिस्सा हैं... एक ऐसे देश की, जो करुणा... शांति... और जीवन के लिए जाना जाता है।” इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मच्छार को “सच्चा नायक” बताया है।
नेतन्याहू ने बुधवार शाम सीएनएन के साथ एक साक्षात्कार में कहा कि घायल पायलट, यात्रियों और चालक दल के अन्य सदस्यों ने “9/11 जैसी त्रासदी को होने से रोकने में सफलता हासिल की।” नेतन्याहू ने बृहस्पतिवार को फॉक्स न्यूज से बातचीत में कहा कि उड़ान में काबू किए जाने के बाद हमलावर चिल्ला रहा था, “मुझे मार डालो, मुझे मार डालो!” नेतन्याहू ने कहा कि इस टिप्पणी से संकेत मिलता है कि हमलावर आत्मघाती था और ऐसा प्रतीत होता है कि उसका इरादा विमान को गिराने का था। उन्होंने यह भी कहा कि हमलावर “इस्लामी कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित था।” इजराइली राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने बृहस्पतिवार को कहा कि इजराइली महिला ताली मानेस ने कॉकपिट से शोर सुनने के बाद खतरे की सूचना दी थी। बीबीसी की खबर के अनुसार, मच्छार के घायल होने के बावजूद कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफल होने के बाद उनके पति और तीन अन्य पुरुष कॉकपिट में दाखिल हुए।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi








/newsnation/media/agency_attachments/logo-webp.webp)