रबी सीजन में किसानों को बड़ी राहत: खाद का पर्याप्त भंडार, एमएसपी से नीचे दाल-तिलहन नहीं बिकने देंगे: शिवराज
नई दिल्ली। रबी सीजन 2026-27 की तैयारियों को लेकर केंद्र सरकार ने किसानों को खाद, बीज, खरीद और प्राकृतिक आपदा से राहत के मामले में भरोसा दिया है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मौसम की चुनौती हो या बाजार की परेशानी, सरकार किसानों के साथ खड़ी है। उन्होंने बताया कि देश में 163 लाख मीट्रिक टन से अधिक खाद का भंडार उपलब्ध है। रबी सीजन में 177.72 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।
रबी की तैयारी के लिए राज्यों के साथ मंथन
राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन-रबी अभियान 2026 के दौरान केंद्र और राज्यों के कृषि मंत्रियों, अधिकारियों और कृषि विशेषज्ञों ने रबी सीजन की तैयारियों पर चर्चा की। चौहान ने बताया कि पिछले करीब 15 दिनों से राज्यों में जिला और राज्य स्तर पर तैयारियां की जा रही थीं। सम्मेलन में फसल, पानी, खाद, बीज, बाजार, किसान ऋण और मौसम से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा हुई। केंद्र सरकार ने राज्यों से किसानों तक जरूरी सामग्री समय पर पहुंचाने और खेतों की स्थिति की लगातार निगरानी करने को कहा है।
खाद का पर्याप्त भंडार होने का दावा
केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद की कीमतें बढ़ने के बावजूद भारतीय किसानों पर इसका असर नहीं पड़ने दिया जाएगा। उनके अनुसार रबी 2026-27 के लिए राज्यों ने करीब 380 लाख मीट्रिक टन खाद की मांग रखी है और देश में 163 लाख मीट्रिक टन से अधिक खाद पहले से उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि यूरिया, डीएपी और अन्य खाद की आपूर्ति राज्यों को जरूरत के अनुसार की जा रही है। सरकार का जोर खाद की समय पर उपलब्धता के साथ इसके संतुलित इस्तेमाल पर भी है। केंद्र ने रबी अभियान में खाद वितरण की निगरानी मजबूत करने पर जोर दिया है।
177.72 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य
सरकार ने रबी सीजन 2026-27 के लिए 177.72 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य रखा है। इसमें गेहूं, दलहन, मोटे अनाज और अन्य रबी फसलें शामिल हैं। गेहूं का उत्पादन लक्ष्य करीब 121 मिलियन टन रखा गया है। चौहान ने कहा कि जहां पानी और मिट्टी में नमी कम है, वहां किसानों को अधिक पानी वाली फसलों के बजाय दलहन, तिलहन और मोटे अनाज की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
22 अक्टूबर से देशभर में चलेगा 'खेत बचाओ अभियान'
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि खरीफ सीजन में चलाए गए अभियान के बाद अब रबी सीजन में भी 'खेत बचाओ अभियान' चलाया जाएगा। यह अभियान 22 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक चलाने की योजना है। इस दौरान कृषि वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्रों के विशेषज्ञ, कृषि विभाग के अधिकारी और अन्य टीमें गांवों और खेतों तक पहुंचेंगी। किसानों को मिट्टी की जरूरत के अनुसार खाद के इस्तेमाल, सही फसल और उन्नत बीज के चयन के बारे में जानकारी दी जाएगी। किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड बनवाने और उसका सही इस्तेमाल करने के लिए भी प्रेरित किया जाएगा। संतुलित खाद इस्तेमाल पर सरकार पहले से जोर दे रही है।
खाद की खपत घटाने का दावा, 1400 करोड़ रुपये की बचत
चौहान ने बताया कि खरीफ सीजन में कुछ राज्यों के दो-दो जिलों में मिट्टी की जांच के आधार पर संतुलित खाद इस्तेमाल का प्रयोग किया गया। उनके अनुसार इससे इन जिलों में खाद की खपत 27 प्रतिशत तक कम हुई और करीब 1400 करोड़ रुपये की बचत हुई। अब इसी तरीके को बड़े स्तर पर लागू करने की तैयारी है। सरकार का कहना है कि इससे किसानों की लागत कम करने के साथ मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में मदद मिलेगी।
एमएसपी से नीचे दाल-तिलहन की खरीद पर सरकार का फैसला
किसानों को बाजार भाव गिरने से बचाने के लिए केंद्र ने दाल और तिलहन की खरीद व्यवस्था को मजबूत करने की बात कही है। चौहान के अनुसार यदि बाजार में कीमत न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP से नीचे जाती है, तो NAFED और NCCF राज्यों की खरीद व्यवस्था में देरी का इंतजार किए बिना मंडियों में जाकर किसानों से खरीद कर सकेंगी। इसका उद्देश्य किसानों को कम कीमत पर अपनी उपज बेचने की मजबूरी से बचाना है।
आपदा प्रभावित किसानों के लिए केंद्रीय टीमें जाएंगी
भारी बारिश, बाढ़ और सूखे से प्रभावित राज्यों के लिए केंद्र सरकार ने भी मदद का भरोसा दिया है। चौहान ने बताया कि कर्नाटक और महाराष्ट्र सहित प्रभावित राज्यों में स्थिति का जायजा लेने के लिए 3 अक्टूबर को केंद्रीय टीमें भेजी जाएंगी। उन्होंने कहा कि नुकसान का मौके पर आकलन कराया जाएगा। राज्य आपदा मोचन निधि यानी SDRF से तत्काल राहत दी जाएगी। इसके बाद विस्तृत आकलन के आधार पर राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि यानी NDRF से अतिरिक्त सहायता देने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
किसान की फसल को एमएसपी से कम भाव नहीं मिलने देने की बात
चौहान ने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसानों को बाजार के उतार-चढ़ाव से सुरक्षा देना है। दाल और तिलहन की खरीद व्यवस्था में देरी होने पर केंद्रीय खरीद एजेंसियों को सीधे मंडी में उतरने की व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने कहा कि किसानों को मजबूरी में औने-पौने दाम पर फसल बेचने की स्थिति नहीं आने दी जाएगी।
डिजिटल पहचान से किसानों को योजनाओं का लाभ
कृषि मंत्री ने एग्रीस्टैक और किसान पहचान पत्र के जरिए किसानों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने पर भी जोर दिया। किसान की जमीन, फसल और अन्य जरूरी जानकारी को डिजिटल व्यवस्था से जोड़कर योजनाओं का लाभ सीधे पात्र किसानों तक पहुंचाने की दिशा में काम किया जा रहा है। राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में किसान पहचान, डिजिटल कृषि, दलहन-तिलहन, खाद्य तेल और बाजार व्यवस्था जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
पराली के मुद्दे पर बोले- किसानों को दोषी ठहराना ठीक नहीं
दिल्ली-एनसीआर के वायु प्रदूषण और पराली जलाने के मुद्दे पर चौहान ने कहा कि प्रदूषण के लिए केवल किसानों को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि किसानों को खलनायक बनाकर कार्रवाई करने के बजाय उनसे संवाद किया जाना चाहिए और उन्हें आधुनिक कृषि मशीनें उपलब्ध कराई जानी चाहिए। चौहान के अनुसार पराली से प्रदूषण में होने वाला योगदान पहले की तुलना में कम हुआ है। उन्होंने कहा कि किसान भी पराली जलाना नहीं चाहते और समस्या का समाधान सहयोग से किया जाना चाहिए।
2015 के बाद कृषि उत्पादन में बढ़ोतरी का दावा
कृषि मंत्री ने देश में कृषि उत्पादन की वृद्धि का जिक्र करते हुए कहा कि 2015 के बाद खाद्यान्न उत्पादन की औसत वार्षिक वृद्धि दर 8.4 मिलियन टन तक पहुंची है। उन्होंने इसे भारतीय कृषि में बड़ा बदलाव बताया। सरकार का कहना है कि रबी अभियान में मौसम, पानी, मिट्टी, खाद, बीज, बाजार और किसान की आर्थिक जरूरतों को ध्यान में रखकर राज्यों के साथ मिलकर योजना बनाई जा रही है। राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में भी केंद्र-राज्य समन्वय और वैज्ञानिक तरीके से रबी की तैयारी को प्रमुख विषय बनाया गया।
वोटर लिस्ट में बदलावों पर संग्राम: EC-SIR विवाद के बीच CWC बैठक में कांग्रेस ने रखी 5 बड़ी मांगें, चुनाव आयोग पर उठाए गंभीर सवाल
देश के राजनीतिक गलियारों में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इसी कड़ी में राजधानी दिल्ली में आयोजित कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक में मुख्य विपक्षी दल ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
पार्टी ने आरोप लगाया है कि संस्थाओं पर दबाव बनाकर मतदाताओं के अधिकारों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है, जिसके विरोध में अब कांग्रेस ने खुलकर आर-पार की लड़ाई का ऐलान करते हुए सरकार के सामने पांच सूत्रीय मांगें रखी हैं।
चुनाव आयोग और सरकार पर खरगे का तीखा हमला
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कार्यसमिति की बैठक को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों में षड्यंत्रकारी तरीके से लोकतंत्र की नींव को खोखला किया गया है।
खरगे ने कहा कि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने मताधिकार को लोकतंत्र की सबसे मौलिक चीज बताया था, लेकिन आज अफसर सरकार के इशारे पर मनमाने ढंग से मतदाताओं के नाम काट रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना किसी को बताए चुपचाप फॉर्म 6 के नियमों में बदलाव कर दिए गए, जो पूरी तरह से गैरकानूनी हैं।
कांग्रेस द्वारा चुनाव आयोग के सामने रखी गई 5 बड़ी मांगें
चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग करते हुए कांग्रेस ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के समक्ष निम्नलिखित पाँच प्रमुख मांगें रखी हैं:-
- मतदाता सूची में किए जाने वाले हर बड़े बदलाव का पूरा डेटा सार्वजनिक किया जाए।
- जिन मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, उन्हें इसकी पूरी जानकारी दी जाए और उन्हें अपनी बात रखने या अपील करने का उचित अवसर मिले।
- सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को मतदाता सूची और उससे संबंधित जरूरी डेटा एक आसान फॉर्मेट में समय पर उपलब्ध कराया जाए।
- जिन निर्वाचन क्षेत्रों या इलाकों में गंभीर विसंगतियों के प्रमाण सामने आएं, वहां एक स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कराई जाए।
- चुनाव प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण डेटा और फैसलों में ऐसी पारदर्शिता हो जिससे यह स्पष्ट रहे कि कोई भी जानकारी छिपाई नहीं जा रही है।
लोकतंत्र और संविधान की रक्षा का संकल्प
अपने संबोधन और सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से कांग्रेस अध्यक्ष ने दो टूक शब्दों में कहा कि उनकी पार्टी इस पूरे मुद्दे को किसी चुनाव की हार-जीत के रूप में नहीं देख रही है। यह लड़ाई देश के संविधान, लोकतंत्र और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए है। कांग्रेस का मानना है कि हर मतदाता को यह पूरा भरोसा होना चाहिए कि उसका वोट सुरक्षित है और लोकतंत्र में सबसे ताकतवर इकाई देश का आम नागरिक ही है।
राजनीतिक और चुनावी निहितार्थ
इस पूरी बैठक और पांच सूत्रीय मांगों के जरिए कांग्रेस ने आगामी चुनावी माहौल में सरकार और चुनाव आयोग को घेरने की बड़ी रणनीति बनाई है। पार्टी इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाकर चुनावी पारदर्शिता और संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता पर बहस को और तेज करना चाहती है।
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