सूडान के विदेश मंत्री ने पीएम मोदी के नेतृत्व की सराहना की, भारत की जनता को दी बधाई
नई दिल्ली, 30 जनवरी (आईएएनएस)। सूडान के विदेश मंत्री मोहिएलदीन सलीम अहमद इब्राहिम दूसरी भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने के लिए भारत पहुंचे हैं। इस दौरान उन्होंने सूडान में जारी संकट और आम लोगों की सुरक्षा के उपायों को लेकर आईएएनएस के साथ खास बातचीत की। इस दौरान उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की भी सराहना की।
सूडान के संकट और आम लोगों की सुरक्षा के उपायों के मुद्दे को लेकर सूडान के मंत्री मोहिएलदीन सलीम अहमद इब्राहिम ने कहा, मुझे लगता है कि इस मामले में हमारे पास बहुत सारे फैसले हैं और संयुक्त राष्ट्र के साथ मिलकर हम अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहे हैं। मुझे लगता है कि आपने और दूसरों ने देखा होगा कि यूएन के बड़े अधिकारी आए और वे सीधे लोगों के पास गए और साफ तौर पर हमने उन्हें लोगों से सीधे बात करने दी और मुझे लगता है कि हमारी सरकार इस मामले में अच्छा काम कर रही है क्योंकि वे हमारे नागरिक हैं।
सूडान में अप्रैल 2023 से गृह युद्ध छिड़ा हुआ है। इस वजह से यहां अब तक कई नागरिकों की मौत हो चुकी है और बड़ी संख्या में परिवारों को अपना घर छोड़कर दूसरी जगह पलायन करना पड़ा। देश में लंबे समय से अशांति और अस्थिरता व्याप्त हो गई है।
सूडान के मंत्री मोहिएलदीन सलीम अहमद इब्राहिम ने कहा, मुझे लगता है कि आपको ऐसे प्रधानमंत्री मिलने पर बधाई, जो अपने लोगों का ध्यान रखते हैं और हमेशा उनके लिए नए मौके लाने की कोशिश करते हैं, और मुझे लगता है कि चुनावों में, हर बार वह जीतते हैं, तो इसके लिए बधाई।
भारत शनिवार को दूसरी आईएएफएमएम होस्ट करने वाला है। भारत और यूएई द्वारा होस्ट की जा रही इस मीटिंग में दूसरे अरब लीग सदस्य देशों के विदेश मंत्री और अरब लीग के महासचिव शामिल होंगे।
आईएएफएमएम से पहले शुक्रवार को चौथी भारत-अरब सीनियर ऑफिशियल्स मीटिंग का आयोजन हो रहा है। दूसरी भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक से मौजूदा सहयोग को आगे बढ़ाने और साझेदारी को बढ़ाने की उम्मीद है।
खास बात यह है कि भारत-अरब विदेश मंत्रियों की मीटिंग 10 साल बाद हो रही है। इससे पहले यह मीटिंग पहली बार 2016 में बहरीन में हुई थी। पहली बैठक के दौरान, नेताओं ने सहयोग के पांच जरूरी मुद्दों, ऊर्जा, अर्थव्यवस्था, शिक्षा, मीडिया और संस्कृति, की पहचान की और इसमें कुछ गतिविधियों का प्रस्ताव रखा।
विदेश मंत्रालय ने कहा, भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक इस साझेदारी को आगे बढ़ाने वाला सबसे बड़ा इंस्टीट्यूशनल सिस्टम है, जिसे मार्च 2002 में तब औपचारिक रूप दिया गया था, जब भारत और एलएएस ने बातचीत की प्रक्रिया को इंस्टीट्यूशनल बनाने के लिए एक एमओयू पर हस्ताक्षर किया था।
--आईएएनएस
केके/एबीएम
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घर में नकली पौधा क्यों नहीं लगाना चाहिए? सबसे ज्यादा Artificial Plants बनाने वाला चीन भी ऐसा क्यों नहीं करता
Artificial Plants For Home: घर को सजाने का चलन बदला है. पहले लोग गमले में मिट्टी डालते थे, अब प्लास्टिक में पत्ते खोंसते हैं. देखने में हरा-भरा. छूने पर बेजान. यह इक्कीसवीं सदी का एक अजीब विरोधाभास है कि हम सुविधा के नाम पर जिंदगी को किनारे कर रहे हैं. घरों में नकली पौधे लगाए जा रहे हैं. सवाल यह है कि असली पौधों की जगह नकली पौधे क्यों? जवाब सीधा है - कोई झंझट नहीं रहता. न पानी देना पड़ता है, न धूप की चिंता रहती है और न ही मुरझाने का डर. बस पौधा लगा दिया और निश्चिंत हो गए.
असली पौधे और नकली पौधे में अंतर
निश्चिंतता और निर्जीवता में बारीक फर्क है. नकली पौधा दिखता तो हरा है, लेकिन करता कुछ नहीं. इससे न हवा साफ होती है, न ऑक्सीजन बनती है और न ही ये ताजी खुशबू देता है. यह ठीक वैसे ही है जैसे किसी की तस्वीर से प्यार हो सकता है पर बातचीत नहीं. असली पौधे में जान होती है. जान यानी रिश्ता. आप पानी डालिए तो वो पीता है. धूप दीजिए तो बढ़ता है. देखभाल कीजिए तो फूल खिलाता है. यह एक्सचेंज है. एक्सचेंज का मतलब लेन-देन नहीं इन्वेस्टमेंट यानी कि जुड़ाव. इस जुड़ाव में एक सुकून है जो मन को छूता है. प्रकृति से कनेक्शन बनता है तो घर में एक अलग ऊर्जा आती है. वही ऊर्जा जो प्लास्टिक के पत्तों से नहीं आ सकती, चाहे वो कितने भी चमकदार क्यों न हों.
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चीन का मार्केटिंग खेल
दुनिया में सबसे ज्यादा नकली पौधे चीन बनाता है. एक्सपोर्ट करता है. दूसरे देशों को बेचता है. लेकिन खुद अपने घरों में क्या लगाता है? असली पौधे. यह दोहरा खेल नहीं, यह समझदारी है. वहां फेंग शुई केवल किताबों में नहीं, जीवन में है. वे जानते हैं कि संतुलन प्लास्टिक से नहीं, प्रकृति से आता है. तो फैक्ट्री में बनाओ नकली, लेकिन घर में लगाओ असली. बिजनेस अलग, जिंदगी अलग.
वास्तु के हिसाब से क्या है सही?
वास्तु और ऊर्जा की बातें करने वाले भी यही कहते हैं. जो चीज जीवित नहीं, वो घर में ठहराव लाती है. इससे सुस्ती आती है और घर का माहौल भारी होता है. यह भले ही आपको तुरंत न दिखे. लेकिन यह धीरे धीरे असर करता है. उदाहरण के लिए नमक ज्यादा खाने से तुरंत बीमारी नहीं होती, लेकिन असर तो होता ही है. विज्ञान भी इसे मानता है. रिसर्च बताते हैं कि हरियाली के बीच रहने से तनाव कम होता है. मन हल्का रहता है. लेकिन यह हरियाली असली होनी चाहिए.
नकली पौधों से आंखे भले धोखा खा लें, मन और शरीर नहीं खाते. वे जानते हैं कि जो जिंदा नहीं, उससे जिंदगी नहीं मिलती. सजावट चाहिए तो असली पौधे लगाइए. मनी प्लांट, तुलसी, स्नेक प्लांट. ये कुछ ऐसे पौधे हैं, जो थोड़े पानी और धूप में भी जीवित रहते हैं. बदले में इन्हें लगाने से ताजगी और ऑक्सीजन मिलती है. साथ ही, यह भी महसूस होता है कि घर में कुछ ऐसा है जो जीवित है, बढ़ रहा है और सांस ले रहा है.
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