टाटा मोटर्स कंपनी ने 6 महीने पहले मार्केट में Tata Sierra को लॉन्च किया है, हालांकि भारत में इस कार का क्रेज सड़कों पर देखा गया है और इसका आकर्षण आज भी तहलका मचा रहा है। अपने ट्रिपल-स्क्रीन डैशबोर्ड, बड़े लाउंज जैसा केबिन, 12 स्पीकार JBL ऑडियो सिस्टम और आइकॉनिक रियर-ग्लास लुक के चलते यह गाड़ी हर उम्र में लोगों को खूब पसंद आ रही है।
असल में कंपनी की कुल ब्रिकी में इस कार का महा-योगदान है। इस कार के आने से टाटा कर्व की ब्रिकी में गिरावट तेजी से देखी गई है। आइए आपको टाटा मोटर्स की गाडियों की ब्रिकी के बारे में विस्तार से जानकारी देते हैं।
Tata Sierrra ने बढ़ाई ब्रिकी, Curvv को हुआ भारी नुकसान
- जनवरी से जुलाई 2026 के बीच में टाटा मोटर्स ने कुल 4,41,520 कारें बेचीं, जो कि पिछले साल (2025) की इसी अवधि में बेची गई 3,09,488 कारों से 42.7% अधिक है।
- कंपनी की कुल बिक्री में अकेले टाटा सिएरा की 49,747 यूनिट्स की बिक्री हुई है, टाटा की कुल बढ़ी हुई बिक्री में सिएरा का योगदान 37.7% रहा।
- सिएरा आने से टाटा की दूसरी कार कर्व को काफी नुकसान हुआ है। वैसे तो पंच, नेक्सॉन और हैरियर की बिक्री बढ़ी, वहीं कर्व की बिक्री 20,632 यूनिट्स से घटाकर 11,556 यूनिट्स बची है।
- इसके पीछे का कारण है मिड-साइज एसयूवी सेगमेंट के खरीदारों ने कर्व के कूपे-डिजाइन की जगह टाटा सिएरा के बॉक्सी डिजाइन, 622-लीटर के बड़े बूट स्पेस, लंबे व्हीलबेस (2,730mm) और ज्यादा केबिन स्पेस को पंसद कर रहे हैं।
पेट्रोल-डीजल वेरिएंट और किआ सेल्टॉस से मुकाबला
आपको बताते चलें कि, सिएरा में पट्रोल (1.5 Hyperion turbo-petrol) और डीजल (Kryojet turbo-diesel) इंजनों में ही बिक रही थी। सप्लाई चेन में कमी के कारण इसकी हर महीने सिर्फ 6,000-7000 गाड़ियां ही शोरूम तक पहुंच पा रही थीं, जबकि इसकी मुख्य प्रतिद्वंद्वी किआ सेल्टोस की हर महीने 10,000 से ज्यादा यूनिटस् बिक रही है और वह आगे बनी हुई है।
Sierra EV से पलटेगी बाजी
गौरतलब है कि कुछ समय पहले लॉन्च हुई Sierra EV के आने से खेल बदल गया है, क्योंकि सेल्टॉस के पास फिलहाल इसका कोई सीधा इलेक्ट्रिक ऑप्शन नहीं है-
- सिएरा ईवी में 75 kWH और 63kWh बैटरी पैक मिलते हैं। जिससे डुअल-मोटर सेटअप 306 PS की पावर और 504 Nm का टॉर्क जेनरेट करता है।
- यह कार एक बार फुल चार्ज होने पर 450-500 किलोमीटर की रियल-वर्ल्ड रेंज देती है।
- सिएरा ईवी सिर्फ 5.8 सेकेंड में 0 से 100 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार पकड़ लेती है।
Sierra की कीमत
इस कार की कीमत की बात करें, तो टाटा सिएरा के ICE (पेट्रोल/डीजल) वेरिएंट की एक्स-शोरुम कीमत 11.49 से 21.29 लाख रुपये के बीच में है। जबकि सिएरा ईवी का एक्स-शोरूम प्राइस 18.79 लाख रुपये से शुरु होकर 26.48 लाख रुपये तक है।
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पूरे भारत में गाड़ी मालिकों के लिए भारी बारिश और सड़कों पर जमा पानी हर साल एक बड़ी मुसीबत बन जाता है। हर मॉनसून में, हज़ारों कारें और दो-पहिया वाहन पानी से भरी सड़कों पर फँस जाते हैं, पेड़ों के गिरने से उन्हें नुकसान पहुँचता है या वे बढ़ते पानी में डूब जाते हैं। इसके बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठता है: नुकसान का हर्जाना कौन भरेगा? इसका जवाब मौसम पर कम और आपकी गाड़ी के ग्लव बॉक्स में रखी इंश्योरेंस पॉलिसी पर ज़्यादा निर्भर करता है।
इंश्योरेंस एक्सपर्ट्स का कहना है कि मॉनसून से होने वाले नुकसान के लिए मुआवज़ा मिल सकता है, लेकिन तभी जब गाड़ी 'कॉम्प्रिहेंसिव मोटर इंश्योरेंस पॉलिसी' के तहत कवर हो। जो मालिक सिर्फ़ ज़रूरी 'थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस' पर निर्भर हैं, उन्हें अपनी गाड़ी को हुए नुकसान के लिए पैसे वापस मिलने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। प्रोबस (Probus) के चीफ ग्रोथ ऑफिसर अत्रेय भारद्वाज का कहना है कि बाढ़, भारी बारिश, जल-जमाव और मॉनसून से जुड़ी दूसरी घटनाओं से गाड़ी को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए 'कॉम्प्रिहेंसिव पॉलिसी' ज़रूरी है। वे बताते हैं कि बेसिक 'थर्ड-पार्टी पॉलिसी' में मालिक की अपनी कार को हुए नुकसान के लिए कोई सुरक्षा नहीं मिलती है।
गाड़ियों के लिए जल-जमाव (waterlogging) सबसे बड़े खतरों में से एक है। बजाज जनरल इंश्योरेंस के कमर्शियल मामलों के चीफ टेक्निकल ऑफिसर, अमरनाथ सक्सेना ने कहा, "हालांकि बाढ़ से होने वाले बाहरी नुकसान को 'ओन डैमेज' मोटर पॉलिसी में कवर किया जाता है, लेकिन पॉलिसीधारकों को 'इंजन प्रोटेक्टर' जैसे ऐड-ऑन कवर पर भी विचार करना चाहिए। यह कवर पानी घुसने से इंजन के अंदर होने वाले नुकसान की भरपाई करता है।"
सक्सेना ने आगे कहा, "अगर गाड़ी बह जाती है या उसकी मरम्मत का खर्च उसकी 'इंस्योर्ड डिक्लेयर्ड वैल्यू' (IDV) के लगभग 75 से 80 प्रतिशत से ज़्यादा हो जाता है, तो पॉलिसी की शर्तों के अनुसार क्लेम का निपटारा 'टोटल लॉस' या 'कंस्ट्रक्टिव टोटल लॉस' के तौर पर किया जा सकता है।" पॉलिसीधारकों को पानी में डूबी गाड़ी को दोबारा स्टार्ट करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इससे गाड़ी के इंजन को और नुकसान हो सकता है। इंश्योरेंस कंपनी को तुरंत सूचना देने और गाड़ी को अधिकृत गैराज में ले जाने से क्लेम की प्रक्रिया तेज़ी से पूरी हो सकती है।
ऐसी गलतियाँ जिनसे आपका इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट हो सकता है
अजीब बात है कि सबसे ज़्यादा नुकसान अक्सर बाढ़ के बाद ही होता है। एक्सपर्ट्स सभी एकमत होकर सलाह देते हैं कि गहरे पानी में बंद हो चुकी गाड़ी को दोबारा स्टार्ट करने की कोशिश न करें। भारद्वाज कहते हैं कि अगर इंजन में पानी चला गया है और मालिक उसे दोबारा स्टार्ट करने की कोशिश करता है, तो इंजन को होने वाले नुकसान को आम तौर पर स्टैंडर्ड कॉम्प्रिहेन्सिव पॉलिसी के तहत 'कॉन्सिक्वेंशियल लॉस' (नतीजतन होने वाला नुकसान) माना जाता है। जब तक गाड़ी में 'इंजन प्रोटेक्शन ऐड-ऑन' न हो, तब तक इंश्योरेंस कंपनी क्लेम के उस हिस्से को रिजेक्ट कर सकती है।
डहुजा भी मालिकों को सलाह देते हैं कि वे पानी में डूबी या बुरी तरह पानी से घिरी गाड़ियों को स्टार्ट न करें, क्योंकि इससे इंजन का नुकसान और बढ़ सकता है, जो शायद बेस पॉलिसी के तहत कवर न हो। जोशी बताते हैं कि पानी से खराब हुए इंजन को बार-बार क्रैंक करने से 'हाइड्रोस्टैटिक लॉक' हो सकता है, जिससे रिपेयर का खर्च काफी बढ़ जाता है। ऐसे नुकसान तभी कवर होते हैं जब मालिक ने 'इंजन प्रोटेक्शन ऐड-ऑन' लिया हो।
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