CSMIA Terminal 1 अक्टूबर से होगा बंद, Navi Mumbai Airport पर शिफ्ट होंगी उड़ानें
मुंबई में हवाई यात्रियों के लिए आने वाले समय में सफर का तरीका बदलने वाला है। छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का टर्मिनल 1 अक्टूबर के अंत तक बंद होने जा रहा है। इसके बाद यहां से चलने वाली उड़ानों को चरणबद्ध तरीके से मुंबई के टर्मिनल 2 और नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भेजा जाएगा। इस बदलाव का सीधा असर मुंबई महानगर क्षेत्र के यात्रियों पर पड़ने वाला है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, टर्मिनल 1 के उत्तरी हिस्से को गिराने का काम 15 जनवरी 2027 से शुरू किया जाना है। मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड ने इसके लिए पहले से तैयारी शुरू कर दी है। कंपनी का कहना है कि पूरे बदलाव को चरणों में किया जा रहा है, ताकि विमान सेवाओं और यात्रियों को कम से कम परेशानी हो।
बता दें कि 1 अक्टूबर से कम से कम एक-तिहाई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की आवाजाही नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भेजने की योजना है। इसके बाद 25 अक्टूबर से टर्मिनल 1 से संचालित होने वाली कम से कम एक-तिहाई उड़ानों को मुंबई के टर्मिनल 2 में ट्रांसफर किया जाएगा। विमानन कंपनियों को उत्तरी हिस्से को गिराने से पहले करीब साढ़े 3 महीने तक बदलाव के लिए सहायता देने की भी योजना है।
इस बदलाव से बड़ी संख्या में यात्रियों का सफर नवी मुंबई की ओर हो जाएगा। इस सर्दी में मुंबई हवाई अड्डे से गुजरने वाले करीब 55 मिलियन यात्रियों में से लगभग 1/5 यात्रियों के नवी मुंबई हवाई अड्डे का इस्तेमाल करने की उम्मीद है। टर्मिनल 1 से हर साल करीब 15 मिलियन यात्री सफर करते हैं, जिनमें से लगभग 10 मिलियन यात्रियों से जुड़ी उड़ानों को अक्टूबर के अंत तक नवी मुंबई भेजे जाने की संभावना है।
बाकी करीब 5 मिलियन यात्रियों को मुंबई के टर्मिनल 2 में संभालने की तैयारी है। इसके लिए टर्मिनल 2 की यात्री क्षमता को 40 मिलियन से बढ़ाकर 45 मिलियन यात्री सालाना करने की योजना है। विमानन कंपनियों के साथ उड़ानों को टर्मिनल 2 और नवी मुंबई के बीच बांटने को लेकर बातचीत भी चल रही है। अकासा एयर ने 1 अगस्त से अपनी घरेलू उड़ानों को टर्मिनल 1 से टर्मिनल 2 में स्थानांतरित करना शुरू कर दिया है।
गौरतलब है कि टर्मिनल 1 करीब 80 साल पुराना है और इसके कुछ हिस्सों को पहले ही गिराया जा चुका है। मौजूदा समय में टर्मिनल 1 और टर्मिनल 2 की यात्री क्षमता करीब 15 मिलियन और 40 मिलियन यात्री सालाना है। पुराने टर्मिनल को नए सिरे से विकसित करने का काम चरणों में किया जाना है, ताकि मुंबई की हवाई सेवाएं पूरी तरह प्रभावित न हों।
यात्रियों के लिए सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि उन्हें टिकट बुक करने के साथ-साथ यह भी देखना होगा कि उनकी उड़ान किस हवाई अड्डे और किस टर्मिनल से संचालित हो रही है। जिन यात्रियों की उड़ान नवी मुंबई भेजी जाएगी, उन्हें मुंबई से नवी मुंबई तक अतिरिक्त सड़क यात्रा के लिए समय निकालना होगा। व्यस्त समय में सड़क पर ज्यादा यातायात होने से सफर और लंबा हो सकता है। इससे कुछ यात्रियों का आने-जाने का खर्च भी बढ़ सकता है।
दूसरी तरफ, उड़ानों के बंटवारे से मुंबई हवाई अड्डे पर भीड़ कम होने की उम्मीद है। फिलहाल मुंबई हवाई अड्डे पर उतरने वाले सभी विमान एक ही चालू हवाई पट्टी का इस्तेमाल करते हैं और इसके बाद यात्रियों को टर्मिनल 1 या 2 तक पहुंचाया जाता है। कुछ उड़ानों के नवी मुंबई चले जाने से विमानों के उतरने के लिए इंतजार का समय और उड़ान भरने से पहले की देरी कम हो सकती है। इससे समय पर उड़ान संचालन में सुधार की उम्मीद है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, निजी और चार्टर विमानों सहित ज्यादातर सामान्य विमानन सेवाओं को भी आने वाले महीनों में नवी मुंबई भेजने की योजना है। मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय से एक संयुक्त बदलाव समूह बनाने की मांग की है, जिसकी अध्यक्षता नागरिक उड्डयन सचिव समीर कुमार सिन्हा कर सकते हैं। इसका उद्देश्य विमानन कंपनियों, हवाई अड्डों और सरकार के बीच तालमेल बढ़ाना है।
नवी मुंबई हवाई अड्डे के पहले टर्मिनल की घोषित क्षमता 20 मिलियन यात्री सालाना यानी करीब 55,000 यात्री रोजाना है। वहीं दूसरे टर्मिनल की क्षमता 30 मिलियन यात्री सालाना बताई गई है, जिसके 2029 तक तैयार होने की उम्मीद है। 2026 से 2029 के बीच मुंबई और नवी मुंबई के हवाई अड्डों की क्षमता बढ़ाकर बढ़ते यात्रियों को संभालने की तैयारी है।
ऐसे में आने वाले समय में यात्रियों के लिए सबसे जरूरी बात यही है कि हवाई अड्डे के लिए निकलने से पहले अपनी उड़ान का नया टर्मिनल जरूर जांच लें। टर्मिनल 1 के पुनर्विकास से लंबे समय में सुविधाओं में बदलाव की उम्मीद है, लेकिन निर्माण के दौरान यात्रियों को अतिरिक्त समय और यात्रा खर्च का ध्यान रखना होगा।
जशपुर में मिर्च की बोरियों के नीचे छिपा 440 किलो Ganja जब्त, दो तस्कर गिरफ्तार
जशपुर, दो अक्टूबर छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में पुलिस ने एक ट्रक से 440 किलोग्राम से अधिक गांजा बरामद कर इस सिलसिले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि बरामद गांजे की अनुमानित कीमत 2,20,31,500 रुपये है, जबकि ट्रक की कीमत लगभग 20 लाख रुपये है।
उन्होंने बताया कि जिले में मादक पदार्थों की तस्करी रोकने और प्रभावी कार्रवाई करने के लिए ओडिशा की सीमा से लगे लावाकेरा पुलिस जांच बिंदु पर विशेष मादक पदार्थ रोधी दल को तैनात किया गया है जो संदिग्ध वाहनों की लगातार जांच कर रहा है। उन्होंने बताया कि इसी दौरान पुलिस को सूचना मिली कि ओडिशा की ओर से एक वाहन में गांजा लेकर कुछ तस्कर जशपुर जिले की सीमा में प्रवेश करने वाले हैं। अधिकारियों ने बताया कि सूचना मिलने के बाद शुक्रवार सुबह करीब नौ बजे लावाकेरा पुलिस जांच अवरोधक पर मादक पदार्थ रोधी दल और तपकरा थाने की संयुक्त टीम ने ओडिशा की ओर से आने वाले संदिग्ध वाहनों की जांच शुरू की।
उन्होंने बताया कि जांच के दौरान ओडिशा की ओर से आ रहे एक छोटे ट्रक को संदेह के आधार पर रोका गया और उसमें सवार दो लोगों से पूछताछ की गई, जिन्होंने अपनी पहचान मोहम्मद वसीम (28) और मोहम्मद आसिफ (34) के रूप में बताई। दोनों उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के रहने वाले हैं। अधिकारियों ने बताया कि ट्रक में लदे सामान के बारे में पूछे जाने पर दोनों ने कहा कि उसमें मिर्च की बोरियां हैं, जिन्हें वे ओडिशा से उत्तर प्रदेश ले जा रहे हैं।
संदेह होने पर पुलिस ने वाहन में लदे सामान की बारीकी से जांच की। उन्होंने बताया कि ट्रक में ऊपर की ओर मिर्च से भरी बोरियां रखी थीं। अधिकारियों ने बताया कि नीचे रखी बोरियों की जांच करने पर उनमें टेप से लिपटे पैकेट मिले।
उन्होंने बताया कि इन पैकेट में गांजा पाया गया। अधिकारियों ने बताया कि ट्रक से कुल 14 बोरियों में रखे 440 पैकेट में 440.63 किलोग्राम गांजा बरामद किया गया। पुलिस ने गांजा और ट्रक जब्त कर लिया।
उन्होंने बताया कि पूछताछ के दौरान आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वे गांजा ओडिशा के बोध क्षेत्र से उत्तर प्रदेश के प्रयागराज ले जा रहे थे। धिकारियों ने बताया कि गांजा किस व्यक्ति से खरीदा गया था और उत्तर प्रदेश में इसे किसे पहुंचाया जाना था, इसकी पूरी कड़ी का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है। तस्करी से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
जशपुर जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह ने कहा, ‘‘जशपुर पुलिस द्वारा नशे के खिलाफ चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन आघात’ के तहत यह एक बड़ी और महत्वपूर्ण कार्रवाई है। पुलिस इस पूरे नेटवर्क की हर कड़ी की जांच कर रही है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘गांजा कहां से खरीदा गया, इसके पीछे कौन लोग हैं और इसे उत्तर प्रदेश में किसे पहुंचाया जाना था, इन सभी बिंदुओं को ध्यान में रखकर गहन जांच की जा रही है। नशे के कारोबार में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
जशपुर पुलिस नशे के खिलाफ पूरी दृढ़ता और निरंतरता के साथ कार्रवाई करती रहेगी।’’ सिंह ने बताया कि जनवरी 2026 से अब तक जशपुर पुलिस ने गांजा तस्करी के कुल 16 मामलों में करीब आठ करोड़ रुपये मूल्य का 1,906 किलोग्राम गांजा बरामद किया है और 22 तस्करों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। उन्होंने बताया कि साथ ही तस्करी में इस्तेमाल 17 कार और एक पिकअप वाहन जब्त किए गए हैं। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ जशपुर पुलिस का ‘ऑपरेशन आघात’ जारी है।
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