विदेशी एयरलाइंस में कार्यरत भारतीय पायलटों के लिए भी मजबूत मूल्यांकन जरूरी, कॉकपिट सुरक्षा पर नए सिरे से विचार करने की जरूरत: विमानन विशेषज्ञ
नई दिल्ली, 2 अक्टूबर (आईएएनएस)। विमानन विशेषज्ञ (एविएशन एक्सपर्ट) अरविंद सिंहतिया ने शुक्रवार को कहा कि नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) की सीधी नियामकीय भूमिका उन पायलटों पर लागू नहीं होती जो भारत के बाहर संचालित एयरलाइंस में उड़ान भरते हैं। ऐसे मामलों में संबंधित देश का विमानन नियामक ही उनकी निगरानी और मूल्यांकन करता है। हालांकि उन्होंने कहा कि भारतीय प्रशिक्षण प्राप्त पायलटों के लिए कठोर पृष्ठभूमि जांच, सख्त मूल्यांकन और मजबूत लाइसेंसिंग प्रणाली बेहद जरूरी है।
न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में सिंहतिया ने कहा कि जिस तरह अंतरराष्ट्रीय ड्राइविंग परमिट के लिए कड़े मानदंड होते हैं, उसी तरह अंतरराष्ट्रीय उड़ान संचालन से जुड़े पायलटों के लिए भी उच्च सुरक्षा मानकों और पेशेवर मूल्यांकन की व्यवस्था होनी चाहिए।
कॉकपिट सुरक्षा पर बोलते हुए सिंहतिया ने कहा कि मौजूदा सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत कॉकपिट में हमेशा दो व्यक्तियों की मौजूदगी सुनिश्चित की जाती है। यदि कोई पायलट बाहर जाता है, तो उसकी जगह चालक दल का कोई सदस्य अंदर मौजूद रहता है।
उन्होंने कहा कि यदि खतरा कॉकपिट के भीतर से ही उत्पन्न हो जाए, तो स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण बन जाती है। ऐसे मामलों में अतिरिक्त सुरक्षा उपायों और प्रक्रियाओं पर गंभीरता से विचार किए जाने की आवश्यकता है।
सिंहतिया ने बताया कि जिस घटना की चर्चा हो रही है, उसमें पायलट ने अपनी जान जोखिम में डालकर निर्णायक कदम उठाया और असाधारण साहस का परिचय दिया।
अरविंद सिंहतिया ने आगे आईएएनएस से कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पायलट कैप्टन स्मित मच्छर से बात करना एक सराहनीय और प्रेरणादायक कदम है। उन्होंने कहा कि कैप्टन मच्छर घायल होने के बावजूद असाधारण साहस का परिचय देते हुए करीब 170 लोगों की जान बचाने में सफल रहे।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का व्यस्त कार्यक्रम होने के बावजूद व्यक्तिगत रूप से पायलट से बातचीत करना और उनकी बहादुरी की सराहना करना पूरे विमानन क्षेत्र के लिए सकारात्मक संदेश है। उन्होंने कहा कि ऐसे कदम न केवल संबंधित पायलट का मनोबल बढ़ाते हैं, बल्कि पूरे एविएशन समुदाय को प्रेरित करते हैं।
इस बीच, नागर विमानन मंत्रालय ने एक एक्स पोस्ट में बताया कि मंत्रालय के सचिव समीर कुमार सिन्हा और नागर विमानन सुरक्षा ब्यूरो (बीसीएएस) के महानिदेशक राजेश निर्वाण ने हाल ही में विमानन सुरक्षा नियामक ढांचे में किए गए सुधारों पर प्रेस वार्ता की।
मंत्रालय के अनुसार, नए सुधार चार प्रमुख सिद्धांतों सरलीकरण, जवाबदेही, पारदर्शिता और विश्वास पर आधारित हैं। इनका उद्देश्य नियामकीय बोझ कम करना, समयबद्ध प्रक्रियाएं लागू करना और डिजिटल एवं फेसलेस प्रणालियों को मजबूत बनाना है, जबकि विमानन सुरक्षा मानकों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
नागर विमानन सचिव समीर कुमार सिन्हा ने कहा कि यह विमानन क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण सुधार है, जिसे सफलतापूर्वक लागू किया गया है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से लंबित कुछ प्रमुख मुद्दों का समाधान किया गया है और मंत्रालय ने उद्योग की चुनौतियों तथा जरूरतों को समझते हुए सुधारों को आगे बढ़ाया है।
उन्होंने कहा कि कार्गो क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं और मंत्रालय लगातार उन क्षेत्रों की पहचान कर रहा है जहां प्रक्रियाओं को सरल बनाकर कारोबार सुगमता को बढ़ावा दिया जा सकता है।
--आईएएनएस
डीबीपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
रोबोटिक्स और एआई बदलेंगे भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था, सर्जरी से आगे बढ़कर निदान और उपचार में बढ़ेगी भूमिका: डॉ. जितेंद्र सिंह
नई दिल्ली, 2 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने शुक्रवार को कहा कि भारत में स्वास्थ्य सेवाओं का अगला चरण रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और नैनोसाइंस से संचालित होगा। उन्होंने कहा कि रोबोटिक्स अब केवल सर्जरी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में निदान, उपचार और थेरेपी सहित चिकित्सा के लगभग हर क्षेत्र में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित सोसाइटी ऑफ रोबोटिक सर्जरी (एसआरएस इंडिया 2026) के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि रोबोटिक्स, एआई और नैनो टेक्नोलॉजी मिलकर एक ऐसा एकीकृत स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करेंगे जो मरीजों की व्यक्तिगत जरूरतों के अनुरूप उपचार प्रदान करने में सक्षम होगा।
खुद एक चिकित्सक और डायबेटोलॉजिस्ट रहे डॉ. सिंह ने कहा कि रोबोटिक्स को केवल सर्जिकल तकनीक के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। वर्तमान में रोबोटिक सर्जरी इसका सबसे ज्यादा दिखाई देने वाला उपयोग है, लेकिन आने वाले समय में रोबोटिक मेडिसिन, रोबोटिक एंडोक्राइनोलॉजी और रोबोटिक कार्डियोलॉजी जैसे नए क्षेत्र विकसित हो सकते हैं। उन्होंने इसकी तुलना एआई से करते हुए कहा कि जैसे एआई आज चिकित्सा की अनेक विशेषज्ञताओं में उपयोग हो रही है, वैसे ही रोबोटिक्स का दायरा भी तेजी से बढ़ेगा।
उन्होंने कहा कि दुनिया अब फ्रंटियर टेक्नोलॉजीज के युग में प्रवेश कर रही है, जहां एआई, बायोटेक्नोलॉजी, न्यूक्लियर मेडिसिन, नैनोटेक्नोलॉजी और रोबोटिक्स स्वास्थ्य सेवाओं में बड़े बदलाव ला रहे हैं। भविष्य की चिकित्सा व्यवस्था आनुवंशिक जानकारी पर आधारित निदान और व्यक्तिगत उपचार पद्धतियों पर अधिक निर्भर होगी।
डॉ. सिंह ने आगे कहा कि एक ही बीमारी से पीड़ित दो मरीजों के लिए उपचार का तरीका अलग हो सकता है, क्योंकि उनका जीन प्रोफाइल, जीवनशैली, खानपान और पर्यावरणीय परिस्थितियां अलग-अलग होती हैं। प्रिसिजन मेडिसिन की अवधारणा इसी व्यक्तिगत अंतर को ध्यान में रखकर विकसित की जा रही है।
उन्होंने जीनोम इंडिया कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि इस पहल के तहत अब तक 10,000 लोगों का जीन अनुक्रमण किया जा चुका है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में भारत हर नवजात शिशु का जीन अनुक्रमण करने की दिशा में भी आगे बढ़ सकता है।
मंत्री ने कहा कि 1.4 अरब से अधिक आबादी वाले देश में इतने बड़े स्तर के आनुवंशिक आंकड़ों का विश्लेषण और प्रबंधन केवल एआई और रोबोटिक्स जैसी उन्नत तकनीकों की मदद से ही संभव होगा। इससे रोगों की प्रारंभिक पहचान, जोखिम मूल्यांकन और व्यक्तिगत उपचार रणनीतियों को विकसित करने में सहायता मिलेगी।
डॉ. सिंह ने नैनोमेडिसिन की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र की कई पुरानी चुनौतियों का समाधान नैनो तकनीक के माध्यम से संभव हो सकता है। उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि ओरल इंसुलिन विकसित करने के प्रयास जारी हैं और नैनो-स्तर की तकनीकें दवाओं की डिलीवरी प्रणाली को अधिक प्रभावी बना सकती हैं।
उन्होंने कहा कि नैनो तकनीक-आधारित नवाचार न केवल दवाओं के प्रभाव को बेहतर बना सकते हैं, बल्कि बीमारी प्रबंधन और उपचार के नए रास्ते भी खोल सकते हैं।
--आईएएनएस
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