भारत की स्थिरता और ताकत से एफटीए ऐतिहासिक, निवेश-रोजगार के नए मौके: डॉ. संजीव सरन
मुंबई, 29 जनवरी (आईएएनएस)। भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच मुफ्त व्यापार समझौता (एफटीए) को लेकर चर्चा जोरों पर है। मैनमेड एंड टेक्निकल टेक्सटाइल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के पूर्व चेयरमैन डॉ. संजीव सरन ने गुरुवार को इस समझौते को ऐतिहासिक बताया।
डॉ. संजीव सरन ने आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा, भारत एक बहुत ही राजनीतिक रूप से स्थिर देश है। आज भारत में शासन बहुत मजबूत और अच्छी तरह से व्यवस्थित है। भारत के पास अपनी बुनियादी ताकतें भी हैं। विशेष रूप से टेक्सटाइल और कपड़ों की बात करें तो इस सेक्टर में भारत की अपनी अंदरूनी ताकतें हैं।
डॉ. सरन ने आगे कहा, सबसे पहले, यह सच में एक शानदार और ऐतिहासिक समझौता रहा है। भारत को बहुत जल्द एक बहुत बड़े बाजार तक पहुंच मिलेगी। टैरिफ को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने वाले दूसरे देशों की वजह से जो भी नुकसान हुआ था, अब उसमें कुछ राहत मिलेगी। मौके बिल्कुल 100 प्रतिशत पक्के हैं कि भारत आगे भी और बड़े बाजार हासिल करता रहेगा। यह डेवलपमेंट कई दूसरे पॉजिटिव नतीजों को भी बढ़ावा दे सकता है- जैसे कि नया निवेश, नए जॉइंट वेंचर, और रोजगार के बढ़े हुए मौके।
उन्होंने जोर दिया कि यह समझौता हर तरह से फायदेमंद है। अंतरराष्ट्रीय डील में कुछ लेन-देन तो होता ही है, लेकिन कुल मिलाकर यह काफी संतुलित है। भारत के लेबर-इंटेंसिव सेक्टर जैसे टेक्सटाइल, कपड़े, अपैरल, लेदर, रत्न और आभूषण को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। इन सेक्टर्स में रोजगार स्वाभाविक रूप से बढ़ेगा, क्योंकि ईयू बाजार में जीरो ड्यूटी एक्सेस से भारतीय उत्पाद अधिक प्रतिस्पर्धी होंगे।
बता दें कि 27 जनवरी को दोनों पक्षों ने लंबे इंतजार के बाद बातचीत सफलतापूर्वक समाप्त करने की घोषणा की, जिसे मदर ऑफ ऑल डील्स कहा जा रहा है। यह समझौता दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक को जोड़ता है, जिसमें लगभग 2 अरब लोगों का बाजार शामिल है और वैश्विक जीडीपी का करीब एक चौथाई हिस्सा कवर होता है।
यह एफटीए 2007 से शुरू हुई बातचीत का नतीजा है, जो 2013 में स्थगित हो गई थी और 2022 में फिर शुरू हुई। यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा व्यापार समझौता माना जा रहा है। समझौते के तहत ईयू भारत से आयातित 99 प्रतिशत से अधिक वस्तुओं पर टैरिफ खत्म या काफी कम करेगा, जबकि भारत ईयू से आयातित 93-96.6 प्रतिशत वस्तुओं पर टैरिफ घटाएगा।
--आईएएनएस
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अमेरिका जाने से पहले जयशंकर की अहम मीटिंग, अमेरिकी राजदूत बोले- 'डिफेंस में दिखेगा दम'
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और भारत में अमेरिका के नए राजदूत सर्जियो गोर के बीच दिल्ली में एक अहम मुलाकात हुई. जयशंकर के अमेरिका दौरे से ठीक पहले हुई इस मीटिंग में दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करने पर चर्चा की गई. मुलाकात के बाद डॉ. एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा की.
उन्होंने बताया कि सर्जियो गोर के साथ उनकी बातचीत बहुत अच्छी रही और इसमें भारत-अमेरिका पार्टनरशिप के कई पहलुओं पर बात हुई. जयशंकर ने भरोसा जताया कि गोर के राजदूत बनने से दोनों देशों के रिश्ते नई ऊंचाइयों पर पहुंचेंगे.
किन मुद्दों पर हुई चर्चा?
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी इस मीटिंग को काफी 'सीरियस' और 'काम का' बताया. उन्होंने बताया कि बातचीत सिर्फ हाथ मिलाने तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसमें डिफेंस, ट्रेड और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे जरूरी मुद्दों पर डिटेल में चर्चा हुई. गोर ने कहा कि दोनों देश अपने कॉमन इंटरेस्ट यानी साझा हितों के लिए मिलकर काम कर रहे हैं.
जयशंकर का वाशिंगटन दौरा
यह मुलाकात इसलिए भी जरूरी है क्योंकि डॉ. जयशंकर अगले हफ्ते वाशिंगटन डीसी जा रहे हैं. फरवरी की शुरुआत में होने वाले इस दौरे में वह एक बड़ी मीटिंग में हिस्सा लेंगे. 4 फरवरी को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो एक खास 'क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल' होस्ट कर रहे हैं, जिसमें जयशंकर भारत की तरफ से शामिल होंगे.
कौन हैं सर्जियो गोर?
सर्जियो गोर ने इसी साल 12 जनवरी को भारत में अमेरिका के 27वें राजदूत के रूप में कमान संभाली है. भारत आने से पहले वह व्हाइट हाउस में काफी ऊंचे पदों पर रहे हैं. वह अमेरिकी राष्ट्रपति के असिस्टेंट और 'डायरेक्टर ऑफ प्रेसिडेंशियल पर्सनल' के तौर पर काम कर चुके हैं, जिससे उनके अनुभव का फायदा भारत-अमेरिका के रिश्तों को मिलेगा.
10 साल का डिफेंस समझौता
रक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों की नजदीकी बढ़ रही है. गोर ने याद दिलाया कि पिछले साल भारत और अमेरिका ने एक 10 साल का डिफेंस पैक्ट साइन किया था. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में दोनों देशों के बीच जॉइंट मिलिट्री एक्सरसाइज जारी रहेंगी और हथियारों की खरीद-बिक्री को लेकर भी बातचीत आगे बढ़ रही है.
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