Maa Lakshmi Mantra: शुक्रवार को 108 बार करें इस लक्ष्मी मंत्र का जाप, छूमंतर हो जाएगी गरीबी!
हिंदू धर्म में माता लक्ष्मी को धन, वैभव और समृद्धि की देवी माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार जिस घर में मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है, वहां सुख-समृद्धि और धन-धान्य का वास होता है। यही वजह है कि लोग देवी लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए नियमित रूप से पूजा-पाठ और मंत्र जाप करते हैं।
धर्म शास्त्रों और धार्मिक परंपराओं में शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी को समर्पित माना जाता है। इस दिन विधि-विधान से पूजा करने के साथ लक्ष्मी मंत्र का जाप करने की भी परंपरा है। मान्यता है कि मंत्र जाप से मन को एकाग्र करने और आध्यात्मिक शांति पाने में मदद मिलती है।
कौन सा है मां लक्ष्मी का मंत्र?
मां लक्ष्मी के कई मंत्रों का धार्मिक परंपरा में उल्लेख मिलता है। इनमें ‘ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः’ मंत्र काफी प्रसिद्ध है। भक्त इस मंत्र का जाप मां लक्ष्मी की आराधना के दौरान करते हैं।
मंत्र:
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस मंत्र का जाप मां लक्ष्मी की आराधना और धन-समृद्धि की कामना के लिए किया जाता है।
108 बार मंत्र जाप करने की परंपरा
हिंदू धार्मिक परंपरा में मंत्रों का 108 बार जाप विशेष महत्व रखता है। शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी की पूजा के दौरान इस मंत्र का 108 बार जाप करने की परंपरा है।
मान्यता के अनुसार, श्रद्धा और एकाग्रता के साथ मंत्र जाप करने से मन को शांति मिलती है और व्यक्ति का ध्यान सकारात्मक आध्यात्मिक भाव की ओर जाता है। भक्त मां लक्ष्मी से सुख, समृद्धि और आर्थिक स्थिरता की कामना करते हैं।
शुक्रवार को कैसे करें लक्ष्मी पूजा?
शुक्रवार के दिन सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा स्थान की साफ-सफाई करने के बाद मां लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं। इसके बाद श्रद्धा के साथ माता लक्ष्मी की पूजा करें और ‘ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः’ मंत्र का 108 बार जाप कर सकते हैं।
पूजा के दौरान मन को शांत और एकाग्र रखने की कोशिश करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पूजा में सबसे महत्वपूर्ण श्रद्धा और भक्ति का भाव माना जाता है।
जरूरी बात
मंत्र जाप से धन प्राप्ति या आर्थिक समस्या दूर होना धार्मिक आस्था और मान्यता का विषय है, इसे निश्चित आर्थिक परिणाम की गारंटी नहीं माना जाना चाहिए। आर्थिक परेशानी की स्थिति में पूजा-पाठ के साथ व्यावहारिक वित्तीय योजना और उचित सलाह लेना भी जरूरी है।
Jitiya Vrat 2026: जितिया व्रत के दिन भूलकर भी न करें ये 3 काम, जानें क्या करें और क्या नहीं
जितिया या जीवित्पुत्रिका व्रत संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और मंगल की कामना से रखा जाता है। यह पर्व मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल के कुछ क्षेत्रों में मनाया जाता है। पंचांग के अनुसार, यह व्रत आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है।
इस साल जितिया व्रत की शुरुआत 2 अक्टूबर 2026 को नहाय-खाय के साथ हुई है। 3 अक्टूबर को व्रती महिलाएं निर्जला उपवास रखेंगी। इसके बाद 4 अक्टूबर को व्रत का पारण किया जाएगा।
व्रत के दौरान धार्मिक परंपराओं में कुछ बातों से बचने की सलाह दी जाती है। आइए जानते हैं जितिया व्रत के दिन किन 3 चीजों को नहीं करना चाहिए।
1. व्रत के दौरान भोजन और जल का सेवन न करें
जितिया व्रत को परंपरा के अनुसार निर्जला व्रत माना जाता है। सरगही या ओठगन के बाद व्रती महिलाएं अन्न और जल का सेवन नहीं करती हैं। व्रत का संकल्प लेने के बाद परंपरा के अनुसार इसे पूरा किया जाता है और अगले दिन निर्धारित समय पर पूजा के बाद पारण किया जाता है। हालांकि, स्वास्थ्य संबंधी किसी परेशानी या चिकित्सकीय आवश्यकता की स्थिति में अपनी सेहत को प्राथमिकता देना जरूरी है।
2. क्रोध, विवाद और अपशब्दों से बचें
जितिया व्रत के दौरान मन को शांत रखने और किसी से विवाद या झगड़ा न करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, व्रत के दौरान क्रोध करना, अपशब्द बोलना या किसी से विवाद करना शुभ नहीं माना जाता। मान्यता है कि व्रती को इस दिन शांत मन से पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यों पर ध्यान देना चाहिए।
3. झूठ और छल-कपट से रहें दूर
जितिया व्रत के दौरान झूठ बोलने और छल-कपट करने से बचने की सलाह धार्मिक परंपराओं में दी जाती है। मान्यता के अनुसार, व्रत के दिन मन, वचन और कर्म की शुद्धता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इसलिए व्रती महिलाओं को कोशिश करनी चाहिए कि वे किसी के साथ गलत व्यवहार न करें और दिनभर शांत एवं सकारात्मक वातावरण बनाए रखें।
जितिया व्रत में क्या करें?
जितिया व्रत के दौरान धार्मिक परंपरा के अनुसार पूजा-पाठ, कथा श्रवण और भगवान का स्मरण किया जाता है। व्रती महिलाएं संतान की लंबी आयु और उनके सुखी जीवन की कामना करती हैं।
व्रत का पारण अपने स्थानीय पंचांग में बताए गए समय के अनुसार करना उचित माना जाता है, क्योंकि तिथि और पारण के समय में स्थान के अनुसार अंतर हो सकता है।
ध्यान रखें
जितिया व्रत एक धार्मिक परंपरा है। निर्जला व्रत कठिन हो सकता है, इसलिए गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, बीमार लोगों या किसी विशेष स्वास्थ्य स्थिति वाले व्यक्ति को व्रत रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
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