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Gandhi Jayanti: बापू और Imam Bawazeer के ऐतिहासिक रिश्ते को Ahmedabad में किया गया याद

अहमदाबाद, दो अक्टूबर गांधी जयंती के अवसर पर महात्मा गांधी के जीवन के एक कम चर्चित अध्याय और उनके करीबी सहयोगी अब्दुल कादिर बावाजिर के साथ उनके रिश्ते को अहमदाबाद में याद किया जा रहा है जिसमें सांप्रदायिक सद्भाव की मिसाल नजर आई थी। बापू के करीबी सहयोगी अब्दुल कादिर बावाजिर को लोग इमाम बावाजिर के नाम से जानते थे। बावाजिर के साथ महात्मा गांधी का गहरा संबंध था और वह उन्हें अपना ‘‘सहोदर’’ यानी भाई मानते थे।

उनका रिश्ता साम्प्रदायिक सद्भाव की भावना का उदाहरण माना जाता है। अहमदाबाद के इतिहासकार रिजवान कादरी ने बताया कि दक्षिण अफ्रीका में गांधी के आंदोलन के दौरान बावाजिर उनसे मिले थे। वह पेशे से मौलवी नहीं थे, लेकिन एक मस्जिद में नमाज की अगुवाई करते थे, जिसके कारण लोग उन्हें ‘इमाम’ कहने लगे।

कादरी ने गुजराती लेखक रावजीभाई पटेल की पुस्तक का हवाला देते हुए बताया कि दक्षिण अफ्रीका से गांधी के भारत लौटने के समय बावाजिर भावुक हो गए थे। गांधी ने उन्हें गले लगाकर कहा था, ‘‘आपडे बन्ने तो सहोदर छी’’ यानी हम दोनों तो भाई हैं। भारत लौटने के बाद गांधी के अहमदाबाद में बसने पर बावाजिर भी शहर आ गए।

गांधी जब साबरमती आश्रम गए तो बावाजिर भी उनके साथ वहीं रहने लगे। अहमदाबाद में आश्रम के पास उनसे जुड़ा ‘इमाम मंजिल’ आज भी मौजूद है। कादरी के अनुसार, बावाजिर ने गांधी के साथ मिलकर काम किया और 1930 में दांडी मार्च शुरू होने के बाद उन्होंने धरासणा में सत्याग्रह का नेतृत्व किया।

गांधी का बावाजिर के परिवार से भी करीबी संबंध था। उन्होंने बावाजिर की बेटियों फातिमा और अमीना की शादी के लिए अपने नाम से निमंत्रण पत्र जारी करवाए थे। कादरी ने बताया कि एक बार सरदार वल्लभभाई पटेल ने गांधी से बातचीत के दौरान बावाजिर की बेटी अमीना के अविवाहित होने का जिक्र किया और गांधीवादी स्वतंत्रता सेनानी गुलाम रसूल का नाम विवाह के लिए सुझाया।

गांधी ने प्रस्ताव पर सहमति जताते हुए गुलाम रसूल को अच्छा युवक बताया। बाद में गुलाम रसूल और अमीना बीबी का निकाह साबरमती आश्रम के हृदय कुंज में हुआ और निमंत्रण पत्र पर गांधी का नाम था। कादरी ने कहा कि गांधी के अपने बच्चों की शादियों के निमंत्रण पत्र उनके नाम से जारी नहीं किए गए थे, लेकिन बावाजिर की दोनों बेटियों की शादी के निमंत्रण पत्रों पर गांधी का नाम था।

बावाजिर की मृत्यु के बाद भी गांधी और पटेल के साथ उनके संबंधों को याद किया जाता रहा। कादरी के अनुसार, पटेल ने उद्योगपति अंबालाल साराभाई, कस्तूरबा गांधी और अन्य लोगों से बावाजिर की स्मृति में श्रद्धांजलि सभा आयोजित करने के बारे में बात की थी। बाद में पटेल की अध्यक्षता में माणेक चौक में शोक सभा हुई।

कादरी ने पटेल के हवाले से बताया कि उन्होंने बावाजिर को ‘‘गांधी का भाई और साथी’’ कहा था, जो अंतिम समय तक गांधी को याद करते रहे। पटेल ने यह भी कहा था कि संकट के समय अचानक उनके कंधे पर जो हाथ आ जाता था, वह इमाम बावाजिर का होता था। गांधी आंदोलन से जुड़े लोग आज भी इमाम बावाजिर की विरासत को याद करते हैं।

गांधी के साथ दांडी मार्च में शामिल रहे एक व्यक्ति के पोते धीमंत बढ़िया ने बताया कि कई लोग हर साल नौ दिसंबर को बाग-ए-फिरदौस कब्रिस्तान में गांधी के मित्र इमाम बावाजिर को याद करने के लिए एकत्र होते हैं।

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सपा सांसद Ramashankar Rajbhar का सुभासपा प्रमुख पर वार, बोले- 2027 चुनाव में नहीं चलेगी ब्लैकमेलिंग

नयी दिल्ली, दो अक्टूबर समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद रमाशंकर राजभर ने शुक्रवार को सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के प्रमुख ओमप्रकाश राजभर को ‘‘वोट का सौदागर’’ करार दिया और कहा कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में उनकी ‘ब्लैकमेलिंग’ नहीं चलनी वाली है क्योंकि समाज और सभी दल उनकी सच्चाई जान चुके हैं। उत्तर प्रदेश के सलेमपुर से लोकसभा सदस्य रमाशंकर राजभर ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में यह भी कहा कि उनकी व्यक्तिगत राय है कि जाति आधारित दलों के नेताओं के साथ गठबंधन का अनुभव हो चुका है और अब सपा को ‘‘जातियों के नेताओं’’ के बजाय सीधे विभिन्न सामाजिक समूहों से राजनीतिक जुड़ाव बढ़ाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘ओम प्रकाश राजभर वोट के सौदागर हैं।

राजभर समाज के लोग अब समझ चुके हैं कि उन्होंने इस समुदाय के नाम पर राजनीति की, लेकिन अपने परिवार को आगे बढ़ाया।’’ सपा नेता ने कहा कि 2019 में ओम प्रकाश राजभर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ थे, जबकि 2022 में वह सपा गठबंधन में आए और 2024 के लोकसभा चुनाव में फिर भाजपा के साथ चले गए। उन्होंने दावा किया कि इन राजनीतिक समीकरणों के बावजूद पिछले लोकसभा चुनाव में पूर्वांचल में सपा को नुकसान नहीं हुआ और पार्टी ने कई सीटों पर जीत हासिल की। रमाशंकर राजभर ने कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में जाति आधारित छोटे दलों की ‘‘ब्लैकमेलिंग’’ खत्म हो जाएगी, क्योंकि बड़े राजनीतिक दल पहले से अधिक सतर्क हैं और केवल सीटों के सौदे के आधार पर निर्णय नहीं करेंगे।

उन्होंने ओम प्रकाश राजभर द्वारा पूर्वांचल को अलग राज्य बनाने की मांग किए जाने के बारे में पूछे जाने पर कहा कि राजभर समुदाय की प्राथमिकता आरक्षण, शिक्षा, रोजगार और सरकारी योजनाओं में भागीदारी है। उत्तर प्रदेश में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव संभावित है।

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Asian Games 2026: भारत-पाकिस्तान फाइनल हुआ रद्द, तो किसे मिलेगा गोल्ड मेडल? ये है नियम

Asian Games 2026 IND vs PAK Final: एशियन गेम्स 2026 में कई क्रिकेट मैच बारिश में धुल चुके हैं. जिसके चलते गोल्ड मेडल और ब्रॉन्ज मेडल मैच के लिए खास नियम बनाए गए हैं. Fri, 02 Oct 2026 16:44:29 +0530

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