Jitiya Vrat 2026: जितिया व्रत के दिन भूलकर भी न करें ये 3 काम, जानें क्या करें और क्या नहीं
जितिया या जीवित्पुत्रिका व्रत संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और मंगल की कामना से रखा जाता है। यह पर्व मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल के कुछ क्षेत्रों में मनाया जाता है। पंचांग के अनुसार, यह व्रत आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है।
इस साल जितिया व्रत की शुरुआत 2 अक्टूबर 2026 को नहाय-खाय के साथ हुई है। 3 अक्टूबर को व्रती महिलाएं निर्जला उपवास रखेंगी। इसके बाद 4 अक्टूबर को व्रत का पारण किया जाएगा।
व्रत के दौरान धार्मिक परंपराओं में कुछ बातों से बचने की सलाह दी जाती है। आइए जानते हैं जितिया व्रत के दिन किन 3 चीजों को नहीं करना चाहिए।
1. व्रत के दौरान भोजन और जल का सेवन न करें
जितिया व्रत को परंपरा के अनुसार निर्जला व्रत माना जाता है। सरगही या ओठगन के बाद व्रती महिलाएं अन्न और जल का सेवन नहीं करती हैं। व्रत का संकल्प लेने के बाद परंपरा के अनुसार इसे पूरा किया जाता है और अगले दिन निर्धारित समय पर पूजा के बाद पारण किया जाता है। हालांकि, स्वास्थ्य संबंधी किसी परेशानी या चिकित्सकीय आवश्यकता की स्थिति में अपनी सेहत को प्राथमिकता देना जरूरी है।
2. क्रोध, विवाद और अपशब्दों से बचें
जितिया व्रत के दौरान मन को शांत रखने और किसी से विवाद या झगड़ा न करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, व्रत के दौरान क्रोध करना, अपशब्द बोलना या किसी से विवाद करना शुभ नहीं माना जाता। मान्यता है कि व्रती को इस दिन शांत मन से पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यों पर ध्यान देना चाहिए।
3. झूठ और छल-कपट से रहें दूर
जितिया व्रत के दौरान झूठ बोलने और छल-कपट करने से बचने की सलाह धार्मिक परंपराओं में दी जाती है। मान्यता के अनुसार, व्रत के दिन मन, वचन और कर्म की शुद्धता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इसलिए व्रती महिलाओं को कोशिश करनी चाहिए कि वे किसी के साथ गलत व्यवहार न करें और दिनभर शांत एवं सकारात्मक वातावरण बनाए रखें।
जितिया व्रत में क्या करें?
जितिया व्रत के दौरान धार्मिक परंपरा के अनुसार पूजा-पाठ, कथा श्रवण और भगवान का स्मरण किया जाता है। व्रती महिलाएं संतान की लंबी आयु और उनके सुखी जीवन की कामना करती हैं।
व्रत का पारण अपने स्थानीय पंचांग में बताए गए समय के अनुसार करना उचित माना जाता है, क्योंकि तिथि और पारण के समय में स्थान के अनुसार अंतर हो सकता है।
ध्यान रखें
जितिया व्रत एक धार्मिक परंपरा है। निर्जला व्रत कठिन हो सकता है, इसलिए गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, बीमार लोगों या किसी विशेष स्वास्थ्य स्थिति वाले व्यक्ति को व्रत रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
Vastu Tips: घर में तुलसी का पौधा कहां रखें? उत्तर-पूर्व, उत्तर या पूर्व दिशा में रखना माना जाता है शुभ
वास्तु शास्त्र में घर के वातावरण को संतुलित रखने के लिए पौधों को महत्वपूर्ण माना जाता है। इनमें तुलसी के पौधे का विशेष स्थान है। सनातन धर्म में तुलसी को पवित्र और पूजनीय माना जाता है।
वास्तु मान्यताओं के अनुसार, घर में तुलसी का पौधा सही दिशा और उचित स्थान पर रखने से सकारात्मक वातावरण बना रह सकता है। वहीं, इसे रखने से पहले दिशा और स्थान का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।
उत्तर-पूर्व दिशा में रखें तुलसी
वास्तु शास्त्र में उत्तर-पूर्व दिशा को ईशान कोण कहा जाता है। वास्तु परंपरा में इस दिशा को शुभ और आध्यात्मिक ऊर्जा से जुड़ा क्षेत्र माना जाता है। इसी वजह से धार्मिक और वास्तु मान्यताओं में तुलसी जैसे पवित्र पौधे को ईशान कोण में रखना शुभ माना जाता है। अगर घर में इस दिशा में तुलसी रखने की पर्याप्त जगह हो तो यहां पौधा रखा जा सकता है।
उत्तर दिशा भी मानी जाती है शुभ
तुलसी के पौधे के लिए उत्तर दिशा को भी उपयुक्त माना जाता है। वास्तु परंपरा में उत्तर दिशा का संबंध कुबेर से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि उत्तर दिशा में तुलसी का पौधा रखने से घर में धन-समृद्धि और सकारात्मकता का वातावरण बना रहता है। हालांकि, इसे वास्तु संबंधी धार्मिक मान्यता के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
पूर्व दिशा में भी रख सकते हैं तुलसी
घर में तुलसी का पौधा रखने के लिए पूर्व दिशा को भी अच्छा माना गया है। वास्तु परंपरा में पूर्व दिशा का संबंध सूर्य और प्रकाश से जोड़ा जाता है।
मान्यता के अनुसार, पूर्व दिशा में तुलसी का पौधा रखना शुभ माना जाता है। साथ ही पौधे को ऐसी जगह रखना उचित माना जाता है जहां उसे पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी और हवा मिल सके।
तुलसी रखने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
तुलसी का पौधा रखने के लिए दिशा के साथ-साथ उसकी जगह का भी ध्यान रखना चाहिए। धार्मिक परंपराओं में तुलसी को सम्मानजनक और स्वच्छ स्थान पर रखने की सलाह दी जाती है। ध्यान रखें कि वास्तु से जुड़े ये नियम धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं, इनका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
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