कैप्टन स्मित की तबीयत पर आया बड़ा अपडेट, अबू धाबी से राजदूत दीपक मित्तल ने दी जानकारी
Captain Smith: इस समय भारत समेत पूरे विश्व में कैप्टन स्मित की चर्चा है. फ्लाईदुबई साजिश के हीरो साबित हुए भारतीय कैप्टन चाकूबाजी में घायल हो गए थे. फिलहाल वह अबू धाबी के एक हॉस्पिटल में भर्ती हैं. भारतीय राजदूत लगातार उनके संपर्क में हैं. कैप्टन की हालात अब स्थिर बताई जा रही है.
फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में चाकू से हमले में घायल हुए भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छर की हालत अब स्थिर है. उनका अबू धाबी के एक अस्पताल में इलाज चल रहा है. यूएई में भारत के राजदूत दीपक मित्तल ने अस्पताल में पायलट और उनके परिवार से मुलाकात की. उन्होंने बताया कि स्मित मच्छर मुस्कुरा रहे हैं, हंस रहे हैं और बातचीत भी कर रहे हैं.
थोड़ी दिक्कत लेकिन बना है हौसला
दीपक मित्तल ने कहा कि पायलट को कुछ परेशानी जरूर है, लेकिन उनका हौसला बना हुआ है. उन्होंने कहा कि स्मित मच्छर की हालत स्थिर है और यूएई में उन्हें अच्छी चिकित्सा सुविधा मिल रही है. राजदूत ने कहा कि पायलट और उनके परिवार से मिलकर उन्हें काफी राहत मिली.
विदेश मंत्रालय कर रहा मॉनिटरिंग
विदेश मंत्रालय भी कैप्टन मच्छर की सेहत पर लगातार नजर रख रहा है. मंत्रालय ने उनके परिवार को हर संभव मदद देने की बात कही है. घटना के बाद पायलट को सबसे पहले सऊदी अरब के तबुक स्थित अस्पताल में भर्ती कराया गया था. बाद में बेहतर इलाज और स्वास्थ्य लाभ के लिए उन्हें अबू धाबी लाया गया.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि तबुक में शुरुआती इलाज के बाद कैप्टन मच्छर को अबू धाबी भेजा गया. यूएई में भारतीय राजदूत ने अस्पताल जाकर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली. अबू धाबी स्थित भारतीय दूतावास और दुबई स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास भी इस मामले में स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में हैं.
आरबीआई अगले हफ्ते होने वाली एमपीसी बैठक में रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कर सकता है बढ़ोतरी : एसबीआई रिपोर्ट
नई दिल्ली, 2 अक्टूबर (आईएएनएस)। मौजूदा समय में जोखिमों का संतुलन भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा 25 आधार अंक (0.25 प्रतिशत) की ब्याज दर बढ़ोतरी के पक्ष में निर्णायक रूप से झुक गया है। इसकी वजह महंगाई का दबाव बढ़ना, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का बिगड़ना, तरलता की बदलती स्थिति और वैश्विक स्तर पर जोखिमों के नए सिरे से उभरना है। यह जानकारी भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की एक रिपोर्ट में दी गई।
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक 5 से 7 अक्टूबर तक होनी है, जिसमें बेंचमार्क रेपो रेट पर फैसला किया जाएगा।
एसबीआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों से जुड़े जोखिम और वैश्विक स्तर पर जोखिमों के पुनर्मूल्यांकन को देखते हुए, “हमारे लिए बेहतर होगा कि हम स्थिति से पीछे रहने के बजाय पहले से ही एहतियाती कदम उठाएं।”
रिपोर्ट में कहा गया, “हमें यह भी उम्मीद है कि आरबीआई वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी वृद्धि के अनुमान में 30 आधार अंक और महंगाई के अनुमान में 20 आधार अंक की बढ़ोतरी करेगा।”
महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है। अगस्त में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई जुलाई के 4.45 प्रतिशत से बढ़कर 4.82 प्रतिशत हो गई।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय रुपया लगातार गिरावट के दौर में है, डॉलर इंडेक्स मजबूत हो रहा है और पिछले शुक्रवार से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की लगातार बिकवाली के कारण 4.45 अरब डॉलर की निकासी हुई है। ऐसे में सट्टेबाजी वाली ताकतों को रोकने और प्रभावी ढंग से हस्तक्षेप करने की आरबीआई की क्षमता पर भरोसा उसकी आंतरिक मजबूती की बड़ी परीक्षा होगी।
रिपोर्ट में कहा गया, “भले ही ब्याज दर में बढ़ोतरी अब करीब आती दिख रही है, लेकिन मानसून की स्थिति पर भी ध्यान देना जरूरी है। 2026 का मानसून वर्ष 2000 के बाद चौथा सबसे कम बारिश वाला मानसून रहा, जो दीर्घकालिक औसत (एपीए) का केवल 87 प्रतिशत रहा। वहीं, 43 प्रतिशत जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई।”
मजबूत अल नीनो परिस्थितियां और अक्टूबर में सामान्य से कम बारिश रबी फसलों के उत्पादन के लिए और जोखिम पैदा कर सकती हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कुल मिलाकर तरलता भले ही अधिक है, लेकिन वास्तविक स्तर पर प्रभावी तरलता का सृजन काफी कम है।
विशेष स्वैप सुविधा के तहत रिकॉर्ड 143.5 अरब डॉलर के विदेशी मुद्रा प्रवाह के बावजूद, नियामकीय आवश्यकताएं (सीआरआर/एसएलआर/एलसीआर) बैंकों द्वारा अतिरिक्त जमा राशि के इस्तेमाल को सीमित करती हैं।
एसबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, “हमारा अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026-27 में अनुमानित 16 प्रतिशत ऋण वृद्धि को समर्थन देने के लिए, नियामकीय प्रावधानों, यूपीआई और स्पर्श संबंधी आवश्यकताओं के कारण बैंकों के स्तर पर जमा सृजन में अभी भी 8.2 लाख करोड़ रुपए का अंतर रहेगा।”
रिपोर्ट में कहा गया कि फिलहाल भारत को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन नीति निर्माताओं और नियामकों के लिए यह बेहतर होगा कि वे ऐसी संभावित स्थिति के लिए तैयार रहें, जहां बदलती व्यापक आर्थिक परिस्थितियां व्यापक हितों की सुरक्षा के लिए कुछ असामान्य ब्याज दर संबंधी उपायों को अपनाने के लिए मजबूर कर सकती हैं।
--आईएएनएस
एबीएस
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