दो अक्टूबर का इतिहास: Mahatma Gandhi और Lal Bahadur Shastri की जयंती समेत कई अहम घटनाएं
नयी दिल्ली, दो अक्टूबर भारत के इतिहास में दो अक्टूबर की तारीख का खास महत्व है। यह तारीख देश की दो महान विभूतियों के जन्मदिन के तौर पर इतिहास के पन्नों में दर्ज है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जन्म दो अक्टूबर 1869 को हुआ था। उनके कार्यों तथा विचारों ने देश की स्वतंत्रता और इसके बाद आजाद भारत को आकार देने में बड़ी भूमिका निभाई। अहिंसा के इस पुजारी के सम्मान में संयुक्त राष्ट्र ने उनके जन्मदिन को अहिंसा दिवस घोषित किया है। पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्म दो अक्टूबर 1904 को हुआ था। उनकी सादगी और विनम्रता के लोग कायल थे। उन्होंने वर्ष 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान ‘जय जवान जय किसान’ का नारा दिया था। भारतीय रिजर्व बैंक ने दो अक्टूबर 1987 को महात्मा गांधी की तस्वीर के साथ पहली बार 500 रुपये का नया करेंसी नोट जारी किया गया था। इससे पहले 1969 में बापू की 100वीं जयंती पर एक स्मारक नोट जारी हुआ था, लेकिन नियमित और स्थायी रूप से भारतीय बैंक नोटों पर उनकी तस्वीर की शुरुआत 1987 के 500 रुपये के नोट से ही हुई थी। इसके बाद 1996 में आरबीआई ने आधिकारिक तौर पर महात्मा गांधी श्रृंखला की शुरुआत की, जिसके बाद सभी मूल्य के नोटों पर उनकी तस्वीर स्थायी रूप से छापी जाने लगी। दो अक्टूबर 2025 को ‘पद्म विभूषण’ हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायक पंडित छन्नूलाल मिश्र का 89 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। संगीत सम्राट के नाम से विख्यात ‘पद्य विभूषण’ पंडित छन्नूलाल मिश्र हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के दिग्गज थे। साल 1936 में आजमगढ़ में जन्मे मिश्र ने ख्याल, ठुमरी, दादरा, चैती, कजरी और भजन जैसी शैलियों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वे बनारस घराने और ठुमरी की पूरब अंग परंपरा के प्रतिपादकों में थे। उन्हें 2020 में पद्म विभूषण और 2010 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।
देश-दुनिया के इतिहास में दो अक्टूबर की तारीख में दर्ज महत्वपूर्ण घटनाएं इस प्रकार हैं:- 1869 : मोहनदास करमचंद गांधी (महात्मा गांधी) का गुजरात के पोरबंदर में जन्म। 1904 : पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्म। 1929 : महात्मा गांधी ने नवजीवन कार्यालय को एक सार्वजनिक न्यास बनाया। 1952 : सामुदायिक विकास कार्यक्रम की शुरुआत। 1955 : मद्रास के पेरम्बूर में इंटीग्रल कोच फैक्टरी ने रेल का पहला डिब्बा बनाया गया। 1968 : मेक्सिको सिटी में ओलंपिक खेल शुरू होने से पहले छात्रों का आंदोलन। पुलिस के साथ संघर्ष में 25 लोगों की मौत। 1970 : अमेरिका की विचिटा स्टेट यूनिवर्सिटी की फुटबॉल टीम, यूनिवर्सिटी के कुछ प्रशासनिक अधिकारियों और समर्थकों को ले जा रहा एक विमान कोलोराडो के रॉकी पर्वत श्रृंखला में दुर्घटनाग्रस्त हो गया जिससे विमान में सवार 40 लोगों में से 31 लोगों की मौत हो गई थी। 1971 : बेल्जियम के आर्सले के पास ब्रिटिश यूरोपियन एयरवेज की उड़ान बीईए706 दुर्घटनाग्रस्त हो गई और उसमें सवार सभी 55 यात्रियों और चालक दल के आठ सदस्यों की मौत हो गई। 1982 : ईरान की राजधानी तेहरान के मध्य व्यस्त इलाके में हुए एक भीषण बम विस्फोट में 60 लोगों की मौत और 700 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। 1985 : दहेज निषेध संशोधन अधिनियम लागू। 1987 : पहली बार भारतीय मुद्रा के 500 रुपये के नोट पर महात्मा गांधी की तस्वीर को स्थायी रूप से प्रदर्शित करने की शुरुआत की गई थी। 1990 : चीन की शियामेन एयरलाइन्स के विमान का अपहरण कर लिया गया और अपहरणकर्ता ने विमान को ग्वांगझू के बैयुन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतारने के लिए मजबूर किया। लैंडिंग के दौरान यह विमान रनवे पर खड़े दो अन्य विमानों से टकरा गया, जिससे भीषण विस्फोट हुआ और 128 लोगों की मौत हो गई। 1992 : जी टीवी आधिकारिक तौर पर शुरू हुआ, जिसने भारतीय टेलीविजन उद्योग का चेहरा हमेशा के लिए बदल दिया। ज़ी टीवी के आने के बाद ही भारत में केबल टीवी नेटवर्क का तेजी से विस्तार हुआ। 1996 : पेरू की राजधानी लीमा से उड़ान भरने के बाद एयरोपेरू फ्लाइट 603 (बोइंग 757) प्रशांत महासागर में दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिसमें 70 लोगों की मृत्यु हो गई। 2001 : उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) ने 9/11 हमले के बाद अफगानिस्तान पर हमले की स्वीकृति दी। 2004 : नागालैंड के दीमापुर में रेलवे स्टेशन और हांगकांग मार्केट में दो जबरदस्त बम विस्फोट हुए, जिसमें करीब 30 लोग मारे गए और 100 से अधिक घायल हुए। 2007 : दक्षिण-पश्चिम चीन के चोंगकिंग में 38 लोगों को लेकर जा रही एक बस में आग लगने से 27 लोग मारे गए। 2012 : नाइजीरिया के मुबी शहर में अज्ञात बंदूकधारियों ने एक हॉस्टल में 40 छात्रों की गोली मारकर हत्या कर दी। 2014 : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशभर में एक राष्ट्रीय आंदोलन के रूप में ‘स्वच्छ भारत मिशन’ की शुरुआत की। 2016 : इथियोपिया के ओरोमिया क्षेत्र में बिश्फुटु में एक धार्मिक उत्सव के दौरान पुलिस कार्रवाई के कारण भगदड़ मचने से 52 लोग मारे गए। 2017 : अमेरिका के लास वेगास में एक संगीत समारोह के दौरान हुई गोलबारी में 60 से अधिक लोग मारे गए और 850 से अधिक घायल हुए। 2022 : इंडोनेशिया के कंजुरुहान स्टेडियम में फुटबॉल मैच के बाद मची भगदड़ और हिंसा में 135 लोगों की मौत। 2024 : दक्षिणी गाजा पर इजराइली हमले में 51 लोगों की मौत। 2025 : ‘पद्म विभूषण’ हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायक पंडित छन्नूलाल मिश्र का 89 वर्ष की उम्र में निधन।
Vishwakhabram: Sergio Gor की बढ़ती सक्रियता पर उठे गंभीर सवाल, Singhvi की 'Viceroy' वाली टिप्पणी से बहस गर्माई
कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की भारत में बढ़ती सक्रियता पर सवाल उठाते हुए कहा है कि गोर का आचरण अब ऐसा दृश्य पैदा कर रहा है, मानो औपनिवेशिक दौर का कोई वायसराय संवेदनशील इलाकों का दौरा कर रहा हो, स्थानीय मुद्दों में खुद को शामिल कर रहा हो और अधिकार-बोध के साथ कूटनीतिक गतिविधियों का संचालन कर रहा हो। यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब गोर के दौरे दिल्ली की राजनयिक सीमाओं से निकलकर कश्मीर, लद्दाख, पूर्वोत्तर, पंजाब और विभिन्न राज्यों के राजनीतिक गलियारों तक पहुंच चुके हैं।
हम आपको बता दें कि अभिषेक मनु सिंघवी की टिप्पणी का संदर्भ अमृतसर यात्रा से जुड़ा है। 28 सितंबर को सर्जियो गोर 28 सदस्यीय अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के साथ अमृतसर पहुंचे थे। उन्होंने स्वर्ण मंदिर में मत्था टेका और बाद में जलियांवाला बाग तथा विभाजन संग्रहालय का दौरा किया। स्वर्ण मंदिर के भीतर उन्हें शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति और अकाल तख्त की ओर से सम्मान मिला, लेकिन मंदिर के बाहर का दृश्य अचानक राजनयिक यात्रा को राजनीतिक विवाद में बदल गया। शिरोमणि अकाली दल अमृतसर के कार्यकर्ताओं ने ‘खालिस्तान जिंदाबाद’, ‘वी वांट खालिस्तान’ और ‘गॉड ब्लेस अमेरिका’ जैसे नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे गोर को ज्ञापन देना चाहते थे, लेकिन उन्हें इसकी अनुमति नहीं मिली।
सवाल सिर्फ अमृतसर का नहीं है। अगस्त में सर्जियो गोर श्रीनगर पहुंचे और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात के बाद उन्होंने जम्मू-कश्मीर को ‘भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा’ बताया। यह 2019 के बाद किसी कार्यरत वरिष्ठ अमेरिकी राजनयिक की पहली कश्मीर यात्रा थी। उनके बयान पर पाकिस्तान ने आपत्ति दर्ज कराई और अमेरिकी राजनयिक को तलब किया। इसके बाद गोर लद्दाख भी गए, जहां उन्होंने जांस्कर क्षेत्र में रिवर राफ्टिंग की। लद्दाख की यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण थी क्योंकि यह चीन के साथ सैन्य तनाव वाले संवेदनशील क्षेत्र से जुड़ा है।
इसके बाद गोर का पूर्वोत्तर दौरा भी चर्चा में आया। उन्होंने दार्जिलिंग में राज्यसभा सांसद और पूर्व विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला के साथ समय बिताया और फिर मणिपुर पहुंचे। मणिपुर में उन्होंने राज्यपाल अजय कुमार भल्ला और मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह से मुलाकात की तथा ऐतिहासिक कंगला किले और ईमा कैथेल का दौरा किया। मुख्यमंत्री ने उन्हें आगामी संगाई महोत्सव में आने का निमंत्रण भी दिया। यह दौरा ऐसे समय हुआ जब मणिपुर लंबे समय से जातीय संघर्ष की परिस्थितियों से गुजर रहा है।
गोर की गतिविधियों का एक दूसरा पहलू राज्यों के राजनीतिक नेतृत्व से उनकी लगातार सीधी बातचीत है। केरल, कर्नाटक और तेलंगाना के मुख्यमंत्रियों से उनकी मुलाकातों में निवेश, व्यापार, वीजा और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दे उठे। तमिलनाडु में उन्होंने मुख्यमंत्री और राजनीतिक दल के प्रमुख सी. जोसेफ विजय से उनके जन्मदिन पर मुलाकात की और आर्थिक सहयोग की चर्चा की। इसी दौरान गोर की उस सार्वजनिक टिप्पणी पर विवाद हुआ जिसमें उन्होंने भारत और तमिलनाडु को ‘हमारे दो राष्ट्र’ कहा। बाद में इस शब्दावली पर राजनीतिक नेताओं ने सवाल उठाए और इसे अनुचित बताया।
बेंगलुरु में भी गोर कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के साथ अमेरिकी स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के कार्यक्रम में शामिल हुए। यानी उनकी भूमिका केवल पारंपरिक राजनयिक मुलाकातों तक सीमित दिखाई नहीं दे रही; राज्यों के राजनीतिक नेतृत्व, कारोबारी समुदाय और सार्वजनिक कार्यक्रमों तक उनकी प्रत्यक्ष मौजूदगी लगातार दिखाई दे रही है।
हम आपको यह भी बता दें कि वरिष्ठ पत्रकार प्रभु चावला ने द न्यू इंडियन एक्सप्रेस में अपने एक लेख के माध्यम से गोर की गतिविधियों पर कई सवाल उठाये थे। उनके लेख ने गोर की गतिविधियों को भारत के राजनीतिक, सैन्य और कारोबारी प्रतिष्ठान तक असाधारण पहुंच के नजरिए से देखा और विशेष रूप से चंडीगढ़ स्थित पश्चिमी कमान की उनकी यात्रा पर सवाल उठाए थे। हम आपको याद दिला दें कि सर्जियो गोर ने अमेरिकी भारत-प्रशांत कमान के प्रमुख एडमिरल सैमुअल पापारो के साथ पश्चिमी कमान का दौरा किया था, जहां अभियानगत तैयारी, पश्चिमी मोर्चे की रणनीतिक परिस्थितियों और ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े विषयों पर जानकारी दी गई। इस यात्रा पर विपक्षी नेताओं ने भी सवाल उठाए थे।
देखा जाये तो अमेरिका इन यात्राओं को व्यापार, निवेश, सुरक्षा और भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने वाली सामान्य राजनयिक गतिविधि बता सकता है। लेकिन सवाल यह है कि क्या सर्जियो गोर की सक्रियता अब सामान्य कूटनीति की सीमा से आगे बढ़ती दिखाई दे रही है? कश्मीर से लद्दाख, मणिपुर से दार्जिलिंग और अब अमृतसर तक उनकी लगातार मौजूदगी, वह भी ऐसे इलाकों में जहां राजनीतिक और सुरक्षा संवेदनशीलता बेहद ज्यादा है, कई सवाल खड़े करती है। खासकर तब, जब उनकी मुलाकातें राज्यों के राजनीतिक नेतृत्व से लेकर विवादित और संवेदनशील मुद्दों तक पहुंच रही हों।
बहरहाल, अभिषेक मनु सिंघवी की ‘वायसराय’ वाली टिप्पणी को महज राजनीतिक बयान कहकर टाल देना आसान है, लेकिन सर्जियो गोर की बढ़ती सक्रियता यह सवाल जरूर खड़ा करती है कि आखिर एक विदेशी राजदूत की भूमिका की सीमा कहां तक होनी चाहिए?
-नीरज कुमार दुबे
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