Kotdwar में व्यापारी से अभद्रता और धमकी के आरोप में जिम संचालक दीपक गिरफ्तार
देहरादून, एक अक्टूबर ‘मोहम्मद दीपक’ के नाम से चर्चित कोटद्वार के जिम संचालक दीपक कुमार को एक व्यापारी के साथ कथित तौर पर अभद्रता एवं मारपीट करने और उसे जान से मारने की धमकी देने के मामले में बृहस्पतिवार को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि शांति भंग होने की आशंका के मद्देनजर यह कार्रवाई की गई।
पुलिस के मुताबिक, दीपक को कोटद्वार निवासी व्यापारी संजीव टोंक की शिकायत पर की गई जांच के बाद शाम को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने बताया कि टोंक ने कोटद्वार कोतवाली में दी तहरीर में आरोप लगाया कि दीपक ने उनके साथ अभद्रता और गाली-गलौज की तथा उन्हें जान से मारने की धमकी दी। शिकायत के आधार पर आरोपी दीपक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 351(2) (आपराधिक धमकी) और धारा 352 (जानबूझकर अपमान कर शांति भंग करने के लिए उकसाना) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।
पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज, तस्वीरों और अन्य तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर मामले में बीएनएस की धारा 196 (धर्म, जाति, आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य बढ़ाने या सौहार्द बिगाड़ने संबंधी अपराध) और धारा 115 (जानबूझकर चोट पहुंचाना) भी जोड़ी गईं। पुलिस के अनुसार, प्रथम दृष्टया सामने आया कि आरोपी ने शिकायतकर्ता को अपशब्द कहने के साथ ही उसे जान से मारने की धमकी भी दी। उसने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों, आरोपी की गतिविधियों और क्षेत्र में कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए दीपक को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 170 (संज्ञेय अपराध को होने से रोकने के लिए गिरफ्तारी) के तहत गिरफ्तार किया गया।
सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस ने देर शाम कोटद्वार नगर निगम क्षेत्र में फ्लैग मार्च भी निकाला। दीपक कुमार इस साल जनवरी में उस समय चर्चा में आए थे, जब कोटद्वार में कुछ लोगों ने एक बुजुर्ग मुस्लिम दुकानदार की दुकान के नाम में ‘बाबा’ शब्द के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई थी। दीपक ने दुकानदार के समर्थन में हस्तक्षेप किया और विरोध कर रहे लोगों से बहस के दौरान अपना नाम ‘मोहम्मद दीपक’ बताया था।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित होने के बाद वह इसी नाम से चर्चित हो गए।
AI अदालती कामकाज में मदद कर सकती है पर जजों का विकल्प नहीं: CJI सूर्यकांत
नयी दिल्ली, एक अक्टूबर भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने बृहस्पतिवार को कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) न्यायिक शोध एवं अदालती प्रक्रियाओं में सहायता कर सकती है, लेकिन वह विधिक विवेक या निर्णय लेने की उस भूमिका की जगह कभी नहीं ले सकती, जो हमेशा न्यायाधीशों के पास ही रहनी चाहिए। प्रधान न्यायाधीश ने उज्बेकिस्तान के समरकंद में एशियाई संवैधानिक न्यायालयों एवं समकक्ष संस्थानों के संघ की सातवीं कांग्रेस के पूर्ण अधिवेशन को संबोधित करते हुए कहा कि न्याय तक पहुंच बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल किया जाना चाहिए, लेकिन साथ ही यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि इससे कमजोर वर्ग के नागरिक वंचित न हों और न्यायिक व्यवस्था में जनता का विश्वास कमजोर न पड़े। प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘जून 2026 में उच्चतम न्यायालय की एआई समिति ने अदालतों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस्तेमाल से संबंधित मसौदा नियम जारी किए।’’ उन्होंने कहा कि इनमें स्पष्ट किया गया है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता न्यायिक शोध और अदालत की प्रक्रियाओं में सहायक हो सकती है, लेकिन वह न्यायिक सूझ-बूझ या निर्णय लेने की भूमिका की जगह कभी नहीं ले सकती तथा यह भूमिका हमेशा न्यायाधीश के पास ही रहनी चाहिए।
उज्बेकिस्तान की आधिकारिक यात्रा पर गए प्रधान न्यायाधीश ने एक अन्य कार्यक्रम में ‘न्याय का डिजिटलीकरण : भारत के उच्चतम न्यायालय की दिशा’ विषय पर भी संबोधन दिया। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि न्याय के डिजिटलीकरण की प्रक्रिया को स्वतंत्रता, समानता और न्याय तक पहुंच की संवैधानिक गारंटी के अनुरूप ही आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi







