Stock Market Crash: बाजार खुलते ही Sensex में 850 अंक की गिरावट, Nifty 23,000 के नीचे; निवेशकों में हड़कंप
Stock Market Crash: सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में तेज बिकवाली देखने को मिली। सोमवार सुबह कारोबार शुरू होते ही Sensex और Nifty दबाव में आ गए। Sensex में करीब 850 अंकों तक की गिरावट देखी गई, जबकि Nifty 23,000 के अहम स्तर के नीचे फिसल गया। बाजार में कमजोरी के पीछे कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, अमेरिका-ईरान तनाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली जैसे कारण बताए जा रहे हैं।
बाजार खुलते ही Sensex-Nifty में तेज गिरावट
सोमवार को कारोबार की शुरुआत कमजोर रही। BSE Sensex शुक्रवार के 73,895.74 के स्तर से 73,734 के आसपास खुला और शुरुआती कारोबार में गिरावट बढ़ गई। कुछ ही देर में सेंसेक्स 73,000 के स्तर से नीचे चला गया और करीब 850 अंक तक फिसलता दिखाई दिया।
NSE Nifty 50 भी दबाव में रहा। शुक्रवार को 23,140.50 पर बंद हुआ निफ्टी सोमवार को 23,000 के नीचे चला गया। शुरुआती कारोबार में इंडेक्स करीब 22,900 के आसपास कारोबार करता नजर आया।
बैंकिंग और IT शेयरों पर भी दबाव
बाजार में बिकवाली का असर कई प्रमुख सेक्टरों में दिखाई दिया। बैंकिंग और आईटी शेयरों में दबाव ने प्रमुख इंडेक्स की गिरावट को और बढ़ाया। इससे पहले भी बाजार में लगातार कमजोरी के बीच विदेशी निवेशकों की बिकवाली और महंगे कच्चे तेल को प्रमुख चिंता के तौर पर देखा जा रहा था।
आपके मूल ड्राफ्ट में दिए गए ₹6 लाख करोड़ से ज्यादा मार्केट-कैप घटने के आंकड़े को प्रकाशित करने से पहले उसी समय के BSE market-cap डेटा से दोबारा मिलाना बेहतर रहेगा, क्योंकि शुरुआती कारोबार में यह आंकड़ा लगातार बदलता है।
क्यों गिर रहा है शेयर बाजार?
बाजार की ताजा गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजहों में अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल शामिल है। सोमवार को रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की उस पहल को खारिज कर दिया, जिसमें संघर्ष खत्म करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का प्रस्ताव शामिल था। इसके बाद तेल बाजार में फिर दबाव बढ़ा।
Brent crude शुरुआती कारोबार में करीब $106 प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। भारत के लिए महंगा कच्चा तेल चिंता का विषय है, क्योंकि इससे आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ सकता है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी बनी चिंता
भारतीय बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली भी सेंटीमेंट पर असर डाल रही है। 25 सितंबर को विदेशी निवेशकों ने करीब ₹3,693.93 करोड़ की बिकवाली की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने करीब ₹2,838 करोड़ की खरीदारी की थी। सितंबर में अब तक FII की बिकवाली भी काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच चुकी है।
इससे पहले 25 सितंबर को खत्म सप्ताह में Sensex 0.54% और Nifty 0.88% नीचे रहा था। दोनों बेंचमार्क लगातार सातवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुए थे।
टाटा संस ने खारिज कीं नोएल की आपत्तियां: चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को बताया वैध, बोर्ड के बहुमत फैसले पर कंपनी कायम
मुंबई। टाटा संस ने टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा की आपत्तियों को खारिज करते हुए एन. चंद्रशेखरन की दोबारा चेयरमैन नियुक्ति को वैध बताया है। कंपनी ने कहा कि बोर्ड ने बहुमत से प्रस्ताव पारित कर चंद्रशेखरन को उनके मौजूदा कार्यकाल की समाप्ति के बाद फिर से चेयरमैन नियुक्त करने का निर्णय लिया है। 24 सितंबर को नोएल टाटा को भेजे गए पत्र में टाटा संस ने स्पष्ट किया कि एओए के अनुच्छेद 118 में दी गई विशेष चयन प्रक्रिया केवल नए चेयरमैन की पहली नियुक्ति के लिए है। मौजूदा चेयरमैन की पुनर्नियुक्ति पर यह प्रक्रिया लागू नहीं होती। कंपनी ने कहा कि उसने इस संबंध में कानूनी सलाह लेने के बाद ही निर्णय किया है।
आर्टिकल 118 की व्याख्या पर विवाद
विवाद का मुख्य मुद्दा कंपनी के एओए का अनुच्छेद 118 है। इसके तहत यदि टाटा ट्रस्ट्स के पास कंपनी की चुकता सामान्य शेयर पूंजी का कम से कम 40 प्रतिशत हिस्सा है, तो नए चेयरमैन के चयन के लिए विशेष प्रक्रिया अपनाई जाती है। इसमें सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट के नामित सदस्यों सहित अन्य निर्धारित सदस्यों की चयन समिति उम्मीदवार का चयन करती है। इसके बाद बोर्ड समिति की सिफारिश के आधार पर नियुक्ति करता है। चेयरमैन को हटाने के लिए भी इसी प्रक्रिया का प्रावधान है। टाटा संस के मुताबिक, यह व्यवस्था पहले से पद पर मौजूद चेयरमैन को दोबारा नियुक्त करने के मामले में लागू नहीं होती।
पूर्व न्यायाधीशों की राय का भी दिया हवाला
कंपनी ने बताया कि बोर्ड की बहुमत से पारित नियुक्ति के समर्थन में वरिष्ठ अधिवक्ता सुदीप्तो सरकार की कानूनी राय पहले ही साझा की गई थी। नोएल टाटा की आपत्तियों के बाद कंपनी ने पूर्व प्रधान न्यायाधीश उदय उमेश ललित और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बीएन श्रीकृष्ण से भी कानूनी राय मांगी। टाटा संस ने पत्र में कहा कि दोनों न्यायविदों की राय वरिष्ठ अधिवक्ता सुदीप्तो सरकार की राय के समान है। कंपनी के अनुसार, इन रायों से बोर्ड की बैठक में पारित प्रस्ताव की वैधता की पुष्टि होती है। दोनों की राय की प्रतियां भी नोएल टाटा को भेजे गए पत्र के साथ संलग्न की गई हैं।
एजीएम में कोरम नहीं होने पर बैठक स्थगित
टाटा संस ने 18 अगस्त को बुलाई गई वार्षिक आम बैठक (एजीएम) के स्थगित होने पर भी अपना पक्ष रखा। कंपनी के मुताबिक, टाटा ट्रस्ट्स अनुच्छेद 86 के तहत जरूरी संयुक्त अधिकृत प्रतिनिधि नामित नहीं कर सके थे। इस वजह से बैठक के लिए निर्धारित कोरम पूरा नहीं हुआ और उसे स्थगित करना पड़ा। अनुच्छेद 86 के अनुसार, आम बैठक के लिए जरूरी सदस्यों की व्यक्तिगत उपस्थिति के साथ सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट की ओर से संयुक्त रूप से नामित कम से कम एक अधिकृत प्रतिनिधि की मौजूदगी भी आवश्यक है। कंपनी ने 17 सितंबर को बोर्ड द्वारा पारित प्रस्ताव को स्थगित एजीएम से जोड़ने की दलील को अनुचित बताया है।
निदेशक पद पर रहने के लिए अलग प्रक्रिया
चंद्रशेखरन के निदेशक के रूप में आगे बने रहने के सवाल पर टाटा संस ने कहा कि कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 152 के तहत आम बैठक बुलाई जाएगी। इसमें शेयरधारक उनके निदेशक पद पर बने रहने के प्रस्ताव पर विचार करेंगे। यानी चेयरमैन के रूप में पुनर्नियुक्ति को वैध मानने के कंपनी के फैसले और निदेशक के रूप में उनके बने रहने के प्रस्ताव को अलग-अलग प्रक्रियाओं के तहत देखा जाएगा। टाटा संस के इस पत्र पर कंपनी के सचिव सुप्रकाश मुखोपाध्याय ने हस्ताक्षर किए हैं। इसकी प्रतियां कंपनी के सभी निदेशकों को भी भेजी गई हैं। इस तरह कंपनी ने चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए नोएल टाटा की आपत्तियों के जवाब में बोर्ड के फैसले और कानूनी सलाह को आधार बनाया है।
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