टाटा संस ने खारिज कीं नोएल की आपत्तियां: चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को बताया वैध, बोर्ड के बहुमत फैसले पर कंपनी कायम
मुंबई। टाटा संस ने टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा की आपत्तियों को खारिज करते हुए एन. चंद्रशेखरन की दोबारा चेयरमैन नियुक्ति को वैध बताया है। कंपनी ने कहा कि बोर्ड ने बहुमत से प्रस्ताव पारित कर चंद्रशेखरन को उनके मौजूदा कार्यकाल की समाप्ति के बाद फिर से चेयरमैन नियुक्त करने का निर्णय लिया है। 24 सितंबर को नोएल टाटा को भेजे गए पत्र में टाटा संस ने स्पष्ट किया कि एओए के अनुच्छेद 118 में दी गई विशेष चयन प्रक्रिया केवल नए चेयरमैन की पहली नियुक्ति के लिए है। मौजूदा चेयरमैन की पुनर्नियुक्ति पर यह प्रक्रिया लागू नहीं होती। कंपनी ने कहा कि उसने इस संबंध में कानूनी सलाह लेने के बाद ही निर्णय किया है।
आर्टिकल 118 की व्याख्या पर विवाद
विवाद का मुख्य मुद्दा कंपनी के एओए का अनुच्छेद 118 है। इसके तहत यदि टाटा ट्रस्ट्स के पास कंपनी की चुकता सामान्य शेयर पूंजी का कम से कम 40 प्रतिशत हिस्सा है, तो नए चेयरमैन के चयन के लिए विशेष प्रक्रिया अपनाई जाती है। इसमें सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट के नामित सदस्यों सहित अन्य निर्धारित सदस्यों की चयन समिति उम्मीदवार का चयन करती है। इसके बाद बोर्ड समिति की सिफारिश के आधार पर नियुक्ति करता है। चेयरमैन को हटाने के लिए भी इसी प्रक्रिया का प्रावधान है। टाटा संस के मुताबिक, यह व्यवस्था पहले से पद पर मौजूद चेयरमैन को दोबारा नियुक्त करने के मामले में लागू नहीं होती।
पूर्व न्यायाधीशों की राय का भी दिया हवाला
कंपनी ने बताया कि बोर्ड की बहुमत से पारित नियुक्ति के समर्थन में वरिष्ठ अधिवक्ता सुदीप्तो सरकार की कानूनी राय पहले ही साझा की गई थी। नोएल टाटा की आपत्तियों के बाद कंपनी ने पूर्व प्रधान न्यायाधीश उदय उमेश ललित और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बीएन श्रीकृष्ण से भी कानूनी राय मांगी। टाटा संस ने पत्र में कहा कि दोनों न्यायविदों की राय वरिष्ठ अधिवक्ता सुदीप्तो सरकार की राय के समान है। कंपनी के अनुसार, इन रायों से बोर्ड की बैठक में पारित प्रस्ताव की वैधता की पुष्टि होती है। दोनों की राय की प्रतियां भी नोएल टाटा को भेजे गए पत्र के साथ संलग्न की गई हैं।
एजीएम में कोरम नहीं होने पर बैठक स्थगित
टाटा संस ने 18 अगस्त को बुलाई गई वार्षिक आम बैठक (एजीएम) के स्थगित होने पर भी अपना पक्ष रखा। कंपनी के मुताबिक, टाटा ट्रस्ट्स अनुच्छेद 86 के तहत जरूरी संयुक्त अधिकृत प्रतिनिधि नामित नहीं कर सके थे। इस वजह से बैठक के लिए निर्धारित कोरम पूरा नहीं हुआ और उसे स्थगित करना पड़ा। अनुच्छेद 86 के अनुसार, आम बैठक के लिए जरूरी सदस्यों की व्यक्तिगत उपस्थिति के साथ सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट की ओर से संयुक्त रूप से नामित कम से कम एक अधिकृत प्रतिनिधि की मौजूदगी भी आवश्यक है। कंपनी ने 17 सितंबर को बोर्ड द्वारा पारित प्रस्ताव को स्थगित एजीएम से जोड़ने की दलील को अनुचित बताया है।
निदेशक पद पर रहने के लिए अलग प्रक्रिया
चंद्रशेखरन के निदेशक के रूप में आगे बने रहने के सवाल पर टाटा संस ने कहा कि कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 152 के तहत आम बैठक बुलाई जाएगी। इसमें शेयरधारक उनके निदेशक पद पर बने रहने के प्रस्ताव पर विचार करेंगे। यानी चेयरमैन के रूप में पुनर्नियुक्ति को वैध मानने के कंपनी के फैसले और निदेशक के रूप में उनके बने रहने के प्रस्ताव को अलग-अलग प्रक्रियाओं के तहत देखा जाएगा। टाटा संस के इस पत्र पर कंपनी के सचिव सुप्रकाश मुखोपाध्याय ने हस्ताक्षर किए हैं। इसकी प्रतियां कंपनी के सभी निदेशकों को भी भेजी गई हैं। इस तरह कंपनी ने चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए नोएल टाटा की आपत्तियों के जवाब में बोर्ड के फैसले और कानूनी सलाह को आधार बनाया है।
अमेरिका का ‘इकोनॉमिक डी-डे’ शुरू: ईरान से खाड़ी देशों की सभी उड़ानें रद्द, सऊदी अरब ने हूती विद्रोहियों की 6 मिसाइलें रोकीं
दुबई/रियाद। ईरान से खाड़ी देशों के लिए संचालित उड़ानें गुरुवार को रद्द कर दी गईं। यह घटनाक्रम ऐसे समय देखने को मिला जब ईरानी एयरलाइंस के साथ काम करने वाली दुनिया भर की कंपनियों के लिए अमेरिका की तय समयसीमा समाप्त हो गई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इसे अपनी नई आर्थिक रणनीति का “इकोनॉमिक डी-डे” बता चुके हैं। उधर, सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच संघर्ष जारी है। सऊदी अरब ने अपने बयान में बताया है कि उसने यमन के हूती विद्रोहियों की ओर से दागी गई छह बैलिस्टिक मिसाइलों को रास्ते में ही नष्ट कर दिया है।
ईरानी एयरलाइंस पर अमेरिकी दबाव बढ़ा
प्रतिबंधों के तहत केवल ईरानी कंपनियों को निशाना बनाने के बजाय उन तीसरे देशों की कंपनियों पर भी निशाना है, जो ईरानी कंपनियों के साथ कारोबार करती हैं। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने दुनिया भर की कंपनियों को 23 सितंबर तक ईरानी एयरलाइंस के साथ कारोबार बंद करने का समय दिया था। वॉशिंगटन का घोषित उद्देश्य ईरान के पूरे वैश्विक नागरिक विमान बेड़े को उड़ान भरने से रोकना है। ट्रंप ने पिछले महीने इस रणनीति की तुलना द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नाजी नियंत्रण वाले फ्रांस पर अमेरिका और उसके सहयोगियों के हमले से करते हुए इसे इकोनॉमिक डी-डे नाम दिया है।
खाड़ी देशों की उड़ानों पर असर
अमेरिकी समयसीमा समाप्त होने के बाद ईरान से दुबई सहित खाड़ी क्षेत्र के प्रमुख गंतव्यों के लिए उड़ानों पर असर दिखाई दिया। संयुक्त अरब अमीरात के लिए सभी उड़ानें आधी रात से ही रोक दी गईं। हालांकि, किसी खाड़ी देश ने तत्काल सार्वजनिक रूप से यह घोषणा नहीं की कि उसने अमेरिकी आदेश के तहत ईरानी उड़ानें बंद की हैं। गुरुवार को दुबई और अबूधाबी हवाईअड्डों की वेबसाइटों पर ईरान से आने या वहां जाने वाली कोई उड़ान दिखाई नहीं दी। ईरान की दो एयरलाइंस किश्म एयर और वारेश एयर की वेबसाइटों पर भी यूएई की उड़ानों को रद्द बताया गया है।
ईरान की पड़ोसी देशों को चेतावनी
बता दें ईरान ने बुधवार को चेतावनी दी थी कि यदि उसके पड़ोसी देश अमेरिकी उड़ान प्रतिबंधों का पालन करते हैं तो वह जवाबी कार्रवाई कर सकता है। इसी दौरान सऊदी अरब ने बताया कि उसने हूती लड़ाकों की ओर से दागी गई छह बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराया है। यमन के ईरान समर्थित हूती लड़ाकों और सऊदी अरब के बीच बढ़ता संघर्ष इस महीने व्यापक मध्य-पूर्व युद्ध में एक प्रमुख मोर्चे के रूप में उभरा है। अमेरिका नई रणनीति में ईरान पर सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ आर्थिक और वित्तीय दबाव बढ़ाने पर जोर दे रहा है।
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