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जामुन का ऑर्गेनिक सिरका, 90 दिनों की मेहनत से होता है तैयार, शुगर और लीवर के मरीजों के लिए फायदेमंद

Organic Jamun Vinegar: मुरादाबाद के एक छोटे गांव के किसान अमित देवल ने ऑर्गेनिक खेती की दिशा में नई पहल करते हुए जामुन का ऑर्गेनिक सिरका तैयार किया है. जिसकी जमकर मांग आ रही है. अमित ने बिना किसी रसायन के वर्मी कंपोस्ट, केंचुआ खाद और जीवामृत से जामुन की खेती की और उसी से सिरका बनाया. उन्होंने बताया कि जामुन का सीजन आते ही ताजे फल तोड़कर सिरका बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है जो 90 से 120 दिन तक चलती है. इस दौरान सिरके को पूरी तरह पैक रखकर बिना खोले रखा जाता है. जामुन का यह सिरका शुगर और लीवर के लिए लाभकारी माना जाता है. इसलिए स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों में इसकी अच्छी मांग है. मुरादाबाद से लेकर दिल्ली, उत्तराखंड, मुंबई और विदेशों तक इसकी बिक्री हो रही है. जिससे किसान को अच्छा मुनाफा मिल रहा है.

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गांव वालों ने बनाया करोड़ों का स्कूल, सरकार को देंगे:बरामदे में बैठकर पढ़ते थे बच्चे, बाथरूम तक नहीं था; अगले महीने होगा उद्घाटन

गांव के बच्चों के लिए स्कूल भवन छोटा पड़ने लगा तो ग्रामीणों ने नई बिल्डिंग बनाने की मांग की। सरकार ने जमीन दी, लेकिन बजट अटक गया। हालात ऐसे थे कि बच्चों को बरामदे में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती थी। बाथरूम तक नहीं था। ऐसे में गांव की सरपंच के ससुर और ग्रामीणों ने मिलकर निर्णय लिया कि वे खुद के दम पर स्कूल बनाएंगे। स्कूल से पासआउट पुराने स्टूडेंट्स, प्रवासी और गांव के लोगों से करीब 4.50 करोड़ चंदा इकट्‌ठा किया और बच्चों के लिए भव्य स्कूल बना दिया। जालोर जिले से 18 किलोमीटर दूर नरसाणा गांव में साढ़े चार साल में 21 कमरों और इंडोर स्टेडियम के साथ यह सीनियर सेकेंडरी स्कूल बनकर तैयार है। इसका फरवरी में उद्घाटन होगा। पढ़िए कैसे गांव के लोगों ने चंदा इकट्‌ठा कर बनाया दो मंजिला स्कूल... पहले सात कमरों में चलता था स्कूल नरसाणा गांव की सरपंच दुर्गा कंवर के ससुर और पूर्व एडिशनल बीडीओ जसवंत सिंंह ने बताया- गांव के बीच में 100*100 वर्ग फीट जमीन पर स्कूल है। इसमें 7 कमरे हैं जबकि स्टूडेंट 450 हैं। इन 7 कमरों में भी एक प्रिंसिपल का रूम और एक स्टोर रूम है। 5 कमरों में स्टूडेंट पढ़ते है। अन्य बच्चों की कक्षाएं बरामदे में लगती हैं। 15 साल से गांव के लोग स्कूल के नए भवन की मांग कर रहे थे। ऐसे में सरकार ने एक बार एक रूम बनाकर दिया। लेकिन, साढ़े चार साल पहले जब बच्चों की संख्या बढ़ने लगी तो परेशानी भी बढ़ने लगी। हालात ये थे कि बाथरूम के लिए तक जगह नहीं थी। इसके बाद सरकार की ओर से 5 बीघा जमीन अलॉट हो गई, लेकिन निर्माण के लिए बजट अटक गया। ऐसे में साल 2021 में गांव के लोगों के साथ मंदिर में एक बैठक ली। प्रस्ताव रखा कि क्यों न गांव के लोग चंदा इकट्‌ठा कर अपने स्तर पर स्कूल का निर्माण करवाएं। हर घर से ​चंदा लिया, प्रवासी परिवार भी आगे आए जसवंत सिंह ने बताया कि गांव की आबादी करीब 2500 है। मंदिर में दोबारा बैठक बुलाई गई और तय किया गया कि गांव के कई लोग इस स्कूल से पढ़े हुए हैं। ऐसे में पूर्व स्टूडेंट और प्रवासी परिवारों को भी इससे जोड़ा गया। शुरुआत में चंदा कम आया तो काफी परेशानी हुई। लेकिन, जब लोगों को पता चला कि ये बच्चों के लिए किया जा रहा है ​तो धीरे-धीरे लोग जुड़े। गांव के हर घर से चंदा लिया गया। गांव के 100 से ज्यादा लोगों ने 51 हजार, 7 लाख और 21 लाख तक का चंदा दिया। इस तरह इकट्‌ठा हुए करीब 4.50 करोड़ रुपए से इस स्कूल को बनवाया गया। इतना ही नहीं, ग्रामीणों ने भूमि पूजन के लिए तत्कालीन सांसद देवजी पटेल को बुलाया। तब उन्होंने भी ग्रामीणों के इस सहयोग की सराहना की और 2 रूम बनाने के लिए 15 लाख का चंदा दिया। 2 मंजिला स्कूल में 21 कमरे और इंडोर स्टेडियम इस दो मंजिला स्कूल में 21 कमरे और 2 बड़े हॉल हैं। एक अंडरग्राउंड इंडोर स्टेडियम है। छोटे बच्चों के लिए भी प्ले एरिया बनवाया है। इसमें झूलों के साथ खिलौने भी रखे जाएंगे। जसवंत सिंह ने दावा किया कि प्रदेश का यह पहला स्कूल है, जिसे ग्रामीणों ने मिलकर बनाया है। लेकिन, इस पर नाम और अधिकार दोनों सरकार के ही रहेंगे। वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाया, 10 हजार लीटर पानी स्टोर होगा जसवंत सिंह ने बताया कि गांव में पानी की समस्या भी है। ऐसे में स्कूल में वाटर हॉर्वेस्टिंग सिस्टम बनाया गया है। इसमें करीब 10 हजार लीटर बारिश का पानी स्टोर होगा। वहीं विज्ञान शाला लैब में साइंस से जुड़े एक्सपेरिमेंट समेत अन्य प्रोजेक्ट बताए जाएंगे। स्कूल में करीब 50 लाख का फर्नीचर लगाया गया है। महिलाएं कर रहीं साफ-सफाई और सजावट इस स्कूल से पूरे गांव को लगाव है। गांव की महिलाओं को जब पता चला कि फरवरी में इसका उद्घाटन होना है और सफाई बाकी है तो महिलाएं आगे आईं। वे रोजाना एक से दो घंटे स्कूल में जाकर अपने स्तर पर सफाई और सजावट भी करती हैं। अगले महीने स्कूल का उद्घाटन किया जाएगा। इसके लिए ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, डिप्टी सीएम दीया कुमारी व प्रेमचंद बैरवा और मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग को स्कूल के उद्घाटन के लिए न्योता दिया है। प्रिंसिपल बोले- अब बच्चे आराम से पढ़ सकेंगे ग्रामीण सावलाराम ने बताया कि 2021 में सरपंच के चुनाव हुए। जसवंत सिंह की पुत्रवधू सरपंच बनी। लंबे समय से ग्रामीणों की मांग के बाद भी स्कूल भवन नहीं मिला। इस पर सरपंच समेत सभी ने स्कूल भवन बनाने की सोची तो उनके ससुर जसवंत सिंह ने चंदा एकत्रित कर बनाने पहल की और आज ये स्कूल बनकर तैयार है। ड्रोन सहयोग: हुकमीचंद सोलंकी ... यह खबर भी पढ़ें... अमेरिकी डॉक्टर ने बनवाया संसद भवन जैसा स्कूल:जहां जमीन में बैठकर पढ़े, वहां बनवाई 7 करोड़ की बिल्डिंग; मां ने दिया था सुझाव राजस्थान के जालोर में संसद भवन की तरह दिखने वाली एक खास स्कूल बिल्डिंग का उद्घाटन हुआ। सरकारी स्कूल की यह नई बिल्डिंग अमेरिकी NRI डॉक्टर अशोक जैन ने बनवाई है। (पूरी खबर पढ़ें)

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  Sports

Cricket Rules: टेस्ट क्रिकेट में सफेद जुराब ही क्यों पहनते हैं खिलाड़ी?

Cricket Rules: टेस्ट क्रिकेट में ड्रेस कोड के नियम काफी सख्त माने जाते हैं, जिसमें खिलाड़ियों की ओर से पहनने जाने वाले जुराब (socks) भी शामिल हैं. इस नियम को तोड़ने पर खिलाड़ियों को कड़ी सजा का सामना करना पड़ सकता है. Fri, 30 Jan 2026 19:21:43 +0530

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