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कार-बाइक छोड़िए, इन इलेक्ट्रिक स्कूटर्स से पहुंचें ऋषिकेश, मिलेगी दमदार रेंज

इलेक्ट्रिक स्कूटर अब केवल शहर के छोटे सफर तक सीमित नहीं रह गए हैं। बेहतर बैटरी क्षमता और लंबी रेंज के साथ बाजार में ऐसे कई मॉडल मौजूद हैं, जिन्हें लंबी दूरी की यात्रा के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है। यही वजह है कि अब EV यूजर्स के बीच रोड ट्रिप को लेकर भी दिलचस्पी बढ़ रही है।

दिल्ली से ऋषिकेश की दूरी करीब 260 किलोमीटर है। ऐसे में अगर आपके पास लंबी रेंज वाला इलेक्ट्रिक स्कूटर है, तो फुल चार्ज बैटरी के साथ यह सफर पूरा करना संभव हो सकता है। हालांकि वास्तविक रेंज सड़क, ट्रैफिक, स्पीड, वजन और मौसम जैसी परिस्थितियों पर निर्भर करती है।

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260KM का सफर, अब EV से भी मुमकिन

कुछ साल पहले इलेक्ट्रिक स्कूटर मुख्य रूप से शहर के भीतर आने-जाने के लिए पसंद किए जाते थे। कम बैटरी क्षमता और सीमित रेंज के कारण लंबी दूरी की यात्रा चुनौतीपूर्ण होती थी। अब 300 किलोमीटर से ज्यादा दावा की गई रेंज वाले स्कूटर बाजार में मौजूद हैं, जिससे लंबी दूरी के सफर का विकल्प खुल गया है।

Komaki SE Ultra: 418KM की जबरदस्त रेंज

लंबी रेंज वाले इलेक्ट्रिक स्कूटरों की सूची में Komaki SE Ultra प्रमुख नाम है। इसमें 7.2 kWh की बैटरी दी गई है और कंपनी के अनुसार यह सिंगल चार्ज में 418 किलोमीटर तक की रेंज देता है। इस दावे के आधार पर दिल्ली से ऋषिकेश का सफर एक चार्ज में पूरा किया जा सकता है और बैटरी में कुछ रेंज शेष भी रह सकती है। स्कूटर में LED फ्रंट लाइट्स, LED DRLs, एंटी-स्किड टेक्नोलॉजी, पार्किंग असिस्ट और रिवर्स असिस्ट जैसे फीचर्स मिलते हैं।

Simple Ultra: स्पीड के साथ लंबी रेंज

Simple Ultra भी लंबी दूरी के लिए आकर्षक विकल्प है। इसमें 6.5 kWh बैटरी दी गई है और यह 400 किलोमीटर तक की रेंज का दावा करता है। इसकी टॉप स्पीड 115 km/h है। कंपनी के अनुसार यह 0-40 km/h की रफ्तार 2.77 सेकंड में पकड़ सकता है। 0 से 80 प्रतिशत चार्ज होने में करीब 2 घंटे 15 मिनट लगते हैं।

Komaki XR7: 322KM रेंज और बड़ा बूट

Komaki XR7 करीब 322 किलोमीटर की दावा की गई रेंज के साथ आता है। इसकी टॉप स्पीड 55 km/h है। इसमें 35 लीटर का बूट स्पेस मिलता है, जो रोड ट्रिप के दौरान सामान रखने के लिए उपयोगी हो सकता है। स्कूटर में 12-इंच के व्हील्स और डिस्क ब्रेक्स भी दिए गए हैं।

Ola S1 X+: 125 km/h की टॉप स्पीड

Ola S1 X+ का 5.2 kWh बैटरी वाला वेरिएंट 320 किलोमीटर तक की रेंज का दावा करता है। इसकी टॉप स्पीड 125 km/h है। इस रेंज के आधार पर यह भी दिल्ली से ऋषिकेश की दूरी एक बार फुल चार्ज करने पर तय करने में सक्षम हो सकता है।

सफर से पहले रेंज जरूर जांचें

हालांकि कंपनियों द्वारा बताई गई रेंज आदर्श परिस्थितियों में प्राप्त हो सकती है। हाईवे पर लगातार तेज रफ्तार, चढ़ाई, अतिरिक्त वजन और मौसम वास्तविक रेंज को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए दिल्ली से ऋषिकेश जैसी यात्रा पर निकलने से पहले बैटरी प्रतिशत, चार्जिंग विकल्प और रूट की स्थिति जरूर जांचना बेहतर रहेगा।

- डॉ. अनिमेष शर्मा

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Pakistan के भीतर जाकर भारत ने किया आतंकवाद पर करारा प्रहार! Islamabad में SCO Meeting Attend कर India ने चल दिया बड़ा दाँव

भले ही भारत और पाकिस्तान के बीच दुश्मनी की तलवारें खिंची हुई हों, भले ही हाल ही में संयुक्त राष्ट्र महासभा के वार्षिक सत्र के दौरान दोनों देशों के बीच चले वाकयुद्ध को पूरी दुनिया ने देखा हो, लेकिन भारत ने पाकिस्तान की अध्यक्षता में हुई शंघाई सहयोग संगठन यानि एससीओ की राष्ट्रीय समन्वयक बैठक में हिस्सा लेकर दुनिया को एक बड़ा कूटनीतिक संदेश दे दिया है। 28 से 30 सितंबर तक इस्लामाबाद में हो रही इस बैठक में भारत की ओर से संयुक्त सचिव आलोक डिमरी प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। पाकिस्तान की 2026-27 की अध्यक्षता में यह पहली बड़ी बैठक है, जिसमें संगठन के आगामी कार्यक्रमों और बैठकों का कैलेंडर तय किया जाना है। भारत की इस भागीदारी ने साफ कर दिया है कि नई दिल्ली बहुपक्षीय मंचों से पीछे हटने की बजाय वहां अपनी रणनीतिक मौजूदगी और प्रभाव को और मजबूत करने की नीति पर आगे बढ़ रही है। साथ ही, आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भारत का कड़ा रुख भी बरकरार है।

हम आपको बता दें कि पाकिस्तान ने अपनी अध्यक्षता के लिए ‘दृष्टि को कार्रवाई में बदलना: संपर्क, नवाचार और साझा समृद्धि’ का विषय चुना है। इस एजेंडे के जरिए इस्लामाबाद क्षेत्रीय संपर्क, आर्थिक सहयोग, नवाचार और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने का संदेश देना चाहता है। लेकिन पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ी चुनौती यही है कि जिस मंच को वह अपनी कूटनीतिक सक्रियता दिखाने के अवसर के रूप में पेश कर रहा है, उसी मंच पर भारत लगातार आतंकवाद के प्रश्न को केंद्रीय सुरक्षा मुद्दे के रूप में सामने रखता आया है।

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उल्लेखनीय है कि भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय स्तर पर लंबे समय से कोई सार्थक व्यापक संवाद नहीं है। इसके बावजूद भारत ने शंघाई सहयोग संगठन के बहुपक्षीय ढांचे को द्विपक्षीय विवादों से अलग रखा है। यही नई दिल्ली की कूटनीतिक रणनीति का महत्वपूर्ण पहलू है। पाकिस्तान के साथ सामान्य द्विपक्षीय संबंधों की बहाली और बहुपक्षीय मंच पर भारत की भागीदारी, दोनों को अलग-अलग रखा गया है।

यहीं पाकिस्तान की कूटनीतिक चुनौती स्पष्ट होती है। इस्लामाबाद को एससीओ की अध्यक्षता मिली है, लेकिन भारत के साथ उसके संबंधों में वह परिस्थितियां अब भी मौजूद हैं जिनके कारण व्यापक द्विपक्षीय संवाद बंद पड़ा है। इसके बावजूद भारत पाकिस्तान की मेजबानी में होने वाली संगठनात्मक बैठकों में भाग लेकर यह संदेश दे रहा है कि बहुपक्षीय संस्थाओं को बंधक बनाकर द्विपक्षीय विवादों का समाधान नहीं किया जा सकता।

हम आपको यह भी बता दें कि भारत के एजेंडे में आतंकवाद का मुद्दा एक बार फिर सबसे ऊपर रहने वाला है। खास बात यह है कि इस बार जवाब पाकिस्तान की जमीन पर, उसी के मंच पर दिया जाएगा। पाकिस्तान जब एससीओ के क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी ढांचे की अध्यक्षता कर रहा है, तब भारत के लिए यह मंच इस्लामाबाद को आतंकवाद के सवाल पर सीधे घेरने का महत्वपूर्ण अवसर है। नई दिल्ली लगातार आतंकवाद, उग्रवाद और अलगाववाद के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई की मांग करती रही है। साथ ही भारत सीमा पार आतंकवाद तथा संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के खिलाफ ठोस कार्रवाई को पाकिस्तान के साथ संबंध सुधारने की बुनियादी शर्त मानता है। ऐसे में एससीओ के मंच से पाकिस्तान में ही आतंकवाद का मुद्दा उठाना इस्लामाबाद के लिए कहीं अधिक कड़ा कूटनीतिक संदेश होगा।

साथ ही कनेक्टिविटी के सवाल पर भी भारत की स्थिति स्पष्ट है। नई दिल्ली एससीओ के संपर्क और क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग से जुड़े प्रयासों का समर्थन करती है, लेकिन उसकी स्पष्ट शर्त है कि ऐसी कोई भी परियोजना सदस्य देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन नहीं कर सकती। यानी भारत संपर्क के खिलाफ नहीं है, बल्कि वह संपर्क के नाम पर विवादित क्षेत्रों अथवा संप्रभुता से जुड़े सिद्धांतों को दरकिनार करने के खिलाफ अपनी स्थिति कायम रखता है।

भारत की यही नीति पिछले वर्षों में भी दिखाई दी है। 2017 में एससीओ का पूर्ण सदस्य बनने के बाद भारत ने संगठन की विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी की। अक्टूबर 2024 में विदेश मंत्री एस. जयशंकर पाकिस्तान में एससीओ के शासनाध्यक्षों की बैठक में शामिल हुए थे। जुलाई 2026 में भी भारतीय प्रतिनिधिमंडल सीमा सुरक्षा से जुड़े एससीओ कार्यक्रम के लिए इस्लामाबाद गया था। भारतीय अधिकारी एससीओ के आतंकवाद-रोधी ढांचे से जुड़े अभ्यासों और विशेषज्ञ बैठकों में भी भाग लेते रहे हैं।

अब नजर 2027 पर है। पाकिस्तान अगस्त 2027 में इस्लामाबाद में एससीओ राष्ट्राध्यक्ष शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। पाकिस्तान ने संकेत दिया है कि संगठन के सभी सदस्य देशों के नेताओं को निमंत्रण दिया जाएगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल होंगे। लेकिन निमंत्रण मिलना और प्रधानमंत्री का पाकिस्तान जाना दो अलग-अलग विषय हैं।

हम आपको यह भी बता दें कि शंघाई सहयोग संगठन की स्थापना 2001 में चीन, रूस, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने की थी। भारत और पाकिस्तान 2017 में पूर्ण सदस्य बने थे। बाद में ईरान और बेलारूस भी इसमें शामिल हुए। संगठन का दायरा सुरक्षा से लेकर आर्थिक सहयोग, क्षेत्रीय संपर्क और आतंकवाद, अलगाववाद तथा उग्रवाद के खिलाफ सहयोग तक फैला हुआ है।

बहरहाल, इस्लामाबाद की बैठक महज एक प्रशासनिक बैठक नहीं है। पाकिस्तान इसे अपनी अध्यक्षता के प्रभाव को स्थापित करने के अवसर के रूप में देख रहा है, जबकि भारत इसी मंच का इस्तेमाल अपनी सुरक्षा प्राथमिकताओं, आतंकवाद-विरोधी दृष्टिकोण और क्षेत्रीय संपर्क संबंधी सिद्धांतों को मजबूती से रखने के लिए कर रहा है। पाकिस्तान के सामने चुनौती यह है कि संगठन की अध्यक्षता उसके हाथ में होने के बावजूद भारत की भागीदारी उसकी शर्तों पर नहीं, बल्कि भारत की घोषित रणनीतिक प्राथमिकताओं के साथ आगे बढ़ रही है। यही इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण सामरिक और कूटनीतिक संदेश है।

-नीरज कुमार दुबे

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कृष्णा को रिप्लेस करेंगे सिराज, नितीश रेड्डी अंदर आकिब बाहर? वेस्टइंडीज के खिलाफ तीसरे वनडे के लिए भारत की संभावित प्लेइंग 11

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