Delhi Court ने Cyber Fraud के आरोपियों को दी Bail, गिरफ्तारी की भाषा पर उठाए सवाल
दिल्ली की एक अदालत ने 1.15 करोड़ रुपये के कथित साइबर फ्रॉड मामले में गिरफ्तार दो आरोपियों को रेगुलर ज़मानत दे दी है। अदालत ने कहा कि उन्हें हिरासत में रखने का कोई फ़ायदा नहीं है और यह भी देखा कि उनकी गिरफ़्तारी की वजह उन्हें उस भाषा में नहीं बताई गई थी जिसे वे समझते और जानते हैं। एडिशनल सेशंस जज सौरभ प्रताप सिंह लालर ने योगेशभाई और अमित गोहिल की ज़मानत अर्ज़ी मंज़ूर कर ली। इन दोनों को 2 सितंबर को गुजरात के भावनगर में गिरफ़्तार किया गया था। यह गिरफ़्तारी नई दिल्ली के स्पेशल सेल पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR के सिलसिले में हुई थी, जिसमें भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 308, 318(4), 319 और 340 के तहत अपराधों का आरोप लगाया गया था। आरोपियों की ओर से वकील सैयद कामरान अली और यूसुफ़ खान पेश हुए। अदालत ने आदेश दिया कि दोनों आवेदकों को 50,000 रुपये का पर्सनल बॉन्ड और उतनी ही राशि की एक ज़मानत (श्योरिटी) भरने पर रेगुलर ज़मानत पर रिहा किया जाए, साथ ही कुछ शर्तें भी लगाई गईं।
इसे भी पढ़ें: चलती स्लीपर बस में नाबालिग से दरिंदगी: दिल्ली पुलिस ने दाखिल की 398 पन्नों की चार्जशीट, 51 गवाह और DNA रिपोर्ट शामिल
कोर्ट ने खास तौर पर इस बात की जांच की कि आरोपी को गिरफ्तारी के आधार किस तरह बताए गए थे। कोर्ट ने देखा कि वह दस्तावेज़ हिंदी में तैयार किया गया था, जिसमें अंग्रेज़ी शब्द और बैंकिंग से जुड़ी जानकारी भी शामिल थी। दोनों आवेदकों ने गुजराती-मीडियम स्कूलों में प्राइमरी लेवल तक पढ़ाई की थी और हिंदी उनके विषयों में से एक थी। जांच अधिकारी ने कहा था कि आवेदक हिंदी समझते थे और गिरफ्तारी के आधारों की कॉपी उनके परिवार वालों को भी दी गई थी। हालांकि, कोर्ट ने इस मामले को संवैधानिक ज़रूरत के नज़रिए से देखा, जिसके तहत गिरफ्तार व्यक्ति को उसकी आज़ादी छीनने के कारणों के बारे में ठीक से जानकारी देना ज़रूरी है। पंकज बंसल बनाम भारत संघ और मिहिर राजेश शाह बनाम महाराष्ट्र राज्य जैसे सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का ज़िक्र करते हुए, कोर्ट ने कहा कि ज़रूरत सिर्फ़ गिरफ्तारी के आधार वाला दस्तावेज़ सौंपने की नहीं थी, बल्कि यह पक्का करने की भी थी कि गिरफ्तार व्यक्ति गिरफ्तारी के कारणों को असल में समझे, ताकि वह वकील से सलाह ले सके और सही कानूनी उपाय अपना सके।
इसे भी पढ़ें: चलती स्लीपर बस में नाबालिग से दरिंदगी: दिल्ली पुलिस ने दाखिल की 398 पन्नों की चार्जशीट, 51 गवाह और DNA रिपोर्ट शामिल
कोर्ट ने गिरफ्तारी वाले दिन ही 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता' की धारा 35(3) के तहत जारी नोटिस के मामले पर भी विचार किया। कोर्ट ने 'अमनदीप सिंह जौहर बनाम दिल्ली राज्य' मामले में दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले का ज़िक्र करते हुए कहा कि इस प्रावधान में नोटिस मिलने और गिरफ्तारी के बीच कोई तय न्यूनतम समय-सीमा नहीं बताई गई है। साथ ही, कोर्ट ने यह भी माना कि साइबर और डिजिटल धोखाधड़ी की जांच में मोबाइल फोन, कंप्यूटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में मौजूद सबूत शामिल हो सकते हैं, जिन्हें डिलीट या दूर से ही मिटाया (रिमोटली वाइप) जा सकता है। इसलिए, उचित मामलों में कस्टडी में पूछताछ ज़रूरी हो सकती है। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि जांच अधिकारी को यह देखना होगा कि क्या मामले के तथ्यों के आधार पर ऐसी कस्टडी वास्तव में ज़रूरी है।
Gen-Z Trend के जरिए Akhilesh Yadav का तंज, बोले- एक कचौड़ी दो समोसा, BJP पर नहीं भरोसा
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरुवार को कहा कि भारत और उत्तर प्रदेश में सामाजिक न्याय बीजेपी-शैली की इमरजेंसी से गुज़र रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि हाशिए पर मौजूद वर्गों के ख़िलाफ़ अत्याचार हो रहे हैं और आवाज़ उठाने वालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जा रही है। अखिलेश यादव ने युवाओं के बीच लोकप्रिय हो रहे एक 'कचौड़ी, दो समोसा...' राइम का इस्तेमाल सत्ताधारी दल पर तंज कसने के लिए किया।
इसे भी पढ़ें: Punjab में Drugs के मुद्दे को वोट का सौदा न बनाए BJP, Mundra Port का जिक्र कर बोले Bajwa
सोशल मीडिया के ट्रेंड हो रहे पंक्ति को लेकर अखिलेश यादव ने नया नारा दिया। "एक कचौड़ी, दो समोसा, बीजेपी पर नहीं है भरोसा।" उन्होंने इस अनोखे अंदाज़ के ज़रिए भारतीय जनता पार्टी की नीतियों और शासन पर निशाना साधा। यादव ने पत्रकार वार्ता में कहा कि भाजपा सरकार में हर वर्ग के साथ अन्याय हो रहा है। सब लोग भाजपा को हटाने में सपा की मदद करें। आने वाले समय में पीडीए और जेन जी भाजपा का सफाया कर देंगे। जनता को भाजपा पर भरोसा नहीं है। नई पीढ़ी के लोग भाजपा से बहुत नाराज हैं, समाजवादी पार्टी नई पीढ़ी के नौकरी, रोजगार के लिए अपने घोषणा पत्र में कई चीजें शामिल करेगी। समाजवादी सरकार ने लैपटाप बांटा, आईटी सिटी बनाया, डायल 100 और अन्य सेवाओं की शुरुआत की। आने वाले समय में भी इसी तरह के काम होंगे। भविष्य में टेक्नालॉजी को जोड़कर किसान, गरीब और नई पीढ़ी के लिए काम करेंगे।
यादव ने कहा कि विकास का पैसा भाजपाइयों की जेब में जा रहा है। भ्रष्टाचार चरम पर है। नदियां नहीं साफ हुई, बजट का पैसा साफ हो गया। हालत यह है कि मुख्यमंत्री जी गोरखपुर की सड़क को ही ठीक नहीं बना पाए। गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस वे में 45 किलोमीटर में 74 गड्ढे हो गए हैं। 91 किलोमीटर का एक्सप्रेस-वे सात हजार करोड़ में बनी है, इसमें बजट की लूट हो गयी। जमकर गोरखधंधा हुआ। सपा सरकार में बना आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे आज भी बिना मेंटेनेंस के उसी तरह से चल रहा है। कहीं कोई गड्ढा नहीं है।
इसे भी पढ़ें: Urdu Festival पर BJP के विरोध के बीच बोले मंत्री UT Khader, वेन्यू बदलना प्रतिष्ठा का सवाल नहीं
अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार ने प्रदेश की बिजली व्यवस्था को बर्बाद कर दिया है। इस सरकार में एक भी यूनिट नई बिजली नहीं बनी। जब बिजली नहीं बनायी है तो मुख्यमंत्री और उनके मंत्री जहां जाएंगे, उन्हें जनता के सवालों को सुनना ही पड़ेगा। एक सवाल के जवाब में अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा को बड़े-बड़े कार्यालय बनाने की क्या जरूरत थी, भाजपा को चुनाव आयोग में ही एक फ्लोर ले लेना चाहिए। भाजपा ने संवैधानिक संस्थाओं को बर्बाद कर दिया है, लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाया। मीरापुर में महिलाओं पर पुलिस द्वारा रिवाल्वर तानने वाली तस्वीर कोई नहीं भूल सकता है। उत्तर प्रदेश में हुए सभी उपचुनाव रामपुर, मीरापुर, कुन्दरकी, बीकापुर, कटेहरी में भाजपा ने चुनाव आयोग से मिलकर बेईमानी और धांधली की। भाजपा ने टारगेट करके वोट काटा। उन्होंने कहा कि भाजपा हटेगी, तभी लोकतंत्र बचेगा। समाजवादी पार्टी पहले दिन से चुनाव आयोग की नियुक्ति के तरीके के खिलाफ हैं।
"एक कचौड़ी, दो समोसा, बीजेपी पर नहीं है भरोसा।"
• माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी pic.twitter.com/oGwhij2DTA— Samajwadi Party (@samajwadiparty) October 1, 2026
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi










