फ्लाईदुबई के को-पायलट को UAE को सौंपा गया, कप्तान पर हमले और क्रैश की कोशिश की जांच तेज
दुबाई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 में कॉकपिट के भीतर हुई एक सनसनीखेज घटना ने नागरिक उड्डयन जगत में हड़कंप मचा दिया है. उड़ान के दौरान विमान के ओमानी को-पायलट ने भारतीय मूल के कैप्टन स्मित मच्छार पर जानलेवा हमला कर दिया. प्राथमिक जांच में यह आशंका भी जताई जा रही है कि को-पायलट ने जानबूझकर विमान का नियंत्रण अपने हाथ में लेने और उसे क्रैश कराने की कोशिश की थी. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विमान की सऊदी अरब के तबूक शहर में आपातकालीन लैंडिंग कराई गई, जहां सऊदी अधिकारियों ने आरोपी को-पायलट को तुरंत हिरासत में ले लिया.
को-पायलट ने कॉकपिट के अंदर कैप्टन के साथ की थी मारपीट
घटना की सूचना मिलते ही सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात की सुरक्षा टीमों ने संयुक्त रूप से मामले की छानबीन शुरू की. सऊदी गृह मंत्रालय के आधिकारिक बयान के अनुसार, शुरुआती जांच में इस बात की पुष्टि हुई है कि को-पायलट ने कॉकपिट के अंदर कैप्टन के साथ मारपीट की थी. इस संघर्ष में दोनों पायलट घायल हो गए थे, जिसके बाद उन्हें तबूक के स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया. चिकित्सा परीक्षण में यात्रा के लिए फिट पाए जाने के बाद सऊदी अधिकारियों ने कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए आरोपी ओमानी को-पायलट को यूएई की सुरक्षा एजेंसियों के हवाले कर दिया, जिसके बाद दोनों पायलट अबू धाबी रवाना हो गए.
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यूएई में न्यायिक जांच का आदेश
संयुक्त अरब अमीरात की न्यायिक एजेंसियों ने इस अभूतपूर्व घटना की उच्चस्तरीय जांच शुरू कर दी है. जांच अधिकारी कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर और फ्लाइट डेटा के जरिए उस मुख्य वजह को खंगाल रहे हैं, जिसकी वजह से कॉकपिट में इतना गंभीर झगड़ा पैदा हुआ और विमान को अपनी दिशा बदलकर आपात स्थिति में उतारना पड़ा. यूएई के विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि इस पूरे मामले पर पैनी नजर रखी जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
इसी बीच, यूएई में भारत के राजदूत दीपक मित्तल ने अस्पताल पहुंचकर घायल कैप्टन स्मित मच्छार और उनके परिजनों से मुलाकात की. भारतीय दूतावास ने आधिकारिक रूप से जानकारी दी है कि कैप्टन मच्छार की सेहत अब स्थिर है और वे तेजी से स्वस्थ हो रहे हैं. दूतावास स्थानीय प्रशासन और एयरलाइन प्रबंधन के लगातार संपर्क में है ताकि कैप्टन को हर संभव चिकित्सा सहायता और सुरक्षा उपलब्ध कराई जा सके. फिलहाल अंतरराष्ट्रीय उड्डयन एजेंसियां इस बात की विस्तृत पड़ताल में जुटी हैं कि हवा में 35 हजार फीट की ऊंचाई पर कॉकपिट के सुरक्षा चक्र में यह बड़ी चूक कैसे हुई.
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