ठाणे MACT ने कचरा ट्रक हादसे में मृत बच्चे की मां को 5 लाख रुपये मुआवजा देने का दिया आदेश
ठाणे, एक अक्टूबर महाराष्ट्र के ठाणे जिले में मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) ने मई 2021 में नगर निकाय के कचरा ट्रक की चपेट में आने से मारे गए 12 वर्षीय बच्चे की मां को पांच लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। इस राशि पर नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होग। एमएसीटी के सदस्य आर. वी. मोहिते की अध्यक्षता वाले न्यायाधिकरण ने सोमवार को न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को मुआवजे की राशि का भुगतान करने और बाद में बीमा पॉलिसी की शर्तों के उल्लंघन के कारण पूरी राशि ट्रक के मालिक कल्याण-डोंबिवली नगर निगम (केडीएमसी) के नगर आयुक्त से वसूलने का निर्देश दिया।
मामले के अनुसार, 22 मई 2021 को अमित जगदीश धाकड़ कल्याण में एक आवासीय इमारत के सामने सड़क पर खेल रहा था, तभी तेज रफ्तार में पीछे की ओर जा रहे केडीएमसी के कचरा ट्रक ने उसे टक्कर मार दी। गंभीर चोटों के कारण उसकी मौत हो गई। केडीएमसी ने बचाव में कहा कि ट्रक का चालक निजी ठेकेदार विशाल एक्सपर्ट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड ने उपलब्ध कराया था और कोविड-19 महामारी के दौरान सरकारी प्रस्तावों के तहत वाहनों के फिटनेस प्रमाणपत्र और ड्राइविंग लाइसेंस की वैधता बढ़ाने की सलाह दी गई थी।
हालांकि, क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) के रिकॉर्ड के अनुसार ट्रक का फिटनेस प्रमाणपत्र 10 मार्च 2013 को समाप्त हो गया था और उसका नवीनीकरण नहीं हुआ था। चालक का परिवहन श्रेणी का ड्राइविंग लाइसेंस भी 13 अगस्त 2019 को समाप्त हो गया था। न्यायाधिकरण ने कहा कि 2019 में लॉकडाउन नहीं था और केडीएमसी 26 मार्च 2021 के सरकारी प्रस्ताव का लाभ नहीं उठा सकती।
उसने कहा कि वाहन चालक के पास वैध लाइसेंस और वाहन के पास वैध फिटनेस प्रमाणपत्र नहीं था, जिससे बीमा पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन हुआ। न्यायाधिकरण ने केडीएमसी को चालक के लाइसेंस का सत्यापन नहीं करने के लिए भी जिम्मेदार ठहराया। उसने 30,000 रुपये की काल्पनिक वार्षिक आय और 15 के गुणक सहित अन्य मदों के आधार पर पांच लाख रुपये मुआवजा तय किया।
बीमा कंपनी को याचिका दायर करने की तारीख से ब्याज सहित राशि एक महीने के भीतर न्यायाधिकरण के बैंक खाते में जमा करने का निर्देश दिया गया, ताकि इसे बच्चे की मां के खाते में सीधे हस्तांतरित किया जा सके।
Karnataka CEO ऑफिस के बाहर सीढ़ियों पर बैठे DK Shivakumar, न्याय मिलने तक धरने पर अड़े
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने राज्य के कई कैबिनेट मंत्रियों के साथ मिलकर गुरुवार को मुख्य चुनाव अधिकारी वी. अनबुकुमार के दफ़्तर के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने मांग की कि वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (SIR) के दौरान कथित तौर पर धोखाधड़ी से वोटरों के नाम हटाने के मामले में FIR दर्ज की जाए। शिवकुमार और मंत्री मुख्य चुनाव अधिकारी के दफ़्तर के बाहर सीढ़ियों पर बैठ गए और ज़ोर दिया कि चुनाव आयोग उन लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करे जिन्होंने कथित तौर पर वोटरों के नाम हटाने के लिए धोखाधड़ी से 'फॉर्म 7' एप्लीकेशन जमा किए थे।
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शिवकुमार ने कहा कि जब तक वे अधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हो जाते, तब तक वे चुनाव आयोग का कार्यालय नहीं छोड़ेंगे। विरोध प्रदर्शन के दौरान शिवकुमार ने कहा कि जब तक मुझे न्याय नहीं मिल जाता, मैं इंतज़ार करूँगा। मैं इंतज़ार करता रहूँगा। उन्होंने आगे कहा कि जहां तक कर्नाटक की बात है, नए SIR के बाद एक स्पेशल SIR शुरू किया गया है। कर्नाटक सरकार की ओर से हमने चुनाव आयोग का सहयोग किया... कर्नाटक में एक बड़ी साज़िश चल रही है... हमने पाया है कि 70% से ज़्यादा बूथों पर बीजेपी के अलग-अलग नेता बिना किसी पहचान-पत्र के 'फॉर्म 7' ले रहे हैं। पहले से छपे हुए फ़ॉर्म सप्लाई किए गए हैं और वे बीजेपी पार्टी के नेताओं को दिए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने यह भी सवाल उठाया कि वोटरों से जुड़ी जानकारी तक कैसे पहुँचा गया और कथित तौर पर उसका इस्तेमाल नाम हटाने की अर्ज़ी देने के लिए कैसे किया गया। शिवकुमार ने पूछा कि उनके पास गोपनीय जानकारी कैसे हो सकती है? उन्होंने आरोप लगाया कि कर्नाटक के सभी 224 विधानसभा क्षेत्रों में से हर एक में लगभग 10,000 वोट हटाने की कोशिश की जा रही थी। उन्होंने दावा किया कि यह कथित प्रक्रिया महादेपुरा से शुरू हुई थी और कहा कि उन्होंने कर्नाटक से शुरुआत की है।
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शिवकुमार ने कहा कि वह चाहते हैं कि चुनाव आयोग उन लोगों के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज करे और FIR करवाए, जिन्होंने कथित तौर पर फ़र्ज़ी 'फ़ॉर्म 7' आवेदन जमा किए थे। उन्होंने कहा कि जब तक मैं चुनाव आयोग द्वारा की गई कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हो जाता, तब तक मैं यहाँ से नहीं जाऊँगा।
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