बांग्लादेश: चुनाव से पहले जमात-ए-इस्लामी की ‘दोहरी शरीयत’ रणनीति उजागर
ढाका, 28 जनवरी (आईएएनएस)। बांग्लादेश की कट्टरपंथी इस्लामी पार्टी जमात-ए-इस्लामी एक ओर यह संकेत देती है कि सत्ता में आने पर वह शरीयत लागू नहीं करेगी, वहीं दूसरी ओर उसके शीर्ष नेता, जिनमें 12 फरवरी को होने वाले आम चुनाव के उम्मीदवार भी शामिल हैं, टीवी टॉक शोज़ में खुले तौर पर शरीयत कानून लागू करने की वकालत करते नजर आ रहे हैं। जमीनी स्तर पर पार्टी के मध्यम और निचले स्तर के नेता व कार्यकर्ता जमात के चुनाव चिह्न ‘दारिपल्ला’ (तराजू) पर वोट डालने को धार्मिक कर्तव्य बताकर प्रचार कर रहे हैं, और कुछ तो इसे “जन्नत का टिकट” तक कह रहे हैं। यह खुलासा बुधवार को आई एक रिपोर्ट में हुआ।
बांग्लादेश के प्रमुख दैनिक प्रथम आलो की रिपोर्ट के अनुसार, यह स्थिति एक स्पष्ट विरोधाभास को उजागर करती है- एक तरफ जमात यह संकेत देती है कि वह शरीयत लागू नहीं करेगी, लेकिन दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर शरीयत का नैरेटिव लगातार सक्रिय रूप से प्रचारित किया जा रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया, “राजनीतिक रूप से जमात-ए-इस्लामी एक गहरे दुविधा में फंसी हुई है। पार्टी के नाम में ‘इस्लाम’ शामिल है और लंबे समय से वह ‘हमें अल्लाह का कानून चाहिए’ जैसे नारे के साथ राजनीति करती आई है। इसी वजह से उसके एक बड़े कोर समर्थक वर्ग को उम्मीद रहती है कि जमात सत्ता में आकर इस्लामी शरीयत लागू करेगी। वहीं दूसरी ओर, सत्ता हासिल करने की कोशिश में शरीयत की राजनीति जमात के लिए उलटी भी पड़ सकती है- यह बात पार्टी भी समझती दिखती है।”
रिपोर्ट में इसे जमात की ‘रणनीतिक अस्पष्टता’ करार दिया गया है, जिसे पार्टी चुनाव नजदीक आने के साथ अपनाए हुए है। इसमें कहा गया कि अपनी स्थिति स्पष्ट करने के बजाय जमात दोनों विरोधाभासी कथाओं को एक साथ बनाए रखना चाहती है, जो स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया, “बीएनपी के बजाय जमात को वोट देना, अवामी लीग और बीएनपी के बीच चुनावी विकल्प चुनने जैसा नहीं है। यहां बुनियादी वैचारिक अंतर दांव पर है। जमात-ए-इस्लामी के अमीर को सार्वजनिक रूप से और स्पष्ट शब्दों में बताना चाहिए कि सत्ता में आने पर क्या पार्टी इस्लामी शरीयत लागू करेगी या नहीं। अगर हां, तो उसे यह भी स्पष्ट करना होगा कि वह शरीयत किस रूपरेखा में लागू की जाएगी।”
रिपोर्ट में जोर देकर कहा गया कि अगर जमात या कोई अन्य ‘इस्लामी’ पार्टी बांग्लादेश में शरीयत लागू करने की घोषणा करती है, तो स्वाभाविक रूप से यह सवाल उठता है कि क्या ऐसी पार्टी को देश के मौजूदा संविधान के तहत राजनीति करने का अधिकार रह जाता है।
आगे कहा गया, “चुनाव नजदीक हैं और जमात को तुरंत शरीयत पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए, ताकि मतदाता अपने मताधिकार का उपयोग करते समय सूचित निर्णय ले सकें। जमात के शीर्ष नेतृत्व को यह समझना चाहिए कि इस मुद्दे पर उसकी रणनीतिक अस्पष्टता उसके चर्चित नारे ‘हम ईमानदार लोगों का शासन चाहते हैं’ के सीधे खिलाफ जाती है और धार्मिक शब्दों में कहें तो यह साफ तौर पर दोगलापन (मुनाफ़िक़ी) है।”
रिपोर्ट के मुताबिक, यह दोहरी रणनीति जमात की विश्वसनीयता और लोकतांत्रिक राजनीति में उसकी भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
--आईएएनएस
डीएससी
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गुजरात के मछुआरों की चमकेगी किस्मत, मछली सुरक्षित रखने के लिए बनेंगे हाई-टेक आइस प्लांट
गुजरात सरकार के कृषि, किसान कल्याण और सहकारिता विभाग द्वारा लागू की जा रही प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का एक महत्वपूर्ण घटक न्यूनतम 20 टन क्षमता के आइस प्लांट और स्टोरेज यूनिट का निर्माण है. यह योजना राज्य में मत्स्य भंडारण और कोल्ड चेन अवसंरचना को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है. योजना का उद्देश्य मछली को लंबे समय तक स्वस्थ और स्वच्छ अवस्था में सुरक्षित रखना है ताकि उपभोक्ताओं तक गुणवत्तापूर्ण उत्पाद पहुंच सके और मछुआरों व विक्रेताओं को बेहतर मूल्य प्राप्त हो.
गुजरात में समुद्री मत्स्य उत्पादन की स्थिति
गुजरात देश के अग्रणी समुद्री मत्स्य उत्पादक राज्यों में शामिल है. अरब सागर से लगती लंबी तटरेखा के कारण यहां बड़े पैमाने पर समुद्री मछली का उत्पादन होता है. इसके बावजूद राज्य का निर्यात संभावनाओं के अनुरूप नहीं हो पा रहा है. इसका प्रमुख कारण अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप भंडारण और कोल्ड चेन सुविधाओं की कमी है. मछली के उचित तापमान पर संरक्षण के अभाव में गुणवत्ता प्रभावित होती है, जिससे निर्यात में बाधाएं आती हैं.
योजना का उद्देश्य और आवश्यकता
इस योजना का मुख्य उद्देश्य कोल्ड स्टोरेज और आइस प्लांट के आधुनिकीकरण को बढ़ावा देना है. मछली को पकड़ने के बाद यदि सही तापमान और स्वच्छ वातावरण न मिले तो उसकी गुणवत्ता तेजी से गिरती है. न्यूनतम 20 टन क्षमता की भंडारण सुविधा से मछली को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकेगा. इससे न केवल स्थानीय बाजार में बल्कि अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी गुणवत्ता युक्त मछली की आपूर्ति संभव होगी.
परिवहन और मार्केटिंग में सुधार
योजना के अंतर्गत केवल आइस प्लांट और स्टोरेज ही नहीं बल्कि इंसुलेटेड वाहन, आइस बॉक्स युक्त तीन पहिया वाहन, ई-रिक्शा और लाइव फिश वेंडिंग सेंटर जैसी सुविधाओं को भी बढ़ावा दिया जा रहा है. इन संसाधनों के माध्यम से मछली को उत्पादन स्थल से उपभोक्ता तक स्वच्छ और सुरक्षित तरीके से पहुंचाया जा सकेगा. इससे उपभोक्ताओं को ताजा और स्वास्थ्यकर मछली मिलेगी और विक्रेताओं की आय में भी वृद्धि होगी.
वित्तीय सहायता और इम्प्लिमेंटेशन
योजना के तहत लाभार्थियों को आइस प्लांट और स्टोरेज यूनिट के निर्माण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है. इस परियोजना में कुल लागत का 60 प्रतिशत योगदान भारत सरकार और 40 प्रतिशत योगदान राज्य सरकार द्वारा दिया जाता है. योजना का क्रियान्वयन राज्य सरकारों के मत्स्य आयुक्त के माध्यम से किया जा रहा है ताकि लाभ सीधे पात्र हितधारकों तक पहुंच सके.
मछुआरों और अर्थव्यवस्था को लाभ
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का यह घटक मछुआरों, व्यापारियों और मत्स्य क्षेत्र से जुड़े उद्यमियों के लिए लाभकारी साबित होगा. बेहतर भंडारण और परिवहन सुविधाओं से अपव्यय कम होगा, आय बढ़ेगी और राज्य की समुद्री अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी. साथ ही, गुजरात को वैश्विक मत्स्य बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाने में भी यह योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.
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