4 साल बाद पंजाब को मिलेगा रेगुलर DGP, High Court ने सरकार से मांगा हलफनामा
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार को निर्देश दिया है कि वह सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार एक रेगुलर डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस (DGP) नियुक्त करे। साथ ही, कोर्ट ने मुख्य सचिव से कहा है कि वे 13 अक्टूबर, 2026 को होने वाली अगली सुनवाई तक अनुपालन हलफ़नामा (compliance affidavit) दाखिल करें। यह निर्देश वकील निखिल थम्मन द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई के दौरान दिया गया। उन्होंने बताया कि पंजाब में चार साल से ज़्यादा समय से कोई रेगुलर DGP नहीं है। याचिका में प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ मामले में सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले और रेगुलर DGP की नियुक्ति से संबंधित निर्देशों का ज़िक्र किया गया। याचिकाकर्ता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, DGP की नियुक्ति यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) द्वारा अनुशंसित पैनल से की जानी चाहिए।
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थम्मन के अनुसार, पंजाब सरकार को जुलाई के पहले हफ़्ते में ही UPSC का पैनल मिल गया था, लेकिन नियुक्ति नहीं की गई थी। सुनवाई के दौरान, पंजाब सरकार ने हाई कोर्ट को बताया कि UPSC द्वारा सुझाए गए पैनल पर विचार किया जा रहा है। इन बातों के बाद, हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार को एक रेगुलर DGP नियुक्त करने का निर्देश दिया और मुख्य सचिव को अगली सुनवाई की तारीख तक अनुपालन हलफ़नामा (compliance affidavit) रिकॉर्ड पर रखने का आदेश दिया। पत्रकारों से बात करते हुए थम्मन ने कहा, "पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने निर्देश दिया है कि सरकार तुरंत एक रेगुलर DGP नियुक्त करे। साथ ही, पंजाब सरकार के मुख्य सचिव को निर्देश दिया गया है कि अगली सुनवाई की तारीख, यानी 13 अक्टूबर 2026 तक, कोर्ट में एक अनुपालन हलफ़नामा दाखिल करें कि आज के निर्देशों का पालन करते हुए हमने एक रेगुलर DGP नियुक्त कर लिया है।" उन्होंने आगे कहा कि अगर 13 अक्टूबर तक नियुक्ति नहीं की जाती है, तो वह मुख्य सचिव के ख़िलाफ़ अवमानना याचिका (contempt petition) दायर करेंगे। इस मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर 2026 को होगी।
अमरोहा में Venkateshwara University ने Lawrence Bishnoi के कथित सहयोगी की कानून डिग्री रद्द की
अमरोहा (उप्र), एक अक्टूबर वेंकटेश्वर विश्वविद्यालय ने गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई से कथित तौर पर जुड़े एक वकील की बीए-एलएलबी की डिग्री रद्द कर दी है, क्योंकि पुलिस की जांच में 12वीं कक्षा का उसका प्रमाणपत्र नकली पाया गया। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। राजाबपुर थाना प्रभारी तेजपाल सिंह ने बताया कि फर्जी दस्तावेज जमा करने और धोखाधड़ी के आरोप में वकील के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज की गई है, जबकि उसका पंजीकरण रद्द कराने के लिए विधिज्ञ परिषद को पत्र भेजा गया है।
वेंकटेश्वर विश्वविद्यालय के प्रशासनिक अधिकारी अरुण कुमार द्वारा 28 सितंबर को दर्ज कराई गई प्राथमिकी के अनुसार, दिल्ली के पश्चिम विहार निवासी दीपक नंदा ने 2019 में विश्वविद्यालय के बीए-एलएलबी पाठ्यक्रम में दाखिला लिया था। दाखिले के समय उसने जम्मू-कश्मीर स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा कथित रूप से जारी कक्षा 12 की अंकतालिका और प्रमाणपत्र जमा किया था। प्राथमिकी में कहा गया है कि उसने 2024 में पाठ्यक्रम पूरा किया और उसके बाद वकील के तौर पर प्रैक्टिस करने के लिए विधिज्ञ परिषद में पंजीकरण कराया।
पुलिस ने बताया कि यह मामला दीपक खत्री उर्फ दीपक नंदा से जुड़े हथियार तस्करी मामले की दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा द्वारा जांच किए जाने के दौरान सामने आया। अपराध शाखा ने नौ सितंबर को विश्वविद्यालय से नंदा के प्रवेश और शैक्षिक रिकॉर्ड मांगे थे। इसके बाद दस्तावेजों को सत्यापन के लिए जांच एजेंसी को भेजा गया।
प्राथमिकी के अनुसार, जम्मू-कश्मीर शिक्षा बोर्ड ने 19 सितंबर को अपने जवाब में अपराध शाखा को बताया कि संबंधित प्रमाणपत्र उसके रिकॉर्ड में नहीं मिला और इसे नकली घोषित कर दिया, जिसके बाद 23 सितंबर को विश्वविद्यालय को इसकी जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि इसके बाद विश्वविद्यालय ने नंदा की बीए-एलएलबी की डिग्री रद्द कर दी और भारतीय विधिज्ञ परिषद (बीसीआई) से उसका पंजीकरण रद्द करने का अनुरोध किया। पुलिस के अनुसार, ऐसे आरोप हैं कि नंदा ने गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का पक्ष रखा था और अलग-अलग जिलों में उसके गिरोह के सदस्यों को कानूनी सेवाएं उपलब्ध कराई थीं।
ये आरोप जारी जांच का हिस्सा हैं। इस संबंध में पुलिस अधीक्षक लखन सिंह यादव ने कहा कि मामले की विस्तृत जांच के लिए एक वरिष्ठ अधिकारी नियुक्त किया जाएगा।
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