अमरोहा में Venkateshwara University ने Lawrence Bishnoi के कथित सहयोगी की कानून डिग्री रद्द की
अमरोहा (उप्र), एक अक्टूबर वेंकटेश्वर विश्वविद्यालय ने गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई से कथित तौर पर जुड़े एक वकील की बीए-एलएलबी की डिग्री रद्द कर दी है, क्योंकि पुलिस की जांच में 12वीं कक्षा का उसका प्रमाणपत्र नकली पाया गया। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। राजाबपुर थाना प्रभारी तेजपाल सिंह ने बताया कि फर्जी दस्तावेज जमा करने और धोखाधड़ी के आरोप में वकील के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज की गई है, जबकि उसका पंजीकरण रद्द कराने के लिए विधिज्ञ परिषद को पत्र भेजा गया है।
वेंकटेश्वर विश्वविद्यालय के प्रशासनिक अधिकारी अरुण कुमार द्वारा 28 सितंबर को दर्ज कराई गई प्राथमिकी के अनुसार, दिल्ली के पश्चिम विहार निवासी दीपक नंदा ने 2019 में विश्वविद्यालय के बीए-एलएलबी पाठ्यक्रम में दाखिला लिया था। दाखिले के समय उसने जम्मू-कश्मीर स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा कथित रूप से जारी कक्षा 12 की अंकतालिका और प्रमाणपत्र जमा किया था। प्राथमिकी में कहा गया है कि उसने 2024 में पाठ्यक्रम पूरा किया और उसके बाद वकील के तौर पर प्रैक्टिस करने के लिए विधिज्ञ परिषद में पंजीकरण कराया।
पुलिस ने बताया कि यह मामला दीपक खत्री उर्फ दीपक नंदा से जुड़े हथियार तस्करी मामले की दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा द्वारा जांच किए जाने के दौरान सामने आया। अपराध शाखा ने नौ सितंबर को विश्वविद्यालय से नंदा के प्रवेश और शैक्षिक रिकॉर्ड मांगे थे। इसके बाद दस्तावेजों को सत्यापन के लिए जांच एजेंसी को भेजा गया।
प्राथमिकी के अनुसार, जम्मू-कश्मीर शिक्षा बोर्ड ने 19 सितंबर को अपने जवाब में अपराध शाखा को बताया कि संबंधित प्रमाणपत्र उसके रिकॉर्ड में नहीं मिला और इसे नकली घोषित कर दिया, जिसके बाद 23 सितंबर को विश्वविद्यालय को इसकी जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि इसके बाद विश्वविद्यालय ने नंदा की बीए-एलएलबी की डिग्री रद्द कर दी और भारतीय विधिज्ञ परिषद (बीसीआई) से उसका पंजीकरण रद्द करने का अनुरोध किया। पुलिस के अनुसार, ऐसे आरोप हैं कि नंदा ने गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का पक्ष रखा था और अलग-अलग जिलों में उसके गिरोह के सदस्यों को कानूनी सेवाएं उपलब्ध कराई थीं।
ये आरोप जारी जांच का हिस्सा हैं। इस संबंध में पुलिस अधीक्षक लखन सिंह यादव ने कहा कि मामले की विस्तृत जांच के लिए एक वरिष्ठ अधिकारी नियुक्त किया जाएगा।
804 करोड़ रुपये वाले 4 Bank Accounts पर नहीं मिली राहत, Supreme Court ने खारिज की TMC की याचिका
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (1 अक्टूबर) को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के ममता बनर्जी गुट की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें लगभग 804 करोड़ रुपये वाले चार डेबिट-फ्रीज बैंक खातों को चलाने की अनुमति मांगी गई थी। जस्टिस एमएम सुंदरेश और पीबी वराले की बेंच ने कहा कि वे कलकत्ता हाई कोर्ट के उस आदेश में दखल देने के पक्ष में नहीं हैं, जिसने याचिका को अनुमति देने से इनकार कर दिया था।
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कोर्ट ने क्या कहा?
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट को निर्देश दिया कि वह इस मामले पर जल्द से जल्द फैसला करे। सुप्रीम कोर्ट ने गौर किया कि चुनाव आयोग ने पार्टी का चुनाव चिह्न फ्रीज़ कर दिया है, जबकि चार बैंक खातों में मौजूद फंड का हकदार कौन है, यह बड़ा सवाल अभी भी विचाराधीन है। बेंच ने कहा, "हम मामले के गुण-दोष पर नहीं जा रहे हैं। हम अनुच्छेद 136 के तहत अपने अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करने के इच्छुक नहीं हैं। हम हाई कोर्ट से अनुरोध करते हैं कि वह सुनवाई में तेज़ी लाए। इस याचिका में विधायक विश्वनाथ दास की साइबर अपराध की शिकायत के बाद पार्टी के चार बैंक खातों को फ्रीज़ करने के पश्चिम बंगाल पुलिस के फैसले को चुनौती दी गई थी।
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कलकत्ता हाई कोर्ट ने अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार कर दिया था
कलकत्ता हाई कोर्ट ने 27 अगस्त को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले TMC गुट को उन चार बैंक खातों (जिनसे डेबिट की सुविधा फ्रीज़ कर दी गई थी और जिनमें लगभग 804 करोड़ रुपये थे) को संचालित करने की अनुमति देने वाला अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने कहा कि ऐसी राहत देने से उसका पहले का आदेश कमज़ोर हो जाएगा, जिसमें राजनीतिक पार्टी को अपने रोज़मर्रा के खर्चों को पूरा करने की अनुमति दी गई थी। कोर्ट ने निर्देश दिया कि दुर्गा पूजा की छुट्टियों के बाद मामले की फिर से सुनवाई होगी, और उससे पहले सभी पक्ष अपनी-अपनी स्थिति बताते हुए हलफनामा दाखिल करेंगे। जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने कहा कि चार खातों के संचालन की अनुमति देने वाला कोई और आदेश पारित करने से उनका पिछला आदेश "गलत" साबित हो जाएगा। TMC ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में मौजूद उन चार खातों को संचालित करने की अनुमति मांगी थी, और दावा किया था कि खातों को फ्रीज़ करने से संबंधित FIR में कमियां थीं।
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