खाना दोबारा गरम करते समय कहीं आप भी तो नहीं कर रहीं ये गलतियां
हम सभी के घर में अक्सर खाना बच ही जाता है, जिसे हम अगली मील में दोबारा गरम करके खाते हैं। इसमें कोई बुराई भी नहीं है। इस तरह खाने को दोबारा गरम करके खाने से फूड वेस्टेज को काफी हद तक कम किया जा सकता है। लेकिन यहां इस बात का ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि खाने को सही तरह से गरम किया जाए।
कई बार हम जल्दी में बचे हुए खाने को सीधे तेज आंच पर चढ़ा देते हैं या पूरे बर्तन को बार-बार गरम करते रहते हैं। इससे खाने का स्वाद और बनावट तो बदल ही सकती है, सही तरीके से न रखा गया खाना सेहत के लिए भी परेशानी खड़ी कर सकता है। तो चलिए जानते हैं ऐसी ही कुछ फूड रिहीट मिसटेक्स के बारे में-
खाना बार-बार गरम करना
यह फूड रिहीट के दौरान की जाने वाली सबसे आम गलतियों में से एक है। कभी-कभी हम जल्दी में होते हैं और एक साथ सारा बचा हुआ खाना ही गरम करने लगते हैं। हालांकि आपको ऐसा करने से बचना चाहिए। बार-बार गरम करने से खाने का स्वाद, खुशबू और बनावट खराब हो सकती है। इसलिए, जितना खाना खाना हो, उतना ही अलग बर्तन में निकालकर गरम करें। बाकी खाना ठंडा करके सुरक्षित तरीके से रखा रहने दें।
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बहुत तेज आंच पर खाना गरम करना
आप खाने को किस तरह गरम कर रही हैं, यह भी बहुत ज्यादा मायने रखता है। अमूमन लोग जल्दी के चक्कर में गैस आंच पर ही खाना गरम करने लगते हैं। ऐसे में खाना बाहर से खाना बहुत गरम हो जाता है, लेकिन अंदर का हिस्सा उतना गरम नहीं होता। इतना ही नहीं, बहुत तेज आंच पर गरम करने से खाने का कुछ हिस्सा सूख या जल भी सकता है। इसलिए, हमेशा खाना दोबारा गरम करते समय मध्यम या धीमी आंच रखें और बीच-बीच में चलाते रहें, ताकि गर्मी हर हिस्से तक पहुंचे।
खाने को लंबे समय तक बाहर छोड़ देना
कुछ लोग खाना गरम करने के बाद उसे दोबारा काफी देर तक रसोई या मेज पर छोड़ देते हैं। जबकि यह आदत बिल्कुल भी ठीक नहीं मानी जाती। गर्म या सामान्य तापमान पर लंबे समय तक रखा खाना खराब होने का जोखिम बढ़ा सकता है। जितना खाना तुरंत खाना हो उतना ही गरम करें और बचे हुए हिस्से को दोबारा लंबे समय तक बाहर रखने से बचें।
एक ही खाने को बहुत देर तक गरम करते रहना
कई बार हमें लगता है कि खाना जितनी देर तक गरम होगा, उतना ही अच्छा रहेगा। जबकि यह सच नहीं है। जब खाने को बहुत देर तक गरम किया जाता है तो इससे कभी सब्जी की नमी कम हो सकती है, तो कभी दाल गाढ़ी हो सकती है और खाना सूखा लग सकता है। इसलिए, खाना पूरी तरह गरम होते ही आंच बंद कर दें। जरूरत से ज्यादा पकाने से बचें।
- मिताली जैन
PMLA Case में Nayan Raheja की अग्रिम जमानत अर्जी का ED ने किया विरोध, 6 अक्टूबर को अगली सुनवाई
दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रहेजा डेवलपर्स लिमिटेड (RDL) के पूर्व डायरेक्टर नयन एन रहेजा की अग्रिम ज़मानत याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की दलीलें सुनीं। ट्रायल कोर्ट ने 19 सितंबर को उनकी अग्रिम ज़मानत याचिका खारिज कर दी थी। जस्टिस अमित बंसल ने आरोपी के सीनियर वकील और ED के वकील की शुरुआती दलीलें सुनीं। मामले की सुनवाई के लिए 6 अक्टूबर की तारीख तय की गई है। ED की ओर से वकील रजत नायर पेश हुए और जवाब देने के लिए समय मांगा। उन्होंने कहा कि आवेदक जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। दूसरी ओर, नयन एन. रहेजा की ओर से सीनियर वकील विकास पाहवा पेश हुए। सीनियर वकील ने बताया कि रहेजा एक जाने-माने बिल्डर हैं। उन्होंने लगभग 15 प्रोजेक्ट पूरे किए हैं। उन्होंने BPL कैटेगरी के लिए भी करीब 2000 फ्लैट बनाए हैं। आवेदक जांच में शामिल होने के लिए तैयार हैं। साकेत डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में नयन एन. रहेजा की अग्रिम ज़मानत याचिका खारिज कर दी थी। इससे पहले, उन्हें ज़बरदस्ती की कार्रवाई से सुरक्षा दी गई थी। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने घर खरीदारों को तय समय में फ़्लैट न सौंपने के मामले में केस दर्ज किया था। स्पेशल जज (PMLA) सचिन जैन ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में नयन एन रहेजा की अग्रिम ज़मानत अर्ज़ी खारिज कर दी। जज ने यह फ़ैसला उनके इस व्यवहार को देखते हुए लिया कि बुलाए जाने पर भी वे जांच अधिकारी के सामने पेश नहीं हुए।
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कोर्ट ने कहा कि सिर्फ़ इसलिए कि आवेदक का नाम ECIR का हिस्सा बनी किसी FIR में नहीं है, या नाम होने पर भी चार्जशीट में नाम नहीं है, इसका मतलब यह नहीं है कि वह PMLA के तहत कार्यवाही से बरी हो गया है। ऐसा तब तक नहीं माना जा सकता जब तक कि वह अग्रिम ज़मानत के चरण में यह साबित न कर दे या कम से कम प्रथम दृष्टया यह न दिखाए कि उसने PMLA की धारा 3 के तहत अपराध से हुई कमाई (proceeds of crime) का किसी भी तरह से लेन-देन नहीं किया है। ट्रायल कोर्ट का मानना था कि PMLA की धारा 45(1)(ii) के तहत दी गई दोहरी शर्तें पूरी नहीं होती हैं और आवेदक यह दिखाने में असमर्थ रहा है कि यह मानने के लिए उचित आधार हैं कि वह मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध का दोषी नहीं है। कोर्ट ने 19 सितंबर के आदेश में कहा, "इसके अलावा, बुलाए जाने पर जांच में पेश न होने और सहयोग न करने का उनका व्यवहार उन्हें अग्रिम ज़मानत की सुविधा का हकदार नहीं बनाता है। यह सुविधा आम तौर पर केवल असाधारण परिस्थितियों में ही दी जा सकती है, जब आरोपी यह दिखा सके कि उसे परेशान करने और अपमानित करने के इरादे से झूठा फंसाया गया है।" कोर्ट ने पाया कि आवेदक को सात बार समन भेजे गए, लेकिन वह गुरुग्राम ज़ोनल ऑफ़िस में केवल दो बार पेश हुआ और पांच बार किसी न किसी बहाने से व्यक्तिगत रूप से पेश होने और जांच में सहयोग करने में विफल रहा। ED के स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर (SPP) आनंद कीर्ति ने तर्क दिया कि भले ही आरोपी ने दिल्ली हाई कोर्ट के सामने स्पष्ट वचन दिया था - जिसे 30.07.2026 के आदेश में दर्ज किया गया था कि "याचिकाकर्ता का यह वचन रिकॉर्ड पर लिया जाता है कि याचिकाकर्ता प्रवर्तन निदेशालय के साथ पूरा सहयोग करेगा" - ED ने कई आधारों पर मामला दर्ज किया था। दिल्ली और गुरुग्राम में FIR दर्ज की गईं।
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यह तर्क दिया गया कि सभी FIR में यह आरोप लगाया गया था कि उनमें नामजद आरोपियों/संस्थाओं ने 'रहेजा रेवांता', 'रहेजा शिलास', 'रहेजा ट्रिनिटी', 'रहेजा ओमा', 'रहेजा मॉल', 'रहेजा अरण्य', 'रहेजा अथर्व' और 'वेदांता' जैसे प्रोजेक्ट्स के तहत ग्राहकों से रेजिडेंशियल फ्लैट और कमर्शियल स्पेस देने के नाम पर पैसे इकट्ठा किए थे; हालांकि, आरोप है कि इन प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए इकट्ठा किए गए फंड का इस्तेमाल करने के बजाय, कंपनी ने उस फंड का गलत इस्तेमाल किया और तैयार यूनिट्स की डिलीवरी नहीं की। आरोपियों के वकील ने तर्क दिया कि चूंकि आरोपियों के खिलाफ मुख्य अपराधों (प्रेडिकेट ऑफेंस) में चार्जशीट दाखिल नहीं की गई है, इसलिए PMLA की धारा 3 के तहत उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का कोई अपराध नहीं बनता है।
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