चीन में हर कोई क्यों खरीद रहा है यह 'रोता हुआ घोड़ा'? जानें इस 'बदसूरत-प्यारे' खिलौने के पीछे की दिलचस्प कहानी
चीन में लूनर न्यू ईयर (Lunar New Year) से पहले एक अनोखा खिलौना चर्चा का विषय बना हुआ है. यह 20 सेंटीमीटर लंबा घोड़े का खिलौना शुरुआत में Year of the Horse के लिए एक सामान्य, मुस्कुराता हुआ सजावटी उत्पाद था. लेकिन सिलाई में हुई एक छोटी सी गलती ने इसके फेस एक्सप्रेशन को पूरी तरह बदल दिए. मुंह का आकार ऐसा बन गया कि घोड़ा उदास और रोता हुआ नजर आने लगा. फिर क्या हुआ, ये क्राइंग हॉर्स चीन में छा गया.
ग्राहकों ने खिलौने रिर्टन नहीं किए
South China Morning Post की रिपोर्ट के मुताबिक, इस गलती के बाद फैक्ट्री मालिक झांग हुओछिंग ने ग्राहक को रिफंड की पेशकश की थी. लेकिन ग्राहक ने खिलौना वापस नहीं किया. कुछ ही समय बाद इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने लगीं. इसके बाद यह ‘क्राइंग हॉर्स’ नाम से पहचाना जाने लगा और इंटरनेट पर चर्चा का केंद्र बन गया.
आखिर क्यों खरीद रहे हैं युवा?
Reuters के अनुसार, झांग का कहना है कि इस खिलौने का उदास चेहरा चीन के युवा कामकाजी वर्ग की भावनाओं से मेल खाता है. सोशल मीडिया पर लोग मजाक में कह रहे हैं कि रोता हुआ घोड़ा ऑफिस में उनकी हालत दिखाता है, जबकि मुस्कुराता घोड़ा काम के बाद की जिंदगी को दर्शाता है.
‘कॉरपोरेट स्लेव्स’ की फीलिंग्स
BBC ने झांग के हवाले से बताया कि कई ग्राहकों का मानना है कि यह खिलौना आज के तथाकथित कॉरपोरेट स्लेव्स की भावना को दर्शाता है. लंबे काम के घंटे, दबाव और तनाव को यह छोटा सा खिलौना प्रतीकात्मक रूप से सामने लाता है.
चीन की एक फैक्ट्री में हुई छोटी सी सिलाई की गलती ने खुश चेहरे वाले घोड़े को उदास बना दिया और इसी गलती ने इसे वायरल बेस्टसेलर बना दिया। जिसे पहले डिफेक्ट माना जा रहा था, वही अब लोगों की भावनाओं से जुड़कर ट्रेंड बन चुका है। एक मैन्युफैक्चरिंग मिस्टेक ने इस खिलौने की किस्मत बदल दी।… pic.twitter.com/rCv5Z4doUw
— News Nation (@NewsNationTV) January 28, 2026
‘अग्ली-क्यूट’ ट्रेंड का हिस्सा
यह ट्रेंड चीन में लोकप्रिय हो रहे ‘अग्ली-क्यूट’ खिलौनों से भी जुड़ा है. हाल के वर्षों में ऐसे खिलौने चर्चा में रहे हैं, जिनकी शक्ल पारंपरिक सुंदरता से अलग होती है. इसी श्रेणी में Pop Mart के चर्चित कैरेक्टर Labubu जैसे खिलौनों को भी पसंद किया गया है.
हर रोज बिक रहे हैं खिलौने
South China Morning Post के अनुसार, अक्टूबर 2025 में लॉन्च के बाद इस खिलौने की रोजाना बिक्री करीब 400 यूनिट थी. वायरल होने के बाद यह आंकड़ा हजारों में पहुंच गया. मांग पूरी करने के लिए फैक्ट्री को 10 से ज्यादा नई प्रोडक्शन लाइनें जोड़नी पड़ीं.
चीनी कैलेंडर के अनुसार 17 फरवरी से Year of the Horse की शुरुआत हो रही है. परंपरा में घोड़ा ऊर्जा, प्रगति और सहनशक्ति का प्रतीक माना जाता है. कई लोगों का मानना है कि ‘क्राइंग हॉर्स’ 2026 के लिए एक सटीक प्रतीक है, जो जिंदगी की परेशानियों को स्वीकार करने और आगे बढ़ने का संदेश देता है.
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भारत एआई आधारित जलवायु कार्रवाई में बड़ी वैश्विक भूमिका निभाने को तैयार : जितेंद्र सिंह
नई दिल्ली, 28 जनवरी (आईएएनएस)। केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने बुधवार को कहा कि भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित जलवायु कार्रवाई में बड़ी वैश्विक भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक आयोग (ईएससीएपी) के एशियाई और प्रशांत प्रौद्योगिकी हस्तांतरण केंद्र (एपीसीटीटी) और भारत सरकार के वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव 2.0 में बोलते हुए, जितेंद्र सिंह ने कहा कि जलवायु परिवर्तन एक ऐसा गंभीर विषय है जिसे अकेले किसी एक राष्ट्र पर नहीं छोड़ा जा सकता और जब तक देश सीमाओं से परे मिलकर काम नहीं करते, तब तक इसका शमन नहीं किया जा सकता।
केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि यदि जलवायु परिवर्तन से प्रभावी ढंग से निपटना है और चरम मौसम की घटनाओं के विरुद्ध लचीलापन विकसित करना है, तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को मानवीय निर्णय, संस्थागत सहयोग और वैश्विक साझेदारी के साथ मिलकर तैनात किया जाना चाहिए।
केंद्रीय मंत्री के अनुसार, अलग-अलग होकर काम करने का दौर अब समाप्त हो गया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जलवायु कार्रवाई के लिए विभिन्न वैज्ञानिक विषयों, सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों, और यहाँ तक कि विज्ञान एवं गैर-विज्ञान संस्थानों के बीच सहयोग आवश्यक है। नवाचार अब अलगाव में सफल नहीं हो सकता और इसे उद्योगों, बाजारों तथा प्रौद्योगिकी हस्तांतरण तंत्र के साथ शुरुआती और निरंतर जुड़ाव की आवश्यकता है।
भारत की उभरती वैश्विक भूमिका पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने कहा कि देश अब केवल अपनी आंतरिक सीमाओं तक सीमित नहीं है और जलवायु व प्रौद्योगिकी पर अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में विचारों और समाधानों का योगदान देने के लिए भारत से अपेक्षाएं लगातार बढ़ रही हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि भारत की भौगोलिक विविधता जलवायु प्रभावों के अध्ययन और अनुकूलनीय समाधान विकसित करने में एक अनूठा लाभ प्रदान करती है, जिसे अन्य देशों के साथ साझा किया जा सकता है।
--आईएएनएस
एबीएस/
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