टीम इंडिया की प्लेइंग 11 में बदलाव तय, तीसरे ODI से बाहर हुआ ये खिलाड़ी, CSK के स्टार प्लेयर ने किया रिप्लेस
IND vs WI: वेस्टइंडीज के खिलाफ होने वाले तीसरे वनडे मैच से पहले भारतीय टीम को एक बड़ा झटका लगा है. तेज गेंदबाज प्रसिद्ध कृष्णा हैमस्ट्रिंग की चोट के कारण इस आखिरी मुकाबले से बाहर हो गए हैं. वह गुवाहाटी में खेले गए दूसरे वनडे मैच के दौरान चोटिल हो गए थे. अब मीडिया रिपोर्ट्स सामने आ रही हैं कि आईपीएल में चेन्नई सुपर किंग्स के लिए खेलने वाले अंशुल कंबोज को टीम इंडिया में शामिल किया जा सकता है, जो टीम में प्रसिद्ध कृष्णा को रिप्लेस करेंगे.
दूसरे वनडे के दौरान प्रसिद्ध कृष्णा को लगी चोट
गुवाहाटी में खेले गए सीरीज के दूसरे वनडे मैच के दौरान प्रसिद्ध कृष्णा को गेंदबाजी करते समय खिंचाव महसूस हुआ था. इस मुकाबले में वह अपने कोटे के पूरे ओवर भी नहीं फेंक पाए और सिर्फ 5 ओवर गेंदबाजी करने के बाद मैदान से बाहर चले गए थे. भारतीय टीम के बल्लेबाजी कोच सितांशु कोटक ने मैच के बाद इसकी पुष्टि करते हुए बताया था कि प्रसिद्ध की चोट पर मेडिकल टीम नजर रख रही है. उन्हें आगे की जांच और रिकवरी के लिए बेंगलुरु स्थित बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) भेजा जाएगा.
Prasidh Krishna is in danger of missing some games starting with third ODI against West Indies
— Cricbuzz (@cricbuzz) October 1, 2026
He has been diagnosed with a hamstring injury pic.twitter.com/cpcQozBcvz
अंशुल कंबोज की हुई टीम इंडिया में सरप्राइज एंट्री
प्रसिद्ध कृष्णा के बाहर होने के बाद चयनकर्ताओं ने चेन्नई सुपर किंग्स के तेज गेंदबाज अंशुल कंबोज को रिप्लेसमेंट के तौर पर चुना है. हालांकि, बीसीसीआई की ओर से अभी इसका आधिकारिक तौर पर ऐलान नहीं किया गया है. अंशुल कंबोज ऑस्ट्रेलिया-ए के खिलाफ जारी रेड-बॉल मैच के लिए 'इंडिया-ए' टीम का हिस्सा थे, लेकिन टीम इंडिया से बुलावा आने के बाद वह तुरंत मैच छोड़कर चंडीगढ़ के लिए रवाना हो गए हैं. कंबोज ने घरेलू सीजन और आईपीएल 2026 में बेहतरीन प्रदर्शन किया था. जहां वह अपनी फ्रेंचाइजी CSK के लिए सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज रहे थे.
???? KAMBOJ TO ODI TEAM ????
— Johns. (@CricCrazyJohns) October 1, 2026
- Anshul Kamboj will replace Prasidh Krishna in the Indian ODI team for the 3rd match. [Abhishek Saini from Sportstar] pic.twitter.com/TDpUGPErQu
कर्नाटक में महंगी दवाओं की कीमतों में बड़ा अंतर उजागर, सरकार ने केंद्र से हस्तक्षेप की मांग की
बेंगलुरु, 1 अक्टूबर (आईएएनएस)। कर्नाटक सरकार ने महंगी दवाओं, कैंसर की दवाओं, एंटीबायोटिक्स, मेडिकल उपकरणों और अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की संस्थागत खरीद कीमत और अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) के बीच बड़े अंतर का मुद्दा उठाया है। कुछ उत्पादों का एमआरपी उनकी लैंडिंग कॉस्ट से 50 गुना से भी अधिक पाया गया है।
कर्नाटक गृह मंत्रालय की ओर से गुरुवार को जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) कर्नाटक ने हाल में कैंसर मरीजों का इलाज करने वाले अस्पतालों और अन्य प्रतिष्ठानों के निरीक्षण के दौरान यह स्थिति सामने आने के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (एनपीपीए) के समक्ष मामला उठाया है। राज्य ने मरीजों से अत्यधिक बिल वसूली रोकने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर हस्तक्षेप की मांग की है।
विभाग के अनुसार, कुछ दवा कंपनियां अस्पतालों को भारी छूट के साथ संस्थागत कीमत पर दवाएं उपलब्ध कराती हैं, लेकिन मरीजों से इन दवाओं के लिए प्रिंटेड एमआरपी या उसके आसपास की राशि वसूली जाती है। जांच में ऐसी कीमतों में अत्यधिक अंतर वाली 253 दवाओं की पहचान की गई है।
उदाहरण के तौर पर, क्रिटिकेयर की ओर से सप्लाई की जाने वाली गुफीपोल की लैंडिंग कॉस्ट 86 रुपये थी, जबकि इसका एमआरपी 4,528 रुपये पाया गया। यानी दोनों कीमतों में 52.6 गुना का अंतर था। इसी तरह गुफीसाइक्लिन-50 इंजेक्शन की लैंडिंग कॉस्ट 160 रुपये और एमआरपी 7,110 रुपये था, जो 44.4 गुना का अंतर है।
इसी तरह टर्लिटिस की लैंडिंग कॉस्ट 118 रुपये के मुकाबले एमआरपी 4,416 रुपये था, जबकि टैक्सोकेयर 120 एमजी की खरीद कीमत 1,000 रुपये और एमआरपी 21,617 रुपये दर्ज किया गया।
निरीक्षण के दौरान कैनमैब 440 एमजी की लैंडिंग कॉस्ट 6,600 रुपये और एमआरपी 57,457 रुपये पाया गया। वहीं, बेवाटास 400 एमजी इंजेक्शन की खरीद कीमत 5,850 रुपये थी, जबकि इसका एमआरपी 62,690 रुपये था।
अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री में भी इसी तरह का अंतर पाया गया। एक एडल्ट नेबुलाइजर मास्क की लैंडिंग कॉस्ट 44.50 रुपये थी, जबकि उसका एमआरपी 950 रुपये था। इसी तरह 14.75 रुपये में खरीदे गए एक आईवी सेट का एमआरपी 295 रुपये था।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री यू.टी. खादर ने 23 सितंबर को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने संस्थागत कीमतों पर खरीदी गई दवाओं, मेडिकल उपकरणों और अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री के लिए मरीजों से अत्यधिक बिल वसूली पर रोक लगाने के उपाय करने का आग्रह किया।
राज्य सरकार ने मरीजों के बिल में लैंडिंग कॉस्ट और एमआरपी दोनों का अनिवार्य रूप से उल्लेख करने, ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर (डीपीसीओ) के तहत मूल्य-नियंत्रित दवाओं का दायरा बढ़ाने और जरूरी महंगी दवाओं व मेडिकल सामग्री पर ट्रेड मार्जिन को नियंत्रित करने का प्रस्ताव दिया है।
इसके अलावा इस मुद्दे के अध्ययन के लिए अंतर-मंत्रालयी विशेषज्ञ समूह गठित करने की भी मांग की गई है। राज्य ने दवा (मूल्य नियंत्रण) आदेश, 2013 में संशोधन, ट्रेड मार्जिन को तर्कसंगत बनाने, लागत से एमआरपी तक पारदर्शिता सुनिश्चित करने, नेशनल लिस्ट ऑफ एसेंशियल मेडिसिन्स का दायरा बढ़ाने तथा ऑडिट और प्रवर्तन तंत्र तैयार करने का भी सुझाव दिया है।
एफडीए और ड्रग्स एनफोर्समेंट अधिकारियों ने 25 और 26 सितंबर को बेंगलुरु समेत कर्नाटक के विभिन्न जिलों में थोक प्रतिष्ठानों, अस्पतालों और अन्य संस्थानों में विशेष सत्यापन अभियान चलाया। इस दौरान 768 से अधिक कंज्यूमेबल आइटम और 189 महंगी दवाओं की जांच की गई। इसके निष्कर्ष केंद्र सरकार को सौंपे जाएंगे।
विभाग ने बताया कि यह सत्यापन अभियान चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा। अगले चरण में एंटी-रेट्रोवायरल दवाओं, महत्वपूर्ण और नई पीढ़ी की एंटीबायोटिक्स, मेडिकल उपकरणों तथा अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली ऐसी सामग्री पर ध्यान दिया जाएगा, जिनका मरीजों पर बड़ा वित्तीय प्रभाव पड़ता है।
कर्नाटक सरकार ने कहा कि वह स्वास्थ्य सेवाओं की बिलिंग में पारदर्शिता बढ़ाने और मरीजों को अनावश्यक आर्थिक बोझ से बचाने के प्रयास जारी रखेगी।
--आईएएनएस
डीएससी
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