जापानी रक्षा मंत्री 30 जनवरी को योकोसुका में अपने दक्षिण कोरियाई समकक्ष से करेंगे वार्ता
टोक्यो, 28 जनवरी (आईएएनएस)। जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी 30 जनवरी को योकोसुका में अपने दक्षिण कोरियाई समकक्ष आह्न ग्यु-बैक के साथ अहम बैठक करेंगे। स्थानीय मीडिया ने रक्षा मंत्रालय के हवाले से यह जानकारी दी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस बैठक के दौरान कोइज़ुमी और आह्न ग्यु-बैक के बीच व्यक्तिगत संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ उत्तर कोरिया के मिसाइल और परमाणु कार्यक्रम से उत्पन्न खतरों तथा अन्य सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए द्विपक्षीय सहयोग पर जोर दिया जाएगा। दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि यह बैठक जापान की मैरीटाइम सेल्फ-डिफेंस फोर्स के योकोसुका बेस पर होगी। क्योडो न्यूज ने यह जानकारी दी है।
गौरतलब है कि मंगलवार को उत्तर कोरिया द्वारा जापान सागर की ओर दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागे जाने के बाद जापान सरकार ने कड़ा विरोध दर्ज कराया था। जापान के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इनमें से एक मिसाइल लगभग 80 किलोमीटर की ऊंचाई तक गई और करीब 350 किलोमीटर तक उड़ान भरी।
दक्षिण कोरिया के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ ने बताया कि इन मिसाइलों को मंगलवार को स्थानीय समयानुसार दोपहर करीब 3:50 बजे प्योंगयांग के उत्तरी क्षेत्र से लॉन्च किया गया था। एक जापानी सरकारी अधिकारी के अनुसार, ये मिसाइलें जापान के विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईज़ेड) के बाहर गिरी प्रतीत होती हैं।
जापान ने उत्तर कोरिया की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। जापानी प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने संबंधित सरकारी अधिकारियों को तुरंत जानकारी एकत्र करने और जहाजों व विमानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। अब तक इस मिसाइल प्रक्षेपण से किसी नुकसान की सूचना नहीं है।
इससे पहले इसी महीने दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने जापान का दौरा किया था, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची से मुलाकात की थी। बातचीत के दौरान राष्ट्रपति ली ने कहा था कि जटिल अंतरराष्ट्रीय हालात के बीच कोरिया और जापान के बीच सहयोग पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।
ली ने दोनों देशों के बीच पिछले छह दशकों में विकसित हुए पारस्परिक लाभकारी संबंधों का जिक्र करते हुए आने वाले 60 वर्षों में रिश्तों को और मजबूत करने की उम्मीद जताई। वहीं, प्रधानमंत्री ताकाइची ने क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए दक्षिण कोरिया के साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई और राष्ट्रपति ली के दौरे को द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई देने वाला बताया।
--आईएएनएस
डीएससी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
सरकार केंद्रीय बजट 2026-27 में पूंजीगत व्यय में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर सकती है : एसबीआई रिपोर्ट
नई दिल्ली, 28 जनवरी (आईएएनएस)। सरकार आगामी केंद्रीय बजट 2026-27 में पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) को बढ़ाकर 12 लाख करोड़ रुपए से अधिक कर सकती है, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में करीब 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी। बुधवार को जारी एसबीआई की रिपोर्ट में यह बात कही गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, इस बढ़े हुए खर्च से सरकार हाईवे, रेलवे, बंदरगाह और बिजली जैसे बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स में निवेश बढ़ा सकेगी, जिससे देश में आर्थिक विकास को रफ्तार मिलेगी और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2027 का बजट ऐसे समय में आ रहा है, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चितता और बिखराव से जूझ रही है। ऐसे में जरूरी है कि भारत वित्तीय अनुशासन के रास्ते पर बना रहे, क्योंकि वैश्विक कर्ज मौजूदा आर्थिक व्यवस्था को कमजोर कर सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, कोरोना महामारी के बाद भारत की आर्थिक रिकवरी वैश्विक वित्तीय संकट के बाद की रिकवरी से भी बेहतर रही है।
एसबीआई रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि वित्त वर्ष 2027 में कर राजस्व में थोड़ी बढ़ोतरी होगी, जबकि गैर-कर राजस्व लगभग स्थिर रह सकता है।
बजट गणना के लिए नॉमिनल जीडीपी वृद्धि करीब 10.5 से 11 प्रतिशत रहने की उम्मीद है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी कीमतों में बढ़ोतरी का असर थोक महंगाई दर पर पड़ सकता है।
इसी आधार पर वित्त वर्ष 2027 में राजकोषीय घाटा जीडीपी का करीब 4.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है। हालांकि, नई जीडीपी शृंखला आने से यह गणना बदल भी सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार, सरकार की उधारी को लेकर कुछ सकारात्मक संकेत मिल सकते हैं। वित्त वर्ष 2027 में केंद्र सरकार की शुद्ध उधारी करीब 11.7 लाख करोड़ रुपए रहने की उम्मीद है, जबकि 4.87 लाख करोड़ रुपए का भुगतान किया जाएगा।
वहीं, राज्य सरकारों की कुल उधारी लगभग 12.6 लाख करोड़ रुपए और भुगतान 4.2 लाख करोड़ रुपए रह सकता है। एसबीआई का कहना है कि इन जरूरतों को संतुलित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को और ज्यादा ओपन मार्केट ऑपरेशन (ओएमओ) करने पड़ सकते हैं।
एसबीआई रिपोर्ट में सरकार को सलाह दी गई है कि बजट में वित्तीय बचत बढ़ाने के लिए कदम उठाए जाएं, जिनमें बैंक जमा पर मिलने वाले ब्याज पर कर व्यवस्था को दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (एलटीसीजी) और अल्पकालिक पूंजीगत लाभ (एसटीसीजी) के बराबर कर व्यवस्था, टैक्स बचत वाली फिक्स्ड डिपॉजिट की लॉक-इन अवधि को म्यूचुअल फंड की ईएलएसएस (3 साल) के बराबर करना, और बैंक जमा में बचत पर टीडीएस के लिए ब्याज की सीमा बढ़ाना शामिल है।
अप्रत्यक्ष करों (इनडायरेक्ट टैक्स) के मामले में रिपोर्ट ने सुझाव दिया है कि इनपुट सर्विस डिस्ट्रीब्यूटर की परिभाषा में बदलाव किया जाए, ताकि भ्रम कम हो और कानूनी विवाद घटें।
इसके अलावा, बैंकिंग सेवाओं पर टीडीएस के लिए जीएसटी लागू न करने की भी सिफारिश की गई है। रिपोर्ट में बीमा और पेंशन सेक्टर में भी कई सुधारों की जरूरत बताई गई है, ताकि इन सेवाओं का दायरा ज्यादा लोगों तक पहुंच सके।
रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य सरकारों पर कुल सरकारी कर्ज का बड़ा हिस्सा होता है, इसलिए राज्य बजट में मध्यम अवधि की कर्ज योजना साफ तौर पर बताई जानी चाहिए।
यह योजना राज्य की आय (जीएसडीपी) और विकास की जरूरतों के हिसाब से होनी चाहिए, न कि सिर्फ सालाना घाटे के लक्ष्य पर आधारित।
एसबीआई ने सुझाव दिया है कि केंद्रीय बजट में इस विषय को खासतौर पर उजागर किया जाना चाहिए।
--आईएएनएस
डीबीपी/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
News Nation






















