Akhilesh Yadav के दावे पर बोले UP Deputy CM Brajesh Pathak, BJP का एक भी MLA नहीं टूटेगा
उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव के उन दावों को खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि बीजेपी विधायक उनकी पार्टी के संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि बीजेपी का एक भी विधायक विपक्ष में शामिल नहीं होगा। गुरुवार को बात करते हुए पाठक ने कहा कि समाजवादी पार्टी को अपने ही परिवार पर ध्यान देना चाहिए। उन्हें भारतीय जनता पार्टी से एक भी विधायक नहीं मिलने वाला है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि बीजेपी, अपने कार्यकर्ताओं और कैडर के मामले में सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते, दूसरी पार्टियों के विधायकों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है।
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पाठक ने कहा कि दूसरी पार्टियों के कई विधायक भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के इच्छुक हैं। सही समय आने पर, भारतीय जनता पार्टी निश्चित रूप से ऐसे सभी सम्मानित विधायकों के बारे में सोचेगी और उन पर काम करेगी। उन्होंने यह भरोसा भी जताया कि बीजेपी 2027 में उत्तर प्रदेश में भारी बहुमत के साथ सरकार बनाएगी। उन्होंने कहा कि मैं फिर से कहता हूं, भारतीय जनता पार्टी 2027 में भारी बहुमत के साथ सरकार बनाने जा रही है।
राज्यसभा चुनाव के लिए बीजेपी के तीसरे उम्मीदवार की घोषणा के बारे में पूछे जाने पर पाठक ने धैर्य रखने को कहा कि आप थोड़ा इंतज़ार करें, भारतीय जनता पार्टी के सभी उम्मीदवार... हम जल्द ही आपके सामने सूची पेश करेंगे। ये बयान अखिलेश यादव के उस दावे के एक दिन बाद आए हैं जिसमें उन्होंने कहा था कि बीजेपी के कई विधायक समाजवादी पार्टी के संपर्क में हैं, लेकिन उन्हें शामिल करने में कुछ दिक्कतें हैं।
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मीडिया से बातचीत के दौरान, यादव ने संकेत दिया कि पार्टी अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश चुनाव में ज़्यादातर उन्हीं सहयोगियों के साथ उतरेगी जिनके साथ उसने हाल के चुनावों में गठबंधन किया था, और जल्द ही गठबंधन की घोषणा करने की योजना है। उन्होंने कहा कि हम जल्द ही ऐसा करने की कोशिश कर रहे हैं, और गठबंधन वैसा ही रहेगा जैसा पहले था। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने राम मंदिर चंदा चोरी मामले को लेकर भी बीजेपी की आलोचना की और कहा कि चंदा चोरी करके कोई बड़ी अर्थव्यवस्था नहीं बनाई जा सकती।
Supreme Court ने Ahmedabad Blast मामले में इंडियन मुजाहिदीन दोषी की फांसी पर लगाई रोक
नयी दिल्ली, एक अक्टूबर उच्चतम न्यायालय ने 2008 के अहमदाबाद सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में इंडियन मुजाहिदीन के एक सदस्य की मौत की सजा के अमल पर बृहस्पतिवार को रोक लगा दी। इन धमाकों में 56 लोगों की मौत हो गई थी। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति ए. जी. मसीह और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने अहमद बावा उर्फ अब्बू अबुबकर बरेलवी की याचिका पर गुजरात सरकार को नोटिस जारी किया।
बरेलवी ने अपनी याचिका में उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें निचली अदालत द्वारा सुनाई गई मौत की सजा को बरकरार रखा गया था। शीर्ष अदालत ने मामले से संबंधित निचली अदालत के रिकॉर्ड तलब किए और फांसी की सजा पर रोक लगा दी। मामले में पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह एक गंभीर मामला है।
उच्च न्यायालय ने 2008 के अहमदाबाद सिलसिलेवार बम धमाका मामले में इंडियन मुजाहिदीन के 38 दोषियों की मौत की सजा सात जुलाई को बरकरार रखी थी। अदालत ने बड़ी संख्या में हुई मौतों, ‘बहुत बड़ी साजिश’ और व्यापक स्तर पर आतंक फैलाने की मंशा को सजा बरकरार रखने के प्रमुख कारणों में शामिल किया था। उसने 11 अन्य दोषियों को दी गई उम्रकैद की सजा भी बरकरार रखी थी और माना था कि गुजरात और केरल में आतंकवादी प्रशिक्षण शिविरों में उनकी भूमिका तथा साजिश के लिए रसद संबंधी सहायता उपलब्ध कराने की बात अभियोजन पक्ष ने साबित की थी।
अहमदाबाद के विभिन्न इलाकों में 26 जुलाई 2008 को करीब 70 मिनट के भीतर 21 सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। इनमें 56 लोगों की मौत हुई और 200 से अधिक लोग घायल हुए थे। धमाकों के बाद घायलों को इलाज के लिए ले जाए जा रहे अस्पतालों में भी विस्फोट हुए थे।
यह भारत में किसी आतंकवादी हमले के दौरान चिकित्सा केन्द्रों को निशाना बनाए जाने की पहली ऐसी घटना थी। दोषियों में प्रतिबंधित संगठन स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया के पूर्व नेता सफदर नागौरी और गुजरात, मध्य प्रदेश, केरल तथा उत्तर प्रदेश समेत 11 राज्यों के उसके सहयोगी शामिल हैं। इस मामले में 35 पुलिस मामलों को एक साथ मिलाए जाने के बाद 78 लोगों पर मुकदमा चला था।
इनमें अहमदाबाद धमाकों से संबंधित 20 प्राथमिकी और सूरत में बरामद किए गए बिना फटे बमों से जुड़े 15 मामले शामिल थे। विशेष अदालत ने इनमें से 49 लोगों को दोषी ठहराया था। विशेष अदालत का फरवरी 2022 का फैसला इस लिहाज से ऐतिहासिक था कि किसी एक मामले में एक साथ 38 दोषियों को मौत की सजा सुनाई गई थी।
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