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शराब दुकानदारों के लिए रेड अलर्ट! MRP से एक रुपया भी ज्यादा लिया तो लगेगा 10 लाख जुर्माना

आंध्र प्रदेश में शराब की दुकानों को लेकर बड़ा बदलाव हो चुका है. दरअसल, अब राज्य सरकार की नई 'एक्साइज शॉप्स पॉलिसी 2026-27' 1 अक्टूबर से लागू हो गई है. इन नए नियमों के अनुसार शराब दुकानों के संचालन से लेकर निगरानी तक हर स्तर पर व्यवस्था में बड़ा फेरबदल किया गया है. बता दें नई शराब नीति 30 सितंबर 2027 तक प्रभावी रहेगी. आइए आपको बताते हैं कि इस नई नीति के तहत क्या-क्या बदलाव किए गए हैं. 

राज्य में कुल कितनी शराब दुकानें संचालित होंगी?

सरकार ने साफ कर दिया है कि इस बार दुकानों की कुल संख्या में कोई बढ़ोतरी नहीं की जा रही. राज्यभर में पहले की तरह कुल 3736 शराब दुकानें ही संचालित होंगी. इनमें से 3396 दुकानें सामान्य यानी ओपन कैटेगरी की होंगी जबकि 340 दुकानें विशेष तौर पर गीता कुल यानी ताड़ी उतारने वाले पारंपरिक समुदाय के लिए आरक्षित रखी गई हैं.

पुरानी दुकानों के मालिकों का क्या होगा?

इस बार नीति में सबसे बड़ा बदलाव 'नवीनीकरण आधारित मॉडल' अपनाने का है. यानी जिन लोगों के पास पहले से लाइसेंस है उन्हें सीधे नीलामी से नहीं गुजरना पड़ेगा बल्कि वे अपने मौजूदा लाइसेंस का एक साल के लिए नवीनीकरण करा सकते हैं. इसके लिए उन्हें अपनी लाइसेंस फीस का 38 प्रतिशत हिस्सा नवीनीकरण शुल्क यानी रिन्यूअल रिटेल एक्साइज टैक्स (RET) के तौर पर चुकाना होगा.

अगर कोई दुकान मालिक नवीनीकरण नहीं कराना चाहता तो क्या होगा?

ऐसी स्थिति में सरकार ने एक स्पष्ट विकल्प तय किया है. अगर किसी मौजूदा लाइसेंसधारी की दिलचस्पी नवीनीकरण में नहीं है तो वह दुकान लॉटरी प्रणाली के जरिए किसी नए आवेदक को आवंटित कर दी जाएगी. यानी खाली रह जाने वाली किसी भी दुकान के लिए पारदर्शी लॉटरी व्यवस्था अपनाई जाएगी.

नई दुकान का लाइसेंस फीस कितना तय किया गया है?

लाइसेंस फीस का ढांचा इलाके की आबादी के हिसाब से तय किया गया है. 50 हजार से कम आबादी वाले क्षेत्रों में ओपन कैटेगरी दुकान के लिए 60.5 लाख रुपये और आरक्षित श्रेणी के लिए 30 लाख रुपये फीस रखी गई है. वहीं, 50 हजार से 5 लाख तक की आबादी वाले इलाकों में ओपन कैटेगरी के लिए 71 लाख रुपये और आरक्षित श्रेणी के लिए 35 लाख रुपये चुकाने होंगे. जबकि 5 लाख से ज्यादा आबादी वाले बड़े शहरों में ओपन कैटेगरी दुकान के लिए सबसे ज्यादा 93.5 लाख रुपये और आरक्षित श्रेणी के लिए 46.8 लाख रुपये की फीस तय की गई है. इसके अलावा परमिट रूम के लिए 5 लाख और 7.5 लाख रुपये की फीस भी रखी गई है.

शराब दुकानों पर निगरानी को लेकर क्या नया नियम जोड़ा गया है?

इस बार हर शराब दुकान और परमिट रूम पर सीसीटीवी कैमरे लगाना पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है. सबसे खास बात यह है कि इन कैमरों की फीड को सिर्फ रिकॉर्ड करके नहीं छोड़ा जाएगा बल्कि AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए इसका विश्लेषण किया जाएगा ताकि नियमों के उल्लंघन को तुरंत पकड़ा जा सके.

'ट्रैक एंड ट्रेस' सिस्टम का मतलब क्या है?

सरकार ने इस बार एक एंड-टू-एंड डिजिटल ट्रैक एंड ट्रेस व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है. इसका मतलब है कि शराब के उत्पादन से लेकर परिवहन, वितरण, दुकान तक पहुंचने और आखिर में ग्राहक को बेचे जाने तक, हर चरण को डिजिटल तरीके से ट्रैक किया जाएगा. इससे अवैध शराब बिक्री और कालाबाजारी पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी.

MRP से ज्यादा दाम वसूलने पर अब क्या सजा मिलेगी?

यह बदलाव दुकानदारों के लिए सबसे सख्त माना जा रहा है. अगर कोई दुकान तय मूल्य यानी MRP से ज्यादा कीमत वसूलते पकड़ी जाती है तो पहली बार में ही उस पर 10 लाख रुपये का भारी जुर्माना लगाया जाएगा. वहीं, अगर वही दुकानदार दोबारा इसी गलती का दोषी पाया जाता है तो उसका लाइसेंस पूरी तरह रद्द कर दिया जाएगा।

शराब दुकानों के संचालन के समय को लेकर क्या नियम हैं?

नई नीति के तहत सभी शराब दुकानों को सप्ताह के सातों दिन और चौबीसों घंटे संचालित करने का प्रावधान रखा गया है ताकि आपूर्ति और राजस्व, दोनों में निरंतरता बनी रहे. सरकार ने मौजूदा दुकानों पर लागू रिटेल एक्साइज टैक्स की दरों को यथावत रखने का फैसला किया है. यानी टैक्स के ढांचे में फिलहाल कोई बड़ा फेरबदल नहीं किया गया है बल्कि पूरा ध्यान निगरानी और पारदर्शिता बढ़ाने पर केंद्रित है.

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सरकार इस नई नीति के जरिए आखिर हासिल क्या करना चाहती है?

राज्य की गठबंधन सरकार का मकसद साफ है शराब कारोबार में हो रही गड़बड़ियों और अवैध बिक्री पर नकेल कसी जा सके. इस नई नीति से सरकार प्रदेश के राजस्व को सुरक्षित रखना चाहती है. इसके अलावा बता दें कि डिजिटल निगरानी, सीसीटीवी-AI कॉम्बिनेशन और सख्त जुर्माने के प्रावधान के जरिए सरकार इस पूरे सिस्टम को पहले से कहीं ज्यादा पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की कोशिश में जुटी है.

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Stock Market Today: मिश्रित वैश्विक संकेतों के बीच लाल निशान में खुला भारतीय शेयर बाजार, ऑटो स्टॉक्स पर दबाव

Stock Market Today: मिश्रित वैश्विक संकेतों के बीच गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ खुला. सुबह 9:22 पर सेंसेक्स 160 अंक या 0.22 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 72,319 और निफ्टी 79 अंक या 0.35 प्रतिशत की गिरावट के साथ 22,541 पर था.  

शुरुआती कारोबार में सबसे अधिक दबाव ऑटो शेयरों पर देखा जा रहा था. सूचकांकों में निफ्टी ऑटो टॉप लूजर था. इसके बाद निफ्टी कंजप्शन, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी मीडिया, निफ्टी इन्फ्रा, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी कमोडिटीज, निफ्टी पीएसई, निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी फार्मा, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी एनर्जी और निफ्टी पीएसयू बैंक लाल निशान में थे.

दूसरी निफ्टी आईटी, निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में मजबूती के साथ कारोबार हो रहा था. 

लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी कमजोरी के साथ कारोबार हो रहा था. निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 404 अंक या 0.68 प्रतिशत की गिरावट के साथ 58,936 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 197 अंक या 1.04 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 19,044 पर था. 

ज्यादातर एशियाई बाजारों में मिलाजुला कारोबार हो रहा था. टोक्यो, ताइपे और सोल हरे निशान में थे, जबकि जकार्ता लाल निशान में था. अमेरिकी बाजार भी बुधवार को मिश्रित बंद हुए थे, जिसमें मुख्य सूचकांक डाओ जोन्स 0.86 प्रतिशत की कमजोरी के साथ और टेक्नोलॉजी इंडेक्स नैस्डैक 0.24 प्रतिशत की मजबूती के साथ बंद हुआ. 

जानकारों के मुताबिक, एफआईआई की लगातार बिकवाली पिछले दो ट्रेडिंग दिनों में और तेज हो गई, इस दौरान उन्होंने कुल 20,128 करोड़ रुपए के शेयर बेचे. यूएस के 10-साल के बॉन्ड यील्ड के बढ़कर 5.3 प्रतिशत होने के कारण, एफआईआई की बिकवाली जारी रह सकती है. एफआईआई की गतिविधियों में एक विरोधाभास यह है कि एक्सचेंज के जरिए बिकवाली करने के बावजूद, वे लगातार प्राइमरी मार्केट में निवेश कर रहे हैं और महंगे मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयर भी खरीद रहे हैं.

उन्होंने आगे कहा कि निवेशक बाजार के इस कमजोर दौर का फायदा उठाकर अच्छी क्वालिटी वाले स्टॉक जमा कर सकते हैं, खासकर ग्रोथ सेगमेंट में मौजूद लार्ज-कैप स्टॉक, जहां निवेश के लिए रिस्क-रिवॉर्ड रेश्यो फायदेमंद है.

स्रोत- आईएएनएस

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Irani Cup: जम्मू-कश्मीर के गेंदबाजों का कहर, ऋषभ पंत की अगुआई वाली रेस्ट ऑफ इंडिया पहली पारी में पस्त

ईरानी कप में जम्मू-कश्मीर के खिलाफ रेस्ट ऑफ इंडिया की बल्लेबाजी बुरी तरह फ्लॉप रही. रेस्ट ऑफ इंडिया की टीम पहली पारी में सिर्फ 237 रन के स्कोर पर सिमट गई. आकिब नबी की गैर-मौजूदगी में जम्मू-कश्मीर के गेंदबाजों ने दमदार खेल का प्रदर्शन किया. रेस्ट ऑफ इंडिया की तरफ से कप्तान ऋषभ पंत सबसे बड़े आकर्षण थे, लेकिन खराब शॉट सिलेक्शन के कारण वह सिर्फ 10 रन बनाकर आउट हो गए. Thu, 1 Oct 2026 23:28:45 +0530

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