Responsive Scrollable Menu

भुवन बोले- प्यार में किसी भी हद तक जाऊंगा:सोनम ने कहा- दुपहिया में पेपर लीक का मुद्दा महज संयोग, शिवानी ने अंधविश्वास को चुनौती दी

प्राइम वीडियो की वेब सीरीज ‘दुपहिया’ का दूसरा सीजन आज रिलीज हो चुका है। पहले सीजन में गांव की सादगी और दिलचस्प किरदारों से दर्शकों का मनोरंजन करने के बाद यह सीरीज नए ट्विस्ट और खुलासों के साथ लौट रही है। इस सीजन में अपराध, प्यार, जुगाड़, अंधविश्वास और पेपर लीक जैसे मुद्दे देखने को मिलेंगे। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में अभिनेता भुवन अरोड़ा, अभिनेत्री शिवानी रघुवंशी और निर्देशक सोनम नायर ने सीरीज के किरदारों, उनकी बारीकियों, शूटिंग के अनुभवों और असल जिंदगी से जुड़ी समानताओं पर बात की। उन्होंने सीरीज से जुड़े कई दिलचस्प किस्से भी साझा किए। सवाल: पहले सीजन में धड़कपुर काफी सीधा-सादा नजर आया था। इस बार यह ‘मिर्जापुर’ जैसा क्यों बनता दिख रहा है? जवाब/सोनम नायर: पिछले सीजन में हमने दिखाया था कि धड़कपुर में बिल्कुल भी अपराध नहीं होता। वहां के लोग बहुत भोले-भाले और सीधे-साधे हैं। लेकिन कहानी के अंत तक पता चलता है कि जो लोग खुद को जितना सीधा दिखा रहे थे, वे वास्तव में उतने सीधे नहीं हैं। अब सबका पर्दाफाश हो चुका है और उनकी असलियत सामने आ गई है। इस सीजन में इन किरदारों का असली रूप देखने को मिलेगा। सवाल: भुवन और शिवानी से पहली मुलाकात में आपका क्या इम्प्रेशन था? जवाब/सोनम नायर: जब मैं भुवन से अमावस के रोल के लिए मिली थी, तो शुरुआत में हमने रोल की बात ही नहीं की। करीब आधे-एक घंटे तक हम सिर्फ हंसते रहे। भुवन मुझे बिहार और अपने ससुराल की कहानियां सुना रहे थे। मुझे लगा कि इनके साथ सेट पर बहुत मजा आएगा। रोल तो ये अच्छे एक्टर हैं, कर ही लेंगे, लेकिन सेट पर भी मजा आना चाहिए। मेरा पहला इम्प्रेशन यही था कि अगर भुवन होंगे तो मैं एंजॉय करूंगी। शिवानी को मैंने पहली बार एक पार्टी में देखा था। वहां सभी लोग हंस-खुलकर मिल रहे थे, लेकिन शिवानी चुपचाप एक कोने में खड़ी थीं। वह किसी से ज्यादा बात नहीं कर रही थीं और हाथ में डाइट कोक था। मुझे लगा कि ग्लैमर वर्ल्ड में रहने के बावजूद उनमें अलग तरह की मासूमियत है। हमें जिस तरह की लड़की चाहिए, वो यही हैं। सवाल: भुवन, आप पढ़ाई के मामले में कैसे थे? दो महीने पहले से तैयारी करने वाले या परीक्षा से एक रात पहले पढ़ने वाले? जवाब/भुवन अरोड़ा: मैं तो रट्टा मारकर पास होता था। आज भी लंबे-लंबे डायलॉग याद करने में यह आदत मेरे बहुत काम आती है। लोग अक्सर पूछते हैं कि तुम्हें इतनी जल्दी डायलॉग कैसे याद हो जाते हैं। मैं कहता हूं कि मैंने स्कूल ही रट्टे मार-मारकर पास किया है। लास्ट मिनट तो छोड़िए, मैं आखिरी सेकंड तक पढ़ता रहता था। आप अक्सर देखेंगे कि डायलॉग याद करते वक्त मेरी आंखें ऊपर की तरफ रहती हैं, जैसे मेरे अंदर कोई आत्मा आ गई हो और मैं कुछ न कुछ रट रहा हूं। मैं इसी तरीके से पास हुआ हूं। सवाल: सोनम, दोनों में वन-टेक आर्टिस्ट कौन है और परफेक्शनिस्ट कौन है? जवाब/सोनम नायर: दोनों ही वन-टेक में अच्छा परफॉर्म करते हैं। शुरुआत से ही इनका परफॉर्मेंस अच्छा रहता है। कोई छोटा-मोटा बदलाव करना होता है तो मैं करवा लेती हूं। शिवानी शायद कभी-कभी कहती होंगी कि एक टेक और कर लेते हैं, लेकिन मैं हमेशा नहीं लेती। सवाल: अगर कोई कलाकार इतना अच्छा करने के बाद भी कहता है कि कुछ कमी रह गई है, एक टेक और देना चाहता तो आप क्या करती हैं? जवाब/सोनम नायर: मैं उसे कहती हूं कि आपने इतना अच्छा किया है, मैं बहुत खुश हूं। अपने ऊपर कॉन्फिडेंस रखिए और आगे बढ़िए। हां, अगर कोई बहुत महत्वपूर्ण सीन हो और उन्हें सच में लगे कि एक और टेक जरूरी है, तो मैं उन्हें करने देती हूं। कलाकारों के अंदर कई बार इनसिक्योरिटी होती है कि हम और अच्छा कर सकते हैं। लेकिन अगर मुझे लगता है कि टेक पर्याप्त अच्छा है, तो मैं प्यार से कह देती हूं कि नहीं, बहुत अच्छा है, अब आगे बढ़ते हैं। सवाल: ट्रेलर में शनिवार को लेकर एक डायलॉग है। क्या असल जिंदगी में भी कभी कोई टोटका आपके साथ हुआ है? जवाब/भुवन अरोड़ा: शनिवार वाली बिल्कुल ऐसी ही घटना मेरे साथ हुई है, लेकिन उसमें दुपहिया नहीं, वॉशिंग मशीन थी। दिल्ली में हमने एक वॉशिंग मशीन खरीदी थी और साफ कह दिया था कि शनिवार को हमारे यहां लोहे की चीज घर में नहीं आती। लेकिन शनिवार रात करीब 8-8:30 बजे उसकी डिलीवरी आ गई। डिलीवरी वाले ने मेरी मम्मी से कहा कि मैडम, अब इसे वापस कहां लेकर जाएंगे और दोबारा लेकर आएंगे, आप इसे रख लीजिए। मम्मी को लगा कि बच्चों को दोबारा परेशानी होगी, इसलिए उन्होंने रख लिया। उस वॉशिंग मशीन ने हमें बहुत परेशान किया। कभी चूहे उसके तार काट देते थे, तो कभी कोई और समस्या हो जाती थी। करीब साढ़े तीन महीने तक हम उस परेशानी से जूझते रहे। आखिरकार कंपनी ने मशीन रिप्लेस की। इसलिए हमारे घर में आज भी नियम है कि शनिवार को लोहे की चीज नहीं आती। सवाल: शिवानी, क्या आप भी इन अंधविश्वासों को मानती हैं? जवाब/शिवानी रघुवंशी: मैं इन सब चीजों को नहीं मानती। लेकिन हमारे घर में ऐसी बातें होती रहती हैं। कोई कहता है मंगलवार को यह नहीं करना चाहिए, कोई कहता है गुरुवार को ऐसा नहीं करना चाहिए। अभी मैं फ्लाइट बुक कर रही थी तो घर में कहा गया कि शुक्रवार को एक खास दिशा में नहीं जाना चाहिए। इसे दिशा शूल कहते हैं। मैं इन चीजों को नहीं मानती। मैं कहती हूं कि आज ही जाकर देखती हूं, कुछ होगा तो देखा जाएगा। आज तक मेरे साथ कुछ गलत नहीं हुआ। मेरा मानना है कि जो होगा, देखा जाएगा। रोशनी के नेचर में भी यही बात है। वह अंधविश्वास को चुनौती देती है और कहती है कि करके दिखाओ, मेरे साथ क्या होगा। सवाल: भुवन, अमावस और आपकी पर्सनैलिटी में क्या समानता है? भुवन अरोड़ा: अमावस और मेरे अंदर एक चीज बहुत कॉमन है। अगर मैं किसी से प्यार करता हूं तो उसके लिए किसी भी हद तक जा सकता हूं। हां, एक चीज बिल्कुल कॉमन नहीं है। मैं क्लेप्टोमेनियाक नहीं हूं और किसी का सामान नहीं चुराता। शिवानी रघुवंशी: मेरे और रोशनी में कुछ भी कॉमन नहीं हैं और मैं वो चाहती भी नहीं हूं। सवाल: आपने प्यार के लिए असल जिंदगी में ऐसा क्या किया है, जिसे आप बड़ी कोशिश मानते हैं? जवाब/भुवन अरोड़ा: मुझे याद है, मेरी पत्नी को एक ज्वेलरी पसंद आई थी और वह पुणे में थी। हमारी एनिवर्सरी पर उन्हें वह ज्वेलरी देने के लिए मैं खास तौर पर पुणे गया। ज्वेलर को ऑर्डर दिया और फिर ज्वेलरी लेकर वापस आया। मैं मानता हूं कि पार्टनर के लिए हम छोटी-छोटी चीजें कर सकते हैं। ऐसी कोई नौबत नहीं आई कि जान पर बात आ जाए। टचवुड, ऐसी स्थिति आई ही नहीं। सवाल: सीरीज में अमावस दोस्त के लिए चीटिंग का जुगाड़ करता है। क्या असल जिंदगी में कभी नकल करनी पड़ी? शिवानी रघुवंशी: नहीं, बहुत ज्यादा नहीं। हालांकि मैं स्कूल में बहुत गंदी चीटिंग करती थी। मैं पूरा टर्न लेकर नकल करती थी। मेरे दोस्त कहते थे कि तू आगे रह, हम तेरे पीछे हैं। सवाल: सीरीज में पेपर लीक का मुद्दा भी उठाया गया है। अगर अमावस को इस समस्या को अपने जुगाड़ से खत्म करना हो तो वह क्या करेगा? जवाब/भुवन अरोड़ा: सबसे पहले तो मैं रोशनी को समझाऊंगा कि इन बेकार के चैलेंज के चक्कर में मत पड़ो। सिर्फ कह दिया है तो जरूरी नहीं कि उसे करके दिखाना ही है। मैं तो खुश ही था कि अगर वह पास हो जाएगी तो शहर चली जाएगी और मुझसे दूर हो जाएगी। मैं कभी नहीं चाहूंगा कि वह मुझसे दूर जाए। लेकिन इश्क का मारा हूं, क्या करूं? जो कहती है, महबूबा के लिए करना पड़ता है। इसलिए जब तक साथ दे सकता हूं, कोशिश करूंगा। फिर चाहे वह दूर रहे या पास। सवाल: सोनम, आप इस मुद्दे पर कोई समाधान देना चाहेंगी? सोनम नायर: मैं कौन होती हूं समाधान बताने वाली? हमारे सिस्टम को हेड करने वाले बहुत सारे मुझसे ज्यादा पढ़े-लिखे और जिम्मेदार लोग हैं। हम अपनी तरफ से सिर्फ लोगों की कहानियां बता सकते हैं। लोगों को जो समस्याएं होती हैं, उसमें हम अपने स्तर पर क्या बदलाव ला सकते हैं, उस स्तर तक मैं कुछ कह सकती हूं। लेकिन इतनी बड़ी समस्या का समाधान, जब हम सब मिलकर भी नहीं कर पा रहे हैं, तो मैं इसका समाधान नहीं बता सकती। यह भी संयोग की बात है। जब हमने यह शो बनाया था, तब पेपर लीक का मुद्दा इतना सामने या प्रासंगिक नहीं था। मुझे लगता है कि जिस समय यह मुद्दा चर्चा में है, उसी समय हमारा शो भी आ रहा है। हमने इसे काफी पहले शूट किया था। इसलिए यह पूरी तरह संयोग है। सवाल: भुवन, हाल ही में हुए नेशनल अवॉर्ड्स में आपकी दो फिल्मों से जुड़े कलाकारों को सम्मान मिला। आप इसे कैसे देखते हैं? भुवन अरोड़ा: मैं खुद को बहुत सौभाग्यशाली मानता हूं कि उन दोनों बेहतरीन फिल्मों का हिस्सा बनने का मौका मिला। अगर उनकी कहानी कहने में मैंने थोड़ा सा भी योगदान दिया है, जिसकी वजह से वे इस मुकाम तक पहुंचीं और नेशनल अवॉर्ड जीता, तो मैं बहुत खुश और आभारी हूं। दोनों फिल्में मेरे लिए बहुत खास हैं। दोनों ही वास्तविक जीवन पर आधारित कहानियां हैं। मुझे लगता है कि हमें ऐसी और फिल्में बनानी चाहिए। सवाल: ‘दुपहिया’ में पहली गाड़ी को लेकर भावनात्मक जुड़ाव दिखाया गया है। आपकी पहली बाइक या कार से जुड़ी क्या यादें हैं? भुवन अरोड़ा: जब मैं कॉलेज में पढ़ रहा था, तब मैंने अपनी पहली बाइक खरीदी थी, जो मेरे नाम पर थी। उससे पहले घरवालों ने जो बाइक खरीदकर दी थी, वह उनके नाम पर थी। लेकिन अपनी बुलेट मैंने खुद खरीदी थी। वह बुलेट आज भी मेरे पास है। काफी वक्त हो गया है, मैं उसे चला नहीं पाता और समय भी नहीं मिलता, लेकिन मैंने उसे संभालकर रखा है। वह मेरी पहली ऐसी गाड़ी थी, जो मेरे नाम पर थी। इसलिए वह मेरे लिए बहुत खास है। मुझे नहीं लगता कि मैं उसे कभी बेचूंगा। शिवानी रघुवंशी: जिस गाड़ी पर मैंने ड्राइविंग सीखी थी, वह सफेद रंग की फिएट 118 थी। वह हमारी फैमिली कार थी और मैंने उसी पर गाड़ी चलाना सीखा। मुझे याद है, एक दिन मैं अपनी फैमिली को ड्राइव करके लेकर गई थी। वे बहुत खुश और गर्व महसूस कर रहे थे कि उनकी बेटी गाड़ी चला रही है। इसलिए उस गाड़ी से मेरा खास जुड़ाव है।

Continue reading on the app

एशियन गेम्स के गोल्डन बॉय कुशल की कहानी:3 खेल छोड़ आर्चरी चुनी, बॉक्सिंग पर कहा था-चोट नहीं मार सकता; फैमिली में 25 चाचा, 17 दादा

जापान में चल रहे एशियन गेम्स में बुधवार का दिन भारतीय आर्चरी (तीरंदाजी) के इतिहास में सुनहरा पल रहा है। चार में 3 गोल्ड आर्चरी में आए। इस ऐतिहासिक उपलब्धि में हरियाणा के सोनीपत के रहने वाले 21 वर्षीैय कुशल दलाल का नाम भी चमका, जिसने कंपाउंड टीम इवेंट में गोल्ड पर अचूक निशाना लगाया। एशियन गेम्स के इस 'गोल्डन बॉय' की यह कामयाबी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। कभी गांव के शुद्ध दूध-घी के चक्कर में इतना ओवरवेट हो गया था कि घरवालों को उसकी सेहत की फिक्र सताने लगी थी। फिटनेस सुधारने के लिए पिता ने पहलवान बनाने अखाड़े भेजा, तो मां को लगा पढ़ाई छूट जाएगी। फिर बॉक्सिंग में हाथ आजमाने रोहतक पहुंचे, तो नन्हे कुशल ने मासूमियत से कहा- मां, मुझसे किसी को पंच नहीं मारा जाएगा, मैं किसी को चोट नहीं पहुंचा सकता। दूसरों को नुकसान न पहुंचाने वाले इसी कोमल स्वभाव के लड़के ने जब तीरंदाजी जॉइन की तो निशाना सीधे एशियन गेम्स के गोल्ड पर लगा। एक रोचक बात यह भी कि कुशल की फैमिली काफी बड़ी है। परिवार में उसके 17 दादा और 25 चाचा है। कुशल इस सफलता में उनकी मां गीता ने अहम भूमिका निभाई। इस प्रेरणादायक सफर की पढ़िए दैनिक भास्कर की पूरी रिपोर्ट… सोनीपत से एशियन गेम्स के पोडियम तक पहुंचने की कहानी… 2018 में पहला गोल्ड, यूथ वर्ल्ड में डबल धमाल कुशल ने 2018 में अंडर-14 वर्ग में विजयवाड़ा, आंध्र प्रदेश में पहला गोल्ड मेडल जीता। मां के अनुसार, इसके बाद उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा। खेलो इंडिया में चयन हुआ और हरियाणा की खेल नीति का भी उसे लाभ मिला। इसके बाद नेशनल स्कूल गेम्स में सिल्वर मेडल सहित अलग-अलग प्रतियोगिताओं में लगातार पदक हासिल करता रहा। कुशल ने 2021 में पोलैंड में हुई यूथ वर्ल्ड चैंपियनशिप में दो गोल्ड मेडल हासिल किए। वह अब तक सब-जूनियर, जूनियर और सीनियर तीनों कैटेगरी में 15 से ज्यादा मेडल जीत चुका है। हर प्रतियोगिता के साथ उसका लक्ष्य भी बड़ा होता गया और अब एशियन गेम्स में देश के लिए गोल्ड जीतकर उसने परिवार और सोनीपत का नाम रोशन किया है। वीडियो कॉल पर कुशल ने बताईं जीत तक पहुंचने की ट्रिक.. कुशल की फैमिली और हॉबी के बारे में जानिए… ----------------------------- ये खबर भी पढ़ें…. ‘लड़कों से बात करती है, गलत जा रही है’:घरवालों ने खेल छुड़वाया, कोच के जूते पहनकर भी दौड़ीं; जानें गोल्ड मेडलिस्ट किरण की कहानी हरियाणा के सोनीपत की एथलीट किरण पहल मंगलवार को एशियन गेम्स के रिले इवेंट में गोल्ड और टीम इवेंट में सिल्वर जीतकर सुर्खियों में आ गईं। किरण 1 अक्टूबर को गांव पहुंचेंगी। यहां उनका जोरदार स्वागत किया जाएगा। (पूरी खबर पढ़ें)

Continue reading on the app

  Sports

IND vs SL Semi final Asian Games LIVE: अब से कुछ ही देर में दिखेगा वैभव सूर्यवंशी का जलवा, टॉस गंवाकर भारत की पहले बैटिंग

LIVE IND vs SL Asian Games 2026: नमस्ते, न्यूज18 हिंदी के लाइव ब्लॉग में आपका स्वागत है. भारत और श्रीलंका के बीच एशियन गेम्स के सेमीफाइनल का रोमांंच जारी है. टॉस गंवाकर भारतीय टीम पहले बल्लेबाजी कर रही है. मैच जीतने वाली टीम फाइनल में गोल्ड मेडल मैच के लिए पाकिस्तान से भिड़ेगी. Thu, 1 Oct 2026 09:47:59 +0530

  Videos
See all

Iran US War Update: ईरान-अमेरिका में भयानक जंग शुरू? | Iran US War Update | Trump | Iran News #tmktech #vivo #v29pro
2026-10-01T03:45:39+00:00

Antarctica Ice Alert: खत्म हो जाएगा यूरोप? बदल जाएगा दुनिया का मौसम? | Climate Change | Scientific #tmktech #vivo #v29pro
2026-10-01T03:45:13+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers